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ओड़िया बीपी वीडियो: बीएफ बीएफ दीजिए, तभी उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हें बहुत अच्छी तरह से पता है कि मैं एक शादीशुदा औरत हूँ.

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माँ की सब विधि होने के बाद दीदी ने मुझसे कहा- देख प्रकाश, ये घर तो कहीं जाने वाला है नहीं, ये घर तो अपना ही है, तू यहां अकेला रह के क्या करेगा? हमारे पिताजी ने एक जगह मुंबई में भी बनायी है, तू वहीं हमारे साथ आ जा. पंजाब सेक्सी व्हिडिओलेकिन बाद में मुझसे पूछने लगी- तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड है?तो मैंने बताया कि ब्रेकअप हो गया है.

मैं पेशाब करने चला गया, फिर वापिस आया तो देखा भाभी का गाउन घुटनों से और ऊपर आ गया था. हीरोइन सेक्स फोटोकेबिन में आने के बाद एक सेफ फीलिंग आने लगी जिसके कारण मेरा जोश हर पल बढ़ता जा रहा था। मैं उसके होठों को चूसने-काटने लगा, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।भाभी ने कई बार कहा कि मुझे होठों पर दर्द हो रहा है लेकिन मैं उसके होठों को जैसे खा ही जाना चाहता था। मेरा लण्ड मेरी पैंट में धमाल मचाने लगा था। वो बाहर आकर उसकी चूत में घुसने के लिए तड़प रहा था। लेकिन अभी मैं उसके होठों के रस का आनंद लेने में लगा हुआ था.

हमारे इस वासना के खेल के बाद हमने एक दूसरे को किस किया और जरूरत होने पे एक दूसरे की प्यास बुझाने का वादा किया.बीएफ बीएफ दीजिए: शायद थोड़ी देर पहले ही उसने मूता था, उसकी पेशाब की गंध अभी तक थी, लेकिन मैंने चाटकर उसकी चूत को गीला किया.

फ़िर वो मेरे पेट से नीचे की तरफ़ बढ़ी और उसका गाल मेरे लंड पर छुलने लगा.ये सोच लूंगा कि हम और वो एक उम्र के हैं और इस उम्र में ये सब हो जाता है.

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जब उसने मुझे कमरे में लाकर चोदना चालू किया था, तब कंडोम लगा लिया था.नेहा ने अपनी जांघें भींच रखी थीं और एक हाथ से वो मेरे हाथ को भी पकड़े हुए थी.

सभी बारी-बारी से मेरी चुत को, मम्मों को और गालों को चूमने चाटने लगे. बीएफ बीएफ दीजिए मैंने उसकी तरफ ध्यान ना देते हुए फिर एक जोरदार शॉट में ही पूरा का पूरा लंड उसकी गांड में ठेल दिया.

मैं कह सकता हूँ कि मेरा लंड किसी को भी संतुष्ट करने के लिए एकदम परफेक्ट है.

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वो बोली- मैं तो सुबह से प्लान कर रही थीं, जब से मेमसाब का फोन आया था. मामी की चूत में लण्ड डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा और बूब्स ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा. स्वीटी की चूत पर मैंने जैसे ही बियर डाली, स्वीटी समझ गई और मस्ती से चूत उठाते हुए बोली- आह जानू अब चूसो मेरी नशीली चूत को …मैंने भी जीभ को नुकीला किया और उसकी चूत में घुसेड़ दी.

फिर नेहा ने मुझे अपने ऊपर से धकेलकर नीचे गिरा दिया और उठकर कपड़े पहनने लगी. उसका क्या मस्त दूध जैसा सफेद शरीर … क्या शानदार तने हुए बोबे और सबसे शानदार उसकी उठी हुई गांड … मैं तो उसकी गांड का ही दीवाना था. 15 मिनट बाद अजय ने ट्रेन से उतरकर मुझे फ़ोन किया तो मैंने उन्हें बताया कि बुक स्टॉल के पास आ जाओ.

मामा के इस लुक को देखकर मैं वासना के सागर में डूब गया और उनके लंड की प्यास में उनके आगे पीछे घूमने लगा. मैंने अब उनकी मेक्सी को उतार दिया जिसकी वजह से अब वो सिर्फ़ काली ब्रा और पेंटी में मेरे सामने थी. मखमल सा सिल्की बदन, कोका कोला की बोतल जैसा उसका जिस्म, पतली कमर, चौड़े कूल्हे, उसके सीने पर विकसित दो कमलपुष्प जैसे दो अमृत से भरे हुए अमृतकलश … उफ़्फ … दीवाना बना दिया उसने!झील सी गहरी आंखें, सुराहीदार गर्दन.

मेरी सहेली की बात सुनकर मुझे भी अपने बॉयफ्रेंड्स से चुदवाने का मन करने लगा. फिर करीब 15 मिनट बाद ट्रेन रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई और मैं स्टेशन पर उतर गया.

अनुप्रिया नीचे थी और मैं अनुप्रिया के ऊपर थी कि तभी जोर कमर उछालते हुये अनुप्रिया मेरे मुँह में फच्च से झड़ गई.

वह नींद से भरी बोलीं- आमिर, मेरी आदत मत बिगाड़ो, तुम तो कुछ दिनों में चले जाओगे और मैं तड़पती रह जाऊंगी.

मैं- क्या बात है … आज रात में याद किया?भाभी- क्यों … क्या मैं आपको याद नहीं कर सकती?मैं- कर सकती हो भाभी जी, लेकिन अचानक याद किया, तो कुछ खास बात होगा तभी ना!भाभी- नहीं वैसे कुछ नहीं है, बस आपकी याद आ रही थी, तो मैंने सोच कॉल कर लेती हूँ. उसने अनु से बोला- चल रे साली कुतिया रंडी … मादरचोदी वेश्या … आज तुझे जन्नत की सैर कराऊंगा …उसने अनु की चूत में लंड को बड़ी जोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया. कुछ देर के बाद मेरी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया और मैं थोड़ा ठंडी हो गयी.

वो बोली- जल्दी चलो … दारू पीने के बाद मैं बहुत गर्म हो जाती हूँ और मुझे बहुत जोर की चुदाई चाहिये. मैं भी उसके इस प्यार में बह के उसे चूमने लगा और एक बार फिर से तीसरी बार हम दोनों जोरदार सेक्स किया. पर मुझे उसमें से ठीक से दिख नहीं पा रहा था क्योंकि उसका छेद छोटा था.

मैंने एक बार में ही उसके सारे कपड़े निकाल दिए और उसपे टूट पड़ी, मैं बस उस वक्त उसके मम्मों को पूरी तरह निचोड़ देना चाहती थी.

मैंने भी अपनी जीभ से भाभी की चूत पर हल्के से लिक करना शुरू किया और वह तड़पने लगी. बेल के समान पुष्ट और कठोर चूचियां … मुलायम पेट के बीचों बीच बिल्कुल गोल गढ़ेदार नाभि … विशाल उठी हुई गांड. उस लम्बे आदमी ने थोड़ी देर बहन को चोदा और उसके बाद वो लंड झाड़ कर किनारे हो गया.

कुछ देर बाद वो झड़ने वाला था। मैंने भी अपने हाथों से उसके कंधों को पकड़ रखा था और उसके पैरों को अपने पैरों से जकड़ रखा था. एक पीले बल्ब की हल्की रोशनी में कुछ अनाज की भरी बोरियां और एक खटिया, जिस पर कल रात का बिस्तर और मच्छरदानी पड़ी हुई थी, दिखाई दे रहे थे. अगर वही पर चूत में लंड डालने की अनुमति मिल जाती तो और भी अच्छा होता.

मैंने अपने लंड का सारा पानी उसकी प्यारी सी चुत में छोड़ दिया और उसके ऊपर ही सो गया.

आजकल दो तीन दिन से मेरे पति ऑफिस के काम से दूसरे शहर गए थे, तब से मैं डर डर कर ही रह रही थी. जिससे प्रिया के होंठों के साथ साथ अब उसकी आंखें भी बंद होती चली गईं.

बीएफ बीएफ दीजिए मेरी पिछली कहानीमेरी प्यासी चूत में जीजू का लंडकी तारीफ़ बहुत सारे पाठकों ने की. अब तक इस मस्त मस्त कहानी में आपने पढ़ा कि सुलेखा भाभी अपने शरीर को‌ कड़ा सा करके मेरे लंड को अपनी चुत के मुँह पर लगाकर झटके से मेरे खड़े लंड पर बैठ गईं.

बीएफ बीएफ दीजिए इससे मेरा काम‌ अब और भी आसान‌ हो गया‌ था क्योंकि अब प्रिया नेहा और सुलेखा भाभी तीनों को ही‌ एक‌ दूसरे के‌ बारे में मालूम हो गया था कि उनके मेरे साथ चुदाई के सम्बन्ध हैं‌ और तीनों को‌ ही‌ इससे शायद कोई‌ ऐतराज भी नहीं था. दरअसल इन जानदार कहानियों के बारे में मिली, आपकी तारीफ का हकदार अकेले मैं ही नहीं हूं, बल्कि सेक्स की साक्षात देवी मेरी नीना डार्लिंग भी है.

मेरे पति दूसरे शहर गए थे, तो दो तीन दिन से मेरी भी चुदाई नहीं हुई थी और उनकी कामुक हरक़तों की वजह से मेरी कामवासना भी जागृत होने लगी थी.

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वो एक मम्मे को चूसता और दूसरे को अपनी मुठ्ठी में भर कर मसलता … तो कभी दूसरी चूची की चौंच को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगता. मैंने आंटी के बल पकड़े और उनकी आँखों में आंखें डाल कर देखा; साली आंटी हवस में जल रही थी. अब उससे रहा नहीं गया और बोली कि तुम तो पूरे मजे ले रहे हो … पर मेरा क्या होगा.

मेरी नज़रें बार-बार उन दोनों की तरफ जा रही थीं क्योंकि कब से वो देखे ही जा रहे थे।अभी कुछ ही देर हुई होगी कि राहुल और अमित हमारी तरफ आए और पूछने लगे कि उन्हें भी हम लोगों के साथ खेलने को मिल सकता है क्या?मैं कुछ बोलती उससे पहले रजनी ने बोल दिया- हां क्यों नहीं. आह्ह् … फ्रेंची में उनका उभरा हुआ लंड देख मेरे बदन में आग लग गई। उनके सीने पर घने बाल थे. मैं काफी डरा हुआ था कि कहीं उसने घर में किसी को बता तो नहीं दिया होगा.

जैसे ही ललिता ने कपड़े पहन कर खड़ी हुई कि उस कुएं के कमरे का दरवाजा खुला, उसमें से एक 28-30 साल की लड़की निकली.

इतना बड़ा लंड जेठ जी मेरी चुत के अन्दर डालकर मुझे जम कर चोदेंगे, इसी बात से ही मैं खुश हो रही थी, पर मैं ऊपर ऊपर से डर और नाराजगी जाहिर कर रही थी. मैं नीचे लेट गया और सोनू को अपने ऊपर चढ़ा लिया और उसे बोला कि मेरे लंड को अपनी चूत में घुसा कर मेरे ऊपर लेट जाए. पहले दिन तो रहम करता, अब तो अगले 2 साल तक मैं तेरी रंडी हूँ, जब मन करे तब चोद दियो, आज तो छोड़ दे.

एक दिन मेरी कामवासना बहुत बढ़ी हुई थी, मुझे मेरे लंड के लिए छेद की सख्त जरूरत थी, तभी मेरे सामने से सरोज चाची निकलीं और मैंने उनको देख कर लंड सहलाना शुरू कर दिया. घर में अन्दर पहुंचते ही हम दोनों ने एक दूसरे को गले से लगाया और कुछ देर चिपके रहे. दो तीन हुक खोलने के बाद उन्होंने ब्लाउज के हुक खोल कर सामने से उसे मेरे स्तनों के ऊपर से हटा दिया और मेरी ब्रा ऊपर कर दी.

फिर से मैंने जोरदार चुम्मा लिया और लंबा फव्वारा सरिता की चूत के अन्दर छोड़ दिया. पता नहीं राज अंकल ने इनको क्या क्या बोला है, क्या कैसे कहा होगा कि यह सब मुझे धंधे वाली समझ रहे हैं.

पर मैं कहां रुकने वाला था, मैंने उसे करीब 10 से 15 मिनट तक यूं ही बांहों में जकड़े रखा. वो दर्द के मारे रोने लगी और मुझसे लंड बाहर निकालने के लिए कहने लगी. उसके बाद उसने जो जोरदार धक्के लगाने शुरू किये, वो मज़े मैं बता नहीं सकता.

आज समझ ले तेरी किस्मत खुल गई, तू आज के बाद चाहे तो यह धंधा छोड़ दे, सिर्फ हम लोगों की बन कर रहना.

जैसे ही आंटी के गेट पर मैंने डोर बेल बजाई और सबीना आंटी गेट खोलने आईं, मैं उन्हें देखता ही रह गया. कुछ और देर घूमने के बाद झूला रुका … हम दोनों थक गये थे। हांफते हुए हम दोनों उस बक्से से उतरे और सुशीला के पास गए।सुशीला की नजर हम दोनों को घूरती जा रही थी पर हम दोनों शांत थे, हमने सुशीला की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और चलने लगे जैसे सुशीला अकेली आयी हो।मैं चलता जा रहा था साथ में मानसी और पीछे सुशीला।कुछ देर के बाद मैं बोला- चलो कुछ खरीदते हैं मानसी मेले से!सुशीला गुस्से से- नहीं हम कमरे में चलेंगे. सुनीता के घर में वो, उसका पति उसका ससुर और एक बेबी जो लगभग दो साल की होगा.

सुनीता का पति एक प्राइवेट नौकरी करता था, जो एक दिन रात को घर में रहता था और अगले दिन की रात में नौकरी पर रहता था. फिर करीब दस मिनट बाद ही मैं जोर से चिल्लाई- आह मॉम … मैं झड़ने वाली हूँ!और मैं जोर से अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर चूत चटवाने लगी और फिर जोर से फच्च आहह करके झड़ गई.

नीचे की मंजिल में मैं अकेला और ऊपर मकान मालकिन, उनकी भतीजी नेहा और उनकी कामवाली, जो कि लगभग 18-19 साल की थी. तभी मैंने देखा कि उसकी पहली चूची, जिसको मैं अब तक चूस रहा था, उसका निप्पल बिल्कुल लाल हो गया था. वो बोला- माशाल्लाह … क्या खूबसूरत कातिल निगाहें है तेरी! बहुत प्यासी आंखें हैं.

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मुझे लोन की बहुत ज़रूरत है। उसके बदले आप कुछ भी माँग लो।मैं उसका इशारा समझ गया था पर कुछ कहने से डर रहा था।मैंने उससे विदा माँगी तो वो बोली- आप ऐसे नहीं जा सकते … अगर आप मेरे पति से मिलना चाहते हो तो ठीक है आप मिल लेना.

मेरे पति दूसरे शहर गए थे, तो दो तीन दिन से मेरी भी चुदाई नहीं हुई थी और उनकी कामुक हरक़तों की वजह से मेरी कामवासना भी जागृत होने लगी थी. मैंने शिवा से आवाज लगाते हुए कहा- ज़रा नयी मैडम को कहो कि वो मुझे रिपोर्ट करें. अगर वह बाहर से पूरी नहीं हो रही हो तो घर में ही पूरी कर लेनी चाहिए.

’‘मतलब?’मैंने झिरी में से बाहर झांका और देखा कि वे दोनों सोफे पे बैठे हुए थे. अब मैंने उसकी कमर पर दोनों तरफ़ हाथ रखे और ऊपर करते हुए टी-शर्ट और ब्रा दोनों एक साथ निकाल दिए. पिक्चर वीडियो सेक्सी पिक्चर वीडियोदीदी अब अपने घर में सासू माँ के साथ और मैं उनके पास वाली दो गली छोड़ कर हमारे माँ बाप के लिए हुए घर में रहने लगा.

इसीलिए मैंने भी सोचा कि मैं भी अपनी जिन्दगी की एक पहली और बिल्कुल सच्ची चुदाई की कहानी आपसे शेयर करूँ. अब तू जल्दी से सच बता दे … नहीं तो यह बात मैं सभी घर वालों को बता दूंगा.

यह कहकर उन्होंने सीधे अपने पैन्ट को खोला और थोड़ा सा नीचे करने लगे. 8 वर्षों से मैंने किसी स्त्री को आंख उठा कर नहीं देखा था, लेकिन कौशल्या की मिलनसारिता और हँसमुख मिजाज ने मुझसे बातें करना सिखा दिया था. वो चुप हो गई और अपने हाथ से मेरे लण्ड को पैंट से बाहर निकाल कर आगे-पीछे करने लगी मैंने भी अपने एक हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और हाथ अंदर पैंटी में डाल दिया.

फिर मैंने उसकी चूत की एक फांक को होंठों से खोला और अपने होंठों में ले के चूसने लगा. फिर मैंने अपने दोनों हाथ पीछे से आगे को लिए और उसके मम्मों को छूना चालू कर दिया. थोड़ी देर चिपके रहने के बाद रमीज का लौड़ा सिकुड़ कर छोटा हो गया और वह उठ कर मुझे छोड़ के कपड़े पहनने लगा.

दस-बारह अप-डाउन के बाद प्रशांत को शरारत सूझी और बात नीना के कंट्रोल से बाहर हो गई.

कुछ ही देर में एक बॉटल दूध और निकालने के बाद मैंने देखा कि उसको आराम मिल रहा है और उसके चेहरे पर हल्की हल्की सुकून की मुस्कान लग रही थी. दोस्तो, मैं बता नहीं सकता कि वो क्या मस्त सीन था, इतनी सुंदर, खूबसूरत और सेक्सी हेमा मेरे लंड पर बैठकर खुद चुदाई कर रही थी.

यह कहानी मेरी और मेरे कस्टमर की बीवी की है, जिसका नाम रेखा (बदला हुआ नाम) है. अब वो भी काफी उत्तेजित हो चुकी और उसकी चूत भी लंड के लिए तड़प रही थी. मैंने अपने दोस्त को आवाज दी, जब कोई जवाब नहीं आया, तो मैं उसे ढूंढते उसके घर घुस गया.

दो छत्तीस साइज़ के मम्मे और दो बत्तीस साइज़ के सख्त बूब्स आज़ाद हो गए. इससे पहले कि लंड चुचियों के बीच में जाता, उसने अपनी चुचियां ऊपर कर लीं और अपने दोनों हाथों से मेरी जांघें नीचे दबा कर बोली- बदमाशी नहीं और चीटिंग भी नहीं. थोड़ी देर चूत चटाई करते हुए हम 69 की पोजीशन में आ गये और लंड उसके गले तक डालकर उसकी चूत चाटते हुए मैं उसका मुंह चोदने लगा.

बीएफ बीएफ दीजिए दस मिनट में उसने मुझे 2 बार कस कस के पकड़ा था मतलब वो 2 बार झड़ चुकी थी. मेरी बात भैया ने आगे पहुंचाई और मैंने अरुणा की फोटो देख ली, अरुणा की फोटो को देखा, तो बस देखता ही रह गया.

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लिहाजा बगल में रखे हुए थर्मस से गरम पानी निकालकर उसने पहले अपनी चूचियों से लेकर पेट से होते हुए चूत तक की सफाई की. मेरी नौकरी इंस्पेक्टर की थी, जिसका काम था कि हर एक प्रपोजल की पूरी तरह से छानबीन करके अपनी रिपोर्ट देना, जिसके लिए मुझे बाहर भी जाना पड़ता था. मैंने उससे कहा- मुझे भी अपनी भाभी की स्टाइल में चोदो, तो वो राजी हो गया.

उन्हें शायद यकीन नहीं आ रहा था कि मैं उनके दरवाजे पर उनके सामने खड़ा हूँ. फिर मीनाक्षी ने मेरा लंड पकड़ा और सीधा अन्दर कंठ तक मुँह में लेकर वापस बाहर निकाला और बोली- भाई तेरा लंड अच्छा है … पर अनिल जैसा लम्बा चौड़ा नहीं है. फिल्म मटकामेरी सहेली मेरे पड़ोस में रहती थी, इसलिए हम दोनों लोग एक दूसरे के घर आते जाते रहते थे.

इसके बाद उन्होंने दीदी को पैसे दिए और कहा- अब तू जा और अलगे हफ्ते दुबई से कुछ लोग आएंगे, हम तुझे फोन कर देंगे तो तू से फिर आ जाना.

जैसे ही मेरी जीभ रूपा की चूत की दोनों फांकों के बीच में से रगड़ खाती हुई उसकी चूत के छेद पर लगी, तो रूपा के मुँह से मस्ती से भरी हुई सिस्कारियां निकलने लगीं- अहह बहुत मज़ा आ रहा है मालिक … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ह्ह्ह…रूपा की कामुक सिसकारियां सुन कर मैं और भी जोश में आ गया और रूपा की चूत के फांकों को फैला फैला कर उसकी चूत के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगा. अब मैं फिर से सीधी ही लेट गई और गाड़ी आगे बढ़ी तो देखा कि मम्मी की गाड़ी कॉर्नर में एक पेड़ के नीचे खड़ी थी.

इस कहानी में मैं आपको बताऊँगा कि कैसे मैं चूतों के एक ऐसे भंडार में पहुंच गया, जहां मैं जब चाहूं, जैसे चाहूं चुदाई कर सकता था. आप चुदी तो हैं ही, तभी माँ बनी, पर आपने कभी गांड मरवाई है?’‘नहीं बेटी, वो तो कभी नहीं किया. अब अनु भी गांड उछाल कर करण का साथ देने लगी ‘आऊ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआह!पूरा कमरा इस चुदाई से गूंज उठा.

अगले दिन जब मेरा उसका सामना हुआ, तो वो मुझे बहुत ही अजीब नज़रों से देख रही थी.

वो बोली- वो घन्टी मेमसाब के फोन की थी कि वो 15 मिनट में पहुँच जाएंगी. इस बार मेरे खूब जकड़े रहने के बावजूद भी वो नहीं माना और उसने फिर से अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया. मैंने मैम की साड़ी भी उतार दी, अब मैं उन्हें लाल रंग की ब्रा और पेंटी में देख कर पागल सा हो गया था.

राजस्थानी औरतों का सेक्स वीडियोउनको अपने बड़े भाई के त्याग का अहसास था, हमारी जितनी भी प्रगति हुई थी, जेठ जी के वजह से ही हुई थी. इस खेल की मजेदार बात यह थी कि उसकी अनचुदी टाईट चूत, जो मेरी उंगली को भी घुसने की जगह नहीं दे रही थी.

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मैं दिखने में ठीक ठाक हूँ, मेरी उम्र 28 साल है और मैं अच्छी सेहत का मालिक हूँ. मेरा विक्रम ठाकुर है और मैं मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में रहता हूं. खाला ज़ोर-जोर से हाँफ रही थीं और ऐसे लग रहा था … जैसे कई मीलों से दौड़कर आई हों.

जो बुड्ढे से मियां थे, अनवर उन्हें बोला- भाई जान आप भी जल्दी से उतार लो. मैं उसके कान को चबाते हुए उसकी कुर्ती के अन्दर हाथ डाल कर उसके मम्मे को दबाने के साथ- साथ उसके दाने को मसलने लगा. मैंने फिर कमरे में रखी क्रीम की डब्बी से बहुत सारी क्रीम निकालकर उसकी गांड पे लगा दी और फिर मैंने अपने लन्ड पे थूक लगा कर गांड की छेद पे रखा और थोड़ा झुककर अंदर की और जोर लगाया तो मेरा आधा लन्ड सरक सरक कर मेरी बहन की गांड में चला गया.

फिर मैंने कायदे से अपना पूरा हाथ उसके दूध पर रखा, तो उसके मुँह से हल्की सी आह निकली. इससे पहले मेरी दोनों कहानियांचाची के घर में गर्लफ्रेंड के साथ सेक्सऔर दूसरी कहानीगर्लफ्रेंड को दोस्त के खेत पर दबाकर चोदादोनों कहानियों को आपने बहुत पसंद किया, इसके बहुत बहुत धन्यवाद. पहले नैना ने अपनी टांगें ज़ोर से बंद कीं, फिर उसे मज़ा आने लगा, तो उसने अपनी टांगें ढीली छोड़ दीं.

मैंने उसको भरोसे में लेते हुए कहा।मगर इससे पहले कि मैं कुछ सरिता से कहता, उसने खुद ही वह बात कह दी जिसके लिए मैं शायद हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. उसके अंडकोष किसी सांड की तरह लटक रहे थे और लिंग, कोई हलचल मचाने को फनफना रहा था.

तो मैं दो सौ मर्दों से पांच सौ से अधिक बार अपने पिछले छेद की सेवा करवा चुकी हूँ.

मैंने कहा- मतलब?तो वो बोली- मेमसाब ने बोला था कि मेरे आने तक साब की अच्छी से सेवा करना … उन्हें मेरी कमी नहीं महसूस होनी चाहिये. हिंदी फिल्म सेक्सी हिंदीइन कहानियों को पढ़ कर मुझे लगा कि मुझे भी अपनी कहानी आपको बतानी चाहिए. गार्डन का सेक्स वीडियोइस्स्स्स … स्स्स्स्स … आह्ह्ह … करती हुई भाभी बिस्तर की चादर को नोंचने लगी. चाची को छोड़कर मैंने इन सबके साथ वो किया है, जो चाची ने नहीं किया था.

उन्होंने तकिया को अपने मुँह में भर लिया और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगीं.

फिर मैंने सपना को पटाने के लिए और आगे बात बढ़ाई, मैंने कहा- तो यार इसमें गलत क्या है, सेक्स करना तो सबकी शारीरिक इच्छा होती है. जब सुबह 9:00 बजे करीब धूप भी हो गई थी, तब मम्मी ने मुझे धक्का देकर उठाया. सब मेरे पास को आ गए और मैं उन सबका एक-एक करके धीरे धीरे लौड़ा चूसने लगी.

आप सोच सकते हो कि दो भरे हुए खरबूज़ आदमी के मुँह के सामने हों और वो कुछ ना कर सकता हो, तो उसकी क्या हालत होगी. मैंने अपनी बांहों में रवि को जकड़ लिया और उनकी पीठ में नाखून से नोंचने लगी. न जाने … इस खेल में ऐसा क्या जादू होता है कि सारा का सारा दर्द कहां गायब हो जाता है.

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जब सुबह 9:00 बजे करीब धूप भी हो गई थी, तब मम्मी ने मुझे धक्का देकर उठाया. उसने झट से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. अगले शनिवार के दिन भाभी का बहुत ज्यादा चुदने का मन हो रहा था … तो उन्होंने रात में जब सब सो रहे थे, तो भाभी ने अपना दरवाजा खोल कर मुझे अपने पास बुलाया.

इस तरह से बातें करते हुए उनमें से एक ने मुझसे पूछा- तुम्हारे किले पर कितनी बार चढ़ाई हो चुकी है?मैंने अनजान बनते हुए कहा- क्या पूछ रही हो … मुझे नहीं समझ में आया क्या पूछा है.

मेरे पति मुझसे कहने लगे- मनीषा, अब मान भी जाओ!और उनका दोस्त भी कहने लगा- भाभी जी, अब मान भी जाओ ना … हमें भी तो मौका दो आपकी सेवा करने का। आप चाहो तो मैं अगली बार अपनी पत्नी को भी लेकर आऊंगा और फिर हम चारों मजे लेंगे।धीरे धीरे वो दोनों मुझे मनाने लगे.

इस आसन में वो मुझे अपने ऊपर लाया और उसके बाद मुझे अपने लंड पर बैठा कर मुझे चोदने लगा. करीब 15 मिनट बाद मैं झड़ने को हुआ, तो उसने जोर से लौड़ा चूसना शुरू कर दिया. आज का नया वीडियोमैं साइड हुआ तो नैना ने अपना सर मेरी छाती पे रख लिया और मेरी छाती पे अपनी उंगलिया फिराने लगी.

मन तो किया कि अभी पकड़ कर चोद दूँ उसको, मगर डर था कि कहीं कोई देख ना ले. मेरी तो किस्मत ही खुल गई थी कि इतनी सेक्सी लेडी को सेक्स सर्विस देने का मौका मिला है. मैं भी ऊपर अँधेरा का फायदा उठा कर उसकी चूची एक हाथ से मसल देता … वो सिसकारी लेती थी ‘असस्स्स्श ह्ह्ह्ह …’ मगर झूले की आवाज में वो दब कर रह जाती थी.

फिर उसने अपना लंड नेहा की चूत में डाला और तेजी से अन्दर बाहर करने लगा. पहली बार किसी ने चूत चाटी थी।पिंकी उठी औऱ मेरे मुंह के ऊपर अपनी चिकनी चूत टिका कर बोली- मेरी चाट … मैं तेरी चाटूंगी।मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। उस दिन ज़िंदगी में पहली बार उसने मुझे चरम सीमा तक पहुंचाया और मैंने भी उसको चरम पर पहुंचाया। काफी देर तक हम दोनों सहेलियां नंगी लेटी रही।उस दिन के बाद मैं अक्सर पिंकी के घर तब जाती जब कोई ना होता.

तभी मैंने अपने मन का सवाल पूछा- तुमने कभी पीछे (गांड में) लन्ड डलवाया है?मनीषा- नहीं … आज तक सिर्फ आगे ही डलवाया है.

मैं चौंक गयी और कहा- यहां तो कोई भी आ सकता है और अगर किसी ने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी. मुझे क्यों तड़पा रही है, मेरी बुर में भी अपनी जीजू का लंड पूरा डलवा कर इसे फड़वा दे ना! मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा, तुम तीनों मुझे क्यों तड़पा रहे हो. एक बार तो अब मैं भी घबरा गया कि इसको‌ कैसे पता चल गया कि मेरे और सुलेखा भाभी के बीच कुछ हुआ है.

सेक्सी फिल्म अंग्रेजो की मैंने मजबूरी वश पिंकी के चेहरे की ओर देखा तो उसकी नज़रें मेरी नज़रों से मिली मगर उसके हाव-भाव से मुझे लगा कि वह नहीं कर पाएगी. अचानक सब बंद हो गया, फिर अन्दर से ऐसी आवाज़ आई, जैसे किसी का गला चोक हो गया हो.

लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद मेरा होने वाला था तो मैंने सारिका से पूछा कि कहां छोड़ना है तो उसने कहा कि मेरी चूत में ही छोड़ दो. मेरी हालत तुम तीनों को देख देख कर खराब हो गई है, मेरा तो कुछ करो!और यह कहते ही मेरी पत्नी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगी हो बेड पर देखते हुए बोली- अरे नीरू, तू कहां मर गई? मेरी चूत को चाट!यह सुनते ही नीरू अपनी जीजी की टांगों के बीच में आकर उसकी चूत को चाटने लगी. उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया, मेरा लंड कपड़े से साफ किया … फिर मुझे जोरदार किस किया.

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शायद मेरे इतने बड़े लंड को एक बार में ही अपनी चुत में लेने से सुलेखा भाभी को पीड़ा हुई थी, मगर वो सारा दर्द पी गईं और खुद ही मेरे दोनों हाथों को पकड़कर अपनी चूचियों पर रखवा लिया. मैं भी अब अपने पूरे लंड को सुलेखा भाभी की चुत में अन्दर तक‌ पेलने लगा, जिससे भाभी‌ की सिसकारियां तेज हो गईं और अपने आप ही उनके पैर मेरे पैरों पर चढ़ गए. वो दर्द से तड़फ कर मुझसे कहने लगी- आह निकालो … मुझे नहीं करना करना … यह बहुत बड़ा है, मुझे मार डालेगा.

इस सेक्स स्टोरी में बहन की चुदाई को मसालेदार बनाने में कुछ डायलॉग जोड़े गए हैं. मैं उसके होंठों को चूमने लगा, एक बोबे को दबाने लगा और नीचे चुत में जैसे ही लंड डाला कि नुपूर दर्द से कराहने लगी.

मैंने पूछा- चाची ये किसलिए?तो वो बोलीं- इस से सेफ्टी रहती है, ताकि हम दोनों में से किसी को कोई बीमारी, इन्फेक्शन आदि ना हो और वैसे भी मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ और लाइफटाइम करती रहूंगी.

मेरी बात सुनकर मालिनी बहुत खुश हुई और भोपाल आने की तैयारी करने लगी. मैं जान गई थी कि लड़कों का लंड खड़ा होने के बाद उनको कंट्रोल करने में कितनी परेशानी होने लगती है. ”उसकी ना में मुझे हां साफ झलक रही थी, उसके निप्पल चने की तरह सख्त हो गए थे.

शर्त के मुताबिक, आज पहले राउंड में प्रशांत की जीभ को मेरी नीना की चूत का ग्रैंड मसाज करना था. करीब 5 साल बाद पायल की शादी हो गई उसके बाद पायल को चोदने का मौका नहीं मिला. मैंने उसकी पेंटी उतार कर उसकी चूत पर धीरे-धीरे मसाज देना शुरू कर दिया और बदले में वह मस्ती में मेरे लंड के साथ खेलने लगी.

मैंने उसे बोल दिया कि मैं जिस दिन फ्री रहूंगा उस दिन उसके घर पर आकर उसका कम्प्यूटर ठीक कर दूंगा.

बीएफ बीएफ दीजिए: पुणे छोड़ते ही सारे जेंट्स बस के पिछले हिस्से में आ गये और अपना ड्रिंक का प्रोग्राम शुरू कर दिया. बाद में हमें नींद आने लगी, तो हम दोनों भी एक दूसरे की बांहों में सो गईं.

जैसा कि हम लोग खेत के पास ही थे, इसलिए आवाज़ से नानाजी की नींद खुल गयी, वो खड़े हुए और खांसते हुए उन्होंने अपनी टॉर्च चालू कर दी. अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसकी चुत के छेद पर लगा ही रहा था कि रमेश चिल्लाया- रुकिए मालिक. मन ही मन में मैं उनको गालियाँ दे रहा था। हम लोग कॉफी पीकर वापस अपने फ्लोर पर चले तो फिर उसी लिफ्ट में गए और फिर से एक दूसरे को किस करने लगे.

मैं लगा रहा और अगले दस मिनट बाद ही मेरे लंड को उल्टी आ गई और मैंने भाभी जी की चूत में माल निकाल दिया.

फिर सोचा कि आज इसको पटा ही लूं …मैंने बोला- एक बात बोलूं?तो बोली- हां बोलो. मैं सोनू चूत में दोगुनी ताकत से धक्के मार रहा था और मेरा लंड उसके पेट में जाकर घुस जाता था. थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि वो धीरे धीरे मादक सिसकारियां ले रही है.