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उन्होंने अपनी अम्मी को बोल दिया तो उनकी अम्मी ने मेरी अम्मी को कहा।मेरी अम्मी ने कहा- अब तो बहुत देर हो चुकी है. मारवाड़ी सेक्सी राजस्थान कीयह विकास सर की पत्नी है, दिखने में बड़ी खूबसूरत है, इसका फिगर 34″ 32″36″ है।इनकी शादी को 3 साल हो गए हैं।दोनों बेहद खुश रहते हैं।अरे यार आप अनुजा को भूल गए.

जिम में हर रोज मैं अपने जिस्म को संवार कर रखती हूँ।मैं अन्तर्वासना साईट पिछले दो साल से लगातार पढ़ रही हूँ।मैंने अपना पहला साथी इसी साईट से ढूँढा था।ये बात यूँ शुरू हुई कि मेरी बॉय-फ्रेंड बनाने में कोई रूचि नहीं थी।मेरी क्लास की लड़कियों के कुछ के बॉय-फ्रेंड थे और सब ही अपने बॉय-फ्रेंड्स के साथ चुदाई कर चुकी थीं।मैं दिल्ली में रहती हूँ और आप सब जानते हैं कि यहाँ सब कुछ खुल्ला है. सेक्सी फिल्म सलमान कीShadi Kisi ki Aur Chudai Kisi ki-3अब तक आपने पढ़ा कि मैंने नेहा को कॉल करके दरवाजा खोलने को बोला।मैं कमरे के अन्दर गया और दरवाजा बंद कर लिया।नेहा स्कर्ट और टॉप पहने थी।मैं सोफे पर बैठ गया और नेहा को अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी गोद में बिठा लिया।वो दोनों पैर मेरे पैरों की दोनों तरफ करके बैठ गई।मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा और उसके होठों को चूसने लगा।उसकी चूत मेरे खड़े लंड से सट रही थी.

इसस्सस्स और कितना बाकी है राजू? फट जाएगी मेरी गाण्ड…!’‘बस मेरी जान थोड़ा सा और।’ ये कहते हुए मैंने एक ज़ोर का धक्का लगा दिया। अब तो करीब-करीब 7 इंच लंड भाभी की गाण्ड में समा गया।‘आआअ.www.com सेक्सी वीडियो बीएफ: ह्हाआआऐईईई’ मुझे और ताकत दे रही थी।मैं अपनी रफ़्तार से कहीं ज्यादा रफ़्तार रख कर उसे चुदाई की शांति दे रहा था और वो और कामुक होती जा रही थी।उसकी चुदाई की आग का वहशीपन बढ़ता ही जा रहा था।मैंने भी अपनी पूरी ताकत लगा कर उसकी वासना को ठंडा किया। कुछ देर उपरान्त झड़ने के बाद हम दोनों नंगे पड़े रहे।उसने कहा- तुमने आज बहुत समय लिया और मुझे दूसरे घर काम करने जाना था.

अभी जा यहाँ से…दीपाली जाते-जाते लौड़े को सहला कर चली गई।विकास डर सा गया अगर कोई आ जाता तो क्या होता…दीपाली के जाने के बाद विकास फाइल में कुछ देखने लगा… उधर दीपाली क्लास में गई तब प्रिया खड़ी हुई और विकास की कही बात उसको बताई वो बोर्ड पर सवाल लिखने लगी।काफ़ी देर तक जब विकास नहीं आया तो क्लास में शोर होने लगा.सुधीर ने चूत को इतनी बुरी तरह से चूसना शुरू कर दिया कि दीपाली लौड़ा चूसना भूल गई और सिसकने लगी।दीपाली- आआह्ह.

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सेक्स तो कर नहीं सकते थे पर मैं उसके लंड के लिए बेचैन थी तो मैंने आनन्द का लंड मुँह में लेकर चूसना चालू किया.वो अब भी रो रही थी।जब भाभी ने मुझे भी रोता देखा तो हँसने लगीं और फिर हमें समझाया कि चुदाई क्या होती है इसमें क्या-क्या होता है.

इसलिए वो भी मन ही मन खुश हुई थी।समर का लौड़ा किसी खूँटे की तरह पूनम की मशीन में फँस गया था और उसे बिना रूके चोदते ही जा रहा था।बीच में पूनम को दर्द हुआ तो उसने जरा रूकने को कहा।समर रूक गया।पूनम ने सांस ली और थोड़ा आराम किया।जब इशारा हुआ तो फिर समर ने चुदाई शुरू की।दो साल तक समर के लौड़े में जंग लग गई थी।आज पूनम की चूत चोदने से जब वो झड़ने को हुआ तो उसके माल की बाढ़ सी आ गई।उसके रस की फुहार ‘फच्च. www.com सेक्सी वीडियो बीएफ तब तक मज़े लो और मज़े दो।बहुत सारे लड़के और लड़कियाँ ये कहानियाँ पढ़ कर बहुत मायूस हो जाते हैं कि उनकी जिन्दगी में कोई नहीं है।मेरी उनसे गुज़ारिश है कि वो कोई गलत कदम ना उठाएँ.

सो मैंने भी मन बना लिया और दर्द सहती रही।अमर का हर धक्का मुझे कराहने पर मजबूर कर देता और अमर भी थक कर हाँफ रहा था।ऐसा लग रहा था जैसे अमर में अब और धक्के लगाने को दम नहीं बचा, पर अमर हार मानने को तैयार नहीं था।उसका लिंग जब अन्दर जाता, मुझे ऐसा लगता जैसे मेरी योनि की दीवारें छिल जायेंगी।करीब 10 मिनट जैसे-तैसे जोर लगाने के बाद मुझे अहसास हुआ कि अमर अब झड़ने को है.

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मैं देखती हूँ कि कौन आया है।उन्होंने जल्दी से अपना ब्लाउज पहना और बाहर जाकर देखा तो दरवाजे पर मेरी माँ थीं, जोकि घर की चाभी लेने के लिए आई थीं।आंटी ने उनको अन्दर से चाभी लाकर दे दी।मेरी माँ ने उनसे पूछा- क्या विवेक आया था?तो उन्होंने झूठ बोल दिया- नहीं. तो रात रंगीन हो जाए…’मैं बड़े गौर से उनके कमेंट्स सुनती थी और मन ही मन खुश होती थी कि यह सब मेरे पीछे कितने दीवाने हैं।एक बार मेरे अम्मी और अब्बू किसी शादी में बाहर गए तो दुर्गेश के मम्मी-पापा से मेरा ख्याल रखने को कह गए थे. सुनील आ रहे हैं तुम जाओ घूम आओ।मैंने मना कर दिया- मैं आपको इस हालत में छोड़ कर नहीं जा सकती।पर पति के जिद के आगे जाना पड़ा।कुछ देर में सुनील आए और आकाश से बोले- मैं बाइक छोड़ देता हूँ, हो सकता है कि तुमको कोई जरुरत पड़े.

क्योंकि मुझे पता था कि मेघा के व्बॉय-फ्रेण्ड ने उसकी एक महीने पहले चुदाई की थी और तब से मेघा अपनी चूत में ऊँगली कर-कर के ही पानी छुटा रही है और उस दिन भी उसकी वो बात मुझे याद थी कि कब ‘दे’ रहे हो।अब जरूरत है तो बस अपने लौड़े के नीचे लाने के लिए उसको तैयार करने की।दिन बीतते-बीतते शनिवार भी आ गया और मैंने मेघा को सुबह 8 बजे अपने कमरे में आमंत्रित किया।मेघा ने मेरे कमरे में आते है कहा- ओये. हे भगवान! मैंने अपने स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपनी चड्डी को उतारा तो पाया कि मेरी चड्डी मेरे योनिरस से गीली हो चुकी थी. लंड में तनाव आने लगता है।दीपाली- अच्छा तो कुछ गंदा सोचने या देखने से ही ये अकड़ता है क्या?विकास- नहीं.

‘आअप भी बहुत सुन्दर और तगड़े हैं।’ वो बोली।उसकी नजर मेरे तने हुए अंडरवियर पर थी।मेरा लंड जैसे की अंडरवियर फाड़ देने को बेताब था, उसने अंडरवियर को एकदम 120 डिग्री का तनाव दिया हुआ था।बगल से देखने पर मेरे अंडकोष. तेरे बदले वो इतने दिन हमारे साथ मज़ा कर रहा था और हर तरह से मन बहलाता रहा है।फिर रूपा मुझसे मुखातिब हुई- प्यारे जमाई जी. कुछ देर बाद मुझे ध्यान आया कि इस खुली जगह तो हमें कोई भी देख सकता है।साक्षी को चुम्बन करते हुए मैं उसे पीछे धकेलते हुए दीवार की ओट में ले गया।मैं और साक्षी जोर-जोर एक-दूसरे के होंठों को चूस रहे थे।मैंने अपना हाथ साक्षी की बड़ी-बड़ी चूचियों पर रखा और जोर-जोर से दबाने लगा।हमारी आँखें बन्द थीं और साक्षी के हाथ मेरी जैकेट के अन्दर घूम रहे थे।मेरा लण्ड पहले से खड़ा था.

फ़िर हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया रगड़ रगड़ कर !मेरा फ़िर खड़ा होने लगा था लेकिन भाभी जल्दी से तौलिया लपेट कर बाहर निकल गई।. पर बड़े प्यार से चुम्मा दे रही थी।वो काफ़ी गरमा चुकी थी और मेरे लंड को मुठिया रही थी।रूपा हमारे पास बैठ कर प्रेमालाप देखने लगी।मैंने अब देर नहीं की और उठ कर उसकी गाण्ड के नीचे तकिया रख दिया।अब वो थोड़ा घबरा गई और बोली- ये क्या कर रहे हो?अपने विचारों से अवगत कराने के लिए लिखें, साथ ही मेरे फेसबुक पेज से भी जुड़ें।सुहागरात की चुदाई कथा जारी है।https://www.

मैं भी सामान्य रहने की कोशिश करते हुए शीशे में देख कर अपने बाल ठीक करते हुए बाकी की महिलाओं को, लड़कियों को देखने लगी.

उसने मुझे मेरे टेबल पर चित्त लिटाया और मेरी दोनों टाँगें हवा में उठा दीं और अपनी जीभ से मेरी चूत और गाण्ड को चाटने लगा।मैं अपने मम्मों को दबा रही थी और सीत्कार निकाल रही थी।उसने अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और मैंने अपने हाथों से अपनी गाण्ड को चौड़ा किया।जैसे ही लंड का सुपारा मेरी गाण्ड पर लगा.

चलो दोबारा कहानी पर आती हूँ।करीब आधा घंटा बाद वो उठकर रसोई में गया।दीपाली रोटियां बेल रही थी और अनुजा सब्जी बना रही थी।विकास वहीं दरवाजे पर खड़ा होकर वो नज़ारा देख रहा था।दीपाली जब बेलन से रोटी बेल रही थी उसकी गाण्ड आगे-पीछे हो रही थी. पर तभी अचानक से आनन्द ने एक ज़ोर का झटका मारा और उसका आधा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गया।मैं ज़ोर से चिल्लाई और आनन्द को पीछे धकेलने लगी. विजय अपना आपा खो बैठा और मेरी चूत में झड़ गया। उसके साथ ही मेरा भी फव्वारा निकल गया। हम दोनों एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे।रानी- क्यों भाई.

थोड़ी देर बाद मेरा मन फिर से उसको चोदने का हुआ तो मैंने उसको कहा- क्या हम फिर से एक बार सेक्स कर सकते हैं?तो उसने मुझे मना नहीं किया. तब तो ऐसा नहीं हुआ था?तो वो बोली- इस समय पैन्टी नहीं पहनी है और उस समय पैन्टी पहन रखी थी।मैंने बोला- हम्म्म. लौड़ा चूत की दीवारों को चौड़ा करता हुआ अन्दर घुस गया।अभी एक इन्च ही घुसा था कि दीपाली ‘गूं-गूं’ करने लगी… वो जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी। अभी तो उसकी सील भी नहीं टूटी थी.

उसके भूरे काले रंग के फलकों पर दाना मस्त छटा बिखेर रहा था। फूली हुई मस्त बुर निकल आई थी।देखने से ही लग रहा था कि काफी दिनों से चुदाई नहीं की गई है।अब मैंने उसको पीठ के बल लिटा दिया और उसको कंधे से मालिश देने लगा।उसके कंधों और हाथ को मालिश देने से उसको अच्छा लगा।फिर उसके पीठ पर मालिश की.

नमस्कार दोस्तो,मैं दीपक श्रेष्ठ पुनः हाजिर हूँ आपके सामने अपनी कहानी ‘मेरे लण्ड का अनोखा शोषण’ का अंतिम भाग लेकर. मैंने सोच लिया था कि भाभी के चूतड़ों के गुलाबी छेद का मज़ा जरूर लूटूँगा।एक दिन शाम को भाभी के घर गया, भाभी रसोई में थीं।ताई जी हमारे घर थीं. पहले तेरी चूत का उद्घाटन करूँगा उसके बाद प्रिया की चूत का मुहूरत होगा।प्रिया- नहीं भाई पहले आप मेरे साथ करो.

जो एक अनोखा शोषण था।तभी रानी ने अपनी मस्त पतली डोरी वाली पैंटी को अपनी गोरी-गोरी टाँगों के बीच से सरकाते हुए बाहर निकाल फेंका. जिससे वो और कसमसा उठती।इस तरह धीरे-धीरे वो चरम पर पहुँचने लगी और अपने हाथों से अपने मम्मों को मसलते हुए बड़बड़ाने लगी- आआह शह्ह्ह्ह शाबाश. राज ने मेरी बीवी रश्मि की गाण्ड पर लंड टिका कर एक जोरदार धक्का मारा तो रश्मि चिल्ला पड़ी और बोली- ओए.

आज उसे जी भर कर चोद लेना… इस वजह से तो मैंने अभी चुदवा लिया तुमसे… वो कुछ नखरे करेगी… पर मैं सहायता करूँगी और तुम्हें जो भी करना हो कर लेना। जैसा मन चाहे वैसे चोद लेना… उसके रोने-धोने की कोई फिकर मत करना। वैसे चुदवाते हुए वो अब ज़्यादा नहीं रोएगी.

जिसके कारण मुझे उसकी गुलाबी ब्रा साफ़ नज़र आ रही थी।मैं उसके उरोज़ों की सुंदरता में इतना खो गया कि मुझे होश ही नहीं था कि घर में सब लोग हैं और अगर मुझे रूचि ने इस तरह देख कर चिल्ला दिया तो गड़बड़ हो जाएगी।लेकिन यह क्या…अगले ही पल का नजारा इसके विपरीत हुआ. ये बात किसी को बताने की है क्या चल बाय… कल मिलते हैं।बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है।अब आप जल्दी से मेल करके बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं.

www.com सेक्सी वीडियो बीएफ मैं बोला- लगता है नशा उतर गया है अब मैडम का…वो बोली- तो मैं क्या सारी रात नशे में झूमने के लिए यहाँ आई हूँ. नाड़ा खोल कर सलवार का रोड़ा भी हटा दिया।अब वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में ही रह गई।मैंने उसके मम्मे दबाना शुरू किए.

www.com सेक्सी वीडियो बीएफ फिर जल्द ही झड़ भी गया।फिर ना जाने मामी को क्या सूझी उन्होंने हँसते हुए मेरा लौड़ा पकड़ लिया और जोर-जोर से मसलने लगीं।मैंने कहा- मामी झड़ जाएगा. अभी तो तुझसे बहुत काम है। उसकी इस बात पर मेरी हँसी छूट गई और मैंने उसे खींच कर अपने से लिपटा लिया और एक ज़ोरदार पप्पी उसके होंठों पर कर दी।थोड़ी देर तो हम ऐसे ही लिपटे हुए पप्पी करते रहे.

क्या हुआ तुम क्लास की मॉनीटर हो… अगर तुम ऐसा विहेव करोगी तो बाकी पर क्या असर पड़ेगा।प्रिया- सर सॉरी…विकास- दीपक तुम मार खाओगे.

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उफ़ ऐसे ही शुरू हो गई तू आहह…दोस्तो, इसी पल सोनू खिड़की से अन्दर आया था और आपको बता दूँ वो रसोई की खिड़की थी. जबकि मेरे विषय में जानकारी देने वाले उन्हें पैसे के बारे में बता दिया था, तब भी वह हमसे पूछ रही थीं।मैंने बताया कि आने-जाने का एसी थ्री का टिकट. उसे थोड़ी राहत हुई मैंने ज़्यादा सा तेल अपने लौड़ा पर लगाया और फिर से उसकी चूत में पेल दिया।हालांकि वो मचली और छटपटाई.

ताकि मैं अच्छे से आप का चेहरा साफ़ कर सकूँ और आप भी खुद को सामने आईने में देख कर संतुष्ट हो सकें।मेरा इतना कहना ही हुआ था कि वो मुस्कुराते हुए मेरे सामने आ कर खड़ी हो गई. कुछ देर बाद मैं नहाने जा रही थी तो उसने फिर पकड़ लिया।मैंने कहा- प्लीज़ नवीन मुझे जाने दो मुझे नहाना है।तो उसने कहा- जान यहीं नहा लो।लेकिन मैंने कहा- नहीं यार. उनको अच्छी तरह से मालूम होगा कि यहाँ की औरतें कितनी मस्त होती हैं।उमर रियाद में नौकरी करते थे और उनकी बीबी आयशा दम्माम में टीचर थी।उमर हफ्ते में 2 दिन ही दम्माम में रहते थे.

’ऐसा ही मैंने उसकी सारी ऊँगलियों के साथ किया… वो पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी, लगातार उसके मुँह से ‘आआआअहह आहह लव मी.

पर मैं उनकी नज़र में एक दुबला-पतला शरीफ बच्चा था इसीलिए कोई भी प्रयास करना मैंने सही नहीं समझा और किसी तरह खुद को रोक लिया।कुछ देर में मामी नहाने चली गईं और मैं दरवाजे के की-होल से उनको नहाते हुए देखने लगा।मामी ने अपने कपड़े उतारे और साबुन से रगड़ कर नहाने लगीं।क्या हसीन नज़ारा था. वहाँ मेरी पढ़ाई चल रही थी। छुट्टियों में मैं अपने घर चला गया था।इस बार जब छुट्टियों के बाद मैं फरीदाबाद वापिस आया तो मकान मालकिन आंटी ने बताया उन्होंने मेरे साथ वाला बड़ा वाला हिस्सा भी किराए पर दे दिया है।मुझे अच्छा नहीं लगा. सो सिर्फ कच्छे में ही घर में बैठा था।उस दिन लता भी 11 बजे ही घर आ गई।मेरी तो जैसे भगवान ने लॉटरी ही लगा दी थी।वो जैसे ही आई तो मैंने उसे पानी पिलाया।मुझे अंडरवियर में देख कर बोली- कपड़े क्यों नहीं पहने हो?मैंने कहा- गर्मी बहुत लग रही है इसलिए.

अब क्या करूँ?फिर मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसकी लुल्ली पकड़ ली और बोला- चल तू बार-बार मुझे यहाँ-वहाँ छूता रहता है. मैं मानसी के पास सट कर बैठ गया और उसके बालों में ऊँगलियाँ डाल कर उसको कस कर पकड़ लिया।कामातुर होकर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसको बेहिसाब चूमने लगा।ऐसा करने से एक अलग ही नशा छा जाता है और सामने वाले को ये भी पता चल जाता है कि आज उसकी चूत. और वो मेरे ऊपर ही लेट गई और मेरे होंठों पर अपने गर्म तवे समान तपते होंठों को रख कर उसे बेतरतीब चूसना चालू कर दिया।साथ ही तेज-तेज झटके लगा कर मेरे कुँवारे लण्ड का शोषण करना शुरू कर दिया।हाय.

मेरा कद 6 फीट है। मेरा जिस्म औसत है पर मैं दिखने में आकर्षक हूँ।मैं फरीदाबाद में किराए से एक कमरा लेकर रहता था. जिससे कि उनकी बुर सामने रहे।अब एक तो ऊँचा करने से बुर खुल कर ऊपर को आ गई और फिर जब मालिश देना शुरू किया।उसकी बुर के किनारों पर.

तेरा लंड भी चूसूंगी।मैं- मम्मी तू गंदी है?मैम- तेरे लिए मेरा बेटा…मैं- मैं तुझे रोज़ चोदूँगा।मैम- जब तेरा मन करे. आपकी चुदाई में तो बहुत मज़ा आएगा… सच में कहूँ तो मुझे 22 से 30 साल की महिला के साथ चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है।प्रिया– आरके सिंह. एक गिलास में मैंने वो पिसी हुई नींद की गोलियाँ डाल दीं और ऊपर से उसमे दूध डाल दिया और बचा हुआ दूध मैंने मुन्ने की बोतल में डाल दिया।मेरे हाथ में गिलास देख कर भाभी बोलीं- तुम भी पियोगे??तो मैंने मन ही मन सोचा कि हाँ भाभी.

शायद मैं एक लम्हे के लिए बेहोश हो गई थी।मेरी दोनों आँखों से पानी निकलने लगा।आनन्द का पूरा का पूरा 9 इंच का लंड अब मेरी चूत के अन्दर घुस चुका था।मेरा दिमाग़ कुछ काम नहीं कर रहा था.

’ऐसी आवाज़ों से मेरा जोश और बढ़ गया था।मेरे साथ ऐसा पहली बार हो रहा था कि बस सोचा और आग उधर भी लग गई।इस वक़्त मैं और साक्षी दोनों ही गरम थे।मैंने अपने जीन्स के अन्दर साक्षी का हाथ डाल दिया। साक्षी एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह लण्ड मसल रही थी।मैंने भी चूस-चूस कर उसके चूचे लाल कर दिए थे।थोड़ी देर बाद मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी. पहचाना?’मैंने कहा- हाँ पहचाना… सुबह मैंने लगाया था पर आप का फोन बन्द था।वो बोली- आज सुबह ही मैं सूरत आ गई थी, पर नींद आ रही थी, तो मैं अपना सेल बन्द करके सो गई थी।मैंने कहा- तो अब तो तुम फ्रेश हो गई होगी?तो कहा- हाँ. कि आज से ये चूत मेरी हुई।खैर जब लण्ड बाहर निकाला तो वो पूरा खून से भरा हुआ था।राधा थोड़ी घबराई हुई थी.

उसने तो मामी के घर में हिस्सा डाल लिया है।दोस्तो, 2007 में मेरी मामी मुझसे अलग रहने लगीं और मैं अपने घर वापस आ गया।उसके बाद मुझे पता चला कि वो अब अपने देवर से लग गई हैं और उससे ही चुदवाती हैं।मैंने ये बात उससे ही पूछना चाहा तो उसने कसम देकर मुझे चलता कर दिया।उसके बाद मैं एक परीक्षा देने लखनऊ देने जा रहा था तो लोग बताते हैं कि आपको जो भी प्यार करता हो उसका चुम्मा ले कर जाओ. और ऊपर से वो सेक्सी भैंस थी और इतराएगी।तो मैंने उसकी तारीफ करना चालू किया और बात बन गई।धीरे-धीरे वो मुझसे खुलने लगी और अब तो खुद ही मेरे पास आके बैठ जाती।उसकी बातों से पता चला कि कॉलेज उसे पसंद नहीं आया और वो इसे छोड़ देगी।मैंने कहा- बिना कोर्स पूरा किए?तो उसका जवाब था- हाँ.

स्कूल के गेट पर वही तीनों खड़े उसको आते हुए देख रहे थे।आज दीपाली के चेहरे में अजीब सी कशिश थी और वो बड़ी चहकती हुई स्कूल में दाखिल हुई।दीपक- उफ्फ साली क्या आईटम है. इन बड़े-बड़े अनारों को दबाने दे।दीपाली- मैं तो पहले से ही बहुत गर्म हूँ और गर्म कर दे ताकि चूत तो ठंडी हो मेरी।बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है।अब आप जल्दी से मेल करके बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं. लेकिन उस हरजाई ने पीछे से भी मेरी चूत में ही लंड डाला और झटके देने लगा।मुझे तो मानो नशा सा चढ़ गया मैं कुछ बोल ही नहीं पा रही थी.

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मैं एक नाईटी पहने लेटी थी, उसने पैर दबाने शुरू किए और मैंने अपनी आँखें मूंद लीं।प्रीतेश पैर दबाते-दबाते जब मेरी जाँघों तक आता तो बेचारा डर के मारे वहीं से मुड़ जाता।मैंने कहा- ओए.

मुझे तेरे पूरे बदन का मजा लेना है… पूरे बदन को चाटना है।इतने में वो एकदम से अकड़ गई और उसने जीन्स के अन्दर ही पानी छोड़ दिया।मैंने धीरे से उसकी टी-शर्ट ऊपर करके निकाल दी।मैं उसकी गोरी कमर को, उसके मम्मों को. मुझे दीपक चाहिए बस।दीपाली- अच्छा एक बात तो बता तेरे दिमाग़ में ये ख्याल आया कैसे और दीपक ही क्यों और कोई भी तो हो सकता है. पर मेरे जिस्म की हालत ऐसी है कि मैं ठीक से खड़ी भी नहीं हो सकती।तभी मेरी योनि और नाभि के बीच के हिस्से में उसका लिंग चुभता हुआ महसूस हुआ.

उसकी आँखें बंद थीं।मैंने उसके कांपते हुए होंठों को अपने होंठों में बंद कर लिया।दोस्तो, उस समय में जो महसूस कर रहा था वो मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता।दस मिनट बाद जब आंटी ने आवाज लगाई. फिर मैं और माया दोनों एक-दूसरे की बाँहों में लेटे रहे।जब माया का दर्द कुछ कम हुआ तो वो उठी और वाशरूम जाने लगी और पांच मिनट बाद जब वापस आई तो चहकते हुए बोली- ओए राहुल तूने तो शादी की पहली रात याद दिला दी।तो मैंने भी उत्सुकता से पूछा- वो कैसे?तो बोली- अरे जब मैंने पति के साथ पहली बार किया था तब भी मुझे बहुत दर्द हुआ था और खून से तो मेरे कपड़े भी खराब हो गए थे. इंग्लिश गाना सेक्सी वीडियोक्या बोली वो?प्रिया- उसने कहा कि वहाँ वो आदमी रात को आ गया है दोपहर को किसी दूसरी जगह के बारे में बताएगी।दीपक- ऐसा कहा उसने और दूसरी जगह कहाँ से लाएगी प्रिया.

अच्छे कपड़े और ब्रा पैन्टी सब कुछ जो मैं चाहती हूँ।विजय ने मुझे ब्लू-फिल्म भी दिखाई उसमें एक साथ दो आदमी एक लड़की को चोद रहे थे। मेरा बहुत मन हुआ और मैंने एक प्लान बनाया।जब 28 नवम्बर की शाम, मैं घर में अकेली थी, तभी अजय वहाँ आ गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया।रानी- अरे रूको ना… क्या कर रहे हो. एक दिन साक्षी ने बताया उसका एक ब्वॉय-फ्रेंड भी है।मैंने सोचा इसका भी ब्वॉय-फ्रेंड है।मेरा साक्षी में कोई इंटरेस्ट नहीं था.

लण्ड पर बैठने लगीं।जब मेरा लण्ड भाभी की चूत के अन्दर घुस रहा था तो मैं बता नहीं सकता कि मुझे कैसा लग रहा था।मेरी आँखें बंद हो गई थीं और भाभी अपने चूतड़ों को हिला-हिला कर मेरे लण्ड को अपनी चूत में अन्दर-बाहर कर रही थीं।हम दोनों के मुँह से ‘आह आह आ आ अहहा’ की आवाज निकल रही थी और साथ ही साथ लण्ड और चूत के मिलन से भी ‘फॅक फॅक. किसी नामर्द का लौड़ा भी उसके दूध और चूत देख कर खड़ा हो जाए।मैं उसे अपनी गोद में उठा कर बिस्तर पर ले गया।मैं बिस्तर पर बैठ गया और उसे पास में खड़ा करके उसकी टाइट चूची के गुलाबी निप्पल को मुँह में भर के जोर से चूसने लगा और दूसरी चूची के निप्पल को मसलने लगा।वो मदहोश हो गई और मेरा सिर अपनी चूचियों में दबाने लगी और कहने लगी- बस और बर्दाश्त नहीं हो रहा. रोज की तरह आज भी कुछ लड़के गेट पर उसके आने का इंतजार कर रहे थे ताकि उसकी मटकती गाण्ड और उभरे हुए चूचों के दीदार हो सकें।रोज तो दीपाली नज़रें झुका कर चुपचाप चली जाती थी.

पर बाद में सब कुछ ठीक हो जाता है। उसने मुझे चुम्बन करके अपनी बाँहों में भर लिया।फिर हम लोग छत के बाथरूम में साथ में जाने लगे. उसकी आँखों में आँसू झलक आए थे।मैंने आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लिया रूचि भी मुझे पकड़ कर रो पड़ी कि तभी उसके आँसू पोंछते हुए उसके चाय के गिलास से थोड़ी चाय छलक कर उसकी टी-शर्ट पर गिर पड़ी।गरम चाय यूँ गिरने से सारा ध्यान उस तरफ चला गया. तब उसको थोड़ा अजीब सा लगा और उसने मुँह हटा लिया।अनुजा- अरे क्या हुआ रानी चूस ना।दीपाली- दीदी मुझे ये लौड़ा एकदम असली जैसा लग रहा है और शहद के साथ-साथ कुछ नमकीन सा और भी पानी मेरे मुँह में आ रहा है इसकी गोटियों की चमड़ी भी बिल्कुल असली लग रही है।अनुजा- अरे पगली ये सब आँख बन्द होने का कमाल है.

अब आ जा…सोनू रसोई की खिड़की से दीपाली को आता देख रहा था, तभी दीपक ने उसको वहाँ से हटा दिया।दीपक- साले हट.

रोहन बेटा मज़ा आ रहा है…’मैं अपनी दो ऊँगलियाँ तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगा… साली रंडी मम्मी पागल हुई जा रही थी, रंडी मम्मी की चूत बहुत ही गर्म थी।मेरे ऐसा करते ही उसके मुँह से सिसकी निकल गई- आअहह, ह्म्म्म्म ऊऊहह. क्या वो तुम्हारे अन्दर भी है या मैं केवल तुम्हारी प्यास बुझाने का जरिया बन कर रह जाऊँगा।इस पर उसने बिना देर किए ‘आई लव यू’ बोल दिया और बोली- आज से मेरा सब कुछ तुम्हारा ही है.

ज़िन्दगी में पहली बार कोई लड़का मुझे छू रहा रहा था।मैं सुरूर में आ गई और दुर्गेश सलवार के ऊपर से मेरी चूत सहलाने लगा।मैंने बनावटी मना किया और फिर उसने मुझे गर्दन पर चुम्बन करना चालू कर दिया।मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई- स्स्स्स दुर्गेश आह्ह्ह. मेरा चिकना और सपाट पेट देख कर मेरी नाभि में ऊँगली घुमाने लगा…मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं।मैं ज़ोर से सिसक रही थी।उसका भी यही हाल था… उसने अपनी जीभ मेरे चिकने पेट पर फिराई. बड़ी परेशानी थी।ऐसे ही दिन गुजर रहे थे एक रोज हमने अपने घर मेरी बीवी रश्मि के जन्मदिन पर एक पार्टी रखी, उसमें हमने उनको भी बुलाया।वो लोग आए और बैठे, मेरी बीवी पानी लाई तो उसने टेबल पर पानी रखा और झुकी.

बस शर्मा कर गर्दन नीचे कर ली।मैंने झट से उसे पीछे से जा उसकी दोनों चूचियों को पकड़ा और उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !उसने नीचे से समीज पहनी हुई थी सो उसके निप्पल मेरी हथेली से टकरा रहे थे।वो थोड़ी देर तो मुझे हटाने के लिए थोड़ा विरोध करती रही लेकिन जैसे ही मैंने उसके निप्पल को हल्का-हल्का मसलना शुरू किया. इसका भी उद्घाटन आप ही कर दो।मैं भी समझ चुकी थी कि भले मुझे मजा आए पर मुझे ज्यादा चिल्लाना है ताकि इनको अधिक मजा आए।विश्रान्त ने झटके के साथ लौड़ा चूत से निकाल लिया और गाण्ड के छेद पर रख कर ज़ोर से धक्का मारा. मुझे तुम्हारे लण्ड की जरूरत है।’तो मैंने उनके मुँह पर चुम्बन किया और उन्हें कुछ इस तरह होने को बोला कि वो सोफे की टेक को पकड़ कर घोड़ी बन जाएं.

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वो बोल ही न सकी।मैं इसी तरह निरंतर उसके होंठों को चूसते हुए उसके मम्मों को रगड़े जा रहा था जिसमें माया का अंग-अंग उमंग में भरकर नाचने लगा था।तो मैंने सोचा. रात को क्या कम चोदा है जो अब दोबारा मेरी हालत खराब करना चाहते हो।विकास- अरे जानेमन रात को तो मैंने गोली ले ली थी. मैं सोच रही थी कि बाहर इतनी आवाज़ें होने के बावजूद जब मैंने बगल के स्टॉल में उस औरत के मूतने की आवाज़ सुन ली तो मेरे द्वारा भी किसी भी प्रकार की आवाज़ भी सुनी जा सकती है.

जिससे मैं अपने आने का पक्का कार्यक्रम बना सकूँ।इस पर वह तैयार हो गईं। मैं उनका नाम यहाँ पर अर्चना लिख रहा हूँ।मेरी तारीख तय हो गई. जब भी मैं गोआ जाती हूँ, मैं जेनेलिया से ज़रूर मिलती हूँ और हम एक दूसरी के नंगे और सेक्सी बदन से खेलते हुए लेस्बीयन चुदाई ज़रूर करती हैं. इंग्लैंड में सेक्सीक्योंकि मुझे उस वक्त सेक्स का कोई ज्ञान नहीं था।मुझे नहीं पता था कि औरत और मर्द आपस में मिल कर क्या-क्या करते हैं।मेरे लिए ये सामान्य बात थी.

बेचारा बाहर खड़ा बड़ी रफ्तार से लौड़े को आगे-पीछे कर रहा था।ये दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे की चूत चाटती रहीं।फिर अनुजा अपनी ऊँगली से दीपाली की चूत चोदने लगी.

’तभी उन्होंने मुझे कुण्डी के दोनों तरफ़ पाँव करके संडास करते वक़्त जैसे बैठते हैं वैसा बैठा दिया और पानी में ही मेरी चुदाई करने लगे।मैंने तो आज तक ऐसा कोई आसन नहीं देखा या सुना था।मेरा ससुर तो वात्सायन का भी गुरु निकला।ससुर जी ने मुझे 20 मिनट तक खूब पेला, मुझे बहुत मज़ा आया।फिर उन्होंने मुझसे कहा- ले चूस मेरा लंड. मैं चूत और जोर से चाटने लगा। वो और जोर से चिल्लाने लगी और मेरे सिर को अपनी चूत में दबाने लगी।थोड़ी देर में ही वो ढीली पड़ गई और उसकी चूत में से पानी निकलने लगा।मैं सारा माल चाट गया।वो बोली- अब मुझे पेशाब लगी है।मैंने कहा- जरा रूको.

तू कल स्कूल के बाद मेरे साथ मेरे घर आ सकती है क्या? बहुत जरूरी बात करनी है।प्रिया- हाँ पढ़ाई के बहाने से आ तो सकती हूँ मगर ये बात तो तू कल भी बोल सकती थी. मगर भगवान ने तो इसे कल शाम तक यहीं रोक दिया अब तो सारी रात आप इसके साथ रासलीला कर सकते हो।दीपाली- छी:. क्या मस्त चूत है ऊह्ह… सविता दीदी… मेरी जान… उम्म्म… उम्म्म्म…जितनी मस्त तुम हो उतनी ही तुम्हारी चूत भी.

बाय अब चलती हूँ।’दीपाली अपने घर चली गई और जैसा कि आप जानते हो चुदाई के साथ साथ उसको पढ़ाई की भी फिकर रहता है.

तुम सिर्फ वक्त से आ जाना।उसने मुझे पता मैसेज किया और मैं बाइक लेकर दिए हुए पते पर जाने के लिए निकल पड़ा।मैंने वहाँ पहुँच कर मानसी को कॉल किया तो उसने कहा-105 नम्बर के बंगले के अन्दर आ जाओ. क्योंकि अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।मैंने उनकी टाँगों को अपने कन्धों पर रखा और लंड के टोपे को चूत के मुँह पर टिका कर एक ज़ोर का धक्का लगाया और मेरा लंड सुनीता जी की चूत की गहराइयों में ‘गच्छ’ की आवाज़ के साथ उतरता चला गया।जैसे ही मेरा लंड उनकी चूत में गया. पर दोनों अलग-अलग सेवन करता हूँ यानि चुदाई के वक़्त शराब को हाथ नहीं लगाता और शराब के समय शबाब को हाथ नहीं लगाता।रानी- आप वाकयी दिलचस्प इंसान हैं मैं कब से आप से मिलने को कह रही थी, जब से जाना है तब से सीमा को बोल रही थी कि कब ले चलोगे और…!रानी चुप हो गई।रणजीत- और.

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मैं शुरुआत में जबरदस्ती करता पर फिर वो भी अपनी चूत की खुजली मिटवाने के लिए टाँगें खोल देती थी।उसकी एक महीने पहले शादी हो गई है. हा…’ की आवाजें उसके मुँह से निकल रही थीं।मैंने मौके का फायदा उठाया और चुपके से उसके पीछे जा कर खड़ा हो गया। फिर मैंने उसको कहा- गुरविन्दर क्या कर रही हो?वो चौंक गई और अपनी शर्ट नीचे करने लगी। मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसको बोला- क्या हुआ. जो पूनम के पास बहुत अच्छे क्वालिटी के थे।उसके रसीले मम्मे मानो जैसे रत्नागिरी के हापुस आम थे और उससे भी बड़ी बात वो बच्चा होने के कारण असलियत में दूध दे रहे थे।और यही बात ध्यान रखकर मैंने सोनम को भी बता दिया था कि मुझे किसी भी औरत का असलियत में दूध पीना है।मुझे विश्वास भी था कि सोनम हाथ में आई है.

बस जिसको मेरे जैसे प्यार की कमी हो और वो भी मेरे जैसे प्यार की भूखी हो।मेरी तलाश अभी भी जारी है। जब भी कोई मिलेगी मैं सबसे पहले उससे चुदाई करने के बाद उसकी राजी से आप सब को जरूर बताऊँगा।आपको मेरी यह दास्तान कैसी लगी मुझे अवश्य ईमेल कीजिएगा।. तब उसकी गोरी जांघें बेपरदा हो गईं और सफेद पैन्टी में उसकी फूली हुई चूत दिखने लगी।अनुजा बस उसको देखती रही और दीपाली अपने काम में लगी रही। अब उसने ब्रा के हुक खोल दिए और अपने रस से भरे हुए चूचे आज़ाद कर दिए।विकास का तो हाल से बहाल हो गया और होगा भी क्यों नहीं. उतना करूँगा।’कुछ देर बाद अर्चना ने मुझे अपने कमरे में बुला लिया और वहाँ उसने कहा- अब तुम अपना काम करो कोई दिक्कत नहीं है।मैं उसको बोला- आप चेंज कर लो फिर मैं शुरू करूँ।वह गई.

’वो मेरी टाँगों से चिपक़ गई, उसने मेरे चूतड़ पकड़ लिए, उसके मम्मे मेरी जंघाओं से घर्षण कर रहे थे।रिंकी ने तने हुए लंड के सुपारे को अपने मुँह से पकड़ा और फिर एक झटका देते हुए. मेघा दौड़ते हुए बेलन लेकर आई और मेरे ऊपर कूदी।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !माहौल फिर से हल्का हो गया था. बस जाकर चूम लो।अगर आप उसकी खूबसूरती का अंदाजा लगा चाहो तो यूँ समझ लीजिए कि वो माधुरी दीक्षित लगती थी।खैर.

हईईइ अल्लाह मैं तो मर जाऊँगी।मैं- आपको दर्द हो रहा है तो मैं बाहर निकाल लेता हूँ?मैंने तड़पाने के लिए कहा।भाभी- अरे. मैं अपनी इमेज खराब नहीं कर सकता।दीपाली भी बाहर आ गई थी और उसने सब सुन लिया था।दीपाली- सर आप जाओ आज नहीं तो कल सही.

उसमें एक सच्चाई थी कि वो बूँदें सिर्फ़ मुझे ही पीने के लिए बरसी हों।उसने कस कर मेरे बालों को पकड़ा हुआ था.

नहीं तो मुश्किल हो जाती।इसलिए आराम से उसकी बुर की एक फलक को ऊँगलियों से पकड़ कर बाल साफ़ किए।एक तरफ साफ़ करने के बाद जब दूसरी फलक को पकड़ा तो उसने तब तक अपना पानी गिराना शुरू कर दिया था।उसको पकड़ने पर उसकी चिकनाहट से हाथ से बुर की फलक छूट जाती थी।उसको मैंने कपड़े से चूत को पोंछा फिर झांट साफ़ कीं।उसकी झांटें बुर के अन्दर तक गई थी।जिसको साफ़ करना कठिन था. हिंदी बीपी वीडियो सेक्सी वीडियोइस तरह करते हुए मुझे 15 मिनट के ऊपर हो गए थे और सुनीता जी अपनी मस्ती में अपने चूचों को मसलवाने का मज़ा ले रही थीं और बड़बड़ा रही थीं, ‘ओर मसलो. सेक्स सेक्सी फुल वीडियोकोई दिक्कत तो नहीं?मैंने ‘ना’ में सर हिला दिया, तब तक बस पुनः चल दी।वो आदमी ने मेरे चूतड़ों को मसलने लगा, मैंने डर कर बस में इधर-उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा, पर भीड़ की वजह से सभी एक दूसरे से सटे हुए थे।तभी उस आदमी ने मेरे कान में बोला- कोई दिक्कत न हो, तो थोड़ा इधर को आ जा. राजधानी भी उसके आगे हर मान जाए इतनी तेज़ी से लौड़ा चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था।इसका अंजाम तो आप जानते ही हो प्रिया की चूत ने पानी छोड़ दिया और उसके अहसास से दीपक के लौड़े ने भी बरसात शुरू कर दी। दोनों काफ़ी देर तक झड़ते रहे और उसी अवस्था में पड़े रहे।प्रिया- आह भाई मज़ा आ गया आज तो.

हम एक-दूसरे के पति-पत्नी बन जाते हैं और आंटी के कहने पर मेरी सेलरी भी काफ़ी अच्छी हो गई है।इसीलिए मैंने आंटी का नाम नहीं बताया और ना ही यूरोप के उस देश का नाम लिखा है।.

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हसीन कामुक अप्सरा सी दिख रही थी और दूध भरे होने के कारण उसके मम्मे और भी बड़े दिख रहे थे।फिर हम गपशप करते हुए चाय पीने लगे. कोई आ गया तो सारा खेल चौपट हो जाएगा।वो दीपाली के पैरों के पास आ गया और उसके दोनों पैर कंधे पर डाल लिए. साक्षी की गाण्ड इतनी मोटी और गोल मटोल थी कि अगर कसी हुई होती तो गाण्ड तक पहुँचने का रास्ता लम्बा कर देती।जैसे ही लण्ड गाण्ड से लगा, साक्षी पलट कर बैठ गई और डरते हुए प्यार से बोली- बेबी, चूत चाहे जितनी बार मार लो, प्लीज मेरी बम्स छोड़ दो।मैं बोला- तेरी चूत में दम कहाँ यार.

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फ़च’ की आवाजें आ रही थी।करीब 15 मिनट तक हम दोनों मदहोशी में चुदाई का खेल खेलते रहे और आख़िर में हम दोनों ने एक साथ पानी साथ छोड़ा. बस उसे तो असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही थी।वो ज़ोर-ज़ोर से चूत को मसलने लगी और बड़बड़ाने लगी।दीपाली- आह. अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दो और तुम आराम से लौड़ा चूसो।दोनों 69 की अवस्था में आ गए और मज़े से चुसाई करने लगे।दीपाली की सूजी हुई चूत को विकास की जीभ से बड़ा आराम मिल रहा था।वो एकदम गर्म हो गई थी और टपकने लगी थी.

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अन्दर तक खुज़लाहट मिटा देता है…चाची ने भी हँस कर मामी को गले लगाया और सलवार उतार कर मेरे ऊपर आ चढ़ बैठी और मामी से बोली- चल अब तू पहरेदारी कर।मामी पहरेदारी पर खड़ी हो गई और चाची ने मुझे अपने ऊपर ले लिया।मैं चाची को चोदने लगा।अब मेरे पास दो औरतें थीं. मैं समझ गया कि इसकी चूत ने रस छोड़ दिया है और ये अपनी चूत धोने बाथरूम जाना चाहती है।जैसा कि मेरा स्वभाव ही मदद करने का है मैंने उसको बड़े ही संभाल कर सहारा दिया और उसको बाथरूम तक लेकर गया और मैं बाथरूम के बाहर रुक गया. फिर मैंने अपनी टी-शर्ट और पजामा भी उतार दिया और उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत पर चुम्बन करने लगा।उसकी पैन्टी पूरी गीली हो गई थी।वो बहुत मादक आवाजें निकाल रही थी.

पर मैं अब भी रिंकी को चोद रहा था।उसकी हालत बहुत बुरी हो चुकी थी… फिर भी उसमें अजीब सी मस्ती थी।आख़िर हम एक-दूसरे से लिपट कर सो गए।दो दिन तक मैं रिंकी और रूपा को ही चोदता रहा और नीलम हमारी चुदाई देखती रही. माया ने फोन काट दिया।फिर माया फोन काटते ही मुझसे झुँझलाकर बोली- तुमने मेरे फ़ोन से काल क्यों की?तो मैंने बोला- अरे मैं तो गेम खेल रहा था और हो सकता है.

अपनी कमसिन साली की मक्खन जैसी नाज़ुक बुर को चोदने का मेरा दिली ख्वाब पूरा होने वाला था।मैं अपने लण्ड को हाथ से पकड़ कर उसकी चूत पर रगड़ने लगा।कठोर लण्ड की रगड़ खाकर थोड़ी ही देर में रिंकी की फुद्दी का दाना कड़ा हो कर तन गया। वो मस्ती में कांपने लगी और अपने चूतड़ों को ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी।‘बहुत अच्छा लग रहा है जीजू… ओहह… ऊ… ओह… ऊओह.

पर फिर भी मुझे यकीन था कि मेरा काम हो तो जाएगा।अब दोपहर का खाना हुआ और वो मेरे पास आया और बोला- दीदी, आज सुबह जो हुआ वो क्या था. पर किस्मत ने उसे मेरे पास भेज दिया।मैंने उसे बिठाया और बस स्टैंड पर छोड़ दिया।वो बोली- राहुल मुझे तुमसे बात करनी है. मुझे बड़ा मज़ा आया।फिर उसने क्रीम की शीशी खोल कर उसमें से ढेर सारी क्रीम निकाल कर मेरी गाण्ड के छेद पर लगा दी।फिर उसने अपनी एक ऊँगली मेरी गाण्ड के छेद पर रख कर धीरे से उसे अन्दर डाल दी.

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तो मैंने उससे बोला- करके देखना पड़ेगा।उसने बोला- क्या कर के देखना पड़ेगा?तो मैंने बोल दिया- चूत चुदाई!वो बोली- आप मेरे साथ चुदाई करेंगे?तो मैंने उसको समझाया- नहीं यार, मैं उस सीन को समझना चाहता हूँ।फिर वो बोली- ठीक है. पर लंड चूत में वापस जाने के बजाए फिसल कर गाण्ड में चला जाता।भाभी से रहा नहीं गया और तिलमिला कर कर ताना देती हुई बोलीं- अनाड़ी का चोदना और चूत का सत्यानाश… अरे मेरे भोले राजा. आपने तो मेरे पेट की आग को हवा दे दी।फिर हमने साथ मिलकर छोला-कचौड़ी खाई और खाना खाने के बाद आंटी ने रसोई का काम ख़त्म किया और जल्दी से वो मेरे पास आ गई।मैं टीवी देख रहा था.

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उसकी इस हरकत से मेरा लण्ड जींस के अन्दर अकड़ सा गया था।फिर उसे मैंने सम्हाल कर अपना मुँह धोया और कमरे में जाकर बैठ गया।कमरे में अब सिर्फ मैं और विनोद थे. विजय कहाँ मानने वाला था उसने एक और जोरदार झटका मारा अबकी बार पूरा लौड़ा मेरी गाण्ड की गहराइयों मैं खो गया और मेरा दर्द के मारे बुरा हाल हो गया।मैं चीखती रही वो झटके मारता रहा.

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हाय दोस्तो, कैसे हो आप सब… आज मैं आपको दीपाली सिंह की कहानी बताती हूँ।दोस्तो, कहानी के सभी किरदार असली हैं. मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आती हूँ।फिर वो रसोई में चली गई और चाय बनाते समय गरम दूध उसके ऊपर गिर गया, मैं उसके चीखने की आवाज सुन कर गया तो वो रो रही थी।मैंने जल्दी से उसे उठाया और हॉल में ले जाकर बिठाया और फिर जल्दी से बरफ ला कर बोला- अंजलि तुम अपनी पैंट उतारो. कभी-कभी सलीम रात में मुझे इंटरनेट पर पॉर्न पिक्स और वीडियो क्लिप दिखाता था।सब क्लिप गंदी ही होती थीं।फिर कभी-कभी रात में चैट करता था। शुरू में याहू चैट क्या है.

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