बीएफ दादी

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मैंने डिसाइड किया कि गाण्ड ही मरवा लेती हूँ। मुझे पता था कि गाण्ड की गली चूत से भी टाइट होती है. தெலுங்கு செஸ்जाता रहता हूँ। मैं एक साफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूँ। यह कहानी मेरी जिन्दगी में घटी एक सच्ची घटना है। मैं आज इसे आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ।डलास मेरे लिए नया शहर है.

ऐसा नहीं कि यह परिवार शुरू से इस हालत में था, यह खाता पीता परिवार था, मंजरी के नाना की हरियाणा के एक गाँव में जमीन थी और वे गाँव के जाने माने वैद्य थे तो अच्छी खासी आय हो जाती थी. कन्नड सेक्सी विडिओकुछ देर सांस लेने के बाद मैंने आँख खोली तो उन पाँचों को अपनी तरफ ही देखता पाया।मैं जैसे तैसे उठ कर बैठी, सबसे पहले मैंने अपने बूट निकाल कर फेंक दिये, बगल में पड़ी बोतल उठा कर तीन चार तगड़े घूंट भरे, शराब गले से लेकर पेट टेक सब कुछ जलती हुई अंदर गयी.

उसके सहयोगी फ्रेंड का मुँह पदमा के पैर के बीच आ गया और वो पदमा की चूत चाटने लगा.बीएफ दादी: सिर्फ मेरी प्रियतमा ने अपनी पोजीशन थोड़ी बदल दी थी, और अब वो सोफे पर कमर के बल लेटी हुई थी और ओमार ने बिना अपना लंड बाहर निकाले मुफ्त की रण्डी को १८०° पर घुमाते हुए कमर के बल लिटा दिया था, और अपने लंड को उसकी गांड में घुसाना जारी रखे था.

‘अति उत्तेजित’ ओमार उससे कहने लगा- तेरे मुंह को आज रेस्ट नहीं मिलने वाला! ले ले ले ले ले और ले… और भरपूर धक्कों के साथ अपना मोटा लंड उसके मुंह में घुसेड़ने लगा.एकदम से नर्म चुचे पर मेरे सख्त पैर का दबाव महसूस करते भाभी ऊपर को हो गईं और मेरी तरफ देखने लगीं.

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भाभी ने सॉरी बोल कर मेरा पैर खींचा और अपनी गोद में रख कर दवाई लगाने लगीं.ये तेरा ही दोस्त है कि नहीं?इरशाद ने आगे बढ़ कर शाकिर की पैन्ट खोल दी, अंडरवियर नीचे खिसका दिया और उसके चूतड़ चूम लिए.

उस दिन से मैं उन्हें बदली निगाहों से देखने लगा और वो भी मुझे कुछ अलग नजरों से देखने लगीं. बीएफ दादी वे मेरे ऊपर चढ़ बैठे, औंधे हो गए मेरी टांगें अपने हाथ से दूर दूर कीं और गांड में पेला हुए लंड पूरा जड़ तक पेल दिया.

करीब 5 मिनट बाद ही भाभी ज़ोर से चीखती हुई झड़ गईं- आह… आआह… गई… आआह… जान… आह… रूको… आह…भाभी मेरे ऊपर गिर गईं… पर मेरा तो अभी बाकी था, तो मैंने उन्हें तुरंत नीचे लेटाया और टांगें फैला कर अपना मूसल लंड एक ही झटके से पूरा पेल दिया.

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पुलकित मंजरी को रेस्तराँ में ले जाता, खूब खिलाता पिलाता, मंजरी बहुत खुश थी क्योंकि वो खाने पीने की शौकीन थी. अपनी चूत पर मेरी जीभ का अहसास पाते ही वो बहुत उत्तेजित हो गई और उछल उछल कर चूत चटवाने लगी. मैंने पूछा- क्या अभी भी आप मुझसे नाराज हो?तो बोलीं- तुझे ये बातें मुझे बतानी चाहिए थीं.

अब मुझे वो आदमी काफ़ी भला और शरीफ लगा, तो मैंने कहा- मैं बहुत थक चुकी हूँ, मुझे आप आगे किसी भी ऐसे स्टैंड पर छोड़ दीजिएगा, जहां से मैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट ले सकूं. ठीक है सब कुछ उतार के इस बिस्तर पर सीधे लेट जाओ, मैं तुम्हारी झांटों की मस्त वी शेप बनाता हूँ. रास्ते में बारिश की वजह से ठंडी ठंडी हवा चल रही थी, जिससे ठण्ड लग रही थी और ठंड की वजह से वो बार बार मेरे पास को हो रही थी.

यह सब तो मेरे लिए चुटकी बजाने जैसा आसान काम था क्योंकि शहर के 80% कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट मुझ से जुड़े थे. उस समय बिजली भी नहीं आ रही थी, सब खेल रहे थे मैं बार-2 मौका देख कर कविता के साथ छिप जाता और उसे होंठों से खेलने लगता व उसकी चुची को मसलने लगता और वो बोलती- छोड़ दो यार, कोई देख लेगा तो मुसीबत में फंस जायेंगे. वो कुछ भी नहीं बोला और चुपचाप खड़ा रहा पर उसकी आँखें नियत्रण में नहीं थीं.

अदिति बेटा, तू इतनी बदल कैसे गयी, पहचान में ही नहीं आ रही आज तो?”अच्छा, ऐसा क्या दिख रहा है मुझमें जो पहले नहीं दिखाई दिया आपको?” बहूरानी जरा इठला कर बोली. अब क्या पड़ोसी से उधार लेकर आऊं?वो हंसती हुई अपनी गांड आगे पीछे करके चुदवाने लगी.

इतना कह कर उसने पास रखी बियर की बोतल उठाई, दांतों से ही उसका ढक्कन खोला और अंगूठे से बोतल बंद करके जोर से हिला कर उसका फव्वारा सीधा मेरे बदन पे चला दिया। ये सब इतनी जल्दी हो गया कि मेरे समझने से पहले ही बियर की पहली धार मेरे बदन से टकराई और उसके ठन्डेपन से मेरी रीड की हड्डी तक को जमा दिया। मेरे मुँह से न चाहते हुए भी लम्बी चीख निकल गयी.

एक दिन दोपहर को टीवी देख रहा था और मानवी खुद नीचे आ गई और मुझसे कहने लगी- भैया, प्लीज़ आप मेरे साथ ऊपर चलेंगे?मैं- क्या हुआ भाभी?मानवी- सफाई करते वक़्त मेरे से टीवी का रिमोट बेड के नीचे गिर गया है और अब मुझसे निकल नहीं रहा.

जॉब मुझे कैम्पस प्लेसमेंट से मिल ही गई थी और जयपुर में ही ज्वाइनिंग थी. मैंने जल्दी से उनकी ब्रा उठाई और उनके मुँह में ठूंस दी और हाथों में अपना लंड पकड़ा दिया. मैं बोला- दीदी, मैंने कभी किस नहीं किया, मुझे नहीं पता कि किस कैसे करते हैं.

उसने मेरी जींस के चैन खोली और लंड को बाहर निकाला, उसे हाथ में लेते ही वो बोली- ये तो इतना लंबा है रे!मैं समझ गया था, वो इतना लंबा मूसल लंड सहन नहीं कर पाएगी, मेरा लंड 7 इंच लंबा 3 इंच मोटा था. समझ नहीं आ रहा, मगर जो भी है मेरी पूरी फैमिली शादी में जाने वाली थी. मैंने कहा- क्यों क्या हुआ?तो बोलने लगी- मैंने सुना है कि लड़की की जब पहली चुदाई होती है, तो बहुत दर्द होता है और मैं भी तो पहली बार आज चुदने वाली हूँ.

तभी मैंने तेज तेज धक्के मार कर मैंने अपना सारा वीर्य छाया भाभी की प्यासी चुत में छोड़ दिया.

मुझको भी जोश आ गया और मैंने पीछे हाथ ले जाकर चाची की गांड को सहलाना शुरू कर दिया. कुछ देर तक उसकी चूत के दाने को सहलाने के बाद वह फिर से थोड़ी शान्त हुई. खैर ये तो रही पुरानी बातें, पर ये बात आज की है अब मैं 21 साल का हो गया हूँ और अब अपने लंड की आग को संभालना मेरे लिए और भी मुश्किल हो गया है.

यह थी मेरी पहलीहिंदी सेक्स कहानी, आप को कैसी लगी प्लीज़ मुझे रिप्लाई करना ना भूलें. आपने आध घंटे तक रगड़ा था, मेरी गांड लाल कर दी थी, आज तक चिनमिना रही है. उसने जाते जाते मुझे इनडायरेक्ट्ली बस इतना कहा कि कुछ ग़लतियों की कोई माफी नहीं होती.

वो बोली- हम्म… तो ये बात है जनाब… फिर अब तक मेरे को बोला क्यों नहीं तुमने?मैं बोला- बस मैं कहने से डरता था, कहीं तुम मना ना कर दो.

लेकिन दो सेकंड का विश्राम देने के बाद दोबारा लंड को मेरी पत्नी के मुंह में घुसेड़ कर चुदाई करने लगा लेकिन इस बार धीरे धीरे… इस इंटरवल के दौरान मेरी धर्मपत्नी को भी थोड़ा ऊपर सरक आने का मौका मिल गया था और इसकी वजह से अब ओमार को खासी जगह मिलने के कारण वो लहरा लहरा कर गांड में धक्के मारने लग गया. फिर मयूरी खुद ही दरवाज़े की तरफ बढ़ी और ऐसे झुकी जैसे पीछे से मोहन लाल को अपनी गांड के दर्शन करवाना चाहती हो और दरवाज़े को अन्दर से बंद करने की कोशिश करने लगी.

बीएफ दादी अभी लंड पेला भी नहीं था कि वो मादक सिसकारियां लेते लेते फिर से झड़ गई. उनका एक पैर ड्रेसिंग टेबल पर रखा और एक नीचे को थोड़ा सा झुकाया और शीशे में देखते हुए उनकी चूत में लंड पेल दिया.

बीएफ दादी मैंने पूरी पैंटी उतार दी और उसकी नंगी चूत पर अपना नाक लगा कर सूंघने लगा. अब ब्रा निकाली और वो मैं पहन ना सकी क्योंकि वो रबड़ की तरह थी जैसे बालों में लगाने वाली रबड़ होती है.

” मैंने अपने लंड पर ढेर सारी चॉकलेट क्रीम लगाई थी, जिसे देखकर वो हँसे जा रही थी.

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मैं ज्यादा कुछ बोलती, उससे पहले तो संजय ने मेरा हाथ खींच कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया. पुलकित तो हमेशा ही उसकी अमरूद की सी चूचियाँ दबाता, उसके चूतड़ सहलाता… कपड़ों के ऊपर से ही या हाथ अंदर डाल कर उसकी चूत को सहलाता. छोटी वाली लड़की कल्याणी मेरी तरफ़ देख रही थी उसने पूछा- आप कहां थे?मैंने कहा- मैं दूसरे कोच में था!सब विदा होने लगे तो फिर से मिलने के लिए कहा और आंटी ने अड्रेस भी दिया.

उन्होंने कुछ नहीं बोला और मैक्सी नीचे करके मुझे अपने से चिपका कर सो गईं. मुझे बहुत दर्द हो रहा था इसलिए वो मेरे होंठों को अपने होंठों से दबाए था. तो मैं वहां पर से जल्दी से भाग कर चुपचाप बाहर सड़क में आ गया और मेनडोर को फिर से बंद करके घर से दूर जाकर छुप गया, ताकि वे मुझे न देख लें.

दीदी ने पंजाबी सूट पहना हुआ था जो बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि दीदी का जिस्म भी शोभा दीदी की तरह भरा हुआ था, मोटी नहीं थी लेकिन स्लिम भी नहीं थी, बूब्स और गान्ड भी एकदममस्त थी, जैसे कोई 20-22 साल की पंजाबी लड़की होती है, एकदम गोरी चिट्टी और भरे हुए जिस्म की मालकिन!साला दिल किया कि अभी यही चोदना शुरू कर दूं.

इसलिए घर में उसके अन्दर आने पर मैं उसको देख कर ज्यादा हैरान नहीं हुआ. मैंने हाथ बढ़ा कर ब्रा को पकड़ा, तभी दीदी ने मेरे हाथ को पकड़ा लेकिन मैं नहीं रुका और ब्रा को निकालने लगा. कॉलेज के बहुत से लड़के उसके सामने प्रोपोज कर चुके थे मगर उसने किसी को घास नहीं डाली मगर कॉलेज के पहले दिन से जब से उसने राहुल को देखा, उसे प्यार करने लगी थी पर उसके लिए पढ़ाई सब चीज़ों से पहले थी.

खैर मैंने ढेर सारा थूक उसकी बुर पर लगाया और उसके मम्मों के ऊपर लंड लाकर कहा- मेरे लंड को अपने थूक से भर दो. अब मैं कभी उसके लबों को चूस रहा था तो कभी उसके निप्पल को… साथ साथ मैं उसकी चूत पर अपना लंड घिस रहा था तो उसे बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी. इधर सुकुमारी भौजी सिसकारियां लेती हुई खुले खेत में पूरी तरह चूत खोल कर लेटी थीं और मैं उनके ऊपर चढ़ा था.

दो बजे छुट्टी के बाद मैं निकल रहा था कि निर्मला जी ने आवाज दी- अतुल रुको, मुझे कमला मार्केट जाना है कुछ सामान लेना है, मैं स्कूटी नहीं लाई हूँ, तुम अपनी गाड़ी से ले चलो. बोलीं- ऐसा मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ इतना अच्छा सेक्स होगा.

भाभी की चुत बिल्कुल गीली हो चुकी थी; मैंने थोड़ा सा उनके पैरों को ऊपर उठाते हुए फैलाया और उनकी चूत के मुँह में लंड का टोपा लगा दिया. अंकित से रहा ना गया और उसने अपनी एक उंगली माया की गांड में डालनी चालू की. मेनका- क्या मैं तुझे अच्छी लगती हूँ? बस ये बताओ?मैं- हाँ दीदी, लेकिन पापा?मेरे कुछ कहने से पहले ही दीदी खुशी से झूमने लगी जैसे उनकी कोई बरसों पुरानी दुआ भगवान ने आज सुन ली हो.

तो चाची ने मुझे तेल दे दिया और मैं सर पर तेल लगाता हुआ डांस करने लगा.

स्लेटी रंग के फूलों वाले प्रिंट की लॉन्ग फ्रॉक पहने मंजरी बहुत खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी. अब मैंने उससे कहा कि मैं तेरी गांड मारना चाहता हूँ, उसने साफ मना कर दिया कि बहुत दर्द होगा. अगर अभी पांच मिनट में अगर तू न आती तो मैं निकल जाता घर!वह बोली- ओ के सॉरी बाबा, आगे से ऐसे नहीं करुँगी.

तभी मुझे याद आया कि मेरा फोन ऊपर है, सो मैंने सोचा कि जाकर ले आती हूँ. फिर मैंने गाड़ी मार्केट की ओर घुमा दी और वहां से उसके लिए एक टॉप खरीद कर लाया, वो गाड़ी में ही बैठी रही.

मैं अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए बोला- मेरी जान आज तो मैं तुम्हें थका कर ही दम लूँगा. ममता जी अब बिल्कुल नंगी मेरे नीचे लेटी हुई थी और मैं उनके मखमली बदन के स्पर्श का मजा ले रहा था. कार को दीदी का बॉस दयाल ड्राइव कर रहा था और पीछे की सीट पर दीदी के ऑफिस के दो बड़े ऑफिसर राकेश और सतीश बैठे हुए थे.

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सुकुमारी भौजी के ऐसे कर्णभेदी शब्दों ने मेरे लंड को खड़ा करने में पुरजोर समर्थन दिखाया और मैं उठ कर खड़ा हुआ.

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इतने में विक्की भी अपना लंड निकाल लिया और पूजा की चूत में फेरने लगा और चुचियां चूसने लगा. मैंने कहा- भाभी आप दर्द का कारण बताएंगी, तब ही तो दर्द का इलाज होगा.

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इतने में मैंने महसूस किया कि दो लड़कियाँ जो उम्र में मुझसे छोटी लग रही थी, मुझे परेशान करने लगी, वो कभी मेरे ऊपर पानी डाल देती तो कभी एक दूसरी को धक्का मार कर मेरे ऊपर गिराती और फिर मेरे ऊपर हंसती.

मैं घबरा गया और जल्दी से वीडियो बंद करके उठ गया लेकिन मेरा लंड अभी उसी हाल में था. बहूरानी, एक गिलास पानी ले आ… और फिर चाय बना दे जल्दी से!” प्रत्यक्षतः मैंने कहा.

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जैसे ही वो घर से बाहर निकला, मैंने बहूरानी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वो मेरी गोद में आ गिरी. मैं अन्दर गई और एक एक करके सारी ड्रेस पहन कर देखीं, पर अवी को नहीं दिखाया और बाहर आकर बताया कि जो सबसे पहले अवी ने पसंद की थी, वो और जो मैंने पसंद की थी वो. मैंने पूछा- आपने xxx वीडियो ढूंढी कैसे?तो बोलीं- रिसेंट डाक्यूमेंट्स से.

बीएफ दादी जॉब मुझे कैम्पस प्लेसमेंट से मिल ही गई थी और जयपुर में ही ज्वाइनिंग थी. वो मुँह ऊपर करके जोर से हंसने लगीं और फिर जब मुँह नीचे करके मेरे लंड को देखा तो कुछ बोली नहीं.

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हां तो मैंने बात आगे बढ़ाने की सोची और मैंने उससे पूछा- कहां जा रही हो?पूनम (उसका नाम) ने कहा- क्यों?मैं- मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. रास्ते में गियर बदलने के बहाने कभी कभी उसके पैरों को छूना, कभी ब्रेक मारना, कभी उसके सीट बेल्ट लगाने के बहाने उसके मम्मों को दबाना, यह सब हरकतें करता रहा. मैंने सोचा कि हो सकता है माँ को सब पता हो इसलिए ये कुछ नहीं बोल रही तो मैं उनकी साइड घूम गया और अपने हाथ को उनके ऊपर इस तरह रख दिया कि उन्हें लगे कि मैं सो रहा हूँ.

तो चाची ने बाथरूम से आवाज़ दी कि मम्मी पापा मार्केट गए हैं और मैं बाथरूम में हूँ, कुछ देर रुक जाओ, मैं आती हूँ. कल्याणी- झूठ मत बोलो, कॉलेज में ब्लू फिल्म भी नहीं देखी क्या?मैं- लैपटॉप में तो ब्लू फिल्म देखी है. ল্যাংটো নাচरजनी ने जल्दी से नाइटी का बेबी फीडिंग हुक खोला और चिंटू को दूध पिलाने लगी.

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भैया जाते वक्त मुझसे बोले- मुझे कुछ दिनों का काम है इसको कुछ दिन घुमाने के बाद घर जाने के लिए स्टेशन तक छोड़ आना, ये अभी कुछ दिन तुम्हारे पास यहीं रुकेगी.

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मैंने हैरत से कहा- ये मेरे लिए है!अमित ने खड़ा होकर कहा- हां जानेमन जी. कुछ देर बाद वो बोले- मैं जाने वाला हूँ, कहाँ डालूं?मैंने उनको बोला- मेरी बच्चे दानी में डाल दो राजा जी!उन्होंने अपने रस को मेरी चूत में डाल दिया. फिर मैं उठ कर उसके गले लग गई, इसी जल्दबाजी में उसने अपनी तौलिया मेरे ड्रेस में फंसा दिया और मेरी ड्रेस की पूरी चैन खोल दी.

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काम बन गया तो चूत और जेब दोनों खुश।पर जैसे ही वो विक्रांत के ऑफिस में घुसने वाली थी उसने देखा कि विक्रांत फ़ोन पे हेडफोन लगा कर कुछ देख रहा है और देखते हुए पैंट के ऊपर से ही अपने लन्ड को सहला रहा है।वो समझ गयी कि विक्रांत पोर्न देख रहा है.

जो अपने पति से चुदने का मजा नहीं ले पा रही थीं। परन्तु वो कोई अपने देवर से.

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वो तो सिर्फ बेड पर बैठी थी… गाउन के क्लिप खुल गए… मैंने उसका गाउन उतार फेक दिया… वो सिर्फ पेटीकोट और निकर पर ही थी. पर मेरा मन नहीं भरा था सो मैंने उसको लेटाया और उस पर चुदाई करने को चढ़ गया.

?रमेश की जोरदार चुदाई वाले धक्के की वजह से उसकी आवाज़ रुक रुक कर निकल पा रही थी.

एक दिन सुरेंदर भैया ने मुझसे कहा कि उनको 10 दिनों के लिए ऑफीशियल टूर पर जाना है और मैं उनके पीछे उनके घर का ध्यान रखूँ. और आज साक्षात् वही मयूरी उसके सामने नंगी खड़ी होकर उसको रिझा रही थी. चाची तड़फ कर लंड बाहर निकालने की क़ोशिश करने लगीं, लेकिन मैंने उनको जकड़ किया और उनके होंठों से होंठ चिपका कर उनकी चूचियों को मसलने लगा.

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अब हमारा क्या होगा?सुदेश- चल अन्दर चलते हैं और साली को बोलते है कि तेरी सारी रासलीला देखी हमने. कुछ देर बाद कमल बेड पर मेरे पास आकर मेरे ऊपर आ गया और मुझे किस करने लगा. अब मेरे दोनों हाथों में ममता की चूचियां थीं, जिन्हें अब में बेदर्दी से जोर जोर से मसल रहा था और उसकी चूत को अपने लंड से चोद भी रहा था.

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फिर मैं उठ कर उसके गले लग गई, इसी जल्दबाजी में उसने अपनी तौलिया मेरे ड्रेस में फंसा दिया और मेरी ड्रेस की पूरी चैन खोल दी. दो पल तक तो उसने बड़े प्यार से मेरे गले पे हाथ फेरा और यकायक उसने मेरा गाला कस के पकड़ कर तेज तेज चोदना चालू किया।जैसे उसके धक्के तेज होते गए वैसे मेरी सांस घुटती गयी, मुखड़ा लाल होने लगा. मंजरी ने बहुत बार पुलकित के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर देखा था, एक दो बार पुलकित के कहने पर अपने मुंह में लेकर चूसा भी था.

अब मुझे वर्षा से कोई खुन्नस नहीं थी,मैंने अपनी सगी छोटी बहन को बेरहमी से चुदवाया और अपनी इस घिनौनी आदत से मुझे बहुत आत्म ग्लानि होती थी. कुछ देर बाद विनोद का फ़ोन आया कि स्वाति हम बाहर खड़े हैं, तुम बाहर आ जाओ.

भाबी ने कहा- सत्या, मुझे जोर से भूख लग रही है, चलो चल कर कहीं खाना खाते हैं.

उस दिन शाम में मीना आंटी ने अपने पड़ोसी को मेरी ट्यूशन क्लास के बारे में बताया कि कैसे मैंने पिंकी और रोशनी को पढ़ाने के साथ साथ उनकी बॉडी लैंग्वेज भी विकसित कर दी है. पहले तो राज को देख कर बहुत ज्यादा गुस्सा आया मुझे… पर उन दोनों को देख कर मेरी चुत भी गीली होने लगी. यही फायदा होता है लड़कों के साथ में शॉपिंग करने का, बहुत प्यारी ड्रेस खरीद कर लाई हो.

और तुमने ही तो कहा था कि मेरे पास ऐसी ड्रेस नहीं है, जो मैं पहन कर तुमसे मिलने आ सकूँ. फिर अचानक वो एक बार मेरे होंठ के पास आई और मेरे होंठों पर किस करके उसने सीधे मेरे लंड को पकड़ कर सुपारा अपने मुँह में भर लिया. तभी वो बड़ी मीठी सी आवाज़ में बोली- बाहर से खड़े होकर ही देखते रहोगे या अन्दर भी आओगे?मैंने हल्की सी स्माइल की और अन्दर आ गया.

उसको अपनी गोद में बैठाते ही नीचे से मेरा लंड खड़ा होकर ममता की गांड के छेद में घुसने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ था.

बीएफ दादी: उधर सुकुमारी भौजी फसल काट रही थीं इधर मैं लंड हिलाते हुए समय काट रहा था. अब वो आराम से मेरे लंड को मुँह के अन्दर-बाहर करने लगी थी, जैसे बच्चे लॉलीपॉप खाते हैं, उसी तरह वो मेरा लंड चूस रही थी.

आह…मैंने उन्हें चुप कराने के लिए तुरंत ही उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए. मैंने कहा- ममता भाभी जब तुम सोच चुकी हो तो बता क्यों नहीं दिया कि तुमने क्या सोचा कि तुम मेरा लंड अपनी चूत में लोगी कि नहीं, यदि मैंने नहीं पूछा तो तुम ही बता देतीं. बाजू वाला लड़का भी जोश में आ गया और उसने भी अपनी उंगली बहन की चुत में घुसा दी.

वो खाने के बारे में, मेरी जॉब के बारे में बातें कर रही थीं, मैं कब अमेरिका आया, या कभी घूमने के लिए इंडिया गया कि नहीं, मेरी पसंद नापसंद वगैरह की बातें कर रही थीं.

भाबी ने मेरा लंड पकड़ा और गौर से देखने लगीं और देखते देखते लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं. फिर उसने अपना माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेटा रहा. ऐसी ड्रेस पहनने को मैं सपने में भी नहीं सोचा था और अब इस तरह देख के मैंने ये निश्चय कर लिया कि मैं दूसरी ही पहन कर जाऊँगी, ये नहीं.