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उधर फोन पर शहजाद- नसीम, तुम अपने हिसाब से देख लो और संजय का ख्याल रखना.पापा जी, जो बात इस सीने में है वो लंड में कहां!” वो मेरे बायें निप्पल को मसलते हुए बोली.

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उन्होंने सीधे बढ़ते बढ़ते अपनी गांड को मेरी तरफ किया और इससे मेरा लंड खड़ा हो गया. उसने कहा कि उसके सब रिश्तेदार चाहते हैं कि स्वाति आज ही आ जाए, वो सब बहुत जिद कर रहे हैं इसलिए मैंने फ़ोन किया है. एक दिन वो अपने भाई के सामने, जो कि मेरा दोस्त है, मुझसे पूछने लगी- मिठाई कैसी थी?तो मैंने बोला- बहुत मीठी.

मैं समझ गया कि वो झड़ रही है, मैं और तेज़ चाटने लगा उसकी टांगें कंप गईं और वो जोर से अकड़ते हुए झड़ गई. मैं ये सब देख कर अनदेखा कर रहा था लेकिन कल्याणी तो मुझे गर्म करने में लगी हुई थी.

फिर उनको न जाने क्या हुआ, मुझको पता ही नहीं चला क्योंकि उन्होंने पूछा कि क्यों इससे पहले तुमने किसी के देखे नहीं क्या?मैं समझ गया कि मामी गर्म हो गई हैं सो मैंने जबाव दिया- नहीं देखे.

तो उन्होंने कहा कि मेरे हाथ में दर्द बहुत है, मैं कपड़े नहीं पहन पाऊँगी, मैं तौलिया लपेट लेती हूँ.

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फिर बुआ बोलीं- चलो देखते हैं कि संगीता भाभी को गुरप्रीत ने चोदा कि नहीं. पहले उन्होंने मेरे लंड को हिलाया, फिर सुपारे को ऊपर नीचे करके लपक लपक चूसने लगीं. फिर मैंने भाभी की गर्दन पर किस किया और फिर उनकी नाभि के पास किस करने लगा.

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मैंने संजय को उठा कर अपनी बांहों में ले लिया और हम दोनों ने एक दूसरे के होंठ चूसना शुरू कर दिया. बस अपनी भाषा को सभ्य रखिएगा।कहानी जारी है।[emailprotected]गांड चोदन कहानी का अगला भाग :पंजाबन लड़की की गांड चोदन कहानी-2.

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अंकित भावुक होते हुए बोला- आज तुमने मुझे वो आनन्द दिया है जान, जो मैं तुम्हें बता भी नहीं सकता.

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पापा बोले- सच?अंकल बोले- वादा आपसे!मेरे पापा बोले- मैं आज तक नहीं बोला, तो बोल नहीं सकता आरती से, अगर आप बुला दो तो आज जो मांगोगे दे दूंगा. हाय राम… क्या निप्पल थे यार… तनु, छोटी और फिर उसकी माँ सबके निप्पल और घेराव एक जैसे, हल्के भूरे रंग का घेराव और गुलाबी आभा लिए हुए चूचुक… वाह… क्या बात थी आंटी में!मेरी एडल्ट कहानी जारी रहेगी. मैंने उसकी कमर को झुकाया और उसकी चूत का छेद मेरे लंड के सामने आ गया था.

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मैं फिर हर एक बन्दे के गले लगी, जिसका मन किया, उसने एक बार फिर मेरे होंठ चूसे।आखिर में मैं सिराज के पास गयी, मुझे एक लंबा सा किस करने के बाद उसने पूछा- फिर मिलोगी कभी?मैंने पलट कर जवाब दिया- सच कहूं तो नहीं”. मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी पेन्टी के अन्दर डाल दीं और उनकी चुत को सहलाने लगा. मैं भी दीदी की पीठ पर हाथ को बड़े प्यार से अपनी उंगलियाँ खोल कर सहला रहा था.

अब मेरे चूचे बहुत दब रहे थे और मुझे ऐसा लग रहा था कि इतने में ही वो टाइट हो रहे हैं, बड़े होते जा रहे हैं.

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वो इस बार बहुत तीखी आवाज में चीखी और बिस्तर पर कुछ देर ऐसे पड़ी रही, जैसे कोई आलसी सो रहा हो. सो मैंने अपने लंड को पूरा बाहर निकाला और निशाना लगाते हुए पूरे जोर से उसकी चूत में घुसा दिया. भाबी की चुत किसी ने कभी चाटी नहीं थी, जो भाबी के हाव भाव से पता चल रहा था.

पहले हाथ में लंड लगा तो मुझे अजीब सा लगा, मैंने बड़ी तेजी के साथ खींच लिया. कुछ देर बाद जमाई जी उठे, मुझे बातें करने लगे।फिर मेरी बेटी भी आ गई। मैंने खाना बना कर खिलाया.

ये सब अंकल ने इतना जल्दी अचानक किया कि मैं सम्हाल नहीं पाई खुद को, मैंने अंकल को बोला- मुझे छोड़ दो प्लीज़, मुझे जाने दो, मैं आपकी बेटी की उम्र की हूँ, प्लीज मुझे जाने दो! मैं चिल्ला दूंगी, मुझे छोड़ दो!मैं घबरा गई।अंकल बोले- सुना नहीं कि वो लोग रास्ते में क्या बोले कि क्या मस्त बीवी पाई है, जाते ही चोद देना, बहुत चुदासी है तुम्हारी बीवी.

फिर कुछ महीनों बाद मेरी भाभी भैया के साथ भोपाल आईं, भैया को कुछ ज़रूरी काम था तो भैया भाभी को मेरे कमरे पर छोड़ कर चले गए. मैंने उसका रिजल्ट चेक किया और मैं काफ़ी खुश था कि वो 72% से पास हुई और मैथ्स में 80% मार्क्स लाई थी. इसके बाद हुआ यूं कि मुझे पढ़ाई के लिए भोपाल जाना था तो मैं अगले दिन जाने की तैयारी में लग गया.

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थोड़ी देर बाद मैं बस झड़ने वाली थी और तभी मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और कमल ने मेरी चूत का सारा पानी अपने मुँह में ले लिया. मेरे मन में फिर से लड्डू फूटने लगे, पर पिछली बार जो हुआ था, उसका डर भी था. उसके बड़े और मोटे लंड के सुपारे के घुसते ही मेरे मुँह से कराह निकल गई- आउच.

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मैंने उसे हटाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसकी पकड़ से मैं आज़ाद नहीं हो पाया. नताशा की क्लिट को मसलते मसलते ओमार इतना अधीर हो उठा कि उसने मेरी पत्नी को अपने ऊपर लेटा कर नीचे से उसकी चूत मारते हुए उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया:आह. भाभी के पापा मेरे बाल पकड़ कर जोर जोर से लंड को मेरे मुंह में अंदर बाहर करने लगे और जम के धक्के लगाने लगे.

देवर जी पूरे जोश में आ चुके थे और उन्होंने अपने लौड़े को चूत के निशाने पर लेते हुए धक्का लगा दिया. दीदी- देखो सन्नी, ये ग़लत कर रहे हो तुम, बात सिर्फ़ लंड चूसने की हुई थी और अब तुम…मैंने दीदी को बीच में ही चुप करवा दिया- दीदी मैं समझ सकता हूँ कि आप क्या बोल रही हो, लेकिन डरो नहीं, मैं कुछ नहीं करूँगा, मैं तो बस हल्की सी मस्ती कर रहा हूँ, बाकी का काम मैं आपकी मर्ज़ी के बिना नहीं करूँगा.

मैं खुद को रोक ही नहीं पाया और अपना मुँह उसकी बुर में सटा कर पेंटी के ऊपर से ही उसकी बुर को चूसने लगा.

यही सोच कर पहले मैंने केवल पहन कर देखने के लिए टॉप और स्कर्ट को भी पहन लिया और सैंडल को भी पहन कर मैंने अपने आपको जब मिरर में देखा तो मैं खुद अपने आपको देखती रह गई. यह करते हुए करीब 15 मिनट बीत जाने के बाद भाभी ज़ोर से चिल्लाते हुए पेंटी में ही झड़ गईं- आह… मेरा निकल रहा है… आह… रुक जाओ… अह्ह्ह्ह… हय…चूत से रज निकलने के कारण भाभी काँपने लगीं और निढाल होकर मेरे ऊपर गिर गईं. यह सुन कर वो हंसने लगीं, मुझे बड़ा गुस्सा आया, मैंने उनसे पूछा- इसमें हंसने वाली बात क्या है?तो वो बोलीं- कुछ नहीं, बस ऐसे ही मुझे हंसी आ गई.

उसने उसका बदन सीधा करलिया और वो झड़ गयी थी पर मैं नहीं झड़ा था, मेरे धक्के चालू थे. एक घंटे की बाद मुझे फिर से जोश आ गया और मैं फिर से उसकी मारने को तैयार हो गया. उस मेल में लिखने वाले/वाली ने मुझे चैलेंज के साथ हूल दी कि मैंने अपनी जिंदगी में घटी एक सच्ची घटना को मिर्च-मसाला लगा के पाठकों को पेश कर दिया.

एक दिन की बात है, जब मैं दोपहर को टीवी देखने भाभी के रूम में गया था.

सेक्सी भाभी का बीएफ: क्या इससे बड़ी साइज़ का लंड देखा है?”गोलू का 3 इंच की भिन्डी मुर्झाई हुई थी. मैं- तो करो ना खुद… मुझे क्यों मजबूर करती हो ऐसा करने को!दीदी ने मुँह खोला और लंड की टोपी को लिप्स में भर के मुँह में लिया और हल्के से चूसने लगी.

यही सोचते हुए कि चलो आज भाग गई कल सुबह तो आएगी ही, यही सब सोचते हुए मैं सो गया. अब मैंने एक हाथ उनके सीधी तरफ वाले चूचे पर रख दिया और दूसरा हाथ उनकी गांड पर रख दिया. रेशमा की चूची भी 36 से 38 इन्च वाली लग रही थी, एकदम सफ़ेद गाय के दूध के रंग के जैसी, निप्पल चॉकलेट रंग का था.

मैंने हल्की सी जबरदस्ती की तो ममता जी ने अपने हाथों को भी चुत पर से हटा लिया और अब ममता‌ जी की‌ नंगी चुत मेरे सामने थी.

इस फंसी सी स्थिति में लंड इतना अच्छा तो नहीं आ रहा था लेकिन एक चालू गाड़ी में अपनी सगी बहन को चोदने का मजा ही कुछ और था. जो बाइक में बार बार ब्रेक लगा रहे हो?मैंने भी मौका देख कर बोल दिया- भाभी जब पीछे बाइक पर कोई खूबसूरत हूर बैठी हो, तो मन क्यों नहीं करेगा. फिर वो अपना लौड़ा पदमा की गांड में घुसाने लगा जो कि आज तक अनचुदी हुई कुँवारी थी.