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लेकिन वो तड़प उठी थी और अपनी बगलों में घुसे मेरे मुँह को हटाना चाह रही थी- ‘आअहह … ऊहह जानू प्लीज़ नीचे कुछ करो ना जान … ऊऊँहह देखो न … मुझे कुछ कुछ हो रहा है … आऐईयईईई … उउउफ़फ्फ़ … चोद दो न मुझे.

मेरी सेक्स कहानी के पिछले भागभाभी की सहेली ने चुदाई के लिए ब्लैकमेल किया-1में आपने पढ़ा कि एक दिन मैं भाभी की गांड मार रहा था तो उनकी सहेली आ गयी, उसने हमारी चुदाई देख ली और विडियो भी बना ली. फिर उन्होंने कहा- तुम पेट के बल से हो जाओ, जिससे तेरी गांड ऊपर आ जाएगी. ये सब करते हुए मेरी आँखें बंद थी कि अगर वो जाग भी रही होंगी तो उन्हें यही लगेगा कि मैंने नींद में ऐसा किया है.

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मैं उसे तेज तेज झटके मारते हुए चोदने लगा और साथ साथ में किसी और मर्द से चोदने के लिए उत्तेजित करने लगा.

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थोड़ा सा और जोर लगाकर मैंने पूरा लंड उसकी चुत में उतार दिया और शुरूवात में हल्के धक्के देने के बाद मैंने स्पीड पकड़ ली.

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तो मैं बता देना चाहता हूँ कि मैं यहाँ पार्थ (बदला हुआ नाम) के नाम से कहानियां लिखता हूँ.

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मैं अन्तर्वासना से पिछले 2 साल से जुड़ा हूँ और इसमें सेक्स कहानी पढ़ते आ रहा हूँ. बिल्कुल मलाई कोफ्ता या रसमलाई के जैसी नर्म गर्म रसीली चूत थी कम्मो रानी की.

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इसके अलावा डिस्प्ले पिक पर लगी महिला की तस्वीर मुझमें दिलचस्पी बना रही थी.

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बस मैं चाची के साथ चूमा चाटी, चूत में उंगली करके चला जाता।6 महीने पहले में जॉब छोड़कर आ गया, अपना खुद का काम करने.

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उसने मेरी तरफ वासना भरी निगाहों से देखा और मैंने दो उंगलियां उसकी चुत में डाल दीं.

थोड़ी देर भाभी को चोदने बाद मैंने भाभी की चूत में लंड डाल दिया और चुत चोदने लगा. मुकेश ने मुझे सारी बात बता दी है, आप चाहो तो मैं आपकी मदद कर सकता हूं.

निशा की जुबानी:मैं निशा आप सबके लंड को एक प्यारा सा चुम्बन देकर और लंड को मुँह में लेकर मजा सुनाती हूँ. धीरे धीरे उन्होंने मेरे बॉक्सर के अन्दर हाथ डाल कर अपना हाथ मेरी गांड पर ले लिया और मेरी गांड सहलाने लगीं. कम्मो के मुंह पर दर्द के निशान उभरे पर उसने अपने दांत भींचे और ईईई ईईई ईईई जैसी आवाज करते हुए समूचा लंड लील गयी और फिर हांफती हुई सी मेरी छाती पर सिर टिका के सुस्तानेलगी.

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वो एक बहुत बड़ी चुदक्कड़ थी और उसने मुझे भी अपनी जैसी रंडी बना दिया था।पूरी रात वासना का यह खेल चला. मैं वैसे ही किसी को नहीं बताना चाहता था कि मेरी बहन इतनी सेक्सी है कि बूढ़ों का भी लंड खड़ा कर दे. नीचे धीरज ने उसकी चूत के नीचे अपना मुँह इसे सेट किया कि वाइन नायरा कि चूत से होती हुई सीधे धीरज के मुँह में गिरे.

मैं उनकी प्यास बुझाने वाली बात से कुछ समझ तो गया था लेकिन अब भी मुझे उनकी चाहत को समझना था. उस वक़्त मैं लगभग 21 साल का था और सुनीता दीदी, हाँ! उनका नाम सुनीता था, वो लगभग 35 साल की थी. बुरचोदी वाला बीएफतभी सासू माँ ने इशारा किया और मैंने साड़ी का पल्लू फिर से ऊपर कर लिया और अपने सिर से घूंघट की तरह ले लिया.

थोड़ा प्यार बचा कर रखना मेरी चाची जान … उम्माह …अगले भाग में उस दिन रात तक कैसे चुदाई चली … सब लिखूंगा … और उसके बाद चाची के दोनों बहनों को मैंने कैसे पटाया, ये भी जानिए.

क्या… क्या? आपने आठ कहा?आपने गलत अंक कहा है या फिर मेरा गणित गलत है?राज- नहीं मैंने तो कोई गलत अंक नहीं कहा।श्लोक- तो फिर हम आठ कैसे हुए? आप और रीना दीदी, मैं और सीमा,आपका दोस्त रणवीर और उनकी बीवी प्रिया. उन्हें इस वक्त कोई होश ही नहीं था कि कमरे के अन्दर वेटर आ गया है और उससे अपनी ये सब हरकतें छुपाना हैं.

उसके मुँह से आवाजें आना शुरू हो गई थीं- आह ज़ोर से जानू … आअज ऊऊहह हमम्म्म जानू … अया आज हम दोनों माँ बेटी को चोद कर खुश कर दो जानू आज हम दोनों का जीवन सफल कर दो … आ मम्मी मैं आई … आआहह ऊओह उउउम्म्म जानू …यह कह कर उसने ज़ोर से मेरे मुँह पर अपनी चूत दबा दी और उसकी चुत का रस मेरे मुँह में छूटने लगा. भाभी जी बोलीं- मेरे जैसी क्यों?मैंने बोला- खाना भी आप जैसा होना चाहिए और खिलाने वाली भी आप जैसी होना चाहिए. ’ भरते हुए एकदम से अपनी चूत को मेरे मुँह से लगा दिया … और मेरे सर को अपने हाथों में पकड़ कर अपनी चुत को दबाने लगी.

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जब मेरे चूचों से उसका जी भर गया, तो उसने मेरी चुत को चाटना शुरू किया. मैं जयपुर में रहता हूँ और सरकारी नौकरी के लिए कम्पटीशन की तैयारी कर रहा हूँ. अब तक पूजा की चुत ने शायद पानी छोड़ दिया था, जिसे पूजा की चुत भीगी पड़ी थी.

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लंड के अन्दर जाते ही वो मचल जाती और गांड उठा उठा कर चुदाई का मजा लेने लगती. बैगनी कलर का लहंगा उनके गोरे बदन पर बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था. मैंने उससे कहा- रशीद तुमने चार रोज पहले भी सलमा को नशे में कली से फूल बना दिया था … पर शर्माओ मत, मुझे तुम बहुत पसंद हो.

तू सोच … और निकल इन दकियानूसी ख्यालों से … और मज़े ले मेरी तरह या दूसरी बाकी लड़कियां ऑफिस वाली ले रही हैं. कोई दिन जब मनोज बड़ोदरा में हो तो बिना पोर्न मूवी देखे और बिना वाइब्रेंट सेक्स के सो नहीं सकते. उस दिन पहली बार मैंने कबीर के लंड को अपने हाथ में लेकर फील किया था.

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तो जीजा जी भी तैयार हो गए, वो बोले- मेरा भी मन नहीं लग रहा है यहाँ! मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा. फिर मैंने अपनी एक उंगली पूजा की गांड से लगायी, तो पूजा उछल पड़ी और बोली- साले भड़वे, क्या तेरे को मेरी चूत पसंद नहीं है? कब से तू मेरी गांड के पीछे पड़ा हुआ है.

जब वो अपने घर गई, तो साथ में उसकी बेटी जिद करके मेरी बेटी को भी अपने घर ले गयी.

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मैं बाथरूम में जैसे ही फ्रेश होने के लिये गई कि सीमान्त भी पीछे से सूसू के लिए आ गया.

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मैंने किस करते हुए पूजा की चुत को जींस के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया. उसकी इस शरारत से मेरे लंड में फिर से ज़ोर आने लगा … और वो देखते ही देखते वापस अपने आकार में आ गया. जिस तरह से मैंने पल्लवी के साथ किया, ठीक उसी तरह पल्लवी मेरे साथ कर रही थी। वो मजे से मेरे दानों काट रही थी और जीभ से खेल रही थी। मेरे निप्पल कड़े हो चले थे और तो और झुरझुरी तो ऐसी हो रही थी कि सुपारे में एक मीठा सा मादक अहसास हो रहा था।मैं अपनी भावनाओं पर काबू रखना चाहता था लेकिन हो काबू हो नहीं पा रहा था, मैंने कस कर उसके चूचुक को दबाना शुरू कर दिया और निप्पल को जोर-जोर से मलने लगा.

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आपको मेरी ये दीदी के साथ चुदाई की स्टोरी कैसी लगी, मुझे लिख कर ज़रूर बताएं. तो क्या आप बहुत दिनों से ये चाहती थी?”अंकित के सवाल पर शबनम थोड़ा शर्मा गयी और हल्की हंसी के साथ बोला- जिस दिन से मैंने तुम्हें बाथरूम में मास्टरबेट करते देखा था जब तुम आतिफ का इंतज़ार कर रहे थे. ये सोचना भी जैसे मुमकिन न हो।10 मिनट का वो दीर्घकालीन चुम्बन दो जवान जिस्मों की अन्तर्वासना जगाने के लिए काफी था।अब हमने कोठरी की ओर रुख किया। कोठरी में काफी पुआल (धान का कचरा) रखी हुई थी। झटपट उसी का गद्दा बना लिया गया।एक अजीब विचार मेरे मन में आया कि मामा ने अपना सामान सुरक्षित रखने के लिए ये कोठरी बनवायी होगी.

शबनम ने अपना मुँह खोला और धीरे से ले अंकित की जबान को अन्दर ले लिया.

मैंने मस्ती से कहा- एकदम से क्या हो गया तेरे को?वो बोली- बस अब और मेरे से सब्र नहीं होता.

अभी मुझे नौकरी तलाश करते हुए एक साल ही गुजरा था कि भैया का सड़क दुर्घटना में स्वर्गवास हो गया. मैंने अमायरा से पूछा- तुम्हारे घर के और लोग किधर गए हैं?उसने बताया- वो सब मेरी ननिहाल गए हैं … और घर पर मैं अकेली ही हूँ. भाभी की चोदने वाला बीएफफिर वो बोली- अरे मैं तो भूल ही गई कि मैं तो टॉयलेट जाने के लिए उठी थी.

शबनम ने प्यार से अंकित की आँखों में गहराई से देखा और प्यार के साथ उसके दोनों गालों को चूमने लगी. न जाने कब से मुझे अपनी कहानी आपसे साझा करनी थी, पर कर ही नहीं पाया. मैंने उसकी चुत पर हाथ रख कर थोड़ा सहलाया और अपना लंड उसकी चुत में डालने की कोशिश करने लगा.

यह एक ऐसा अनुभव था, जिसमें हम अच्छे से मिले भी … और नहीं भी … क्योंकि दोनों का पहली बार था. हम दोनों के अलावा घर में कोई नहीं था, सिर्फ हम चाचा भतीजी साथ में थे और हम दोनों ही को नींद नहीं आ रही थी.

तभी वो एकदम से उठीं और मुझे अपने ऊपर खींचते हुई बोलीं- अब आ जाओ दामाद जी … अब नहीं सहन होता … आ जाओ आज आपके लंड को स्वर्ग का रास्ता दिखाती हूँ.

मैं तो वैसे ही गर्म था तो मैंने भी उनके गालों पे एक गीला सा चुम्बन कर दिया।उन्होंने मुझे अचम्भे से बड़ी आँखें करके देखा तो मैं बोला- आपको भी तो बधाई बनती है, आखिर आपके भांजे को जॉब मिली है. और इससे पहले आप पूछें तो बता दूँ कि मेरे पिताजी की मृत्यु 3 साल पहले हो चुकी थी. उन्होंने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा- ठीक है … आज हम अँधा प्यार करेंगे.

हिंदी में सेक्सी बीएफ जबरदस्ती मैंने उन दोनों की पैंट खोल दी और उनके कहने से पहले ही उनकी अंडरवियर भी खोल दी. आलिया- कब तक ऐसे नाराज रहेगा?मैं- जब तक आप मेरी बात मान नहीं जातीं, तब तक.

हब्शियों की तरह मुस्कुराते हुए उसने अपनी जीभ को मेरे होंठों पर फेरा. वैसे भी हम दोनों का थोड़ी देर पहले ही पानी निकला था तो जल्दी झड़ने का सवाल ही नहीं था. पिंकी तो बकवास बहुत करती थी चुदाई के समय … वो राहुल से बोली- अच्छे से चोद राहुल, ऐसी चिकनी और मस्त चूत नायरा की नहीं होगी.

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मैंने रचना को फिर याद दिलाया कि ध्यान रखना कि यहां किसी को ना पता चले कि तू मेरी बहन है … वरना तुझे मॉडलिंग में काम नहीं मिलेगा. चाची- आहह … मादरचोद अब मेरी गांड का भी भोसड़ा बनाएगा … आआआह…मैं एक हाथ से डिल्डो को अन्दर डाल नहीं पा रहा था … तो मैंने हिना आंटी को इशारे किया. मैंने उसकी मैक्सी से लन्ड पौंछा और उसने भी अपनी चूत पौंछी, फिर सीधा मेरे लन्ड को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ करके बैठ गयी।मेरा लन्ड थोड़ा खिंचाव सा महसूस करता हुआ उसकी चूत में घुस गया। हम दोनों को हल्का सा दर्द महसूस हुआ.

उसके लंड के स्पर्श ने मेरी चूत में वो आग लगाई कि मैं खुद ही अपनी चूत को उसके लंड की तरफ धकेलने लगी. मैं- तुमको अपनी गलफ्रेंड बनाने के लिए आसमान से चांद लेकर भी आ सकता हूं.

हम दोनों की इस बात पर वेरोनिका और एना ने ताली बजा दी और ओके बोल दिया.

मैं- हां अगर फोन करके ग़लती की है, तो मैं समझ सकती हूँ कि आप क्यों माफी मांग रहे हो. जो मित्र सेक्स चैट, फोन सेक्स या अन्य जानकारी के संबंध रखना चाहते हैं, वे मुझसे[emailprotected]पर संपर्क कर सकते हैं. इन भाई-बहन की चुदाई के बीच वो दूसरा जोड़ा कौन था जिसको लेकर मुझे अभी तक भनक भी नहीं लग पाई थी!भाई-बहन की चुदाई का वो याराना आपको कहानी के अगले भाग में सुनने के लिए मिलेगा.

रोहन- तुमसे बात करने के बाद मेरे पेट में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था. परीशा पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, उसकी चूत उसके काम रस से भीग चुकी थी जिससे बाप मुकुल का लंड चिकना होकर बेटी की चूत के अंदर बाहर होने लगा था. मैंने गर्म पानी का फव्वारा चलाया और दोनों भीगते हुए चुदाई का मजा लेने लगे.

मुझे लगता है कि आज मेरे मम्मों की जो साइज़ है, वो उसके दबाने से ही हो गई है.

एक्स एक्स एक्स बीएफ राजस्थानी: अब किसी से नहीं करता करवाता।मामा जी- इसका मतलब खूब सारे दोस्तों से करवाई। मेरे से भी हो जाए?मैं- मामा जी, अब बहुत दिनों से नहीं कराई।मामा जी- आखिरी बार कब?मैं- यही कोई चार पांच साल पहले, जब मैं अट्ठारह उन्नीस का रहा होऊंगा. उसने अंडरवियर को जांघों पर फंसा लिया था और अपने मोटे लंड को सहलाता हुआ मुझसे भी कपड़े उतारने के लिए कहने लगा और पूछने लगा कि उसके प्रपोजल के बारे में मैंने क्या सोचा है.

”भोसड़ी के, काम वाली को भी नहीं छोड़ा?”वो चीज ही ऐसी है कि केला देने का मन बन गया. चुम्बनों के बीच में वो थोड़ा सा खिसकी और अंकित के हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी कमर से लेकर ऊपर गले तक रगड़ती हुई ले गयी और वापस लायी. पर उसे वहां सुरक्षित नहीं लगा। फिर उसने मुझे फैसला सुनाया कि हम सामने खड़ी हुई पुराने रेल के डिब्बे में जाएंगे। वो काफी दिनों से खड़ा हुआ डिब्बों का झुंड था शायद 6 य 7 डिब्बे।मैंने उसे मना किया पर उसने मुझे समझाया कि यहां कोई नहीं आता और अगर कोई आता भी है तो वो सब सम्हाल लेगा।मेरा मन तो नहीं था इतने असुरक्षित स्थान पर लेकिन हवस के आगे इंसान की नहीं चलती.

मैंने उससे पूछा कि हां बताओ क्या बात है?वो बोली- रात काफी हो गई है, इधर ही रुक जाओ, सुबह चले जाना.

और अचानक मेरा वीर्य अंडों से तेज़ी से निकलते हुए लन्ड के रास्ते सीधा उसकी चूत में उतर गया। मैं तब तक उसकी चूत में धक्के मारता रहा जब तक कि मेरे वीर्य की आखरी बूंद उसकी चूत में न झड़ गई. मगर जब भी मैं चुदाई के लिए तैयार होती तो वह मुझे नजर अंदाज कर देता था. हमारा घर अच्छी कॉलोनी में होने की वजह से उन्मुक्त वातावरण था और मेरे भाई के सारे दोस्त मेरे घऱ आते थे.