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अगले दिन से माँ के बताये समय पर रिया हमारे घर आई तो माँ उसे लेकर उपरी मंजिल में मेरे कमरे में ले कर आई और मुझसे परिचय कराया. देसी पोर्न सेक्सी वीडियोमैं तुम्हारे लिए चाय लाती हूँ।वो कुछ देर बाद चाय बना कर लाई, कुछ देर तक कुछ इधर-उधर की बातें हुईं।उसके बाद उसने कहा- लकी तुम ड्रिंक करते हो?तो मैंने धीरे से कहा- यस।वो बोली- मैं भी करती हूँ मगर अकेले पीने की इच्छा नहीं होती अगर तुम बुरा ना मानो तो आज रात हम कुछ ड्रिंक लें?मैंने कहा- इट्स ओके.

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फिर वो मेरे पास आकर बैठ गई और अपनी भौंहे हिलाकर कहने लगी- क्या कर रहे हो समीर जी?मैं बुरी तरह घबरा गया था, पूजा को क्या पता था कि मैं किस हालत में लेटा हुआ था.सेक्सी बीएफ व्हिडिओ सेक्सी व्हिडिओ: इसकी गाण्ड बहुत मस्त है आ… साहिल ने पूरा पानी गाण्ड में भर दिया और लौड़ा निकाल कर साइड में लेट गया।लौड़ा निकलते ही ‘पुच्छ’ की आवाज़ आई और जूही को असीम दर्द का अहसास हुआ। जूही ने रेहान का लौड़ा मुँह से निकाल दिया।जूही- आइ उफ्फ आ.

आप सभी के लिए आज मैं कुछ रोचक जानकारी लेकर आया हूँ, पढ़ें और जानें कि सुहागरात में क्या और कैसे करना चाहिए.मैंने इसमें सब लिख दिया जो तूने कहा था।निशा- ठीक है… चल अब जल्दी से अपनी ब्रा और पैन्टी दोनों निकाल दे।मैं- क्या… निकाल दूँ.

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Tumko na Bhool Paunga-3मैंने उसकी चूत पर अपना लौड़ा रखा और जोर से झटका मारा तो मेरा थोड़ा सा लौड़ा उसकी चूत में घुस गया।इतने में ही सीमा की आँखों में से आँसू निकलने लगे और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- अहह… अह्ह्ह्ह… जल्दी बाहर निकालो…मैं- कुछ नहीं होगा जान.तभी देख लिया था, यह वहाँ कोने में उकड़ू बैठी कुछ कर रही थी, तभी साफ़ साफ़ दिख गई थी।दूसरा- ओह तभी साले इतना उछल रहा था… चिड़िया के दर्शन पहले ही कर लिए… डबल फ़ायदा… फ़ुद्दी भी देख ली और पैसे भी… सही है.

वो उठ कर चल दी तो उसके जाने के बाद मैंने सोचा ऐसे किसी अनजान घर में हूँ तो कपड़े पहन लूँ, इसलिए लाइट ऑन करने के लिए स्विच खोजने लगा. सेक्सी बीएफ व्हिडिओ सेक्सी व्हिडिओ आह्ह …बहुत मज़ा आ रहा है…।’रूबी अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर मेरी मदद कर रही थी, हम दोनों मस्ती की बुलंदियों को छू रहे थे।तभी रूबी चिल्लाई- जानू…मुझे कुछ हो रहा है…आआहह जानू.

धीरे-धीरे मैं अपना हाथ उसकी चूत की तरफ ले गया और जीन्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा।उसकी सीत्कार निकलने लगी, उसने मेरे लंड को पकड़ लिया।वो सीट से उठ कर टॉयलेट चली गई और वहाँ से एक मैसेज किया मैं तुम्हारे नाम पर अपनी चूत में ऊँगली डाल रही हूँ।फिर वो दस मिनट में वापस आ गई।अब मैं टॉयलेट गया और उसको मैसेज किया- जान.

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सलोनी के कदम लड़खड़ा रहे थे।मैंने देखा कि मेरे देखते हुए भी उसने सलोनी को गाड़ी के अंदर करने और उसको बैठाने में उसके चूतड़ों को अच्छी तरह सहलाया था,उसके हाथ सलोनी की शर्ट के अंदर ही थे।मैंने उसको सौ का नोट भी दिया जैसे उसने मेरी बहुत मदद की हो और साला मना भी कर रहा था जैसे उसने पैसे वसूल कर लिए हों…मैं गाड़ी लेकर आगे बढ़ गया, अब मेरी मंजिल घर ही था…. कुछ देर बाद मैंने भाभी को अपने नीचे लिटा लिया और भाभी की जबरदस्त चुदाई की और भाभी के सारे कस-बल निकाल दिए. ह्ह… सुनील मैं झड़ने वाली हूँ। और यह कहते हुए वह कुछ देर के लिए मछली की तरह तड़पने लगी।अब मैंने उसके पैरों को थोड़ा फैलाया और लण्ड का सुपारा उसकी गर्म गीली चूत पर रख दिया और वह उम्म्म….

चूत के बाहरी होंठ भी अन्दर ठंस जाते।इसी दशा में मैंने लगभग 30 धक्के लगाए। वो बीच में दो बार और तड़प उठी थी।अब सहना मुश्किल हो रहा था. मैं कहाँ शरमा रहा हूँ।मैंने इधर-उधर नजरें दौड़ाई, दूर कुछ लोग थे, पर वो हमारी तरफ नहीं देख रहे थे।मैं अपनी बात साबित करने के लिए उसके गालों को चूमने के लिए बढ़ा लेकिन वो मुझसे दूर हो गई।‘देखा. अब चुदाई का मज़ा आएगा।’ मैं हौले-हौले धक्के लगाता रहा।कुछ ही देर बाद रूबी की चूत गीली होकर पानी छोड़ने लगी।मेरा लण्ड भी अब कुछ आराम से अन्दर बाहर होने लगा, हर धक्के के साथ ‘फक-फक’ की आवाज़ आनी शुरू हो गई।मुझे भी अब ज़्यादा मज़ा मिलने लगा था। रूबी भी मस्त हो कर मेरा सहयोग देने लगी थी।अब वो बोल रही थी- अब अच्छा लग रहा है जानू.

मैंने कहा- हम आज ही मिले हैं और आज ही तुमने अपने प्यार का इज़हार कर दिया !तो उसने कहा- जल्दी करने में ही भलाई है, वरना क्या पता तुम्हें अपने कॉलेज की कोई लड़की पसंद आ जाती तो मैं तो मर ही जाती…अब हम आपस में काफी खुल गए थे।कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उससे कहा- रात बहुत हो गई है और तुम अब सो जाओ. !’‘क्या?’वो कहती थी कि तुम्हें चोदना नहीं आता, उसकी सेक्स की भूख इतनी थी कि हर रोज़ उसे 2-3 बार सम्भोग चाहिए था और मेरे काम की वजह से ये संभव नहीं था। उसकी चूत में हर वक़्त आग लगी रहती थी। शादी के बाहर उसके 3 बॉय-फ्रेंड्स और भी थे, जिनसे वो रेग्युलर चुदाई करती थी…!’‘तो, फिर क्या हुआ?’‘मैंने ही उसे छोड़ दिया कि जाओ तुम आज़ाद हो, अब जिस से चाहो उस से उतना सेक्स करो. परीईईईईईईईईईईइ ……………”मेरे मुँह से भी भी गुर्र… गुर्र की आवाजें निकालने लगी और मैंने उसे जोर से अपनी बाहों में भींच लिया। और उसके साथ ही मेरा भी कुलबुलाता लावा फूट पड़ा …………….

फिर थोड़ी देर बाद मैं अपने घर आ गई लेकिन दर्द के मारे दो दिन तक कहीं नहीं गई। उसके बाद से तो वो लोग मुझे अक्सर उसके रूम पर बुला कर दिन में भी चोदते हैं।लेकिन वो रात मैं कभी नहीं भूल सकती। आखिर वो था मेरा पहला गैंग-बैंग।यह मेरी पहली कहानी है इसलिए प्लीज इस पर अपने कमेन्ट जरूर करें।[emailprotected]. अब उसने मेरे जिस्म से खेलते खेलते, नीचे की तरफ़ बढ़ना शुरु किया और लपक कर लंड को पकड़ लिया, उसने एक बार मेरी तरफ़ देख कर अपने होंठों पर जीभ फ़िराई और लपक के लंड को अपने मुँह के अन्दर कर लिया.

कॉम पर पढ़ रहे हैं।थोड़ी देर बाद वो गीली हो गई और तब मैंने उसको बोला- तुम मेरा लोड़ा चूसो।वो भी मेरा आठ इंच का लोड़ा देखकर बोली- क्या लंड है ! भगवान ने मेरी किस्मत कितनी अच्छी बनाई है कि मुझे तुम जैसे नौजवान का लंड देखने को मिला।मैंने कहा- मेरी रानी, फालतू बातें छोड़ो और मेरा लंड अपने मुँह में लो.

खैर इसके बाद स्वाति ने मुझसे कहा- क्यों सायरा खान मैडम? अब क्या कहती हो, चलो अब सोनिया जो भी कहेगी, तुम्हें करना पड़ेगा.

की नज़रों ने हमारी यह हरकत पकड़ ली और वो भी चालू हो गया। उसने मौका देखा और बॉस का हाथ वहाँ से हटते ही अपना हाथ मेरी चूत पर धर दिया।मुझे लगा कि आज तो कुछ गजब ही हो रहा है, मेरी चूत से जैसे अब पानी बहने लग जायेगा। ऐसा तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था। खैर अब ड्रिंक्स के बाद डिनर भी जल्दी ही हो गया और बॉस अपनी कार से हमको होटल छोड़ने आये। वहाँ पर एक कमरा हमारे बगल का ही सी. आशा- चल दिया पर नए साल वाले दिन पक्का उसका लंड मुझे अपने अंदर चाहिए?कविता शर्म से लाल हो गई, 2 दिन तक उसने बात नहीं की, मैंने उसे कई एस एम एस किये पर रिप्लाई नहीं आया. मैं सीधे उसके रुम के बाहर पहुँचा, उसने काफ़ी मंहगा कमरा बुक किया था, उसके कहे अनुसार मैंने दरवाजा खटखटाया.

मैंने झट से कहा- नहीं पापाजी, मुझे तो बिल्कुल भूख नहीं है, मेरा पेट तो आप की मलाई और सजा के आनन्द से भर गया है. इतना लम्बा लण्ड मैं पहली बार देख रही हूँ!उसकी बात सुन कर मैं पागल सा हो गया।उसकी चूचियाँ मेरे चूसने से बिलकुल सुर्ख लाल हो गई थीं। अब मैं उसकी पैन्टी पर मुँह रख कर चूम रहा था, फिर मैंने उसकी पैन्टी भी उतार दी।वाह. यह तो दस साल से सीख रहा था।फिर मैंने कामसूत्र की तरह उसकी आँखों पर पट्टी बांधी और उसके दोनों हाथ बिस्तर से बाँध दिए।उसने कहा- यह क्या कर रहे हो.

दीदी एक शहर में किराए की मकान में रहती थी, 2 कमरों का घर था। जीजाजी दूर एक फ़ैक्टरी में सुपरवाइज़र थे, तो सुबह 7 बजे निकलना और रात में देर 10 बजे तक आते थे। यह मुझे वहाँ रहने के बाद पता चला।मैं अब आराम करने के लिए बगल वाले कमरे में चला गया और यही सोचता रहा कि मेरी बहन आज इतना सजी संवरी क्यूँ है.

‘बेबी पहले कभी किसी से ऐसा करवाया है क्या?’ राजू ने रीटा के पत्थर से कठोर निप्पल को चुटकी में मसला तो रीटा मज़े से दोहरी हो कर चिंहुक के राजू से बुरी तरह से लिपटती और लज्जाती बोली- सीऽऽऽ नहीं भईया पहली बार करवा रही हूँ ये सब! हायऽऽ ये आप क्या कर रहे हो?‘मजा आ रहा है ना?’ राजू चूचों को पीसता बोला. !मैंने कहा- नहीं सब ठीक है। बस कॉलेज से वापिस आने के बाद समय पास नहीं होता है, बोरियत होती है!तो वो बोले- ऊपर आ जाया करो. आलोकअन्तर्वासना के सभी पाठकों को आलोक का नमस्कार एवं अभिनन्दन। आप सभी के ढेरों ईमेल आए कि मेरी अगली कहानी कब आ रही है, तो मित्रों नई कहानी प्रस्तुत है।यह मार्च की बात है मैं नेट पर देर तक रहता हूँ इसमें एक मुझको मेरी याहू आईडी पर एक सीधा सा मैसेज आया- मुझे आपसे मिलना है.

सच-सच बताओ अब तक कितनी औरतों या लड़कियों को चोद चुके हो?रणजीत- गिनती करना मुश्किल है, फिर भी ग्यारह को तो चोद चुका हूँ।सीमा- 11 को. चूत के बाहरी होंठ भी अन्दर ठंस जाते।इसी दशा में मैंने लगभग 30 धक्के लगाए। वो बीच में दो बार और तड़प उठी थी।अब सहना मुश्किल हो रहा था. !मैंने अपना चोदन थोड़ा रोका और भाभी के मम्मों को अपने होंठों से चूसा। भाभी कुछ ही क्षणों में अपना दर्द भूल कर अपने चूतड़ उठाने लगीं।‘आ…आहह.

पर सिर्फ निराशा हाथ लगती रही, होटल में रिस्क लेना नहीं चाहते थे, और किसी दोस्त की मदद लेकर बदनाम होना नहीं चाहते थे।एक दिन अम्बिका पार्क में मुझसे मिलने आई तो उसने मुझे बताया- यश, एक मौका है हमारे मिलने का पर थोड़ा रिस्की है। पर ऐसा भी नहीं कि हम मिल ना सकें।मैंने उसे कहा- बोल यार, इस तड़फने से अच्छा हैं कि कुछ रिस्क उठा लें.

आधे घंटे बाद जब उसने मुझे उठाया तो मेरा फिर से खड़ा हो गया और उसको भी इच्छा हो गई थी तो हम लोग फिर से चुदाई में खो गये पर इस बार न तो कोई दर्द न ही चीखना, सिर्फ मजा ही मजा लिया एक दूसरे ने!उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने, ठीकठाक हुए और एक दूसरे को चूमा. उस गीलेपन को महसूस करते ही मैं उत्तेजित हो उठा और तब मैंने रिया की पेंटी को नीचे की ओर खींच कर उसके पैरों में डाल दिया.

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सेक्सी बीएफ व्हिडिओ सेक्सी व्हिडिओ कहीं धंधे से ला रहा है या खुद ही बजाने ले जा रहा है?मैं अब बिल्कुल सच बोलने वाला था और यह भी जानता था कि यहाँ साला कोई विश्वास नहीं करेगा मगर अब कुछ तो करना ही था…मैंने किसी तरह खुद को संयत किया- सर विश्वास करो, यह मेरी बीवी है. मैं बाथरूम में पेशाब करने बैठी तो प्रिया ने मेरी टाँगें चौड़ी करके खोल दीं ताकि वो ठीक से मेरी नंगी चूत से पेशाब निकलते हुए देख सके.

सलोनी रानी से पहले जितनी कहानियाँ छपी थीं उनमें तो कोई गाली नहीं थी, ऐसा क्यों?मैंने कहा- सुन मां की लौड़ी, वो इसलिये शिखा रानी कि सलोनी रानी मेरी पहली गर्ल फ्रेंड थी जो गाली देने और गाली खाने में बड़ी खुश होती थी… उसे चोदने से पहले कई दिन चैटिंग में जो गालियाँ उसने दीं और मैंने दीं उसमें मुझे इतना मजा आया कि मेरा अब बहुत दिल करता है लड़की से गाली सुनने को और उसे गाली देने को.

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वो दिन था और आज का दिन है, हर दूसरे तीसरे दिन मैं उसकी चुदाई करता हूँ और बदले में मैं कभी कभार कुछ पैसे उसे दे देता हूँ. मगर यह सब एक पल के लिए ही हुआ …सलोनी ने पूरी ताकत लगा फिर से ऊपर उठ गई और एक बार फिर लण्ड की दूरी बढ़ गई… चूत उसकी पहुँच से बच कर निकल गई…ये सब एक चूहे बिल्ली वाला खेल बहुत रोचक और मजेदार हो रहा था, कभी पकड़ में आ रही थी और कभी बच कर निकल जा रहे थी. मैंने शीशे में देखते-देखते ही रफ्तार बढ़ाना शुरू किया।तेज गति के साथ उसके बड़े-बड़े मम्मे भी आगे-पीछे हिलते जा रहे थे और मेरी चुदाई की गति के साथ ‘थप.

बाएं हाथ से मेरी चूची को मसलते हुए पूछा- अब कैसा लग रहा है? अगर तुम कहती हो तो मैं निकाल लेता हूँ नहीं तो जब कहोगी तभी आगे सजा दूंगा. तभी सोनिया बोली- साली कुतिया, अब तुझे शर्म आ रही है, पहले तो बहुत बड़ी बड़ी बातें कर रही थी?मैंने कहा- देख सोनिया!और सोनिया ने मुझे चुप कराते हुए कहा- अगर तुझे अपनी मनमानी करनी है तो अभी मेरे घर से निकल जा!मैं जानती थी कि अगर मैं चली गई तो ये लोग मेरा कॉलेज में जीना मुश्किल कर देंगे. रह रह कर उस नन्ही नवयौवना के सुकोमल अंगों में तनाव व कसाव आ जाता और कोरी फुद्दी किसी फड़फड़ाते लण्ड को गपकने के लिये कुलबुला उठती थी.

तो आपका ‘काम’ कैसे करता है?’मैंने सलवार का नाड़ा बंद किया।उसने मेरी बाजू पकड़ कर अपनी तरफ खींचा, मैं उसके सीने से लग गई- यह क्या कर रहे हो.

जैसे आवाज़ें निकलने लगी। मैंने करीब 15 मिनट तक उसकी चूत को चूसा।मैं- बेबी, चलो कुछ नया करते हैं।शालिनी- मगर क्या?मैं- मैं अभी आया. थोड़ा आराम से करो।’फिर उन्होंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए और धीरे-धीरे अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया।मैं चिल्लाए जा रही थी- बालू, नहीं पेल अब रुक जा. उन्होंने भी वासना भरी आवाज में कहा- चलो कमरे में इसका जादू भी बिस्तर पर देखती हूँ।वो अपने कमरे में जाने लगी और मैं पीछे-पीछे उनके साथ कमरे में पहुँच गया।मैंने कहा- भाभी अगर आप बुरा न मानो तो एक बात पूछूँ?भाभी- हाँ.

बाद में सब ठीक हो जाता है।उसे चलने में दिक्कत हो रही थी, तो मैंने उससे पेनकिलर दी और उसे उसके हॉस्टल छोड़ कर आ गया!तब से अब तक मैंने उसे 3 बार चोदा है।कैसी लगी मेरी गाथा, दोस्तो, प्लीज़ अपने विचारों का अचार जरूर दें![emailprotected]. 5 इंच का लण्ड तंबू बना हुआ था।मैंने प्यार से उसे देखा फिर हमारी नज़रें पहली बार मिलीं और मैंने आराम से उसे चुम्बन करना शुरू किया। पहले सिर पे, फिर आँखों पर, नाक पर मैंने चुम्बनों की झड़ी लगा दी करीब 25-30 चुम्बन ले लिए। हम लोग अपने प्यार की मस्ती मग्न थे और धीरे-धीरे ऐसे ही 10. फिर सन्नाटे में रीटा की फुद्दी ने बड़ी जोर की फ़िच्च शीऽऽऽऽ की आवाज से पेशाब का जबरदस्त और जोरदार शर्ला छोड़ा.

अब तो तुम्हारे पास ही हूँ खूब अच्छी तरह से चुदवाऊँगी।दोस्तो यह थी मेरी कहानी। आप मुझे अपने ईमेल ज़रूर कीजिए।[emailprotected]. ’उसने अपना लौड़ा खोल दिया।मेरी माँ खिलखिला कर हंसती हुई काउंटर पर पहुँची- ओए… चार रॉयल स्टैग की बोतल दे.

वो बीच बीच में कहता- चोद दे मुझे सूमी, रंडी की तरह चोद, ब्लू फिल्म की तरह चुदाई कर दे आज मेरी गाण्ड की!यह सुन कर मैं अपना पूरा लंड पूरे जोश क साथ उसकी गाण्ड में घुसा रही थी. क्या बताऊँ यारो! ऐसा लग रहा था जैसे मेरे हाथों में मक्खन हो! और उसके गले को चूमते-चूमते में एक अजीब सी मदहोशी में खो गया जिसके कारण मुझे पता ही नहीं चला कि ऐसा करते मुझे कितनी देर हो गई थी. लड़के से हो गई और वो उसके साथ विदेश चली गई। आज भी वो मुझे बहुत याद आती है।कहानी कैसी लगी जरूर बताना…आपका अपना राज.

ज़ालिम राजू ने आखिरी कमरा हिला देने वाले आटोमिक धक्के रीटा सम्भाल ना पाई और दोनों चूदाई करते करते कारपेट पर ढेर हो गए.

अगले दिन कॉलेज में उसने मुझसे अच्छे से बात नहीं की। उसकी सहेली को भेजा पूछने के लिए कि वो ऐसा क्यों कर रही है मुझसे…उसने पूछा- कल क्या हुआ था अंजलि के घर?मैंने कहा- कुछ नहीं, काफी पीकर वापिस आ गया !और वो भी मुँह फेर कर चली गई, जाते हुए वो बोली- तुम पूरे पागल हो, जाओ अपना काम करो. फिर उठ कर देखा तो बिस्तर की चादर खून से गीली थी।हमने उसे हटा कर खुद को भी साफ किया।फिर वो चाय बना कर लाई. कहानी का पहला भाग :कट्टो रानी-1मैं लैपटोप में पड़ी फ़ाइलों के विशाल संग्रह में रेलगाड़ी ढूँढने लगा लेकिन काफ़ी कोशिशों के बाद भी मुझे सफ़लता नहीं मिली.

अब कोई परेशानी नहीं होगी।उनकी इस हँसी में मुझे उनकी मूक सहमति दिखी, मैंने झट से भाभी को बाँहों में भर लिया और उनको कस कर दबा लिया।‘भाभी आह्हह. !यह कह कर वो चले गए।कहानी जारी रहेगी।आपके विचारों का स्वागत है।आप मुझसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।https://www.

अब तो बक।रश्मि मुस्कुराई फिर धीरे से बोली- आज मैं सुबह नहा रही थी, उस समय रवि की याद कर रही थी।नेहा- ये बात. उस गीलेपन को महसूस करते ही मैं उत्तेजित हो उठा और तब मैंने रिया की पेंटी को नीचे की ओर खींच कर उसके पैरों में डाल दिया. तो मैंने खुश होते हुए कहा- हाँ जरूर!वो उठ कर बाथरूम चली गई और दस मिनट बाद वो साड़ी पहन कर बाहर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

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यू आर जूनियर…’वो मुझसे एक साल बड़ी थी, लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया। मैं उसे किसी भी कीमत पर प्यार करना चाहता था।मैंने उसकी सहेली जिसका नाम देविका था, उससे कहा- ममता मुझसे रिश्ता बनाए, चाहे जो भी रिश्ता बना ले, पर मुझसे बात करे।मैं वास्तव में उसे बहुत प्यार करता हूँ।मेरी हालत पागलों से भी बदतर थी। मुझे न भूख लगती थी, न प्यास.

!!!लण्ड देखा नहीं चूत को चुदाई का मन हो चला।यही बात मेरे लौड़े की कि चूत देखी और मचल गया, मैंने भाभी को हाँ में मस्तक हिला के जवाब दिया।भाभी ने फोन किया और वो जो बोली उससे मेरा लण्ड और भी उठ गया. दस मिनट तक पापा मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करते रहे, मैं इस दौरान दो बार झड़ गई। अब पापा भी झड़ने के करीब आ गए।उन्होंने रफ्तार और बढ़ा दी, पूरा बिस्तर हिलने लगा, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं ट्रेन में हूँ और आख़िर पापा के लौड़े ने लावा उगल दिया, मेरी प्यासी चूत पानी से भर गई।काफ़ी देर तक पापा मेरे ऊपर पड़े रहे हाँफते रहे. लेकिन मुझे पास जरूर करवा देना !सर की पत्नी घर पर नहीं थी।सर- मेरे पास आओ !मैं सर के पास चली गई।सर– गोपी, मुझे खुश करना शुरू करो…मैं तो पास होने के लिए कुछ भी कर सकती थी इसलिए मैंने सबसे पहले सर के सामने अपने मम्मों को दबाया.

उसके ऐसा करते ही मेरा दिल तो बाग-बाग हो गया तब उसने अपना मुँह खोला और लंड की चमड़ी को पीछे करते हुऐ उसे अपने मुँह में भर लिया. दोस्तो, मैं संजना लुधियाना वाली, आप सबके लिए एक नई कहानी लेकर आई हूँ। यह कहानी बिल्कुल काल्पनिक है। यह सिर्फ़ उन लड़के-लड़कियों के लिए है, जिनके कोई गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड नहीं हैं और वो इस कहानी को पढ़ कर अपने हाथ से अपनी काम की भूख शांत करेंगे। इसमें कोई ग़लत बात भी नहीं है क्योंकि मैं भी छोटी उम्र से ऐसा ही करती रही हूँ, तो मस्ती कीजिए. ब्लू पिक्चर सेक्सी वीडियो एचडीचल आज मुझे अपना मूत पिला… उसको चुदने दे किसी और से…यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !उसकी इतनी गन्दी बातों ने तो हद कर दी थी.

मैंने अपने जीवन के कुछ मधुर अंश तो अपनी रचना ‘इक्कीसवीं वर्षगाँठ’ में पहले ही आप सबको बता चुका हूँ! अब मैं आपको मेरी उस इक्कीसवीं वर्षगाँठ के बाद हुए एक प्रकरण के बारे में बताना चाहूँगा. वहाँ मैंने लड़के को चाबी दी गाड़ी बाहर निकालने के लिए…लड़का चाबी लेते हुए भी सलोनी की टांगों की ओर ही देख रहा था…सलोनी अभी भी काफी नशे में लग रही थी.

यार मैं भी सुबह से लगी हुई हूँ पर ओपीडी में भीड़ कभी खत्म ही नहीं होती और फिर एचओडी ने तुम्हारे पेशेंट भी मुझे ही देदिए हैं. मेरी बात बनने लगी।एक रात की बात है, मैं अपने दोस्तों के साथ खा-पीकर आया था, तब अचानक ही भगवान ने मेरा साथ दिया, उसने अपनी बालकनी में खड़ी होअक्र मुझे आवाज लगाई। मैंने उसको देखा और उसने मुझे देखा, वो बोली- भाईजान, मेरे डिश में कुछ दिक्कत हो रही है, कोई भी चैनल साफ नहीं आ रहा. क्या बला की खूबसूरत लग रही थी मेरी दीदी !दीदी गुलाबी रंग की साड़ी में थी, पेट के काफ़ी नीचे बाँधी हुई थी साड़ी ! ओह ! हल्का भूरा…एकदम पतला सा पेट, मुलायम, उस पर दीदी का कसा हुआ ब्लाऊज, बहुत सेक्सी लग रहा था.

नीचे बड़ी आग लगी है, जल्दी से कुछ करो मेरा…यह कह कर मामी गद्दे पर लेट गईं और अपनी दोनों टांगें मोड़ कर ऐसे खोल लीं, जैसे उनकी चूत मेरे लौड़े को बुला रही हो।मैं झट से उनकी टांगों के बीच में लेट कर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। चूत थोड़ी टाइट थी पर मैंने पूरा लण्ड पेल दिया।उसके बाद दस मिनट तक मैं उनको झटके देता रहा, वो एकदम से मेरे से लिपट गईं और झड़ गईं।मैंने कहा- मामी जी आपकी आग तो बड़ी जल्दी बुझ गई. क्या तुमने कभी किसी के साथ सेक्स किया है?मुझे समझ में आ गया कि इसे बहुत हो गई है और अब इसे चुदवाने की भूख लगी है।मैंने कहा- नहीं. ओह सॉरी… मेरा बैलेंस बिगड़ गया था… बस बस, मैं ठीक हूँ।चारों ही उसको देखने के बहाने जगह जगह से छूने की कोशिश कर रहे थे, मैं सही से देख भी नहीं पा रहा था कि वो उसको कहाँ-कहाँ छू रहे हैं।ओह, ये साले तो इतना गर्म हो रहे हैं कि अभी यहीं सलोनी का … ?कहानी जारी रहेगी।.

चलो।पिक्चर हाल वहाँ से बहुत दूर था।हमें शाम का शो देखना था, इसलिए हम तीनों पिक्चर देखने के लिए 2 बजे ही घर से निकल गए। मैंने एक ऑटो लिया। हम ऑटो में बैठे तो नीरू और प्रभा बहुत मुस्कुरा रही थीं।मैंने पूछा- क्या बात है.

वो कमरा शायद वहाँ का बैडरुम था, मैंने मुड़ कर उसकी तरफ़ देखा तो वो दरवाजा बंद कर चुकी थी और मेरी तरफ़ देखकर बोली- आज का जन्मदिन मैं तुम्हारे साथ अकेले मनाना चाहती थी. उसने मुझे अपने बाहुपाश में जकड़ कर जब मेरे चेहरे को चूम चूम कर गीला कर दिया तो मैं भी गर्म होने लगा, मेरे से रहा नहीं गया और मैं अपने दोनों हाथों से उसके उरोजों को दबाने लगा.

सब ठीक है, मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है, मैं आपसे बाद में बात करती हूँ!मुझसे बात नहीं हो पा रही थी, इसलिए ऐसा कह दिया।अताउल्ला- ठीक है. चोद कुत्ता कमीना है…तू बड़ा तंग करता है अपनी शिखा रानी को…‘हाँ, यह तो कुछ बात हुई ना शिखा मेरी रानी… मैं तंग करता हूँ हराम की ज़नी चुदक्कड़ रांड को… बहन की लौडी. और शायद बहुत दर्द भी होता है।बस मुझे जैसे बुर की लोकसभा का टिकट मिल गया। मैंने भी अपने उम्मीदवार लंड के चुनाव प्रचार में अपनी मेहनत लगा दी। उसे कान पर.

मूल लेखक : आलोकयह कहानी अन्तर्वासना पर पांच साल पूर्व प्रकाशित हुई थी, मामूली संशोधनों के बाद इसे पुनः प्रकाशित किया गया है।पूर्व प्रकाशित मूल कहानीसहेली की खातिरमैं रेखा हूँ, 30 साल की बहुत ही खूबसूरत महिला, मेरे पति अंशु बिज़नेसमैन हैं। मैं आपको उस घटना के बारे में बताना चाहती हूँ जो आज से कोई दस साल पहले घटी थी, इस घटना ने मेरी जिंदगी ही बदल दी. रुक राण्ड मैं आता हूँ…!सचिन ने अपने लौड़े पर थूक लगाया और आरोही की गाण्ड में पीछे से धक्का मार दिया। बेचारी दर्द से तिलमिला गई। कहाँ राहुल के 6″ लौड़े से गाण्ड मरवाई थी, अब ये लौड़ा तो दर्द ही करेगा न. तूने उसको देखा जो मेरे साथ थी?पर उसने पहले ऋज़ू को देखा और उसके चूतड़ों पर हाथ मारते हुए बोला- और सुना छम्मकछल्लो.

सेक्सी बीएफ व्हिडिओ सेक्सी व्हिडिओ मैंने रिया से अलग होकर तुरंत उसे खड़ा किया और उसकी सलवार का नाड़ा खींच कर खोल दिया, उसकी खुली सलवार नीचे सरक कर फर्श गिर गई और अब वह मेरे सामने सिर्फ आधी गिठ कपड़े से बनी पेंटी में खड़ी थी. उसने मुझे अपने साथ खींच लिया और स्लो डाँस करना शुरू कर दिया। अब उसके हाथ मेरी कमर पर थे, क्यूंकी इससे पहले उसके हाथ में बर्फ वाला विस्की का ग्लास था तो उसके हाथ से मेरी स्किन गीली और ठंडी हो गई.

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!’इधर कृपा मुझे चोद रहा था और मुझे भी अब मजा आने लगा था, पर मेरी उत्तेजना अभी आधे रास्ते पर ही थी कि कृपा झटके देते हुए मेरे ऊपर गिर गया।उसने अपना लावा मेरी योनि में उगल दिया और शांत हो गया।मैं अब भी प्यासी थी, पर हेमा और सुरेश अब भी चुदाई किए जा रहे थे और हेमा विनती पे विनती किए जा रही थी।सो मैंने सुरेश से कहा- छोड़ दो सुरेश वो मना कर रही है तो. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।दस मिनट की चुसाई के बाद अजय के बर्दाश्त के बाहर हो गया। उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और खुद मेरे चूचे दबाने लगा. पता नहीं शोएब ने क्या ऐसा किया था, पर उस दिन तो पूरा हॉस्टल खाली था।अपनी आइटम को अपने रूम में लेकर आ गया, अब वो साली मेरे से बातें चोदने लगी!संस्कृति- वैसे बाबू, तुम्हारी उमर क्या है?मैं- मैं 19 साल का हूँ…!संस्कृति- झूठ मत बोलो जान…!मैं- सच जानू…!संस्कृति- तुम तो मेरे से एक साल छोटे हो.

इस हालत में तो यह चिकनी चिड़िया की गाण्ड तो दे ही देगी, ये सोच राजू ने रीट की गाण्ड को ऊपर उठा कर चूतड़ों को दाँतों से कौंचने लगा. ईईईईईईईईईईईईइ…………शायद वो झड़ गई थी। कुछ देर वो दोनों शांत रहे फिर जगन ने अपना लण्ड बाहर निकल लिया। चूत रस से भीगा लण्ड ट्यूब लाइट की दूधिया रोशनी में ऐसा लग रहा था जैसे कोई काला नाग फन उठाये नाच रहा हो। उसका लण्ड तो अभी भी झटके खा रहा था। मुझे तो लगा यह अपना लण्ड जरुर मंगला की गांड में डालने के चक्कर में होगा। पर मेरा अंदाज़ा गलत निकला।मंगला…. भाई बहन की चूतकॉम पर पढ़ रहे हैं।मैं- तो अब क्या इरादा है?सुनीता- हे सुरभि, क्या बात करती है, मुझे शर्म आती है।सुनील सुनीता के हाथ पर हाथ हुए बोला- सच सुनीता जी, मैंने आपसे ज्यादा खूबसूरत औरत नहीं देखी।कहानी जारी रहेगी।आपके मेल के इन्तजार में[emailprotected].

!भाभी मेरे बगल में आकर बैठ गईं और मेरे गालों को चूम लिया। मुझे करंट सा लग गया।मैं भाभी की तरफ देख कर मुस्कुराया और फिर उनके होंठ चूम लिए।भाभी- रूको मैं अभी आती हूँ।मैंने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा- जल्द आना.

कोई क्या कहेगा।मैं- अरे मालिश में तो ऐसा करना ही पड़ता है और यहाँ कोई देखने वाला भी नहीं है।थोड़ा सोचने के बाद मौसी ने बोला- ठीक है, तुम 2 मिनट बाहर जाओ।दो मिनट बाद मौसी की आवाज आई- आजा अन्दर।मैंने जैसे ही अन्दर का नजारा देखा, मेरे तो होश उड़ गए।मौसी की चुदाई की कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार मेल करें।[emailprotected]. फिर तो रीटा की बदन कमान की तरह अकड़ गया, आँखें ऊपर की ओर लुढ़क गई और कई छपाकों के साथ रीटा की नई नवेली चूत भरभरा कर झटकों के साथ हुच्च हुच्च कर पानी छोड़ने लगी.

दरवाजा खुला तो नौकरानी थी !मैंने कहा- तुम्हारी मैडम ने मुझे बुलाया है।उसकी नौकरानी को देखकर मेरे होश उड़ गए, मैंने सोचा कि नौकरानी इतनी सेक्सी है तो उसकी मालकिन कैसी होगी? उसका फिगर था 34″ 30″ 36″ क्या लग रही थी।उसने कहा- हाँ अन्दर आ जाओ. आप सभी के लिए आज मैं कुछ रोचक जानकारी लेकर आया हूँ, पढ़ें और जानें कि सुहागरात में क्या और कैसे करना चाहिए. तूने मेरी गाण्ड में ये मोटा लौड़ा घुसाया था, तब नहीं सोचा कि मुझे कितना दर्द हुआ होगा…विजय- तुम दोनों लड़ना बन्द करो.

प्रेषक : नामालूमसम्पादक : जूजा जी‘भाभी ऐसी क्या चीज़ है जो सिर्फ़ बीवी दे सकती है और आप नहीं दे सकती?’ मैंने बहुत अंजान बनते हुए पूछा।अब तो मेरा लंड फनफनाने लगा था।‘मैं सब समझती हूँ… चालाक कहीं का.

मैंने उसके होंठों के साथ साथ उसके माथे, आँखों, नाक, गालों, ठोड़ी और गर्दन को भी चूमा जिससे वह बहुत गर्म हो गई. मुझे नहीं पता कि वो क्या चाहती है पर जो भी हो वो मुझे और ज्यादा बेइज्जत करना चाहती थी, मैंने ऐसा सोचा. !फिर मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध दबाने लगा। वो सिसकारियाँ भरने लगी और ‘आआआहह आआहह’ करने लगी।धीरे-धीरे मैंने उस के पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी जाँघों पर ले गया और सहलाने लगा। उसने मेरा हाथ अपनी जाँघों में दबा लिया और अकड़ गई।अब मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी और दूध को पीने लगा और एक हाथ से उसका दूसरा निप्पल दबाने लगा।वो तड़प उठी और बोली- उह्ह भैया रहने दो ना.

સેક્સી બીએફलेकिन उसके आ जाने से मेरे विभाग के बाकी कर्मचारी उसके चक्कर में बहकने लगे और लडको में आपस में लड़ाइयाँ होने लगी, जो मुझे पसंद नहीं आया।मैंने उससे एक दिन यूँ ही बातों बातों में कहा- देखो अर्चना, तुम काफी सुन्दर भी हो मगर तुम्हारे होने से मेरे ऑफिस का माहौल बिगड़ रहा है जो मुझे पसंद नही है, मुझे अच्छा तो नहीं लगेगा मगर तुम्हें यहाँ नौकरी नहीं करनी चाहिए. पहली बार में ऐसा होता है।मेरा लंड अब भी पूरा बाहर ही था। मैंने एक और धक्का मारा तो मेरा लण्ड पूरा अन्दर घुस गया था।अंजलि जोर से ‘ऊऊह्ह्ह…’ बोल कर मुझसे लिपट गई।मैंने भी उसे अपने बाँहों में ले लिया वो बिल्कुल भी कुछ कहने की हालत में नहीं थी।मैंने उससे कहा- अंजलि क्या हुआ.

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फिर बहादुर ने पारो की चुच्चों की टोटनी को चुटकी में लेकर अपने लण्ड से प्यासी पारो की पिनपिनाती चूत के पसीने छूटा दिये. अंदर डालूँन या बाहर…?भाभी- एक बार तो अंदर डाल दिया है, अब बाहर क्यूँ? डाल अंदर!1-2-3-4-5-5-6-7! कितनी पिचकारी मारी, मैं भूल गया और उनके ऊपर लेट गया. अवधेश रिंकूहैलो दोस्तो, मैं इस कहानी से आपको बताना चाहता हूँ कि जब प्यार किसी से होता है तो वो शक्ल-सूरत से नहीं होता है।यह उस समय की बात है जब मैं बी.

रोनू- आप कितने अच्छे हो…!रेहान उसके होंठों को पागलों के जैसे चूसने लगता है। उसके मम्मों को दबाने लगता है।जूही- आ…हह. उमा चाची- हांह… मुझे अन्दर तक चोद… सन्जू… अहह… अपनी चाची को पूरी तरह से संतुष्ट कर दे… तुमहारे चाचा ने तुम्हारी चाची को कभी इतना मज़ा नहीं दिया है। ओह… हां… सन्जू…. यह मैंने इसलिए किया कि अंकल थोड़ा नार्मल हो जाएँ वरना इस समय अगर मैं जरा ज़ोर से बोल देता तो कसम से वो बेहोश हो जाते.

!” और फिर ताऊजी जोर जोर से धक्के लगाने लगे। उनकी साँसें फूलने लगी थी। वो जोर जोर से धक्के लगाने लगे थे जैसे कोई बिगड़ैल सांड हों। मुझे लगा कि अब इस प्यासी धरती को बारिश की पहली फुहार मिलने ही वाली है। मैंने भी अपनी बाहें उनकी कमर से कस लीं।मुझे लगा मेरा शरीर भी कुछ अकड़ने लगा है और लगा जैसे मेरा सु-सु निकल जाएगा। सारा शरीर और मेरा रोम-रोम जैसे रोमांच में डूबने लगा था। ओह्ह…. ओह…’करके कसमसा कर चचाजी झड़ गये। उनके घी जैसे वीर्य से मेरा मुँह भर गया। मैं चख चख कर खाने लगा और साथ ही उनका सुपारा जीभ से रगड़ता रहा।‘बस बेटे… बस. एक दिन और बस में थे हम अभी खड़े थे, उसकी गांड मुझे दिखाई दे रही थी, मैंने पहले की तरह ही उसके गांड पर हाथ लगा दिया, उसने घूर के मुझे देखा और मुस्कुरा दी.

मैंने पूजा को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की पर नाकाम रहा, उसने मेरे मुँह को अपनी टांगों के बीच कस कर जकड़ा हुआ था और लगातार अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़े जा रही थी. मैं मतलब की बात हो भूल ही गई … हाँ … वो किसी चिकने लौंडे का फ़ोन नंबर और आई डी भी जरुर देना … अब मुझ से देरी सहन नहीं हो रही है। मुझे इन नौसिखिए और चिकने लौंडों का रस निचोड़ना बहुत अच्छा लगता है।”ठीक है मेरी मैना बाय….

अब मैंने दीदी को बाँहों में उठा लिया और बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट कर उसकी एक चूची को हाथ से मसलने लगा और दूसरी चूची पीने लगा.

कुछ भी तो नहीं…!तभी मैं और सोनू रसोई में गए।मैंने सोनू से मज़ाक में कहा- तुम्हारी ब्रा-पैन्टी से वो मज़े ले रहा था और तुम्हारे निप्पलों को भी देखे जा रहा था।वो शर्मा गई और मुस्कुरा दी, उसकी हँसी में एक सेक्सी अंदाज़ था, जिसे देख कर मेरे दिमाग़ में एक ख्याल आया ‘क्यों ना आज इसकी दूसरे लंड की चाहत को पूरा किया जाए. एक्स एक्स हॉट सेक्सीआह’ करने लगी। अभी तक अन्तर्वासना पर पढ़ कर जितना ज्ञान अर्जित किया था, वो सारा मैं उस पर प्रयोग करना चाहता था।आप यह कहानी अन्तर्वासना. वीडियो सेक्सी भेजिएअब इशानी थोड़ी शांत हो गई थी।कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]कहानी का अगला भाग :एक दूसरे में समाये-3. मेरा फिगर 36-24-36 है और मेरी चूचियाँ मस्त गोल, सुडौल और सख्त हैं, गोरे रंग की चूचियों पर गहरे भूरे रंग की डोडियाँ बहुत सुंदर लगती हैं.

मैं नहा कर आ रही हूँ।मैं खुश हो गया और बैठ गया।वो नहा कर एक तौलिए से लिपट कर मेरे करीब से मुस्कुराते हुए गुज़री।उसने कहा- आती हूँ.

थोड़ी देर में ही उसकी चूत भी खुल गई, वो भी अपनी दीदी की तरह जोश में आ गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी गर्दन को लपेट लिया और मेरे होठों को चूमने लगी. दीदी- आहह ! बहुत बदमाश हो गये आप भाई साहब… थोड़ा तो इंतज़ार करो ! चेंज तो करने दो…मकान मालिक- आज तो ये कपड़े फट कर ही अलग होंगे जानेमन…दीदी- अरे पागल हो गये हो क्या तुम. मैंने उससे पूछा तो उसने कहा- जिंदगी के इन खूबसूरत पलों को अपनी डायरी में छुपाने की कोशिश कर रही हूँ ताकि जब तुम चले जाओ तो मैं इन्हें पढ़-पढ़ कर अपना सारा वक्त इन बीते दिनों में ही बिता सकूँ क्योंकि अब तुम्हारे बिना एक पल भी जीना मुश्किल है अर्पित… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.

के दूसरे वर्ष में था। मेरे पड़ोस मे एक लड़की रहती थी और वो 12वीं में थी। उम्र 19 के आस-पास थी, पर लगती कॉलेज की लड़कियों जैसी मस्त गोल-मटोल, अपनी माँ की तरह उस के बड़े-बड़े मम्मे, मस्त गोल-गोल कूल्हे, ऊँचाई साढ़े 5 फुट की रही होगी, पर देखते ही लण्ड खड़ा हो जाए. !अंत मैं मैंने अब मूठ ना मारने का निर्णय किया और अपने घड़ी में समय देखा। अब डेढ़ घंटे बीत चुके थे, शायद उसे आना ना था, कामदेव को कुछ और ही मंज़ूर था। उसके ना आने से मन थोड़ा उदास था, मगर खुशी भी थी, इसलिए कि ऐसे रोमान्टिक तरीके से मूठ मैंने पहली बार मारा था। मैं सीधे उसके घर गया और उसको छोड़कर सबसे बातें की।मेरी नाराज़गी उसे पता चल गई, घर से आते वक़्त उसने पूछा- नाराज़ हो?मैं- हाँ. तुम गुस्सा मत हो!कृपा अब उसे धक्के देने लगा। कुछ देर बाद मैंने गौर किया कि हेमा भी हिल रही है। उसने भी नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए थे।दोनों की साँसें तेज़ होने लगी थीं और फिर कुछ देर बाद कृपा फिर से हाँफते हुए गिर गया, तो हेमा ने फिर पूछा- हो गया?कृपा ने कहा- हाँ.

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अब तो बक।रश्मि मुस्कुराई फिर धीरे से बोली- आज मैं सुबह नहा रही थी, उस समय रवि की याद कर रही थी।नेहा- ये बात. ?उनके मम्मे मेरे जिस्म को छू रहे थे, जिससे मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ने लगा, साथ ही मेरा लौड़ा भी अंगड़ाइयाँ लेता हुआ उसकी चूत को छूने लगा।मैंने उसके कान में कहा- आप बहुत सेक्सी माल हैं।वो मुस्कुराते हुऐ बोली- चल हट शैतान कहीं का. आह्ह… धीरे… अह्हाआ !!” इतने समय बाद उसके मुँह से ये दो शब्द निकल पाए थे।मैंने उसका रिरियाना नज़रंदाज़ कर दिया, चोद लेने दो वरुण.

थोड़ी देर उसके होंठ पीने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी, उसने भी स्वागत में अपने जीभ को मेरे जीभ से लगा दिया और हम एक दूसरे को और जोश से चूमने लगे।हमें अपने चूमने के आवेश का पता तब चला जब हमने अपने मुँह में रक्त का सा स्वाद महसूस किया.

वो अपनी गांड उठाकर चुदवाने लगी, तो मैं समझ गया कि ये झड़ने वाली है और मैं जोर-जोर से चोदने लगा लेकिन मैंने अपने लंड पर थोड़ा नियंत्रण किया.

लो भाभी से बात करो।उन दोनों ने कुछ बात की फ़िर भाभी ने कहा- तुम थोड़ा बैठो, मैं ऊपर स्टोर में से कुछ समान और बिस्तर निकाल रही हूँ। अभी और भी थोड़ा काम है, फ़िर चाय बनाती हूँ. मेरे पूरे बदन में सिरहन सी दौड़ गई। हम नाचते रहे और हमारे बदन पास आते गये, मैं उसकी साँसें अपने गले और कंधे पर महसूस कर रही थी।मेरा बदन गरम होने लगा और मैं सोच नहीं पा रही थी कि मैं क्या करूँ…मैंने देखा कि महक और राज सोफे पर बैठे थे और आपस में बातें कर रहे थे. ववव क्सक्सक्स वीडियो कॉममैं यह देखकर बहुत खुश हुआ कि भाभी मुझसे भी ज्यादा उतावली थी मेरे होठों को चूसने के लिए, वो मेरे होठों को जोर-जोर से अपने होठों में पकड़ कर चूस रही थी और अपने दांतों से भी काट रही थी.

भाभी अपनी चूत की चुदाई पहले ही उंगली से कर चुकी थीं, इसलिए उनकी चूत से काम रस बह रहा था जिसे मैं बड़े मज़े से चाटे जा रहा था. इस दर्द में भी मजा है।मैंने भी पूरे जोश में आकर उसकी चुदाई चालू कर दी।तभी उसने कहा- जानू बहुत मजा आ रहा है और जोर-जोर से चोदो. आधी पैंटी उठाई और मुझे झुकने को कहा…तीन चार फोटो उठाई गई…मोहित- ब्रेक… इनको टावल दो… दो कॉफ़ी मंगवाओ…मैं चुपचाप टावल लपेट कर बैठ गई मोहित सर मेरे पास आये.

लण्ड! मेरी गाण्ड फ़ट रही है!’मैं जल्दी उसके ऊपर आ गया और उसे अपनी बाहों में कस लिया। वो कसमसाने लगी थी और मेरी पकड़ से छूट जाना चाहती थी। मैं जानता था थोड़ी देर उसे दर्द जरुर होगा पर बाद में सब ठीक हो जाएगा। मैंने उसकी पीठ और गले को चूमते हुए उसे समझाया।‘बस… बस… मेरी जान… जो होना था हो गया!’‘जीजू, बहुत दर्द हो रहा है. यह कहानी तब की है जब मेरी दिवाली की छुट्टियाँ चल रही थी तो मैं अपने चाचा के वहाँ चला गया जो मुंबई में रहते हैं.

!मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सूट भी उतार दिया। अब वो मेरे सामने ब्रा और पैन्टी में थी।आह दोस्तो.

सिर्फ़ एक बार…फिर मैम ने अपना पल्लू हटाया और आँखें बंद कर लीं।मैम- जल्दी करियो…मैंने अपना हाथ मैम के मम्मों की तरफ बढ़ाया और उनके मम्मों को दबाने लगा।वो बहुत ही मुलायम थे और इतने बड़े थे कि मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे।मेरा मन बहुत उत्तेजित होने लगा और लंड फिर कड़ा होने लगा।मैम भी अब सिसकियाँ ले रही थीं- आहह. फ़च…’ की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज़ रहा था।भाभी की चूत में से इतना रस निकला कि मेरे अमरूद तक गीले हो गए।मैंने भाभी के होंठ चूमते हुए कहा- भाभी मज़ा आ रहा है ना ? नहीं आ रहा तो निकाल लूँ।‘चुप बदमाश. सामने देखो मैं यहाँ हूँ।वो दुकान से निकल गई और फोन पर बोली- आप मुझे सामने वाली गली में मिलो!मैं गली में जाकर स्वीटी से मिला।वो बोली- अब बताओ कि आप मुझे कैसे जानते हैं और क्या चाहते हो?मैं- सड़क पर ही बता दूँ.

चूत लंड का वीडियो ’ की आवाजें निकल रही थीं।काफी देर तक चली इस चुदाई में मैं झड़ने वाला था जबकि वो दो बार झड़ चुकी थी।मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुँह में पेल दिया और झड़ गया। वो भी मेरे साथ साथ तीसरी बार झड़ गई।उस रात मैंने उसकी तीन बार चुदाई की और सुबह अपने पैसे लेकर चला गया।आपको मेरी यह सच्ची घटना कैसे लगी, ज़रूर बताना।अभी और भी कहानियाँ हैं जो आगे लिखता रहूँगा।आप अपने ईमेल यहाँ भेजें।[emailprotected]. फिर उनका लौड़ा जवाब देने ही वाला था कि उन्होंने उसे बाहर निकाल लिया और मेरे पेट के ऊपर अपना माल निकाल दिया.

मेरा भेजा सटक जाता था और हाथ लौड़े पर चला जाता था।उनका हमारे घर आना-जाना था, तो मुझे बहुत मज़ा आता था। जब मैं घर पर होता और भाभी आतीं, मैं उनको देख कर मुस्कुरा देता था, वो भी मुस्कुरा देती।मैं उनकी ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को आतुर चूचियों को देखता था, वो भी इस बात जानती थीं।उनके पति कई-कई दिनों तक बाहर रहते थे, ऊपर से उनकी मदमस्त जवानी. और जब उसके ये कपड़े उसके बदन से उतरते है तो देखने वाले की आँखों के सामने तो कयामत ही आ जाती है और उसके लंड के सामने उसकी सारी इन्द्रियाँ काम करना बन्द कर देती हैं, और वो सारी दुनिया भुला कर उसी को चोदने के लिये तड़प जाता है फ़िर चाहे वो अच्छा हो या बुरा!मेरी हालत भी शायद अब कुछ ऐसी ही थी कि अगर अब हमारे बीच कोई आ जाये तो वो हम दोनों का सबसे बड़ा दुश्मन होगा इस दुनिया का. आप बहुत मस्त हो भाभी।उन्होंने मुझसे चुदाने में हामी भरी।फिर मैंने भाभी को कई बार चोदा।मुझे उनकी गाण्ड भी बहुत पसन्द है, मैंने कई बार भाभी की गाण्ड मारने की कोशिश की, पर भाभी नहीं चाहती हैं.

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फ़िर मैंने धक्के लगाने शुरू किए और वो बोलने लगी- आह्ह अम्म्म उह्ह्ह और जोर से चोद राजाआआ… फ़ाड़ दे आज मेरी चूत. इससे मेरी हालत बहुत खराब होने लगी, मैंने कहा- पापाजी, अब और मत चिढ़ाओ और इसे जो सजा देनी है वह जल्दी से दे दीजिए. अब मैं भी सोने लगा था, तभी धीरे से मैंने गेट खुलने की आवाज़ सुनी, मैं कुछ देर तो ऐसे ही बिस्तर पर पड़ा रहा.

कुछ देर तक चूचियों को अदल-बदल कर चूसता रहा और फिर नाभि और पेट पर चुम्बन करता हुआ नीचे पहुँच गया और पेंटी की नीचे सरका दिया. वहाँ मैंने पूजा को देखा तो मेरा चेहरा खिल उठा और हम खाना खाते-खाते एक दूसरे को दूर से ही प्यासी निगाहों से देख रहे थे और मुस्करा रहे थे.

अगर फट गई तो फिर क्या चुदवाओगी?’‘हटिए भी आप तो, आपको सचमुच ये इतनी अच्छी लगती है?’‘तुम्हारी कसम मेरी जान… इतनी फूली हुई चूत को छोड़ कर तो मैं धन्य हो गया हूँ और फिर इसकी मालकिन चुदवाती भी तो कितने प्यार से है।’‘जब चोदने वाले का लंड इतना मोटा तगड़ा हो तो चुदवाने वाली तो प्यार से चुदवाएगी ही.

करती ही रह गई। जैसे ही मैं धक्का लगाने को होता वो अपने नितम्बों को थोडा सा और ऊपर उठा देती और फिच्च की आवाज के साथ लण्ड उसकी चूत में जड़ तक समां जाता। हम दोनों को मज़ा तो आ रहा था पर मुझे लगा उसे कुछ असुविधा सी हो रही है।‘जीजू… ऐसे नहीं. फिर मैं डाक्टर के पास गया और दर्द की दवा लेकर अनिता की छोटी बहन को दे दी और उससे कहा- दवा ले जा कर अनिता को दे दो. देसी रोमियो हरमनमैं दो मिनट तक भाभी के ऊपर ही लेटा रहा और भाभी से पूछा- आपकी चूत दो बच्चों की माँ होते हुए भी इतनी टाइट क्यों है.

सब देख रहे हैं।फिर मैं राजीव को बोल कर जाने लगा तो मयंक बोला- सुशान्त, तुम दीदी को भी घर छोड़ दोगे, मुझे यहाँ कुछ काम है, मैं कल जाऊँगा।मैं बोला- कोई बात नहीं मैं छोड़ दूँगा।मैं बाहर निकल कर मन में बोला- हम तो चाहते ही यही थे।हम दोनों मयंक की कार में आकर बैठ गए।मैं उसको अपने घर ले आया और आते ही हम एक-दूसरे से लिपट गए।अब उसकी मीठी आवाज निकली- चलो, कमरे में चलते हैं।आहा. ये लो।यह बोलते ही मुझे उसकी चूत के दर्शन करा दिए।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !वाह… क्या चूत थी. मैं भी बोर हो रही हूँ!वो आई मेरे घर में, आकर मेरे पास बात गईं, बोलीं- मैं तो अकेली पड़ गई हूँ, तू भी होली के मुझसे बाद बात नहीं करता।मैंने कहा- ऐसा कुछ नहीं है!फिर बोलीं- तेरा तो समय पास हो जाता होगा।मैंने बोला- कहाँ यार.

साला लोफर!’शीतल- अरे क्यों गुस्सा करती हो। थोड़ा सा अगर छेड़ ही दिया तो इस तरह क्यों बिगड़ रही है। वो तेरा होने वाला नंदोई है। रिश्ता ही कुछ ऐसा है कि थोड़ी बहुत छेड़छाड़ तो चलती ही रहती है।‘थोड़ी छेड़छाड़ माय फुट! देखेगी क्या किया उस तेरे आवारा आशिक़ ने?’ मैंने कह कर अपनी कमीज़ ऊपर करके उसे अपनी छातियाँ दिखाई। यह कहानी आप अन्तर्वासना.

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फिर वह मेरे पास आकर मुझसे लिपट गई और मेरे होंट को चूसने लगी, फिर बोली- कोई जग गया तो मुसीबत हो जाएगी, हम फिर कभी करेंगे!और चली गई. अब इन्तजार लण्ड के सम्पूर्ण रूप से सलोनी की चूत में समाने का था…10-12 बार यही सब चलता रहा, वो सलोनी को नीचे करता और सलोनी ऊपर उठ जाती… और एक बार भक्क की आवाज आई. !मैंने कहा- नहीं सब ठीक है। बस कॉलेज से वापिस आने के बाद समय पास नहीं होता है, बोरियत होती है!तो वो बोले- ऊपर आ जाया करो.

और अब आप लोग भी इस बात से वाकिफ हो चुके हैं।दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी।यह मेरी पहली कहानी थी, यदि कोई गलती हो गई हो तो माफ कर देना।अपनी राय देने के लिए मुझे ईमेल कीजिए, आपकी प्रतिक्रिया ही मुझे आगे लिखने के लिए उत्साहित करेगी।[emailprotected].

सम्पादक – इमरानअमित इतना सीधा तो नहीं है कि एक नंगी खूबसूरत नारी को अपनी गाड़ी में लेकर आया जो हल्के नशे में भी थी. सुबह जब मैं उठा तो चाची ने मुझे चाय के लिए बुलाया तो मैं चला तो गया चाची के पास पर दोस्तो, रात के कारनामे से मैं चाची के साथ आँख नहीं मिला पा रहा था. ? मुझे पता है यह करने से ही औरतों के बच्चा होता है।‘तू हमे चूतिया समझती है ! सरकार से मिलने वाले पैसे के लालच में हम बहुत पहले अपने लण्ड का कनेक्स्सन कटवाये लिय थे.