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फिर मैंने देखा मामी मेरे और पास में आकर साड़ी का पल्लू थोड़ा नीचे गिराकर पास में हो गईं. मैं पूरी नंगी थी, मेरे दूध अपने होठों में भर लिए। वहां एक ही बिस्तर लगा था, उसी बिस्तर में ले जाकर लिटा दिए. स्टेशन पर बहुत भीड़ थी, मैं कुछ खास नहीं कर सका बस हल्का सा हग किया और सामान लेकर टैक्सी में बैठ गए और सीधे सुमीना के घर आ गए.

घर आकर वाशरूम में मैं हाथ मुँह धोने गया, तब नजर मेरी बनियान पर पड़ी, जो नीचे से सारी खून में लाल सी हो रही थी. चाचा मुझे बोले- तुझे चुदते हुए देख कर मुझे बहुत मजा आ रहा है आरती, लग रहा है कि क्या कर डालूं!तीनों लंड से जम के हो रही चुदाई और उन सब की गन्दी गन्दी बातें और गालियां सुन कर मैं फुल एक्साइटेड होने लगी और मेरा पूरा दर्द खत्म हो गया, अब मुझे बहुत मजा आने लगा. ब्लू फिल्म करने वालीमेरा लंड अभी भी उसकी चुत में था और झड़ने के वजह से धीरे धीरे ढीला होने लगा.

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”माया की आँखें खुली की खुली रह गईं और उसे समझने में सिर्फ एक मिनट लगा कि अमित क्या मांग रहा था. करीब पांच मिनट तक यही चलता रहा, फिर अचानक मुझे कुछ गिल्टी फील हुआ और मैंने चचा जान को धक्का देकर अपने से दूर कर दिया. फिर भी नहीं हो, तब भी मैं मजा तो तुम्हारा लूँगा ही, चाहे जो करना पड़े मुझे.

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लेकिन मैंने अंजान बनते हुए कहा कि मुझे वो सब करना नहीं आता है, मैंने बस देखा है. शिशिर के लंड का मजा तो ले ही चुकी थी, अब मेरा मन सुनील के लंड से चुदवाने को बेकरार हो गया. कितना मोटा लन्ड था, मेरे हाथ में भी मुश्किल से आ रहा था और लम्बा भी काफी जैसे कि काले रंग की लौकी हो। मैंने अपना पूरा मुँह खोल के बड़ी मुश्किल से लन्ड को मुँह में लिया और लॉलीपॉप की तरह उसे चूसने लगी।वो फिर शांत हो गया और आँखें बंद करके चूसाई का मजा लेने लगा। उसके बड़े मशरूम जैसे गर्म गर्म टोपे को चूसने में बड़ा मजा आ रहा था.

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जल्दी बताओ?मैं- तुम कब करना चाहते हो?अमित- मैं तो अभी करना चाहता हूँ. अब मैंने भी मेरा कैमरा चालू कर दिया और अन्दर का सब रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया.

मुझे क्या पता था कि आगे क्या होने वाला है और अगर ये पता होता कि आगे क्या होगा तो शायद मैं कुछ ना करती.

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हमारी सांसें तेज़ हो रही थीं और हमारे चूमने की रफ़्तार भी बढ़ रही थी, हम एक दूसरे को बस चूमे ही जा रहे थे.

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मैं 69 की स्थिति में होकर उसकी चूत चाट रहा था और वो मेरा लंड चूसे जा रही. मॉम दिन में अपने ऑफिस से फोन करती थीं, मैं उस वक्त कॉलेज में होता था. मैंने उसे साफ़ मना किया और हंस कर कहा- अच्छा है, अगर तेरी कुल्फी बन गयी तो कम से कम डिलडो की तरह काम तो करेगी। आज बहुत ठरक चढ़ी है यार, और ये पीटर भी हरामी पता नहीं कहां मर गया है.

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उनके जाने के बाद मैं तुरंत भाभी के घर चला गया और जैसे ही उन्होंने गेट खोला, मैंने उन्हें कस कर पकड़ लिया. इस बार गर्मियों की छुट्टियों में सीधा गाँव अपने चाचा के घर चला गया, सबने मेरा बड़े अच्छे से स्वागत किया. इन दो जोड़ों में एक भाई-बहन थे और दूसरा देवर-भाभी लंड चूत के खेल में लगे थे.

अबकी बार भाभी मुझे भी अन्दर ले गईं और उन्होंने मेरे सामने अपनी पेंटी चेंज करवाई.

जब हम आमने सामने हुए तो हमने हाथ मिलाया और फिर हम पार्क में चले गए.

मैंने उसके बगल में लेट कर उसे किस किया और इस प्यार के लिए थैंक्स बोला लेकिन एड्रिआना ने मुझे नीचे गिराया और मेरी चड्डी उतार कर मेरे लिंग को अपने मुँह में ले लिया. फिर मैंने उसे उसी हालत में अटकाए रखा और अपने लंड से उसकी चूत के छेद पर ऊपर नीचे घिसने लगा, चूत को लंड की नोक से रगड़ता रहा. जंगल में मंगल वीडियो सेक्सउधर चचा जान अपनी रसभरी जीभ को मेरी चुत में अन्दर बाहर कर रहे थे और मेरा एक हाथ फोन पर और एक हाथ उनके सर को अपनी चुत में दबा रहा था.

मेरी उम्र 30 साल है और मैं एक मल्टिनेशनल कम्पनी में अच्छे पद पर हूँ. माया ने मुस्कुराते हुए अमित से हाथ मिलाया और सोचने लगी कि पहला प्रोजेक्ट इस हरामी के साथ. तुम भी मजाक करती रहती हो!दिव्या- मजाक नहीं यार सच में तुम बहुत अच्छी लग रही हो.

इसी कहानी के पहले भाग में अपने पढ़ा था कि दिनेश ने अपने दोस्त विक्रांत के ऑफिस में पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए एक सेक्सी लड़की भेजने की बात की थी. मैंने अपने लंड पर और उस की चूत में बहुत सारा तेल लगाया और चूत के छेद पर लंड सैट करके हल्का सा धक्का मारा, तो मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया.

मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर लगाई, उसके शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई और उसके मुँह से सिसकारी निकल गई- आहह आईई माँ उम्ह आहह…उसने अपनी गांड हिलाना शुरू कर दिया, मैं उसकी चूत को चाट रहा था और मेरा लंड उसके मुँह में था, मैं उसकी चूत के दाने को अपने होंठों से बड़े प्यार से काट रहा था.

जब वापस ऑफिस गया तो अपने पार्टनर को सब बता दिया तो मेरे पार्टनर ने मुझे बताया कि वो इसके पहले जिस पुणे की कंपनी में काम करती थी, वहीं के एक लड़के से शादी की लेकिन दो महीने के भीतर ही उसका पति चल बसा और यहाँ पर अपने मायके में रहती है. लेकिन रूचि तो चुदने को बेचैन हो रही थी, उसे अपनी चूत में लंड चाहिए था तो वो मुझे अपने नंगे बदन पर खींचने लगी. ” मैंने कहा और खुद को जोर से चिकोटी काट के सजा दी कि यह बात मुझे पहले क्यों नहीं सूझी कि बहूरानी मुझे ट्रेन से ही चलने के लिए क्यों जोर दे रही है.

देसी गर्ल कॉम भोंसड़ा है!इस तरह मेरी मम्मी को मेरे पति ने चोदा और मैं चुपके से आकर सो गई।‌‌सुबह देखा तो मेरी मम्मी मेरे पति के साथ चिपक कर सो रही थी।‌‌आप लोगो को मेरी चोदन स्टोरी कैसी लगी, मेरी कहानी पर अपने विचार मुझे मेल करें!‌धन्यवाद।‌[emailprotected]. मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर रख दिए तो उसने इसका कोई विरोध नहीं किया.

फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और पहले मैंने नीचे चला गया, कुछ देर बाद खुशबू भी नीचे आ गई. आज तो ये आलम था कि अगर मंजरी का बस चलता तो वो पुलकित के लंड को चबा कर खा जाती. हाँ दोस्तो, मैं आपको यह बात बताना भूल ही गया कि मैं उस समय पट्टे के कपड़े का सिला हुआ नाड़े वाला अंडरवियर पहनता था लेकिन आज की तारीख मैं कैसा भी कोई अंडरवियर नहीं पहनता हूँ.

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इन दो अंडर गारमेंट्स में उनके मोटे मोटे चूचे और बड़े बड़े चूतड़ देख के लंड खड़ा होने लगा. वो लड़की बात करते हुए मुझसे शर्मा रही थी, पर उसके चेहरे से जाहिर था कि उसने मेरे लंड का खूब आनन्द उठाया है. ’कुछ देर के बाद मैं अपना लंड उसकी चूत में से निकाल कर सोफे पर बैठ गया और उसे अपने लंड पर बैठने को कहा.

मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और मैं भाभी को शताब्दी एक्सप्रेस की स्पीड से पेलने लगा. मैं दूसरे कमरे में अपने अन्दर फिट किये कैमरे को लैपटॉप से जोड़ कर सरिता को कपड़े चेंज करते देखने लगा.

मैंने बिना टाइम गंवाते हुए उसकी लैगी खींच कर उतार दी और उसकी चूत में उंगली डाल दी.

मैं भी उसके निप्पल चुटकियों में भर के बड़े आराम से मसलने लगा और साथ में उसका निचला होंठ अपने होंठों से चूसने लगा. आँखें खोलते ही मैंने देखा कि उसकी गोरी कमर मेरे सामने थी और उसकी ब्रा की दोनों तरफ की पट्टी ब्लाउज से नीचे लटकी हुई थीं. तो बोलीं- ओके सबसे पहले मुझे यह बता कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?मैंने मना कर दिया- नहीं भाभी, मेरी अभी तक कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है.

इतना कह कर मैंने लेटे लेटे ही उनकी टाँग उठाकर धीरे धीरे लंड भाभी की चूत के अन्दर घुसा दिया क्योंकि ज़्यादा ताक़त तो मुझमें भी नहीं बची थी. कभी कभी किसी कुएं के पास के पेड़ पर चढ़ कर पत्तों में छिप कर पानी भरती, कपड़े धोती या नहाती लड़कियों को देखते हुए मूठ मारने का जो लुत्फ़ था मज़ा था उसकी बात ही अलग थी. उसकी चुत के पानी से उंगली गीली करके उसकी गांड में धीरे धीरे डालने लगा और दूसरी उंगली से उसकी चुत के दाने को सहलाने लगा.

फिर मैंने बरमुडा पहना और बाहर आ गया, उसके बाद तो मैंने उसे पूरे दिन अपनी गोद में उठा उठा कर चूमा और बूब्ज दबाये और चूसे पर उसने चूत को टच नहीं करने दिया.

बीपी सेक्स बीएफ: मैंने भी जल्दी करने के चक्कर में अपना लंड उसके मुँह में गीला करके उसकी चूत में रख दिया और रगड़ने लगा. आपको किसी चीज की जरूरत होगी तो प्लीज आप हमें फोन कर दीजिये, आपका वीकेंड हैप्पी हो.

अब मैंने उसकी जींस को खोलना शुरू किया, उसने मेरी इस हरकत का कोई विरोध नहीं किया. शनिवार था बच्चों का स्कूल नहीं था, तो रात को सागर आते वक़्त सबके लिए व्हिस्की लेकर आया था. फिर भाभी की चुत में उंगली डाल कर रगड़ी तो वो बोलने लगीं- आआहह छोड़ दे कुत्ते.

रात के 10 बजे होंगे, तब चाची बच्चों को सुला कर मेरे कमरे में आ गईं और दरवाजा बंद कर दिया.

मैं बोली- तू शर्माता क्यों है? मैं तेरी भाभी हूँ, अपनी बीवी समझ!वो बोला- भाभी, आप भी मजाक करती हो।मैंने अपनी छाती से अपना पल्लू हटा दिया और साड़ी उतार दी, मैंने कहा- साफ कर!वो साबुन उठा कर मेरे गाल पर लगाने लगा।मैं बोली- सारी जगह लगा ना!वो बोला- अच्छा भाभी!‌उसने अपने हाथ मेरे ब्लाऊज के ऊपर रख दिये और हुक खुलने लगा. आज मैं भाभी की चुदाई करने अपने कॉलेज से छुट्टी लेकर पहुँच जाता हूँ. उन्होंने मुस्कुरा कर पूछा- कहाँ छोड़ दूँ आपको?मैंने उस जगह का पता बताया तो उन्होंने कहा कि इसी रास्ते में उनका भी घर पड़ेगा तो उनके घर में चाय भी पी लूँ और थोड़ा हाथ मुँह भी धो लूँ जो स्टेपनी बदलने के चक्कर में गंदे हो गए थे.