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दोस्तो, प्रिया का फिगर तो आपको पता ही है 30-26-30 चलो अब प्रिया को नंगी भी देख लो।जैसा कि मैंने पहले आपको बताया था प्रिया थोड़ी साँवली है लेकिन दोस्तों रंग का कोई महत्व नहीं होता. तो मैं सीधा उसे लेकर बाथरूम में चला गया और वहाँ जाकर फव्वारा चालू कर दिया जिससे हमारे कपड़े भीग गए और हमारे जिस्मों से कपड़े चिपक गए थे।मैंने देखा कि उसने अन्दर ब्रा नहीं पहन रखी थी. मैंने मना किया और अब मैं अपने मँगेतर हिलाल से बातें करने लगी और उसको पसंद करने लगी।हालांकि मैंने हिलाल को नहीं देखा था क्योंकि वो कराची में था और मैं एबटाबाद में थी।हम मोबाइल पर बातें करते.

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मुझे बड़ा अपनापन सा लगा।जॉन्सन अंकल भी मेरे पापा की उम्र के थे और वो दोनों तो मेरे बाबा की उम्र के थे.

मैं अन्तर्वासना पर लगभग एक साल से कहानियाँ पढ़ रही हूँ लेकिन कभी कुछ लिखा नहीं है, कोई सेक्सी कहानी नहीं लिखी है. उम्म्म स्स्स्स्स्श्ह्ह’ के साथ अपनी कमर बिस्तर पर पटकने लगी।सबसे ताज्जुब वाली बात तो यह थी कि उसकी चूत में इतनी गर्मी थी कि जल्द बर्फ का दम घुट गया और रिस कर बाहर बह गई. lund koStranger: muje laga tum thak gayeStranger: uhhhhhhStranger: ahhhYou: maine… tumhe… jhatke maar maar ke chhodane lagaStranger: ahh ahaStranger: ahh ahahStranger: ishhhhhYou: aur… mamme masalke.

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पूरी दोपहर बैठ कर थक गए हैं।दोनों कमरे में जाकर लेट जाते हैं। अनुजा विकास की पैन्ट का हुक खोलने लगती है।विकास- क्या बात है.

अगर मुझसे कोई ग़लती हो तो माफ़ कर देना।मेरी यह कहानी काफ़ी समय पहले की है जब मैं स्कूल में पढ़ता था। मेरा स्कूल घर से करीब एक किलोमीटर दूर था. उसके हाथ का दबाव पा कर मैं भी बस अपना हाथ उसकी चूत पर फिरा रहा था।उसकी चूत पर थोड़े-थोड़े रेशमी बाल थे. वो 38 साल की और अंकल 50+ के और बहुत मोटे थे।मेरे घर आने-जाने के कारण उनकी हमारे घर के सदस्यों से अच्छी जान-पहचान हो गई।वो मुझे अंकल के न रहने पर घर बुलाती थीं और पेट के बल लेट कर अपने पूरे बदन पर सिर से पाँव तक पैर से कचरने को कहती थीं।जब मैं उनके चूतड़ों के ऊपर पाँव रखता.

पानी पिया और थोड़ा उसे भी दिया।उसके बाद पानी की बोतल एक तरफ रख कर मैं लेट गया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया।इसके बाद उसकी चुदाई का नम्बर था क्या मैं उसको आज चोद पाया?इससे मैं आपको रूबरू कराने के लिए कहानी के दूसरे भाग में ले चलूँगा।आप मुझे मेरे ईमेल के ज़रिए मुझे अपने विचार लिख कर भेज सकते हैं।. लेकिन दो दिन तक कोई जबाब नहीं आया था। अब तो मुझे उसे चोदने का सपना टूटता सा नज़र आ रहा था। मैं बहुत परेशान रहने लगा था. !इस सबसे मेरा लन्ड खड़ा हो जाता था, पर मैं दिन में कुछ नहीं कर सकता था। रात में जब सब सो जाते थे तब उसकी याद में नींद नहीं आती, तो सोच-सोच कर मुठ मारता था।एक दिन भाभी बोलीं- तुम बहुत गन्दे हो अक्सर तुम्हारी पैन्ट गन्दी हो मिलती है.

मस्त उभरे हुए चूतड़ों से तो कलेजा हलक में आने को हो जाता है।बाकी फालतू बातें तो आप और कहानियों में पढ़ ही लेते हैं। वो एक जूनियर स्कूल में पढ़ाती थी। उस स्कूल के 26 जनवरी के प्रोग्राम में मेरी और उसकी मुलाकात हुई थी। उस स्कूल में मेरी एक फ्रेंड जिसका नाम अंशिका है.

मैंने पैर उठा कर पूरी पैन्ट निकाल दी। अब मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था। वो मेरे लण्ड को अंडरवियर के ऊपर से ही दबा रही थी. जो धूप के कारण हीरे जैसी चमक रही थीं।अब मैं अब एकटक उसको देखे जा रहा था। वो भी बड़े मजे से नहा रही थी। वो कभी अपनी चूचियों पर साबुन लगाती.

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मैंने फिर ‘ओके’ कह दिया और बस फिर जो हुआ वो क़यामत था।मेरी सहमति के बाद उन दूसरे अंकल ने सीधे टी-शर्ट पकड़ी और मेरे जिस्म से खींच कर उतारने लगे.

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चल अब काम पर लग ही जाते हैं।वैसे भी अभी गाण्ड भी मारनी है गाण्ड मारने का ख़याल आते ही मेरा ध्यान उसके छेद पर गया जो कि काफी कसा हुआ था।मैं सोच में पड़ गया कि मेरा लौड़ा आखिर इतने छोटे और कैसे छेद को कैसे भेदेगा।इतने में ही मेरे दिमाग में एक और खुराफात ने जन्म लिया और वो यह था कि माया की गाण्ड का छेद बर्फ से बढ़ाया जाए. मुझे अब जाना चाहिए।फिर मैंने उसे कपड़े पहनाए और उसने मुझे। फिर वो मुझे चुम्बन करके चली गई और मैं भी अपना बिस्तर ऊपर लेकर आ गया।दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी कैसे लगी, मुझे जरूर बताना।आपका राज. थोड़ी देर बाद कॉलेज का हर गार्ड चोदेगा और फिर सारे मादरचोद तुम्हें उस ठरकी चेयरमैन से भी चुदवाएंगे।”यह कह कर मैंने अपना हाथ हटा लिया। सोनम की पीठ मेरे सीने से चिपकी थी.

मैं बड़े ही प्यार से धीरे-धीरे चोदूँगा और तुम्हें कोई तकलीफ़ नहीं होने दूँगा।मैंने उसके चेहरे को हाथों में लेकर उसके होंठों पर एक प्यार भरा चुंबन जड़ते हुए कहा।‘लेकिन जीजू. प्लीज देखना बहुत दर्द कर रहा है।पहले तो मैं चौंक गया फिर मैंने स्थिति को हल्के में लिया और कहा- ठीक है. नीचे के मैं उतारता हूँ…तभी दादा जी ने मुझसे कहा- निकी, तुम अब आँखें खोल लो।मैंने ‘ना’ में सिर हिलाया तो बोले- खोल लो आँखें.

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मैंने सुनते ही जोरदार एक झटका लगाया ही था कि लंड चूत की गहराइयों में जा कर बच्चेदानी से जा टकराया होगा।भाभी के मुँह से चीख निकली- मारेगा क्या मुझे. प्लीज़ इसे गलत मत लो।अंकिता की आँखों में मुझे सच्चाई लगी और वो आंसू की बूँदें मुझे झकझोर गईं।मैंने अंकिता को पकड़ कर मजाक में कहा- अरे. जल्दी कर भड़वे आह…बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है। अब आप जल्दी से मेल करके बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं!तो पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए…मुझे आप अपने विचार मेल करें।[emailprotected].

मैं अपने कमरे में आया और वो भी नहा-धो कर खाना बनाने की तैयारी करने लगी।आपसे फिर मुलाक़ात होगी, मुझे ईमेल जरूर लिखिएगा।. मैं गोपाल गया, बिहार से हूँ।मैं अन्तर्वासना काफी दिनों से पढ़ता आया हूँ लेकिन मैंने कभी कहानियाँ नहीं लिखीं, पर मैं आज आपके सामने एक सच्ची कहानी लिख रहा हूँ।पहले मैं अपने बारे में बताने जा रहा हूँ, मेरा रंग साँवला है, कद 5’2’’ और मैं एक पैर से विकलांग हूँ, पर लण्ड 6 इन्च लम्बा 2 इन्च मोटा है और मजबूत है, उसमें तनाव भी अधिक है, मैं इसलिये यह लिख रहा हूँ कि मैं पैर से विकलांग हूँ, लण्ड से नहीं. लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी।एक दिन मैं और वलीद हमारे घर के एक कमरे में सीट पर दोनों साथ बैठे बातें कर रहे थे।सारे घर वाले बाहर थे.

!” सभी बोले।मैं दूर दरवाजे के पीछे कड़ी सब देख रही थी और मुझे सिर्फ संधू देख रहा था उसने बोला- अबे तेरा औजार भले खड़ा हो गया हो पर तेरी बुद्धि कभी नहीं खड़ी होती है।”क्या मतलब है बे तेरा संधू।”खन्ना और शर्मा समझ गए थे सो वे हँसने लगे और खन्ना बोला- संधू ठीक कह रहा है. कितनी गंदी हो गई है?मैंने तुरंत आज्ञाकारी बच्चे की तरह चाची की ब्रा के हुक को पीछे से खोला और निकाल दिया।अब चाची कुछ और ही रंग में थीं- बेटा.

उनकी गीली बुर और बुर रस में भीगे होने के कारण पूरा लंड एक बार में अन्दर तक घुस गया। फिर मैं फुल स्पीड में धक्के लगाने लगा। मेरे चेहरे से पसीना. मैंने चुपके से अपना दरवाजा खोला ओर निकल गया।आंटी के पास पहुँचा तो जाकर देखा कि गेट के पास उनके ससुर सोए हुए थे. जो बड़ी थी उसने इशारे से मुझे बुलाया।मैं चूत पाने की हसरत में लपक कर दीवार पर चढ़ गया।वो बोली- तुम्हारा ‘वो’ बहुत मस्त है। तुम हमसे दोस्ती करोगे?मैंने कहा- दोस्ती बराबर की होती है.

इसके जैसा शायद किसी के पास नहीं होगा।भिखारी एकदम घबरा गया और झटके से उठ गया।इसी हड़बड़ाहट में तौलिया खुल कर उसके पैरों में गिर गया और फनफनाता हुआ उसका विशाल लौड़ा आज़ाद हो गया।भिखारी- न.

जो औरतें पूजा में लगाती हैं।मैंने सोचा आज तो भाभी को चोदे बगैर रह ही नहीं पाऊँगा…मैंने रसोई में जाकर भाभी के लिए गिलास में कोल्ड-ड्रिंक निकाली और उनके गिलास में 2 स्पेशल वाली गोलियाँ भी पीस कर डाल दीं। इनसे किसी भी औरत को गरम करने में तो मदद मिलती ही थी बल्कि वो गहरी मदहोशी में रहती थी. मैंने अपनी हाथ वाली तौलिए से अपने जिस्म को ढकने की बहुत कोशिश की और उसको बहुत ही गुस्से से कहा- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे कमरे में आने की. फ़िर हम लोग घर पहुँच गए।भाभी ने खाना बनाया फ़िर खाना खाने के बाद मैंने कहा- अब सुहागरात मनाते हैं।भाभी ने कहा- थोड़ी देर इंतजार करो।मैंने कहा- ठीक है।भाभी ने कहा- जब तक तुम बाहर हो आओ।फ़िर जब मैं थोड़ी देर बाद कमरे में गया.

लेकिन छोटी थी इसलिए किसी को ना कह सकी।अब वो हर वक़्त मेरे साथ होने का बहाना ढूँढने लगे।मैंने भी इतना गौर नहीं किया।फिर कुछ दिनों बाद मेरा ब्वॉय-फ्रेंड वलीद कराची से आया हुआ था।वो भी मेरा रिश्तेदार था तो मेरे घर आया हुआ था।हम एक-दूसरे से मुहब्बत भी करते थे. सहेली ने दिया है…वो मुझसे रोज मिलता था।इम्तिहान के आखिरी वाले दिन वो मुझे बाइक पर बिठा कर घर तक छोड़ने आया।उसको देख कर माँ भी बहुत खुश हुईं।हम काफ़ी वक्त बाद मिले थे।माँ पड़ोसन आंटी के पास चली गईं और मैं और नवीन मेरे कमरे में आ गए थे।तभी नवीन ने मुझे पकड़ लिया और जबरदस्त चुम्बन करने लगा।मैं भी उसका साथ देने लगी।फिर उसने मेरे मम्मों को दबाना चालू कर दिया।दस मिनट हम यूँ ही करते रहे.

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अभी पढ़ना जरूरी है।दीपाली उठ कर बाथरूम चली जाती है उसके बाद पढ़ाई चालू।एक घंटा पढ़ने के बाद दीपाली घर चली जाती है।रात का खाना खाकर वो अपने कमरे में बैठी हुई कुछ सोच रही थी। दीपाली को प्रिया की कही बात दिमाग़ में घूमने लगी वो अपने आप से बातें करने लगी।दीपाली- क्या ऐसा हो सकता है प्रिया के मन में ये बात आई कैसे.

अतः मैं कभी पकड़ा नहीं गया। मेरी उनके साथ चुदाई बेरोक-टोक चलती रही।एक दिन वो अपने प्रेमी के साथ भाग गईं और आज तक लौट कर नहीं आईं।रीता दीदी आप जहाँ भी हो. दीदी की गान्ड ही याद आ रही थी।वो रात को कॉटन की कैपरी और टी-शर्ट पहनती थी।करीब आधा घंटे के बाद मैं उसके बिस्तर के पास गया और धीरे से उसकी गान्ड पर हाथ फ़ेरने लगा।मेरा लन्ड खड़ा हो गया था। बाद में मैं उसके मम्मों को दबाने लगा।आह्ह्ह्ह्ह्ह. फिर मैंने चाची की पैन्टी को छोड़ा और चाची की कमर के बगल से दोनों हाथ पैन्टी में डाल कर पैन्टी नीचे करने लगा.

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धीरे-धीरे मैं नीचे की तरफ आई। जब मैंने साबुन को चूत पर लगाया तो मेरी चूत में खुजली होने लगी और उसमें आग लगने लगी, जैसे मेरी चूत मुझसे कह रही हो- रॉक्सी डाल इसमें कुछ. उसका एक हाथ मेरी गाण्ड पर था और मेरी गाण्ड को सहला रहा था।अचानक उसने अपनी ऊँगली को मेरी गाण्ड के छेद में डाल दिया. Chachi Ki Chudas Ka Ilaj-4चाची की चुदास का इलाज-3मैं अब अपने आपे से बाहर होता जा रहा था। एकदम सेक्सी चाची और मैं इस स्थिति में.

Bada Lund Choot Me Kaise Jayegaमेरा नाम सैंडी है, यह मेरी पहली कहानी है, मैं सोनिया को बहुत चाहता हूँ। वो बहुत ही सेक्सी लड़की है. मेरे अन्दर जैसे बिजली सी दौड़ जाती।फिर उसने मेरी पैन्टी भी निकाल दी। अब मैं उनके सामने पूरी नंगी हो गई थी, मुझे बहुत शर्म आ रही थी।फिर वो अपने कपड़े निकालने लगे। जैसे ही उन्होंने अपनी चड्डी निकाली तो उसका लंड देख कर मैं डर गई. हिंदी बीएफ सेक्सी पंजाबीयोनि की जगह से उनकी कच्छी पूरी गीली हो गई थी, मैडम की चूत पूरी पनिया गई थी, मैंने अपना हाथ कच्छी के अंदर घुस दिया और उनकी चूत के दाने को मसलने लगा।जैसे ही चूत के दाने को मैंने मसला तो मैडम पूरी तरह से कसमसा गई और सीईई… सीई ईईई… सी… सी.

तब ऐसा ही लगा था कि यह बहुत चालू माल होगी… खूब चुदाई करवाती होगी।परन्तु जरा सी ही देर में ही वो ऐसी हो गई…फ़ुद्दी में घुसा लौड़ा भी निकाल दिया और अब कितना शर्मा रही है जैसे पहली बार मर्द का लिंग देखा हो।किशोरी- भैया, मुझे तो बहुत शरम आ रही है।मैं- ऐसा क्यों पागल.

मैंने कहा- आप जैसी हैं वैसा ही आपका नाम भी है।वो मुस्कुरा दीं।कहानी अभी जारी है। आपके विचारों का स्वागत है।. मैंने भाभी से कहा- मैं आपके घर आ रहा हूँ।तो भाभी ने कहा- मैं तो कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ…मैंने जल्दी से अपनी गाड़ी उठाई और भाभी के घर चल दिया।जब मैं भाभी के घर पहुँचा तो सब दरवाज़े बंद थे.

वो बोली- चल मैं तुझे और भी अच्छी चीज़ दिखाती हूँ।वो फिर उठ गई और अन्दर जाकर आइसक्रीम लेकर आई और उसको अपने मम्मों पर लगा लिया और बोली- ले अब चूस ले अक्की. पर इसके साथ ही मेरी जलन बढ़ गई।मैंने तुरंत लंड को बाहर निकाल कर देखा लंड की चमड़ी पलट चुकी थी और 1-2 जगह से हल्का खून निकल रहा था।ये देख कर नीता की हँसी छूट पड़ी- तो तुम सच में अब तक वर्जिन थे. लेकिन स्तनों को तब तक न छुएँ जब तक कि आपको यह न पता चल जाए कि वह स्वयं चाह रही है कि आप उसके स्तनों को छुएँ.

तो मैंने उसकी कच्छी भी उतार फेंकी, उसकी फुद्दी पर मेरे लंड के विपरीत कोई बाल नहीं थे।मेरे पास कंडोम नहीं था.

मज़ा आ गया…दीपक के लौड़े ने दीपाली के गले तक पानी की पिचकारी मारी और वो सारा वीर्य गटक गई।अब उसने लौड़ा मुँह से निकल जाने दिया. जिससे मेरे भी मुख से एक ‘आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल गई।फिर उसने अपने होंठों से मेरे गाल पर चुम्बन किया और मेरे लौड़े के टोपे पर अपने होंठों को टिका कर उसे चूसने लगी।उसकी इतनी मादक चुसाई से मेरे शरीर में कम्पन होने लगा. मैंने क्लासिकल भी सीखा है।रजनीश बोला- तो मुझे एक नमूना दिखाओ ना।विभा बोली- फिर कौन सा डान्स करूँ?रजनीश बोला- जो तुम्हें अच्छा लगे वो.

बीएफ सील तोड़ने वालीमैं कश्मीर की रहने वाली हूँ, मेरी उम्र 24 वर्ष है और वर्तमान समय में मैं दिल्ली में किराए पर रहती हूँ।मेरी शादी असफल रही और मैं परित्यक्ता का जीवन बिता रही हूँ।चूंकि मैं MA पास हूँ. जिससे मेरे भी मुख से एक ‘आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल गई।फिर उसने अपने होंठों से मेरे गाल पर चुम्बन किया और मेरे लौड़े के टोपे पर अपने होंठों को टिका कर उसे चूसने लगी।उसकी इतनी मादक चुसाई से मेरे शरीर में कम्पन होने लगा.

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तो मुझे क्यों दिक्कत है। मैंने भी उसकी टी-शर्ट ऊपर खींचना शुरू कर दिया।तो नीचे वो मेरी पैंट उतार रही थी और मैं उसकी टी-शर्ट।मुझे उसके बोबे महसूस हो रहे थे. अब जाती हूँ जल्दी मिलेंगे ओके…दीपाली कपड़े पहनने लगी।बस दोस्तो आज के लिए इतना काफ़ी है। तो पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए…मुझे आप अपने विचार मेल करें।[emailprotected]. उन्हें देख-देख कर मेरा दिमाग खराब हो रहा था और मैं ब्लू-फिल्म भी देख रहा था। मैंने मोबाइल बंद कर दिया और लेट गया। मामी मेरी तरफ करवट लिए हुई थीं तो मुझे उनके मम्मे गले के नीचे से साफ दिख रहे थे।अब मैंने मामी को चोदने का प्लान बना लिया.

तीनों चाय का मज़ा ले रहे थे और साथ ही बातों का भी मज़ा ले रहे थे।मैडी- यार दीपक पूरी रात नींद नहीं आई. मैंने उसके पेट पर हाथ रखकर सरकाते हुए उसके पैंट में घुसेड़ कर उसके कड़क होते हुए लंड को पकड़ लिया।वो पूरी तरह उत्तेजित अवस्था में था, उसका लंड मेरी जैसी शादीशुदा औरत के हिसाब से छोटा और पतला था. लेकिन हम दोनों में से कोई भी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि मैं क्या बकवास कर रहा हूँ.

किसी ने हमारी ऐसी बातें सुन लीं तो में बिना कुछ किए ही बदनाम हो जाऊँगी।”वो आगे बढ़े, मुझे कलाई से पकड़ अपनी तरफ खींचा, मैं उनके सीने से लग गई, यह सब क्या कर रहे हो अंकल !”साली माँ की लौड़ी… जब चूची दिखा रही थी… तेरी गांड पर भी हमने हाथ फेरे. हाथ लगाते ही वो दर्द से उछलने लगती थी।अब धीरे-धीरे हमारी दोस्ती के चर्चे स्कूल में चलने लगे थे। जब ये मुझे लगा कि हमारी लव स्टोरी अब मशहूर हो रही है तो मैंने राजेश्वरी को अपना मोबाइल नम्बर दिया और उससे स्कूल में बात करना बंद कर दिया।अब हम केवल फ़ोन पर ही बात करते थे. मेरे बस में नहीं है तुम बहुत बेदर्दी हो।मैं हंस पड़ा।फिर मैंने सोचा पहला स्खलन इसी पोज में हो जाने दो तो मैंने फिर उनसे पूछा- माल तो अन्दर ही लोगी न?भाभी जी हंस पड़ी और बोलीं- हाँ अब तो ऑपरेशन हो चुका है.

जार सब्र तो कर।इतने में जाने कैसे ऊपर से कुछ चीज की आवाज आई और भाभी ने रोशनदान की तरफ देखा तो मैं सकपका गया. मैं उसको लेकर वहीं आता हूँ।दीपक वहाँ से वापस घर आ गया तब तक प्रिया भी उठ गई थी।उसको बुखार था तो वो बस मुँह-हाथ धोकर बैठी थी।दीपक की माँ ने उसे नहाने नहीं दिया था और गुस्सा भी किया कि इतनी देर रात जागने की क्या जरूरत थी मगर प्रिया ने पढ़ाई का बहाना बना दिया था।दीपक- हाय माय स्वीट सिस्टर गुड मॉर्निंग।प्रिया- गुड मॉर्निंग भाई।दीपक- आख़िर कर उठ ही गई मेरी प्यारी बहना.

उसका उत्तेजक आनन्द भी अलग ही था।इस प्रकार से उसकी चूत को रगड़ते हुए ही नीता एक बार झड़ गई।फिर उसने कहा- आज तो पूरी रात हमारे पास है और आज हमें किसी के डिस्टर्ब करने का खतरा भी नहीं है.

अब सेवा का मेवा खाओ।मैडम ने मेरे सिर को पकड़ कर होंठों को चूसना शुरू किया और मेरे होंठों को चाटने लगीं। मैडम की गर्म और हल्के मीठे लार का स्वाद मेरे मुँह में घुलने लगा।फिर मैंने उनको निर्वस्त्र करके. उसने बीएफमानो मेरे लिए अभिवादन के लिए नंगी हुई हों।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैं प्यार करते समय हमेशा अपनी पार्टनर की ख़ुशी का बहुत ध्यान रखता हूँ और ये बात उसको महसूस हो रही थी।मैंने जल्दबाजी न दिखाते हुए उसके हर एक अंग को पहले निहारा. सुहागरात के हिंदी बीएफफिर वो महिला हमारे साथ चलने को तैयार हो गई।एक व्यक्ति का 500 रुपए तय हुआ।वो हमें एक हाईवे रोड पर ले गई।मैग्नेटो मॉल के आगे एक गाँव लाभांडी था. जो मैं भी सोच नहीं सकती थी।उनके सवाल के उत्तर में मेरे मुँह से निकल गया- अंकल दोनों करो…उनके फिर से पूछने पर- ज़ोर से.

’ की आवाज़ से गूँज उठा।अब तक आरती 2 बार झड़ चुकी थी और अब हम दोनों साथ में झड़ गए।आरती मुझसे बोली- आज मुझे असली सुख मिला है.

जो बार-बार चेहरे पर आ रहे थे।अपने बालों को बाँधने की बजाय वो मेरे चेहरे से बाल हटाने में शरारतें कर रही थी. पर वो अब आराम से हो रहा था।तो मैंने फिर से एक बर्फ का टुकड़ा लिया और उसकी गाण्ड में दबा दिया जो कि अन्दर नहीं जा पा रहा था और माया फिर से ‘आआअह’ कराह उठी।मैंने बर्फ के टुकड़े को मक्खन में सान कर फिर से उसकी गाण्ड में झटके से दबा दिया. अब मैं केवल आंटी को नहाते देख कर मुठ मार कर काम चला रहा था।फिर कुछ दिनों बाद कविता के भाई की शादी होने वाली थी।प्रोफेसर जी ने अब लॉज में अपना ठिकाना उसी लॉज में शिफ्ट कर लिया और उन्होंने एक दो कमरे वाला कमरा ले लिया।वे दोनों कमरे आपस में जुड़े हुए थे।पुराने वाले कमरे में एक भाभी जी रहने को आईं.

bagal chat raha hooStranger: bagal pe bahut pasina haiStranger: ahh ahah ahahaYou: tum pyaar se bahon main bhar liyaStranger: ahh ahaYou: maine jor jor se…shuru ki judaiYou: tumhariYou: aur…achanak upar aakeYou: moo main lund ghusake chodane lgaaStranger: ahhhhhStranger: hahhStranger: ahh ahaYou: chusoo isseStranger: mmmmYou: jaanuuStranger: mera nikal gayaStranger: ahhhYou: ammmm…. शनिवार नाइट लेकर आता हूँ।फिर दोनों ने अपने-अपने मोबाइल नम्बर लिए और दिए।सलीम ने नेट बंद किया और हम कमरे में आ गए।मैंने उनको कहा- सलीम. हाँ इन दिनों वो अनिता के पास कई बार गए, तब अनिता ने उनको संजय के बारे में बताया कि वही उसका बॉयफ्रेंड है और अब वो सुमन को रंडी बना कर बदला लेना चाहता है.

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अभी तुझे आराम देती हूँ…प्रिया ने जल्दी से कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर चित्त लेट गई।प्रिया- अरे तू भी निकाल ना अपने कपड़े…दीपाली- नहीं. क्योंकि वो भी मुझे बहुत देखती थी।लेकिन एक दिन मुझे फोन आया कि उसको मुझसे मिलना है।मैंने पूछा- कहाँ?तो उसने बताया- मॉल में. क्या बोलती है ये…?दीपक रूक गया और प्रिया के ऊपर ही पड़ा रहा। उसका लौड़ा जड़ तक चूत में घुसा हुआ था।दीपाली ने जब मुँह से हाथ हटाया प्रिया ने एक लंबी सांस ली.

कब हुआ और शादी में 6 साल बाद रानी से मिलने के उपरान्त क्या घटना घटी और यह अनोखा देह शोषण कैसे कहलाया…? तब तक आप सभी मुझे ढेर सारे मेल कर के बताएँ कि आप लोगों को मेरी यह आपबीती कैसी लग रही है और इसे पढ़ने में आपको कितना मजा आ रहा है?कहानी आगे जारी रहेगी।.

जिससे आराम से ऊँगली अन्दर-बाहर होने लगी।फिर मैंने एक बर्फ का टुकड़ा लिया और उसकी गाण्ड में घुसड़ने के लिए छेद पर दबाने लगा.

अब उसने लंड मुँह से निकाला और मेरे ऊपर आकर लंड मेरे मम्मों के बीच रखा और दोनों मम्मों को ऐसे पकड़ा कि बीच में सुरंग बन गई और उसी में चोदने लगा।‘आअहह. तो वो मेरी बात काटते हुए बोली- क्योंकि क्या?मैं बोला- क्योंकि अपनी चड्डी तुम खुद ही मुझे दिया करोगी।तो वो हँसने लगी और मेरे गालों पर चिकोटी काटते हुए बोली- बहुत शैतान और चुलबुला है. हिंदी बीएफ सेक्सी हिंदी फिल्मतो मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उनके मम्मों पर हाथ रख दिया।फिर वो मुस्करा कर अपने कमरे में चली गईं।मैं समझ गया कि भाभी की चूत भी चुदने को बेचैन है।मैं भी यहाँ बेचैन होने लगा और रात को 11 बजे मैं भाभी के कमरे में चला गया।उफ्फ.

लड़की और स्त्री के बारे में ही सोचने लगा और मेरे दिमाग़ ने मुझे सेक्स का सुपर हीरो बना दिया और इस सोच में मेरा सबसे पसन्दीदा आइटम रहा है वो है लड़की के स्तन…मेरी उमर जैसे-जैसे बढ़ रही थी मेरी नज़र हर जगह औरत को अपनी कमसिन नज़र से ढूँढती रहती थी।मुझे टीवी. इसे मैं कैसे प्यार से मनाती हूँ।तो मैंने भी गाड़ी एक बगल में ली और जींस का बटन खोल कर नीचे सरका दी और अपनी चड्डी को साइड से पकड़ कर अपने सरियानुमा लौड़े को हवा में लहरा दिया।वो एकदम ऐसा अकड़ा हुआ किसी झंडे की तरह खड़ा था जिसे माया देखकर अपनी मुस्कान न रोक सकी।वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर उसे प्यार से सहलाने लगी और बोली- अरे वाह. उसके बाल पकड़े और उसके मुँह में अपना लण्ड डाल दिया।सोनम भी जल्दी छुटकारा पाने के लिए मेरा लण्ड पकड़ कर रगड़ते हुए चूसने लगी। सोनम की चुसाई से यह तो पता लग गया कि सुनील सर ने इसे चूसने की ट्रेनिंग अच्छी दी है.

अब हम साथ थे और आज़ाद भी थे। अब हमको कोई रोकने वाला नहीं था।राजेश्वरी ने खुद को मुझसे छुड़ाया और कपड़े बदलने के लिए बोला. इसकी देखरेख किसके जिम्मे छोड़ें।मैंने अपनी ख़ुशी और लौड़े को दबाते हुए उनसे कहा- अरे अंकल आप बेफिक्र जाइए मैं हूँ न.

वो कसमसा कर मुझसे अलग होते हुए बोली- जीजू ये आप क्या कर रहे हैं?‘रिंकी आज मुझे मत रोको… आज मुझे जी भर कर प्यार करने दो… देखो तुम भी प्यासी हो.

लेकिन कोई भी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।दोनों में किसी का भी स्खलन नहीं हो रहा था।फिर मैंने उसे कुतिया की तरह बनाया और पीछे से उसे चोदने लगा।मैं बहुत तेज-तेज धक्के लगा रहा था।उसकी सिसकारियाँ बढ़ गई- आआह. मैंने पूछा- यह क्या हुआ भाभी?वो बोली- मेरा माल निकल गया।फिर मैंने बोला- अब क्या होगा?वो बोली- थोड़ी देर आराम कर लो. वो चिहुंक जाती थी।अब उसने अपनी चूत को चिपका कर छुपा सा लिया। वो अकड़ सी गई और ज़ोर-ज़ोर से ‘आहें’ भरी.

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क्योंकि मुझे पता था अभी मैं इसका बदला लूँगा तो ये और रोएगी।मैंने कंडोम उतार फेंका और एक ही झटके में पूरा लण्ड रूचि की चूत में उतार दिया।रूचि को जब तक ये अहसास हुआ कि एक गुस्से से भरा लण्ड उसकी चूत में उतर चुका है. जिससे उसकी आवाज़ नहीं निकल पाए।फिर मैंने गाण्ड के अन्दर अपना लंड डाल दिया और धीरे-धीरे उसकी गाण्ड चुदाई करने लगा।फिर उसने मेरी तरफ देख कर बोला- बेबी ज़ोर से. फिर मैंने खिड़की से झाँक कर देखा तो मेरा भाई अन्दर बिल्कुल नंगा खड़ा था और उसकी फ्रेन्ड नीचे बैठ कर उसका लण्ड अपने मुँह से अन्दर-बाहर कर रही थी।मेरा भाई अपनी आँखें बंद किए हुए उसका सर पकड़ कर अपने लण्ड को पूरा अन्दर तक डाल रहा था।ये देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भी अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और 61-62 करने लगा।अचानक मेरा हाथ खिड़की पर पड़ा और वो खुल गई.

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और वे वहीं डंडा पटकने लगे थे। तब तक प्रीति ने अपने कपड़े पहने और मुझे चूम कर भागी।इस वक़्त मुझे पता था कि सोनम कमरे में मौजूद है और थोड़ा डरी हुई और शायद लण्ड की प्यासी भी है, क्योंकि जहाँ तक मुझे लगा सोनम की चूत अब भी एक लण्ड चाहती थी।मैंने दुबारा चुपके से सोनम की ओर देखा और मेरी सोच बिलकुल सही निकली. पर किस्मत कहीं और ले जाएगी किसको पता था।तीसरा दिन था क्लास में सफ़ेद शर्ट और ब्लू जीन्स के नार्मल लिबास में बैठी थी।पास में बैठा एक लड़का शायद सिगरेट पीकर आया था।मैंने अपने नाक पर रुमाल रख लिया।उसने देख कर बोला- इतनी बुरी चीज नहीं है मैडम. ये कह उठने सी लगी तो मैंने उसके कंधे पर हाथ रखे और उसे बैठने को कहा और बोला- पहले ठीक से हम समझ तो लें.

और सबने अपने घर जाकर इस क्रिया को करने का फ़ैसला किया।मैं उस दिन उंगली से चुदाई की बात सोच-सोच कर काफ़ी गरम हो चुकी थी। जब मैं घर पहुँची तो जल्दी से बाथरूम में गई और अपने सारे कपड़े उतार कर पूरी नंगी होकर ज़मीन पर बैठ गई और अपनी चूत को रगड़ने लगी।कुछ ही पलों में मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मैं हवा में उड़ रही होऊँ और अंत में एक मीठी सी ल़हर मेरे पूरे जिस्म में दौड़ गई. उसका बदन किसी साँचे में ढली मूरत क़ी तरह था।मैं उसके स्तनों को चूसने लगा और फिर उसकी नाभि के पास अपनी गरम सांसों को छोड़ते हुए दुबारा उसके होंठों को चूमने लगा।इस ठंडे मौसम में हम दोनों को एक-दूसरे के बदन की गर्मी स्वर्ग जैसा सुख दे रही थी।मैं जब-जब अपनी गरम सांसों को उसकी गर्दन के पास छोड़ता था.

पर मैं इस बात का ध्यान रखता कि कहीं उसको बच्चा न ठहर जाए।फिर उसका चयन टीचर हेतु हो गया।मैंने दीदी और जीजाजी से बात की- मैं और आपकी बहन कृति शादी करना चाहते हैं।वो तैयार नहीं हुए।मैंने कृति को कोर्ट मैरिज करने के लिए कहा।वो बोली- मैं भइया के खिलाफ नहीं जा सकती।मैंने एक ट्रिक चली।अब मैं बिना कंडोम के संबंध बनाता था।इससे वो गर्भवती हो गई.

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”मौसा नीचे से घोड़ी की लगाम की तरह मेरे हिल रहे मम्मे पकड़ दबाने लगे और झटके पर झटके लगाने लगे। फिर मुझे लिटाया एक टांग उठाई अपने कंधे पर रख कर मेरे बिल्कुल पीछे लेते हुए लंड घुसा दिया।अब क्या बताऊँ. ’ करके मेरे लण्ड का रस निकल गया। मेरा पूरा माल उसके मुँह में ही झड़ गया और वो भी मेरे लण्ड का सारा रस पी गई।अब मैंने उसे खड़ा किया और पलंग के किनारे पर लिटा दिया। मैं एक बार उसके पूरे जिस्म को चूमने लगा. तब तुम इसे हरा सिग्नल समझना कि अब हाथ लगा सकता हूँ सो इसके पहले हाथ नीचे ही रखना।ऐसा उसने कहा तो मैं तो बस मूड में था, मैंने कहा- जो हुकुम आका.

करीब मेरे हाथ की कलाई के बराबर मोटा और बेलन से भी लंबा लण्ड था। मैं सोचने लगी कि किसी आदमी का लण्ड इतना बड़ा कैसे हो सकता है।हालांकि वो थे भी हट्टे-कट्टे 6 फीट के.

अंग्रेजी वाली सेक्सी बीएफ: चूसो उफ़ मज़ा आ गया आहह…प्रिया ने दीपाली के मुँह से लौड़ा निकाल कर अपने मुँह में डाल लिया। दीपाली ने उसकी गोटियाँ पूरी मुँह में ले लीं और ज़बरदस्त चुसाई शुरू कर दी।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !दीपक- आहह. बस यूं समझ लीजिएगा कि मैं हवा से बातें कर रहा था।फिर एकदम से सैलाब आया और हम दोनों एक दूसरे से चिपक गए.

विकास- चलो मेरे कहने से ना सही खुद देखने से तो तुम्हें यकीन हुआ कि अनु सो रही है। अब वहाँ क्या बैठी हो. तो कभी फर्श पर लेटा कर मेरी चूत भी मारी और गांड भी मारी।चुदाई करते-करते हमें सुबह के 5 बज गए थे। हम वैसे ही नंगे ही सो गए थे. वो मेरे झड़ने के बाद ही खत्म हुआ।हम दोनों काफी देर तक एक-दूसरे में समाए पड़े रहे।इस बीच अनुजा हम दोनों की चुदाई को बड़े मजे से देख रही थी।अनुजा.

हम दोनों की साँसें टकरा रही थीं।इस दो घंटे की चुदाई में तो वो 3 बार झड़ गई थी।मेरा लंड उसी के अन्दर पड़ा रहा।मैं उसके होंठों को चूस रहा था।मैंने हटने की कोशिश की.

पर ऊँगली से और मोमबत्ती से तो बहुत ज्यादा आनन्द आ रहा था।वो पूरी ताकत लगाकर घर्षण कर रहा था, मैं भी उसे जोश दिलाने के लिए कभी-कभी ‘आह. वो क्रीम रंग की गाउन पहने हुए थीं क्योंकि गाउन बहुत पतली था और बदन साफ-साफ दिख रहा था। मामी यही गाउन घर पर भी पहनती थीं लेकिन अन्दर ब्लाउज पहनती थीं, मामी ने अन्दर ब्रा भी नहीं पहनी थी. तो उन्होंने एक-एक पैग और बनाया और वो भी हमने पी लिया।भाभी ने पूछा- सिगरेट पियोगे?मैंने कहा- मेरे पास तो नहीं है।तो भाभी ने बिस्तर के दराज से लेडीज सिगरेट निकाली और जला कर लम्बा कश लगाया.