घोड़ों की बीएफ

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अब ऐसे कपड़ों में आपके सामने आऊंगी, तो मुझे थोड़ी शर्म तो आएगी ना!सुरेश- अब ये बातें जाने भी दो.गांव में मुझे भांग खाने की आदत पड़ गई थी, तो मैं अपने साथ गांव से भरपूर मात्रा में भांग लाया था.

सुमन- मेरे प्यारे पातिदेव मुझे देखो, मैंने क्या पहना हुआ है … उनके सामने ऐसे रहूंगी तो अच्छा लगेगा क्या?सुरेश- अरे पगली वो बड़े हैं, उनसे कैसी शर्म … वो तो तुमको बेटी कह कर बुलाते हैं. घोड़ों की बीएफ रुक्मणी भाभी के बेटे की सरकारी नौकरी लग गयी थी और उसकी पोस्टिंग जयपुर हुई थी, तो रुक्मणी भाभी जयपुर चली गयी थीं.

मेरा लंड अभी भी बहुत दर्द दे रहा था मगर मैं उसकी चुत के पानी निकलने के बाद भी धीरे धीरे चुदाई करने में लगा रहा.

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दूसरी बात उसमें शर्म तो है … मगर डॉक्टर के सामने तो बड़े बड़े नंगे हो जाते हैं, उसमें मीता क्या चीज है. उसके बाद मैं मार्केट गया और वहां से सोनिया और बंगाली भाभी के लिए कुछ गिफ्ट ले लिया. मैं लगभग रोज ही सबके सो जाने के बाद रात को वॉटरकूलर वाले रूम में उसका लंड चूसता और हम किस करते.

मामी- तो तू कौन सा साठ साल का बुड्ढा है?मैं- तभी तो कह रहा हूं मामी. फिर धीमे से भाभी की आवाज आई- राजा और!मैंने कहा- भाभी आप मुड़ोगी क्या?उन्होंने हां कर दिया, तो मैंने उन्हें सीधा कर दिया और उनके स्तनों पर अपनी छाती रख कर लेट गया. मुझे उनका इंटेशन समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वो मुझसे क्या चाहती हैं.

मुझे भी और ज्यादा मजा आने लगा और मैंने उसकी मैक्सी में हाथ देकर उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. ये सब करने के साथ ही अब मैंने अपने एक हाथ को उनके पेट से होते हुए नीचे उनकी नाभि और फिर उनकी कमर और आखिर में उनकी दोनों टांगों के बीच छुपी चूत पर रख दिया।मैंने महसूस किया कि मेरे इतना सब करने मात्र से ही उनकी चूत ने अपना काम रस निकालना शुरू कर दिया था। मैंने उनकी चूत पर उंगली लगाकर हल्के से सहलायी. मीता- मैं सवेरे जल्दी उठ जाती हूँ डॉक्टर बाबू … घर के भी काम होते हैं.

[emailprotected]नंगी भाभी सेक्स कहानी का अगला भाग:दोस्त की पड़ोसन भाभी की वासना- 3. मैं- ठीक है भाभी, पर ये तो बताओ आपको मेरे लंड पर जन्नत की सैर करके कैसा लगा?रुक्मणी- बहुत मजा आया कुणाल.

मैं उनके पीछे पीछे अन्दर चला गया और खाने को टेबल पर रख कर बाथरूम में घुस गया.

उसके मुंह से तेज सिसकारियों के साथ गालियां भी बाहर आने लगीं- उउउई … उउउई … बहनचोद। चोद मुझे … और जोर से चोद … उउउई … उउउई … आआआह … आआआहल्ल्ला … मर गई रे।फिर 20 मिनट की चुदाई के बाद वह झड़ने लगी और मैं भी उसके अंदर ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया.

मगर मैं एक बार और उनको चोदना चाह रहा था इसलिए मैं काफी देर तक उनको मनाता रहा. आई लव यू।उसकी मादक आवाजें मेरा जोश बढ़ा रही थीं और मैं अब तक आराम से ही कर रहा था. तभी एक दिन अंशुमन भैया ने बताया कि अगले 3 हफ्तों में उनके सेमेस्टर की परीक्षाएं खत्म हो जाएंगी और अगला सेमेस्टर शुरू होने से पहले एक महीने की छुट्टियां हैं.

मगर इतने में ही वो हलचल करने लगी और मैंने घबराकर अपना हाथ तेजी से बाहर खींच लिया. मैं- भाभी, तब तो आप शर्ट उतारकर उसे एक बार अच्छी तरह से झाड़ लो, कहीं एक से ज्यादा ना हों. तभी कासिब ने अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मुझे लंड चूसने को बोला.

उसके बूब्स को देखने के बाद मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और उसके बायें बूब को अपने मुंह में भर लिया.

धीरे से मैंने नज़र को तरछी करके देखा तो रजिया की मैक्सी जांघों के ऊपर तक आ गयी थी. आपको प्रेम रोग हॉट लव स्टोरी के लिए क्या कहना है, प्लीज़ मेल से बताएं कि आपको इस कहानी में रस मिला या नहीं?[emailprotected]प्रेम रोग हॉट लव स्टोरी का अगला भाग:मैं तेरा तू मेरी- 2. आदिल ने अपने हाथ में रंग लिया और मेरी चूचियों पर रगड़ने लगा।इतने में ही मुझे लगा कि मेरी जांघ पर कुछ चल रहा है.

सेकेंड ईयर में है लेकिन उसको मेरे देवर ने 2 बार पकड़ लिया अपने बॉयफ्रेंड के साथ घूमते हुए, इसलिए पढाई बंद करा दी हमने. तो भाभी ने पूछा- कहां जा रहे हो?मैंने बोला- मैं अपने घर जा रहा हूँ. ऐसी भी क्या जल्दी है आपको!वह दोबारा हाथ को इधर उधर लगा कर देखने लगी.

घर की बात घर में रहे तो ठीक है इसलिए कुछ भी करो मगर इनको (भाईसाहब को) पता नहीं लगना चाहिए.

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घोड़ों की बीएफ वो सीधे मेरे से चिपट गईं और मेरा लौड़ा पकड़ते हुए बोली- प्लीज कुणाल, जो भी करना है जल्दी करो. रणजीत- अरे करता तो हूँ ना, अब मुनिया नहीं होती … तो खेत से आकर सीधा तेरी चुदाई कर लेता.

घोड़ों की बीएफ बहुत दिनों के बाद चूत चोदने के लिए मिली थी इसलिए मैं कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहा था. उनकी इस तरह की ड्रेस में उनका सेक्सी जिस्म और भी उभर कर सामने दिखने लगा था.

उसका 7 इंच का लंड अब पूरा तन गया था और मीता का ध्यान उसी पर ही टिक गया.

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मुखिया- अरे बेटी तू पानी के अन्दर जाएगी तो तेरे सारे कपड़े भीग जाएंगे. उसके पेट की बनावट को देख मुझे उसे सूंघने और चूमने चाटने पर मजबूर कर दिया. भाभी ने पहले भी ऐसा किया हुआ था, पर उस वक़्त मेरे दिमाग में कोई ख्याल नहीं था.

फिर मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया और उसका पेटीकोट और पैंटी एक साथ उतार दिया. बियर का नशा मेरे ऊपर जोरों से चढ़ा था और ऊपर से उसका लन्ड मुझे पागल किये जा रहा था. ये शायद अशोक की दी हुई गोली का ही असर था कि हम दोनों इतने राउंड के बाद भी नीला को इतना चोद पाए और ठोक पाए.

जब वो फिर से तैयार हो गयी तो उसने अपने नीचे एक पीले रंग का तौलिया बिछा लिया.

वहीं सड़क के दूसरे छोर पर एक नदी बहती थी। जब नदी के कल-कल करते जल की धाराओं को देखा तो मन का कोना-कोना खुशी से भर गया. मैं एक बार तो डर गया कि शायद मॉम कल पेटीकोट पर माल गिराने वाली बात के बारे में डांटने आई होगी. मैं भी उतावला हो गया था … क्योंकि अम्मी की कामुक चूचियों को आज पहली बार पूरा नंगी देखूंगा और उनकी चुदाई भी.

चुदाई का मज़ा भी क्या गज़ब चीज है इंसान को कितना बेशर्म बेहया बना देता है. ये बात यहीं से शुरू हुई कि जब कोरोना इंडिया में आया, तो हम लोगों को बताया गया कि आप लोगों की छुट्टी हो रही है. अचानक एक आग सी शरीर में पैदा हुई और मैं जोरदार टक्कर के साथ अपना सारा माल उसकी चूत में भरने लगा.

वो मुझे देखने के बाद अंदर चली गयी और फिर एक कागज को किसी चीज में लपेट कर नीचे फेंक दिया. मुझे अब उसकी नंगी गांड और चूत दोनों दिखाई दे रही थीं क्योंकि मैं उसके पैरों की तरफ था.

[emailprotected]ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स स्टोरी का अगला भाग:छोटी बहन की चुदाई की चाह- 2. वो बोली- तो फिर सोच क्या रहा है, पिला दे मेरी चूत को अपने लंड का रस. मैंने अपने लौड़े का सुपारा नीला की चमकती गांड के छेद पर सैट किया, उसे वहां थोड़ा रगड़ा.

उसी समय भाई ने झट से अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मैंने जब कासिब का लंड अपने मुँह में लिया, तो कासिब के लंड की मादक महक मुझे गर्म कर गई.

10 बजे के करीब चाची किचन का सारा काम निबटा कर आई और काफी थकी हुई सी लग रही थी. दीक्षा- यार, तेरा डिक तो बड़ा अच्छा है, कितने इंच का है ये!मैं- यार पांच इंच का है. हम दोनों ही एक दूसरे को निहारे जा रहे थे जैसे कि कई सालों से एक दूसरे के लिये प्यासे हों.

फिर पैसे भी मिलने लगे तो मैंने अपनी सहेलियों को इसका मजा दिलवाना शुरू कर दिया है. भाभी का चेहरे देखकर लग रहा था कि वो मुझसे नाराज हैं … क्योंकि मैंने उनकी बातों को अनसुना करके बिना रुके उनकी ताबड़तोड़ चुदाई की.

मामी- ये कहां आ गये हम?मैं- वहीं, जहां कोई आता-जाता नहीं!सुनकर मामी हंसने लगी और हमने गाड़ी को अंदर से लॉक कर लिया. रियल आंटी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मामी की वासना जगाकर मैं चूत तक पहुंचा ही था पर चोद नहीं पाया. तुम मेरे यहां पर ही खा लेना!मैंने अंकल के चेहरे की ओर देखा और पूछा- अंकल आपकी नाइट ड्यूटी लगने वाली है क्या?वो बोले- हां बेटा, आज से नाइट में ड्यूटी करनी है.

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उसको एक अजीब सी जलन अपनी छोटी चुत में महसूस होने लगी … और ना चाहते हुए भी उसका हाथ खुद की चुत पर चला गया.

वो पूरी कोशिश कर रही थी मगर कभी कभी मेरे लंड पर उसके दांत लग जाने से मैं कसमसा जाता था. मुखिया की बात सुमन अच्छे से समझ गई थी कि वो क्या कहना चाहता है और अगले ही पल उसने अपना दिमाग़ दौड़ा दिया. मैंने उंगली को अपनी नाक के पास लाकर सूंघा, तो एक अलग ही महक आ रही थी.

उस वक्त तक कोई लड़की मेरे से सेट नहीं हुई थी मगर चूत मारने का बहुत मन करता था. करीब 40 मिनट बाद जब एक्ट्रेस की थोड़ी सी चुदाई वीडियो, जो मेरे साथ मैंने बनाई थी, उसे देखी … तब मैं झड़ने की कगार पर आ गया. पतंजलि कंडोम प्राइसअब मैं लंड को उसकी बुर की पूरी गहराई में अंदर-बाहर करने लगा। उसकी बुर में पूरा लंड जाता तो वो चिल्ला उठती थी.

मैंने उससे चुदाई को लेकर कुछ और पूछा तो उसने बताया कि उसका पति भी उसे संतुष्ट नहीं कर पाता था, क्योंकि वो रोज शराब पीता रहता था और अक्सर बीमार ही बना रहता था. वो बोली- चलो, आज तो मैं तुम्हें छोड़ रही हूं लेकिन आगे से ऐसी हरकत मत करना.

वो नाइटी ऊपर से निकलती गयी और मुझे धीरे धीरे उनके शरीर के एक एक अंग दिखते गए. लेकिन मैं इसके लिए तैयार थी क्योंकि मेरा पति मुझे बहुत कष्ट दे रहा था. उनकी नजर मेरे तने हुए लंड पर टिक गयी जो कि गीले अंडरवियर को उठाये हुए था.

गीता- इसमें मेरी क्या गलती है काका, वॉल खुला ही नहीं … और अब दूसरा क्या काम है?मुखिया अपने लौड़े पर हाथ फेरता हुआ उसे देखने लगा. जाने से पहले वो एक बार फिर मेरे गले से लग गयी और मुझे एक लम्बा सा फ्रेंच किस किया. मैंने ये भी बता दिया कि सर मुझे बहुत जल्दी चोदना चाहते हैं और मैं भी उनसे चुदने के लिए बेचैन हो रही हूं.

सुमन- मैं भी कितनी भुलक्क़ड़ हूँ, खीर में बादाम डालना तो भूल ही गई, बादाम होंगे … तो खाने में ज़्यादा मज़ा आएगा.

थोड़ी थोड़ी देर में दिन में कई बार मैं जब आंख बंद करती तो उसका काला नाग मेरी आंखों के सामने आ जाता. भाबी जी के ससुर के मरने के बाद वो अपने पति के साथ रहने दूसरी जगह चली गयी और हम दोनों की चुदाई का सिलसिला वहीं रुक गया। अगली कहानी में मैं बताउगा कि भाबी जी कीछोटी बहन की चूतको मैंने कैसे चोदा।मेरी ये देसी भाबी सेक्स कहानी आप लोगों को कैसी लगी इस पर कमेंट जरूर कीजियेगा.

जब मैं अंडरवियर बदलकर गमछी लपेटने लगा तो वह मेरी ओर तेजी से आने लगी। उसे देखा तो मालूम हुआ कि उसकी नजर तो मेरी गमछी से ढके लंड के उभार पर ही थी. कुछ देर यूं ही वे दोनों मुझसे बात करते हुए अपनी चूचियों की घाटियां दिखाती रहीं. रीमा मैडम के साथ मैंने और क्या क्या किया और उसके पति ने फिर क्या क्या किया ये सब मैं आपको अपनी आगे आने वाली कहानियों में बताऊंगा.

मेरा पूरा लंड अन्दर उसकी चुत की दीवारों को फाड़ते हुए उसकी बच्चेदानी तक पहुंच गया. मैंने कहा- चलो अब मेरा भी चूस दो तो तुम्हारी नदी को मैं साफ़ कर दूं. मेरी हालत को देख कर मॉम ने कहा- जब इतनी ठंड लग रही है तो अपने कपड़े उतार कर तू सुखा क्यों नहीं लेता?मॉम के कहने पर मैंने अपनी शर्ट को उतार दिया.

घोड़ों की बीएफ उसका लंड अब बड़ा होना शुरू हो गया था और मॉम की गांड में सटा हुआ था. हमारे इतने बुरे दिन आ गए थे कि सुबह से शाम तक यही सोचना पड़ता था कि कैसे घर चलाऊं.

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मैंने जल्दी से कपड़े निकाले और मैं दो पल बाद सिर्फ अंडरवियर में ही था। अंडरवियर में मेरा मूसल जैसा लंड उनकी गांड को सलामी दे रहा था।बहुत कामुक नजारा था. कुछ पलों बाद जब उसका दर्द कम हुआ … तो उसकी उठती बैठती हुई गांड मुझे बुला रही थी. अब भाभी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं और वो सोनिया की चूचियों को दबाने लगी.

जैसे ही राहुल ने अपने होंठ रूचि के निप्पल पर टच हुए, रूचि ने लंबी सिसकारी भरी. फिर दो दिन के बाद मैंने नोटिस किया कि आंटी अपनी ब्रा और पैंटी को बालकनी में ही सुखाने लगी है. गूगल तुम कब मरोगेवो बोले- तो क्या इरादा है समधन जी!मैं समधी जी के नेकर के ऊपर से लंड को पकड़ कर बोली- इरादा बिल्कुल साफ़ है, अब आप ही बुझा दो मेरी आग.

वो कभी आंड पकड़ने लगती तो कभी लौड़े को ऊपर नीचे करने लगती। मैं बाहर के गेट को देखता हुआ उसके मोटे चूचों को दबा रहा था। हम अपनी कोशिश के हिसाब से जितना हो सकता था उतना मजा ले रहे थे।फिर अवनी ने रात की बात बताई कि मामी को शक हो गया है.

रोज रात को सोने से पहले मेरी योनि मुझे तंग करती और मैं उसे उंगली से रगड़ मसल कर जैसे तैसे समझा बुझा कर शांत करती रहती. अब तक की इस विलेज गर्ल की चूत कहानी में आपने पढ़ा था कि गांव के महामादरचोद मुखिया जीवन परसाद के सामने से एक कमसिन लौंडिया गीता अपनी गांड मटकाती हुई जा रही थी.

20 मिनट गांड चुदाई करने के बाद मैं उनकी गांड में ही झड़ गया और हम दोनों नहाने लगे।नहाते समय मुझे ऐसा लगा कि जैसे शायद बाथरूम के दरवाजे के बाहर कोई हम दोनों को सुन रहा हो। बाद में पता चला कि वो भाबी की छोटी बहन थी। उसकी कहानी मैं आपको बाद में बताऊंगा. राहुल- रूचि, अगर तुम्हें अच्छा लगे तो क्यों न हम अभी कहीं बाहर घूमने चलें?रूचि- हां चलो, उधर हमें एक दूसरे को समझने का … और बातें करने का टाइम भी मिलेगा. एक दिन फ्री क्लास में हम दोनों अकेले बैठे थे, तो उसने नीचे बैठ कर मेरा हाथ पकड़ा और मुझे फिर से प्रपोज़ किया.

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मैंने उनसे कहा कि ये आप क्या कर रही हैं मम्मी जी!उन्होंने कहा- यही तो आज की परीक्षा है बेटे जी, आपको मुझे पांच दिन तक अपने इसी लंड से संतुष्ट करना होगा. सुरेश- अरे आओ रघु बैठो, कैसे आना हुआ … और बताओ दवाई असर कर गई या नहीं?रघु- हां बाबूजी, वो दवा से दर्द ठीक हो गया … और मीनू को भी दर्द में फ़र्क है. हर कोई चोदने को तैयार है और लड़कियाँ भी लंड का मजा लेने में पीछे नहीं हैं.

फिर मैं उसके ऊपर से उठ गया और उसकी टांग को हाथ में पकड़ कर उसकी चूत में लंड को पेलने लगा. तभी अब्बू आ गए और अम्मी को जब इस हालत में लेटे देखा, तो फौरन पैन्ट के ऊपर से लंड सहलाने लगे. उस प्यारे से सख्त लौड़े के लिए मेरी चूत ने अपने अंदर पूरी जगह बना ली.

गांव के आख़िर में एक पुलिस चौकी बनी हुई थी, जहां का इंचार्ज बलराम था. कुछ ही देर में मॉम को पूरा मजा आने लगा और मैं भी मस्ती में चोदता रहा. उनके घर में पक्की ईंटों का बाथरूम नहीं बना था बल्कि तिरपाल का बाथरूम बना हुआ था.

सब रज़ाइयों में लेटे हुए सो रहे थे, सिर्फ भाभी की सहेली ही जाग रही थी. इतने में राहुल ने मेरी पीठ पर हाथ फिराते हुए ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरे दोनों सफेद कबूतरों को आजाद कर दिया.

ऐसे बैठे रहने की क्या वजह?मैं- जी, क्या नाम है आपका?संगीता- संगीता … क्यों?मैं- संगीता जी, मैं चला जाता … लेकिन मेरे बाइक में पंक्चर हो गया है और अंधेरा होने की वजह से रास्ते में कोई पंक्चर वाला भी नहीं मिला.

अचानक से पूरा लंड निकाल कर जोर के झटके के साथ जब मेरा पूरा लंड उसकी गांड में घुसता, तो साला मचल उठता. सबसे छोटा ट्रैक्टरअम्मी ने मजाक में उनसे बोला- और बता आजकल चुदवा रही है या उंगली से काम चला रही है. माथा दर्दमुझे मेरी वाइफ बहुत पसंद आ गयी थी और वो भी मुझे बहुत पसंद करने लगी थी. मेरी सासू मां ने एक शर्त रखी कि मैं और मेरी एक बहन, हम दोनों तेरी परीक्षा लेंगे.

मैं उसकी बात सुन कर हैरान था कि अगर कोई और लड़की होती, तो अब तक मुझे दो चांटे लगा चुकी होती.

मुखिया- अरे मुनिया क्या धीरे से कर रही है, थोड़ा ज़ोर लगा … और कब से बोल रहा हूँ कि ऊपर तक कर. फिर उस देसी गर्ल ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी चूची पर रखवा दिया और कहा- अब बताओ. उनकी गांड को मैंने थोड़ा सा ऊपर उठाया और साड़ी को खोल कर उतार दिया.

उसकी ये हरकत देखकर मुखिया सोच में पड़ गया और उसके पीछे अन्दर चला गया. सुमन- तुम्हारी बहन के बाद तुमने उसको पाला, तो उसके पिता कहां हैं?कालू- मेरी बहन के गम में वो दूसरे दिन उसके पास चले गए. अम्मी के दूध मसलते हुए हल्के से कान में बोले- क्या बात मेरी जान, चूत के बाल कब साफ किए.

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मैं उनके चूतड़ों को जोर जोर से मसल रहा था और बीच बीच में उन पर थप्पड़ भी मार रहा था. मैंने कहा- हां जानू आप खुद ही मेरा लंड निकाल कर ले लो न!भाभी बोलीं- हां जानू मैंने आपका लंड पकड़ लिया है. गीता- इसमें मेरी क्या गलती है काका, वॉल खुला ही नहीं … और अब दूसरा क्या काम है?मुखिया अपने लौड़े पर हाथ फेरता हुआ उसे देखने लगा.

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शबाना- अरे तुम कब आए?मैं- मैं बस अभी ही आया हूँ, तुम नहीं गई शादी में?उसने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया, वो बस एक मुस्कान के साथ रसोई में चली गई.

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काफी दिन गुजर गये थे लेकिन मामी की चुदाई का कोई मौका हाथ नहीं लग रहा था. अब अम्मी औंधी लेट गईं और धीरज ने ऊपर चढ़ कर मेरी अम्मी की चौड़ी सी गांड में लंड पेल दिया. लगभग 5 मिनट बाद मैं बुआ में पीछे लेट गया और पीछे से अपना लंड उनकी चूत में डाल कर धक्के मारने लगा.

कॉन्डम उपयोग

मेरे मुँह से आवाज निकली, तो उसने अपने हाथ से मेरा मुँह बंद कर दिया और जोर जोर से मुझे चोदना शुरू कर दिया. मैं खुद बहुत दिन से ऐसा सोच रही थी कि काश कभी सैंडविच चुदाई का मजा मिले. मेरे पिताजी और मां एक दूसरे को पहले से जानते थे तो उन्होंने बच्चा न गिरवाने का फैसला किया और जल्दी ही शादी कर ली.

मुझे डर था कि कहीं मेरी चुदासी बीवी की ये आवाजें मेरी भानजी रोबीना को जगा न दें. सुजाता भी अब गर्म होने लगी थी और उसके हाथ मेरे सिर के पीछे आ गये थे.

मैं कल्पनाओं के सागर में डूब कर कभी अपनी निगोड़ी चूत को शीशे के सामने सहलाती, तो अपने बोबों को दबाती, निप्पलों पर अपना थूक लगा कर उंगलियों से सहला सहला कर हल्का हल्का सा खींच कर खड़ा करती.

मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो गई और मैं अपने हाथ से अपनी चूत मसलने लगी. यहां मैं एक बात बताना चाहता हूँ कि जब भाई-भाभी दो दिन के लिए भाभी के घर पर गए थे, जो दिल्ली में है. सेकेंड ईयर में है लेकिन उसको मेरे देवर ने 2 बार पकड़ लिया अपने बॉयफ्रेंड के साथ घूमते हुए, इसलिए पढाई बंद करा दी हमने.

मेरी जीभ लगते ही आंटी जोर से सिसकारी और तेजी से मेरे लंड को फेंटने लगी. रुक्मणी जी देखने में सुमन भाभी से किसी भी हालत में कम मस्त नहीं लग रही थीं. जब वो तौलिया अपनी बॉडी पर लपेट रही थी, उसी वक़्त मैंने उसके 34c साईज के स्तनों की हल्की सी झलक देख ली थी.

भाभी ने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया और हम दोनों वहीं खड़े हुए 10-12 मिनट तक किस करते रहे.

घोड़ों की बीएफ: उनका कन्धा पकड़ कर उनके होंठों को चूसने के लिए मैंने अपने होंठों को आगे बढ़ाया तो मौसी ने होंठ हटाकर अपना गाल मेरे आगे कर दिया. इस ये का कोई नाम भी तो होगा!हालांकि मुझे नाम सब मालूम था, लेकिन मैंने शर्म से अपना चेहरा ढंकते हुए बोला- नहीं, मुझे नहीं पता … क्या नाम है.

आंटी की सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … राज … आह्ह … आराम से … आई … आह्ह … अम्म … आहिस्ता।आंटी मेरे सिर के बालों को सहलाने लगी थी. फिर उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे पूरे बदन में किस करने लगे. ये सुनते ही मैंने जोर जोर से चाची की चूत को चूसना शुरू कर दिया और वो मेरे सिर को अपनी चूत में दबाने लगी.

उसके मुंह लगातार कामुक आवाजें निकल रही थीं- आह्ह … रवि … अच्छा लग रहा है … आह्हह … और जोर से चोद … बहुत मजा दे रहा है रे तू तो … आह्ह्ह … मैं तो तेरे ही लंड से चुदा करूंगी अब! अब तू पक्का मादरचोद बन गया है.

भाभी चुदासी सी बोल पड़ीं- जब नीचे आग लगी होती है, तो तेज तो होना ही पड़ता है. वो भी इतनी अच्छी तरह कि एक बाल तक नहीं बचा है, बिल्कुल मक्ख़न जैसी चिकनी चुत कर रखी है. तुम्हारी पैंट में जो औजार तैयार है उसको अपनी पैंट के अन्दर ही रखना.