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लेकिन वो मेरी नजरों की हिद्दत को अपने चेहरे पर महसूस कर रही थीं।उन्होंने एक लम्हें को आँख खोल कर मेरी आँखों में देखा और फिर से अपनी आँखों को भींचते हुए शर्मा कर बोलीं- सगीर क्या है.पर फिर खुद पर काबू करते हुए मैंने उनके लोकेशन बताने के बाद गाड़ी स्टार्ट कर दी।दो ही मिनट बीते होंगे कि कानों में साहब और मैम साहब की बातें जो पार्टी के बारे में बात कर रही थीं.

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मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मैं अब हमेशा के लिए इन आँखों का गुलाम हो गया हूँ।उनकी आँखों में देखते-देखते मेरी आँख में भी आँसू आ गए।आपी ने वैसे ही मेरे सीने से लगे-लगे अपना एक हाथ उठाया और मेरे आँसू साफ करने लगीं।मैंने उस वक़्त अपनी बहन के लिए अपने दिल-ओ-दिमाग में शदीद मुहब्बत महसूस की और बेसख्तगी में अपना चेहरा नीचे किया. अभी 30-40 किलोमीटर ही चली होगी कि मुझे सर्दी लगने लगी।मैंने चादर निकाली और ओढ़ने लगा. इसीलिए मैंने तुमसे पहले ही पूछा था कि कार ड्राईव कर लेते हो न?’मैंने बिना कुछ कहे चाबी उनके हाथ से ली और ड्राईवर सीट पर आकर बैठ गया। साहब और मैम साहब पीछे की सीट पर बैठ गए और मोहिनी मेरे बगल वाली सीट पर बैठ गई। एक बार तो मेरी नजर उसकी गोरी-गोरी मखमली टांगों पर चली गई.

!’ अम्मी का ना रुकने वाला सिलसिला शुरू हो चुका था।फर ऐसे ही अपनी फिक्रें बताते हुए और शिकायत करते हुए ही अम्मी नाश्ता बनाने लगीं, मैं उनकी बातों का जवाब देते हुए ‘हूँ. मैंने माफ़ किया।फिर मैंने पूछा किया- आप मेरी गर्लफ्रेण्ड बनोगी?वो थोड़ी घबरा गई- नहीं.

नमस्कार सभी पाठकों को सेक्स भरा प्रणाम। मैंने आपको पिछले भाग में बताया था कि मुझे टाइपिंग करने में आलस आता है.

आ जाओ न चोदने?मैं बोला- यार मन तो मेरा भी उस दिन से तुमको चोदने का बहुत करता है।प्रियंका- तो एक आईडिया है.

तो मैं तो सन्न रह गई।लड़कियाँ मुझ पर हँस रही थीं। एक ने मुझे पकड़ते हुए बोला- इसको चुदाई कहते हैं रानी. पर उसकी जांघें और चूचे एकदम मस्त थे।मैं चाहकर भी अपनी नज़रें उससे नहीं हटा पा रहा था, उसके चूचे देखकर तो मन कर रहा था कि अभी जाकर उसका टॉप फाड़ दूँ और पूरे मम्मे खा जाऊँ।उसने भी मुझे अपनी तरफ घूरते हुए देख लिया था।क्योंकि वे लोग दोपहर में आए थे. तन्वी बहुत अच्छी लड़की है, वो मुझसे बहुत प्यार करती है। मैं भी उसको बहुत प्यार करता हूँ।अब मैं बताता हूँ कि तन्वी को कैसे चोदा।मैंने तन्वी से एक बार मिलने को कहा.

अदालत ने उसको पागल करार दे दिया और पागलखाने भेज दिया।दोस्तो, हर बार मेरी कहानी का खुशनुमा समापन होता है. मैंने एक ही बार में पूरा लण्ड अन्दर कर दिया।वो ‘आ अहह अहहा अहहा आहा असीसीसिस सीसीसी सीसिस अहहहह’ करने लगी।मैं लगातार चोदने लगा. तो चूत रसीली थी।तब भी सुदर्शन ने अपने लण्ड पर थूक लगा कर मेरी चूत पर रखा.

इसलिए मैंने सोचा कि अन्दर कोई नहीं होगा और मैंने अपना लम्बा लौड़ा निकालकर जो कि इस समय पूरा खड़ा था.

अभी एक ही राउंड हुआ है।टोनी- उठो अर्जुन साहब चीरहरण की रस्म पूरी करो. ’इतने से वार्तालाप ने तो दोस्तो, जिस्म में सुनामी ला दिया।क्या प्यारा नाम है. फिर उसके मम्मों को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। वो तो बस समझो पागल ही हो गई।अब मैंने ज्यादा देर ना करते हुए उसका शरारा उतारना शुरु किया और धीरे-धीरे उसका नंगा गोरा-गोरा बदन मेरे सामने आ रहा था और मैं भी पागल सा होता जा रहा था।अब वो मेरे सामने सिर्फ़ पैन्टी में बिस्तर पर लेटी हुई थी।क्या मस्त नज़ारा था.

पर नर्स को इतनी जल्दी थी कि उसने मेरा लण्ड पकड़ कर उसे चूत का रास्ता दिखा दिया।चूत के मुँह में मेरा लण्ड लगते ही मुझमें एक अजीब सा जोश आया और मैंने एक झटका मारा, मेरा पूरा लण्ड नर्स की चूत में चला गया और वो मझसे लिपट गई। ऐसा लग रहा था जैसे कि वो एक अरसे से नहीं चुदी थी।फिर मैंने एकदम फुल स्पीड के साथ चोदना शुरू कर दिया।वो मुझसे बोली- थोड़ा धीरे. आप सबके सामने अपने जीवन में घटित एक सच्ची घटना प्रस्तुत करने जा रहा हूँ।अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है. वो नंगे पाँव थीं।उनके गोरे पाँव मैरून कार्पेट पर बहुत खिल रहे थे।‘आपी आप इस सूट में बहुत ज्यादा हसीन लग रही हैं.

तो उसने ‘हाँ’ कर दी।बातों-बातों में पता लगा कि वो पंजाबी है और उसके ससुराल वाले चंडीगढ़ में रहते हैं।उस वक्त रात के दस बज चुके थे, उसने कहा- चलो घर चलकर बात करते हैं।मैं समझ गया कि आज इसका शिकार करने का मूड है.

जैसे आम नॉर्मल फिल्म्स में देखो सब हीरो वगैरह खासे पहलवान और आकर्षक. !’ इतना कह कर आपी चुप हो गईं।उनके चेहरे से बेचारगी और लाचारी ज़ाहिर हो रही थी।‘आपी आपकी इतनी लंबी तक़रीर का मेरे पास एक ही जवाब है कि फरहान भी सब समझता है.

बीएफ वाली बीएफ बीएफ तराशी हुई मांसल जांघों के बीच में हल्के काले बाल…मैंने आज तक किसी औरत की चूत नहीं देखी थी, ऐसी जवानी देख कर मैं मदहोश हो गया।‘उफ़. तुम्हारा इतना मोटा ये मेरे अन्दर कैसे जाएगा और इससे मुझे ज्यादा दर्द तो नहीं होगा?मैंने उससे कहा- नहीं यार.

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तो उसको अपने आप पता चल जाता है कि आप उसको घूर रहे हैं।काफ़ी देर लाइन देने के बाद उसने भी मेरी तरफ देखा।मैंने उसको ‘हाय’ का इशारा किया.

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तो मैंने देखा कि उसको करेंट सा लगा है। मैं समझ गया कि इसको कुछ हुआ था।मैं हर रोज़ माउस पकड़वाने के बहाने उसके हाथ को टच करने लगा और दबाने लगा और वो भी कुछ नहीं बोलती थी. लेकिन मैंने उसकी एक ना सुनी।तभी वो अकड़ने लगी और उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर टिका दिया और एक गर्म पानी की पिचकारी छोड़ दी और निढाल होकर बिस्तर पर पड़ गई।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैंने टिश्यू पेपर से उसकी चूत साफ की और चूत में एक उंगली डाल कर उसकी क्लिट को फिर से चूसने लग गया। कुछ ही टाइम में वो वापिस गर्म हो उठी और बोली- प्लीज़ नाउ फक मी. लेकिन मैंने अपनी गाण्ड के सुराख को भींचते हुए पानी को बाहर आने से रोक लिया और अपनी स्पीड को बढ़ाने लगा। मैंने आईने में देखा तो आपी अपना हाथ वापस अपनी टाँगों के दरमियान ला चुकी थीं और रगड़ना शुरू कर दिया था।ये वाकिया जारी है।[emailprotected].

तो हम दोनों छत पर बातें करने लगे।हमारी छत से उसकी छत पर जाने के लिए एक पतली गली जैसा रास्ता है।एक दिन उसका बर्थ-डे आया, मैं उसको गिफ्ट देने के लिए उसी रास्ते से उसके रूम तक गया, वो मुझे वहाँ देख कर डर गई. आज मुझे सेक्स का मज़ा दे ही दो।’उसकी रज़ामंदी देख मेरा मन निहाल हो गया और मैंने बिना देर किए उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिए।उसकी चूत एकदम पाव रोटी की तरफ फूली हुई थी और उसकी चूत पर हल्के-हल्के भूरे रंग के बाल थे।मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी. उसकी क्लिट को रगड़ने लगा।वो मचल कर कहने लगी- जीजू आप तो चूसते भी मस्त हो.

’ करके मज़े ले रही थी। मेरा लंड दुबारा खड़ा हो चुका था और उसकी चूत में डुबकी लगाने को तैयार था।मैंने उसको सीधा लिटाया और लंड को उसकी चूत के पास ले जाकर चूत के बाहर फिराने लगा.

क्लास में आते ही मैं मोना के बारे में सोचने लगा। कितने गोरे दूध थे मोना के. वो एसी खराब होना रॉनी का पुनीत को बार-बार मना करना ताकि इसको जरा भी शक ना हो. कि तब मुझे कैसा लग रहा था।करीब दस मिनट बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया.

मैडम मन में हँसने लगीं- अब आ रहा है लाइन पर फिर वे बोलीं- हाँ हाँ बोलो. मैं ममता को धकापेल चोदने लगा।कुछ मिनट की चुदाई के बाद मेरा जूस निकलने वाला था. लेकिन अब मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके मम्मों से खेलने लगा।उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे लेकिन धीरे-धीरे वो अपने दर्द को भुलाने लगी और मेरी पीठ को सहलाने लगी।कुछ ही देर में मोहिनी के पूरे जिस्म में हरकत शुरू हो गई और अब वो उचक-उचक कर मेरे लंड को अपने अन्दर और लेना चाहती थी। मोहिनी अब पूर्ण रूप से खेलने को तैयार हो चुकी थी।मैंने अपना लंड उसकी चूत से आधा निकाला और फिर एक तेज धक्का और लगाया।‘उफ़्फ़.

जिसको देखो तभी दिल में यही बात आती कि बस इसकी चूत मिल जाए और कुछ नहीं चाहिए. दीदी सोच रही थी कि कहाँ से शुरूआत करूँ।मैंने दीदी से पूछा- क्या सोच रही हो?उसने कहा- मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि कहाँ से शुरूआत करूँ।मैंने कहा- मैं कुछ मदद करूँ?तो उसने मना कर दिया और कहा- मैं खुद ही ट्राई करती हूँ।ये सुन कर मैं उदास हो गया.

जब आपके हाथ में आपकी अपनी सग़ी बहन का इस्तेमाल शुदा ब्रा हो और आप उसे चूम और चाट रहे हों. जब उनके पति ड्यूटी पर गए हुए थे। उन्होंने मुझे बिठाया और कहा- मैं तुम्हारे लिए चाय लाती हूँ।मैं बिस्तर पर बैठ गया. मैं पूरी मेहनत करूँगा।मैडम- प्रिंसिपल सर ने कहा है कि मैं तुम्हें स्कूल के बाद भी पढ़ाया करूँ.

और उसके चूचों पर झपट पड़ा। उसके दोनों चूचों को मिलाकर दोनों अंगूरों को एक साथ चूसने लगा.

इसलिए ना ही कुछ बोल सकीं और ना ही ज्यादा हिल सकीं।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैंने कुछ देर तेजी से अपनी ऊँगलियों को आपी की चूत के दाने पर मसला. नींद भी आ रही है।मैंने उसे दो-तीन किस किए और बिना चोदे एक-दूसरे को अपनी बाजुओं में लेकर सो गए।हमें पता ही न चला कि कब सुबह के 7 बज चुके थे।फिर हमने सुबह जबरदस्त चुदाई की. और अपनी सग़ी बहन के जिस्म की खुशबू आपको उसकी याद दिला रही हो।अचानक आपी ने दरवाज़ा खोला और अन्दर का मंज़र देख कर उनका मुँह खुल गया और वो जैसे जम सी गईं।वो अपनी ब्रा लेने ही वापस आई थीं.

मैंने उससे पूछा- माल कहाँ लेना है?वो बाहर झड़ने को कहने लगी।मेरे लंड निकालते ही वो झड़ गई और मैंने भी मेरा सारा पानी उसकी चूत के ऊपर. वो भी थोड़ी मुस्कुरा दी, तो हम थोड़ी देर तक एक-दूसरे को छुप-छुप कर देखते रहे।ऐसे ही यह सिलसिला 15 दिनों तक चला.

’कुछ देर बाद मैंने अपनी पोज़िशन चेंज कर दी, अब नीलम चाची मेरे ऊपर आ गई थीं, उनको भी यह मूव अच्छा लगा। वो अपनी गाण्ड ऊपर-नीचे करते हुए स्ट्रोक्स लगा रही थीं, वो जब स्ट्रोक्स लगा रही थीं. मैडम- अवि तुम्हें आज दिन भर कुछ काम तो नहीं है?अवि- नहीं मैडम आज मैं फ्री हूँ।मैडम ने अपनी चूचियाँ खुजाते हुए पूछा- तुमने वो किताब पढ़ी है?अवि- हाँ बस एक बार।मैडम- वो किताब देख कर तुम्हें कैसा लगा।अवि- कुछ अजीब लग रहा था।मैडम- क्या तुमने ऐसी किताब पहले भी देखी है।अवि- हाँ मेरे कुछ दोस्तों ने दिखाई थी।मैडम- तुम्हें पसंद हैं ऐसी किताबें?अवि- पसंद तो नहीं हैं. मैंने अपने कपड़े उतारे और फरहान का हाथ पकड़ कर बिस्तर की तरफ चल पड़ा।आपी की नजरें मेरे नंगे लण्ड पर ही जमी हुई थीं.

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तभी मुझे पता चलेगा। मुझे यकीन तो नहीं है शायद फिर से तुम झूट बोल रहे होगे।अवि- नहीं मैडम.

तो हमें लगा कि कोई स्टेशन आने वाला है और हम दोनों अलग होकर बैठ गए।गाड़ी थोड़ी देर स्टेशन पर रुकी और निकल पड़ी।हमारी बोगी में कोई नहीं आया. जो मेरी साथ पिछले साल घटित हुई है।मेरे और मेरी बचपन की दोस्त नेहा (यह असली नाम नहीं है) के बारे में है।नेहा 5’1” की हाइट. पर एक दिन क्या हुआ कि मेरी बहन कपड़े धो रही थी।उसने मुझे बोला- भाई, मेरे कमरे से धोने के कपड़े लाकर दे दो।मैंने कहा- चल मैं भी साथ में कपड़े धो देता हूँ.

यह देख मैडम ने मेरे लण्ड को मुँह में लिया और जोर-जोर से मेरा गन्ना चूसने लगी। मैं उसकी चूत को बार-बार अपनी उंगली से जोर-जोर से अन्दर-बाहर करता रहा।उस समय मैं झड़ गया. उसको भी मेरे हाथों इंतजार था।मैंने एक झटके में उसकी कसी हुई बुर को ढीली कर दिया। वो ज़ोर से चिल्लाई- ओह. सुहागरात मेंवहाँ कोई नहीं रहता था। उसने दरवाजा खोला और हम अन्दर आ गए।उसने पूछा- क्या लोगे?मैंने कहा- पानी.

साली नोंच कर मेरे चूचे ही गायब ही कर देगी क्या? कमीनी जान निकाल दी. तो मौसी ने मेरा हाथ पकड़ लिया।मैं उनके बगल में बैठ गया, मैंने कहा- अब बताओ.

तो एकदम स्वर्ग की अप्सरा लग रही थीं।मैं उन्हें देखता ही रह गया।अब हम दोनों और भी क्लोज हो गए थे।थोड़े दिनों बाद भाभी ने मुझसे एक बॉडी-लोशन मँगवाया तो जब मैं भाभी को वो देने गया. और हमको इतना ड्रामा भी न करना पड़ता।नेहा बोली- अबे साले बिना मेहनत के मिलती तो मजा आता तेरे को क्या?मैं बोला- पॉइंट तो सही है यार. मैं आंटी को गर्म करना चाहता था।दो दिन ससुराल में बिता कर हम वापिस आ गए, आंटी की तरफ से कोई लिफ्ट नहीं मिली थी, इतनी जल्दी कुछ होना भी नहीं था। मगर शिकार तो मुझे करना ही था.

प्रवीण बोला- पागल है के? (पागल है क्या) इसकी नरम मुलायम गांड का पूरा मज़ा लूंगा मैं तो. जो 39 साल की हैं और मैं पूजा 18 साल की हूँ और एक छोटी बहन रूपा है।पापा की मौत हो जाने के कारण माँ बहुत उदास रहती थीं और किसी से भी ज्यादा बात नहीं करती थीं। माँ को उस कर्ज़ की चिन्ता भी थी जो पापा के जाने के बाद हम पर चढ़ गया था. बस आज मुझे दीपा को चोदने का मौका मिल गया था।मैं उठा और उसका हाथ पकड़ लिया.

बोलो पायल पहले तुम बोलो क्या डिमाँड है?पायल- ओके तो सुनो, हारने वाली लड़की को यह हक़ होगा कि उसके साथ पहले कौन करेगा.

फिर उसने बताया- मैं अवनी बोल रही हूँ और तुम्हारी बहन तुमसे बात करना चाहती है।‘ठीक है कराओ. सो वो डर गई।उसने मेरी आंटी को कहा- आप मेरे साथ यहाँ सो जाओ।पर आंटी को सुबह बम्बई जाना था और सुबह की गाड़ी 5 बजे की थी.

फिर मुस्कुराते हुए बाहर चली गईं।मैं और फरहान दोनों ही आपी की इस हरकत पर बुत बने खड़े थे और शायद मेरी तरह फरहान भी हमारी बेपनाह हया वाली बहन के इस अंदाज़ के बारे में ही सोच रहा था।मैं अपनी सोचों में आपी के कल और आज का मिलान करने लगा।मैं और फरहान दोनों ही रूही आपी के ख्यालों में गुम थे और आज जो कुछ हुआ. आज मैं पूरा दिन तेरे साथ गुजारना चाहता हूँ।उसी वक़्त मेरी मॉम भी मेरे कमरे में आ गईं।मॉम बोलीं- आज तू कॉलेज नहीं जाएगा क्या?तब मैंने कहा- नहीं मम्मी. मैंने चाची को अपने पास खींच लिया और उनके होंठों को चूमने लगा।उन्होंने लिपिस्टिक लगा रखी थी और मैं जोर से उनके होंठों को चूस रहा था.

मैं दिखने में स्मार्ट लगता हूँ।मैं अन्तर्वासना का चार वर्षों से नियमित पाठक हूँ. पिछले भाग में आपको मैंने बताया था कि मेरे दोस्त अशोक के बताने पर मुझे एक लड़की को हासिल करने की चाह हो उठी थी और जब कोई लड़की नहीं मिली तो मैंने मौका देख कर अपनी बहन सोनिया से ही उसको नंगा देखने की चाहत से कहा कि सोनिया मैं तुम्हें देखना चाहता हूँ।सोनिया- क्या मतलब. तो मैंने फिर से लण्ड को हल्का से बाहर निकाला और पूरी जान लगा कर धक्का मार दिया तो प्रीत की चीख निकल गई और वो रोने सी लगी थी.

बीएफ वाली बीएफ बीएफ मैंने कहा- हाँ।मैंने कनखियों से देखा कि नेहा भाभी थोड़ा शर्मा गई थीं। उनको ये लग रहा था कि उसको कोई नहीं देख रहा।अब मैंने कहा- चलो अब फाइनल तो पूरा कर लें।‘हाँ अब रस पिला ही दो. पर इसमें मजा भी बहुत आता है।अब एकदम से मुझे याद आया कि प्रीत का गिफ्ट तो मेरे रूम में है।मैं उठा और प्रीत को बोला- जान अभी आता हूँ और जल्दी से गया.

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देखो मैं तुम्हें क्या-क्या दिखाता हूँ।’मैंने शैतानी मुस्कुराहट से कहा।अगली रात हमने मूवी स्टार्ट की ही थी कि दरवाज़ा खुला और आपी अन्दर आईं। हम दोनों की नजरें आपी पर ही थीं। आपी सिर झुकाए-झुकाए ही अन्दर आईं और हमारी तरफ नज़र उठाए बगैर ही जाकर सोफे पर बैठ गईं। उन्होंने आज भी क़मीज़ सलवार पहनी हुई थी. मैं तो बाइ रोड जाने की सोच रहा हूँ। आप क्या करने वाली हो?’ मैंने उनसे पूछा।‘मैंने अब तक तो कुछ सोचा नहीं था. थोड़ी देर पहले फोन किया था। बताया था कि घर नहीं आ पाई तो सहेली के पास वापस चली जाऊँगी.

लेकिन तभी मेरी सहेली ने कहा- यही तो मेरा यहाँ ख्याल रखता है। पहली बार ही थोड़ा दर्द होगा. वो जल्दी से हो गई।मैंने भी पीछे से लंड को उसकी लपलप करती चूत पर लगा कर उसकी कमर पकड़कर एक के बाद एक तगड़े शॉट लगाने शुरू कर दिए।हम इतनी सर्दी में भी पसीने से पूरे पानी-पानी हो रहे थे।इस बार मुझे झड़ने में काफ़ी वक्त लग रहा था. ब्लूटूथ एक्स एक्स एक्सऔर उनका ट्रान्सफर इंदौर में हो गया था। वो अपनी बेटी को डीपीएस इंदौर में 12वीं क्लास में एडमिशन के लिए आए थे।उन्होंने बताया कि परसों उनकी बेटी टिया का टेस्ट है।टिया एक 18 साल की कामुकता से भरी लड़की थी। उसका बदन उसके उम्र की लड़कियों से थोड़ा ज्यादा भरा हुआ था। वो मोटी नहीं थी.

वो चिल्ला उठी।फिर मैं थोड़ा रुक गया और उसके मम्मों से खेलने लगा। फिर जब वो कुछ सामान्य हुई तो मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने चालू कर दिए। अचानक से मैंने एक ज़ोर का झटका मारा और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया।अवनी की आँखें फटी की फटी रह गईं। अब मैं लग गया.

जब मैं 19 साल का था और दिल्ली में डीयू के एक कॉलेज में पढ़ता था। उन दिनों मेरा लंड बहुत उठता था. तो लंड आधा रितु की चूत में चला गया।वो दर्द से बुरी तरह चिल्लाने लगी.

खड़ा करने जैसा काम लगता है।कभी करके देखना और मुझे लिखना।धीमी-धीमी बारिश में हम दोनों बाइक पर जा रहे थे। मैं भी कभी-कभी मजे लेने के लिए ब्रेक लगा देता. पर इसी इरादे से कि हम फिर से ज़रूर मिलेंगे वो भी बहुत जल्द।आप मुझे ईमेल करना मत भूलिएगा. तो मैंने भाभी सोफे को पर लिटा दिया।फिर मैं उसको धीरे-धीरे चुम्मन करने लगा.

मजा आ गया।आप सोच सकते हो मुझे उसकी चूत को चाटने में कितना मजा आ रहा होगा। लेकिन उसकी पैन्टी बार-बार बीच में आ जा रही थी.

तो बुआ मेरे सामने सीधी बैठी हुई थीं।मुझे पता नहीं चला था कि कब बुआ झुककर खाना खाने लगीं। जब मैंने अपना सर ऊपर किया. अब ऐसे घूर-घूर कर क्या देख रहे हो?’ मौसी शर्मा कर एक हाथ से अपनी चूत और एक हाथ से अपनी चूचियों को ढंकने की नाकामयाब कोशिश करती हुई बोलीं।‘सच मौसी आज तक मैंने इतनी मस्त जवानी नहीं देखी. आप अपने ख्यालात कहानी के अंत में अवश्य लिखें।ये वाकिया जारी है।[emailprotected].

देशी चोदाईपर सीधा कह न सकीं। अंकल भी उसके मन की बात समझ गए और उसे चूमने लगा। धीरे-धीरे अम्मी ने खुद को समर्पित कर दिया था और अब उनका विरोध समाप्त हो चुका था।मैं खिड़की से झांकते हुए अपनी अम्मी को अपने पापा के दोस्त से चुदते हुए देख रही थी।उन दोनों ने तकरीबन दस मिनट तक किस किया। अब अम्मी की शर्म खत्म हो गई थी. मैं भी जन्नत में था।मैं बता नहीं सकता कि कितना यादगार पल था।वो आवाजें निकालते हुए झड़ रही थी.

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तो वो अन्दर लाल रंग की ब्रा और पैन्टी पहने हुई थीं।क्या मस्त बदन लग रहा था उनका. वहाँ झोंपड़ी की छत पर लगे बांस में एक बल्ब टंगा हुआ था जिसके कारण बाहर की अपेक्षा अंदर ठंड का अहसास थोड़ा कम हो रहा था।और नीचे जमीन पर फूंस (बेकार की सूखी घास) बिछी हुई थी. बिना उसकी सलवार उतारे।मैंने उससे पूछा- तुमने कभी सेक्स किया है?‘नहीं.

आह… रंडी बना दो मुझे!उन्होंने मुझे फिर पलट दिया… मेरी चूत में पानी आ गया था।एक लड़का फ़िर से मेरी चूत चूसने लगा ‘आहह… क्या मस्त चूत है ऊह्ह… ज़ीनत… मेरी जान… उम्म्म… उम्म्म्म… जितनी मस्त तुम हो उतनी ही तुम्हारी चूत भी. तो वो फ़ौरन मेरी तरफ आईं और परेशान हो कर पूछने लगीं- क्या हुआ सगीर खैरियत तो है ना बेटा. उसने फ़ौरन उसके होंठों को मुँह में लिया और चूसने लगी। अब पुनीत भी कहाँ पीछे रहने वाला था.

जयपुर!इस तरह बातों-बातों में उसने अपना नाम सविता बताया।तभी बस चल पड़ी. नहीं तो और दर्द होगा। मैं अपना लण्ड बाहर निकालता हूँ।मैं धीरे से लण्ड निकलते हुए बोला- आंटी आप मुझे अपनी गाण्ड गिफ्ट में दो या ना दो. इस बार मुझे एहसास हुआ कि वो पहले से ज्यादा कम्फ़र्टेबल तरीके से मेरे बिल्कुल नजदीक अपने हाथों को मेरे कंधे पर रख कर बैठी थी।हम ऐसे ही कुछ देर बाइक पर घूमते रहे और फिर मैंने उसको घर ड्रॉप कर दिया। पता नहीं क्यों.

आज क्या-क्या हो रहा है हमारे साथ?’ कहकर वो हँसने लगीं।मैं भी हँसा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !‘अब आप भी सो जाइए. मैंने चूत से लण्ड को बाहर खींचा और इसी तरह उसकी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।वो एकदम से चिल्ला उठी- ओह्ह.

तो उसके गहने मुझे दिक्कत करने लगे। मैंने उसको बिस्तर के पास बैठाया और एक-एक करके उसके सारे गहने उतार दिए।फिर गर्दन और चूचियों के बीच की जगह पर किस करने लगा.

और मेरा टोपा अपने मुँह में ले लिया।मेरे तो जैसे होश उड़ गए और इतना मजा आने लगा कि अब मैं सातवें आसमान पर था।धीरे-धीरे उन्होंने मेरा लण्ड पूरा मुँह में भर लिया और ‘चपर-चपर’ चूसने लगीं।मेरी तो हालत खराब होती जा रही थी।वो मुँह में जीभ फेरतीं. व्व्व गूगल कॉम इनमामी मेरे नीचे गिरी थीं और हम दोनों ही ऐसे गिरे कि मेरा लण्ड मामी की ठीक चूत के ऊपर ही था। मेरी और मामी की नजरें एक-दूसरे से टकराईं और हम मानो कहीं खो से गए। पता ही नहीं चला मैं कब मामी के ऊपर ही कमर से नीचे के हिस्से को हिलाने लगा, बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था।मामी चुप थीं. सेक्स टैबलेटगुस्सा क्यों हो गए?तो मैंने कहा- मैं कब से तुम्हें चुम्बन कर रहा हूँ और तुम मेरा साथ नहीं दे रही हो।उसने कहा- दे तो रही हूँ।मैंने कहा- अच्छा देखूँ मैं. उन्होंने उसका एक सिरा वॉटर टैब से जोड़ा और दूसरी तरफ बने गेंद पर एक शीशी से खुशबूदार चिकनाई वाली जैली निकाल कर उस पर लगाया और फिर जाकर कमोड पर बैठ गए।उन्होंने पाइप से लगे गेंद को अपनी पिछली सुराख में ज़ोर लगा कर अन्दर किया और पानी का नलका खोल दिया। एक हल्की सी सीटी की सी आवाज़ निकली.

तो?मैं बोला- यार जरूर चोदूँगा साली के तीनों छेद भर दूँगा।वो बोली- साले मादरचोद.

वो पैसे भी नहीं लेती थी।मेरे दोस्त को फिर मैंने उसके घर छोड़ा और फिर मैंने उसे मेरे साथ वाली सीट पर बिठाया और उसके साथ बातें करने लगा।मैंने उसे किस किया. साथ में हल्के से चूत के होंठों को काट लेता था।चाची भी मादक आवाजें निकाल कर पूरा साथ दे रही थीं।अब मेरा लण्ड फ़िर चुदाई के लिए तैयार था, चाची भी देर ना करते हुए बिस्तर पर सीधी लेट गईं. जिसमें एक नंगा लड़का और एक नंगी लड़की आपस में सेक्स कर रहे थे।वो फिल्म देख कर मुझे बहुत ज़्यादा उत्तेजना हो गई, मैंने पहली बार कोई लड़की नंगी देखी थी।उसने मुझे कन्डोम भी दिखाया.

जिससे मेरे पास भी उसका नम्बर आ गया।फिर हम अपने घर पर चले गए।फिर 4-5 दिन ऐसा ही चलता रहा। एक दिन मैं अपने रात के खाने के इंतज़ाम में ढाबे पर घूम रहा था. तू यह क्या बकवास कर रहा है हाँ?आप मुझे अपनी प्यारी ईमेल लिखो और बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. वो गर्म हो चुकी थीं, उनकी चूत भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, वो मेरे बालों के ऊपर से हाथ घुमा कर बोल रही थीं- अब देर मत करो.

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मेरी गाण्ड फट गई… सारा जोश ठंडा हो गया… और मैं घबरा गया… मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ।मैं दीदी के पैरों को पकड़ कर माफी माँगने लगा।दीदी ने मुझे दो चांटे मारे और बहुत बुरा भला कहा।उन्होंने मेरे घर पर सब बताने को कहा और वे रोते हुए उठीं और मीना दीदी के कमरे में चली गईं।मैं उठा और कपड़े पहनने लगा. और आज ये सब उसको यहाँ पर चोद कर उसे पक्की रंडी बना देंगे।पुनीत की समझ के बाहर बात हो गई थी कि अचानक ये रॉनी को क्या हो गया।पुनीत- रॉनी तू होश में तो है. इसके आम और तरबूज दोनों मस्त हैं!लड़की- तुम लोग क्या सिर्फ बातें करने आए हो.

और मैं अभी 21 साल का हूँ। मैं छत्तीसगढ़ के एक गाँव में रहता हूँ। मेरी बॉडी बहुत फिट है.

मेरी रूही आपी की नजरें मेरे लण्ड की नोक से निकलते वाइट लावे पर जमी थीं।इसके बाद मैं फ़ौरन सीधा हो कर बैठा और मैंने बिस्तर की चादर को अपने जिस्म के साथ लपेट लिया।फरहान भी फ़ौरन बेडशीट में छुपने के कोशिश कर रहा था.

तू स्कूल क्यों नहीं आई?बोली- अकेले में बताऊँगी।बाद में उसने मुझे अकेले में बताया कि मदन और उसकी चुदाई गाण्ड चुदाई के बाद उसे बहुत दर्द हुआ था और वो बीमार हो गई थी।उसके बाद मदन और मेरे बीच में सोनिया को लेकर जो भी बात होती मैं सोनिया को सब बात बताता।पर मेरे और मदन के बीच में एक बात जो मैंने सोनिया को नहीं बताई थी. तो मेरा गला खुल सा गया।अब मैं मामा का लंड आसानी से अन्दर तक ले पा रहा था। फिर मामा ने मेरी गाण्ड के छेद पर अपनी जीभ लगाई. ब्रेजर्स कॉममोना का भाई- हाँ चलो।तीनों स्पोर्ट रूम से चले गए और मैं भी मोना और सर की चुदाई देख कर खुश हो गया और अपने घर चला गया।बाय मित्रो, मिलते हैं अगले भाग में.

आपसे आग्रह है कि अपने ख्याल कहानी के अन्त में जरूर लिखें।कहानी जारी है।[emailprotected]. ?’ आपी ने ज़रा गुस्सैल लहजे में पूछा।मैंने वहाँ हाथ का इशारा सोफे के साथ रखे टेबल की तरफ किया. उसने ऐसे ही किया और मेरे सीने पर अपने हाथ टिका कर अपनी गाण्ड को ऊपर-नीचे करते हुए मेरे लण्ड को अपनी गाण्ड में अन्दर-बाहर करने लगा।मैं भी इन्तेहाई मज़े के कारण नीचे से झटके लगाने लगा और मैंने अपना चेहरा मोड़ कर आईने में देखा.

मैं अपने आप धो लूँगा।वो नज़र नीची करके चली गई।दोस्तो, मैं नंगा खड़ा रहा. और न जाने कितनों ने तो उसे सपने में चोद-चोद कर उसकी चूत फाड़ दी होगी।खैर.

अब तक आपने पढ़ा कि मैडम से मैं बड़े लण्ड के विषय में सोचते हुए उनसे इस पर बात करने लगा था।अब आगे.

फिर हम सबने पोजीशन चेंज की।अब नेहा मेरा लौड़ा चूस रही थी।फिर हम खड़े हुए. क्योंकि अब मैं लड़के को चोदने से बेजार हो चुका था और कुछ नया चाहता था।अब यहाँ कहानी के इस मोड़ पर आकर इस बात की जरूरत है कि मैं अपनी आपी के बारे में चंद बातें खुलासा कर दूँ।मेरी आपी जिनका नाम रूही है. मैं भी झड़ने वाली हूँ।अब मैंने 15-20 जोरदार धक्के मारे और दोनों ही एक साथ स्खलित होने लगे.

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जहाँ से वो सब को चुपचाप देख रहा था। उसके मन में तो बस लड्डू फूट रहे थे कि कब ये गेम ख़त्म होगा और कब उसको पायल की चूत के दीदार होंगे।सन्नी- नहीं. मेरी कसम।वो बोली- कोशिश करूँगी।फिर मैंने उसे अपना नम्बर दिया और कहा- मैं घर जा रहा हूँ. कुछ करने की सोचने में ही डर लग रहा था। अब मेरा बुआ के प्रति देखने का नजरिया बदल गया था। जब भी मैं बुआ को देखता था। अगर पीछे से देखने का मौका मिलता.

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तो मैं भी जल्द से नम्बर देकर उसका भी सामान निकाल दिया और फिर हम बातें करते-करते नीचे उतरने लगे।अभी हम दोनों की मंजिल दूर थी. ज़बरदस्त चीज थी।मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मम्मों को दबाने लगा और उसे किस करने लगा।वो भी मेरे को कभी कान पर चुम्बन करती. कोई भी प्रतिरोध न पाकर मैं उन्हें चूमने भी लगा।फिर मैंने एक हाथ उनकी पैन्टी में डाल दिया और पैन्टी को नीचे खींच दिया। अब मेरे सामने वो ही चूत थी.

उसने कहा- देखो तुम लोगों को मैं दो विकल्प देता हूँ एक तो मैं तुम्हें पुलिस को सौंप दूँगा. मैंने पूछा- पीयूष, क्या मैं आपको हग कर सकता हूँ?उसने कहा- देख, मैं पहले भी बता चुका हूँ कि मेरे अंदर ऐसी कोई फीलिंग नहीं है अगर तू मेरे साथ कुछ करना चाहता है तो मुझे उत्तेजित कर और अपना काम कर ले…यह कहकर वो फिर चैट में लग गया.

हम लंच एक साथ ही करेंगे।तभी अर्श बोली- अरे मैं नहीं जाऊँगी क्या मीटिंग में?मैंने कहा- नहीं बेबी.

लेकिन आपको पता है कंट्रोल करना पड़ता है।मैंने उसकी कमर पर अपना हाथ फेरा उसने कुछ नहीं कहा।मैं उसकी कमर पर थोड़े पल बाद फिर से हाथ चलाने लगा. वो अब भी मुझे देखे जा रही थी, उसकी पूरी खुली आँखों मैं मासूमियत थी।मैं उस पर झुका और धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। फिर धीरे-धीरे उन्हें चूसना शुरू कर दिया. पांच मिनट में आ जा वहाँ।मैंने ‘ओके’ कहा और चल दिया ठिकाने पर।थोड़ी देर में वो आई.

काफ़ी नीड में हो?’उसने अजीब सी नजरों से देखते हुए स्माइल के साथ कहा- नीड. जैसे पानी में कोई दो बड़े से नारियल तैर रहे हों।जब मैं झटका मारता था. परन्तु फिर भी मैं कोशिश करता हूँ कि ज़ल्दी से ज़ल्दी आप तक अपनी हाजिरी लगवाता रहूँ।दोस्तो, यह कहानी मेरी एक पाठिका और दोस्त.

मैंने इस रिश्ते को थोड़ा आगे बढ़ाने की सोची।एक दिन सोनिया मैथ्स की कुछ प्रॉब्लम सॉल्व करने में मेरी मदद कर रही थी.

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तो फिर मैं धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा।कुछ देर बाद दीदी भी मेरा साथ दे रही थी. वो मुझे सुनाई नहीं दिया।मैडम- अवि, मेरे पास आ जाओ!मैं मैडम के पास चला गया। मैडम और मेरे बीच बस कुछ कदमों का फासला रह गया था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।मैडम- हाथ लगाकर देखो मेरी चूत को. ’अवि- मुझे कोई बीमारी तो नहीं है?मैडम सोचने लगीं कि गाँव में लड़के छोटी उम्र से ही लण्ड.

बस एक ही बार में पूरा लंड अन्दर पेल दिया।अपेक्षा की दर्द भरी तेज आवाज़ से मुझे डर लगा पर मैंने सब भूल कर 4-5 बार झटके मारे.

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