सरदार का बीएफ

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गूगल आई सेक्सी: सरदार का बीएफ, भाभी के स्तन सच में स्वाति दीदी से भी बड़े थे, प्रिया भाभी के स्तन 36′ से कम नहीं थे.

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मैंने अपना लुंगी गंजी खोली और कूद पड़ा मैदान ऐ ज़ंग में…मैंने जांघें फैलाई और देसी कुते के तरह विदेसी मेम को नोचने लगा. वीडियो बीएफ पिक्चर दिखाओमैं उस समय ये सब बातें ठीक से नहीं समझ पाता था कि अंकल पापा के जाने के बाद ही क्यों आते हैं!एक दिन की बात है पापा घर में नहीं थे, शाम का समय था, मम्मी चाय बना रही थी.

क्या इन्हें दबाने में तुम्हें मज़ा आएगा?मैंने भी बिना कोई मौका गंवाते हुए उसमें अपना मुँह घुसा दिया और अपनी जीभ से उसके मम्मे चाट लिए. शक्ति कपूर की बीएफनए पाठकों को बता दूँ कि मेरा नाम अमित अग्रवाल है और मैं रोहिणी, दिल्ली का रहने वाला हूँ, एथेलेटिक शरीर का मालिक हूँ और मेरा लण्ड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है.

उनकी झाँटों के लम्बे-लम्बे बाल मेरे मुँह में जा रहे था पर मुझे भी अब मोना की चूत चाटने में मजा आ रहा था.सरदार का बीएफ: क्यूँकि मेरी चूत की प्यास मेरे भाई ने बुझा दी थी…मैंने कहा- नहीं ! मुझे नहीं चुदवाना…उसने मुझे बेड पे पटक दिया और मेरे ऊपर लेट गया मेरे दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से कस के पकड़ लिया ताकि मैं हिल ना सकूँ और फ़िर मुझे किस करने लगा….

’आलोक बीयर गिलास में डालते हुए पूछने लगा,’नताशा जी, आपके पति कहाँ हैं?’‘अपने काम पर!’उसने मुझे गौर से देखते हुए कहा…’आपकी हँसी बहुत ही सेक्सी और कातिलाना है!’मैंने कहा,’अच्छा??’‘कसम से! नताशा जी… आप किसी फिल्म एक्ट्रेस से कम नहीं हैं.आह……सॉरी सॉरी करने लगी।मैंने कहा- शीला मैं छुटने वाला हूँ !तो शीला बोली- गांड में नहीं, मैं तुम्हारा रस अपनी चूत में लेना चाहती हूँ !मैं रुक गया, अपना लंड निकाला और शीला को सीधा लिटा कर उसकी चूत में अपना लंड डाल कर तेज धक्के मारने लगा। शीला भी चूतड़ उछाल कर मेरा साथ देने लगी और जोश में आकर आह …… स ….

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तभी दीदी ने फिर पूछा- बोल न नेहा, क्या करते हो तुम दोनों?” अनीता दीदी ने नेहा की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथो से मसल डाला.रात को जब सब सोते तो मैं अपनी साली के सोने के बाद उसके बदन को सहलाता, चूची दबाता फिर मुठ मार कर सो जाता.

लेकर बाबूलाल को देते हुए कहा- टाइम का ध्यान रखना! ठीक 10 बजे!बाबूलाल चला गया, ऑफिस का टाइम खत्म हो चुका था, मैं घर चली आई, घर आकर मैं खूब रगड़ रगड़ कर नहाई, कोई दस बार अपनी चूत को साबुन से धोया, आदत के अनुसार साड़ी के नीचे पेन्टी नहीं पहनी।घर में मैंने कह दिया कि जिमी के साथ शादी में जा रही हूँ।ठीक 9. सरदार का बीएफ पीछे से उसका पार्टनर फर्श पर खडा होकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर एक ही झटके में लंड उसकी चूत में ठोक देता है बिना रहम किये.

प्लीज मुझे मझधार में छोड़ कर मत जाओ। ये मैना तुम्हारे बिना नहीं जी पाएगी। पहले तो मैं उस मधु से बदला लेना चाहती थी पर अब सचमुच मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ। ओह.

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गन्दा लगता है !रोहित : वाह चटवाने में गन्दा नहीं लगा ? अब चूसने में गन्दा लगता है ? … चूसोमुझे रोहित का यह बर्ताव ठीक नहीं लगा ! वो जबरदस्ती सी कर रहा था !उसने मेरे मुँह में अपना लण्ड डाला, मेरे बालों को पकड़ा और चुसवाने लगा !मेरी आँखों से आंसू निकल आए. कारण यह कि अमित का लंड करीब 8 इंच लम्बा और काफी मोटा था, मुझे मालूम था कि यह मेरी चूत का भुरता बना देगा. इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया.

मैं चूमते हुए उसकी चूचियाँ दबा रहा था और धीरे से उसकी चूत को सहलाने लगा, उसके मुँह से सेक्सी-सेक्सी आवाजें निकलने लगी… धीरे से मैंने उसको बिस्तर पे लिटाया और कपड़े उतारने लगा, लेकिन उसने कहा कि वो शादी के पहले सेक्स नहीं करना चाहती. ‘फिर आप साबुन लगाकर नहाई, नहाकर जैसे ही चुकी, आपके घर की घण्टी बजी, आपने जल्दी से कपड़े पहने और दरवाजा खोला तो सामने मैं खड़ा था!’इस समय मेरे होंठ उसके गालों पर रेंग रहे थे और हाथ वक्ष पर!मैंने पूछा- यह सच है या नहीं?अबकी बार उसने पूरी ताकत लगाकर अपने को छुड़ा लिया और…कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]. उसका गुस्सा शांत हुआ तो उसने भाषण देना शुरू कर दिया,”क्या कर रही थी? कैसे गिर गई?”मैं : तू सुन ही नहीं रहा था !!!वेदांत : हाँ कभी पीछे से आवाज़ दोगी और अगर कभी गलती से नहीं सुना.

फिर क्या था, मुझे आज्ञा मिल गई और मैंने उसके चेहरे से उसके हाथ हटा कर उसके गाल पर चूम लिया. आखिर प्रकाश अंकल को आपने पटा ही लिया, मस्त अंकल है ना!” गौरी ने शरारत भरी हंसी से कहा. खैर मैं पढ़ाने में अच्छा था और प्रिंसिपल मुझसे खुश था, मुझे स्कूल में थोड़ी आजादी भी मिल गई थी, मैं अपने खाली समय में स्कूल की बाऊँडरी के बाहर एक दुकान में चला जाता था.

मेरे इस सवाल पर उसने मुझे टांगों से अपनी और खींचा और मेरी निक्कर उतार फेंकी… अपनी लंड हाथ में लिए वो वो मेरी चूत को और तड़पाने लगा…. और फिर वो उम्र ही ऐसी थी… दूसरे लिंग के प्रति आकर्षण स्वाभाविक था…!!पर लोगों का हमारे बारे में बातें बनाना उसे बुरा लगता था.

वैसे तो श्यामलाल की बेटी ने सूट पहन रखा था मगर वो इतना कसा था कि उसमे से उस लड़की के शरीर के पूरे दर्शन हो रहे थे और उसके चूचे तो इतने मोटे थे कि मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया था.

मैंने चिटकनी लगाई और उसे फुसफुसाते हुए सीढ़ियों से ऊपर जाने का इशारा किया…वो ऊपर चला गया.

उधर शायद राजू भी चूत चूस चूस कर थक गया था इसलिए वो भी उठ कर खड़ा हो गया और मेरे मुंह के पास लंड ला कर बोला ‘प्लीज़ जान मेरा भी तो चूसो. फिर आगे जाकर उसने एक बड़े से शानदार घर के आगे बाईक रोकी, गेट खुला था तो वो बाईक और मुझे भी अन्दर ले गया।उसका दोस्त सामने ही खड़ा था. दीदी मेरे ऊपर टूट पड़ी और मेरी टी-शर्ट और बनियान उतार दी और मेरी छाती पर जीभ फेरने लगी.

मैं कुछ कहता इससे पहले चित्रा ने कहा- मैं तुमसे प्यार करती हूँ!और यह कह कर उसने मुझे गले लगा लिया. मुकेश अब नीचे झुका और उसने मेरी चूत के होंठों पर अपने होंठ लगा दिए, वो मेरी चूत को चाटने लगा, उसने अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर घुसा दी. ‘अरे ये क्या कर रहे हो… इसकी इजाज़त नहीं है… ‘‘प्लीज़ मैम… ‘ दोनों ने मेरी और देखा.

मैंने उसको अन्दर बुला कर दवाजा बंद कर लिया, उसको अपनी बाहों में ले लिया और चूमने लगा पर वो अपने को मुझसे दूर करके बिस्तर पर बैठ गई.

शायद उसने ऐसा पहले इसीलिए नहीं किया क्यूंकि मैं उसके साथ हर समय रहती थी… और हमारे प्रेम संबंधों की अफवाह से सभी लड़कियाँ उससे दूर भागती थी और मुझे भी कोई लड़का आंख उठा कर नहीं देखता था…उसके लिए यह एक मौका था और दोस्त बनाने का. मैंने बाते करते हुए उसके हाथ में मोबाइल देखा और बोला- मोबाइल भी ले लिया और नंबर भी नहीं दिया…?बोली- सॉरी यार …अब तो दो नंबर…बोली नोट करो- 98********अब तो हम रोज़ मोबाइल पर भी बात किया करेंगे …. मनोज मेरे पास आकर मुझसे सट गया और उसका लिंग मुझसे छू गया तो मुझे अहसास हुआ कि वाकई मनोज का तो काफ़ी बड़ा है.

मुझे वो दृश्य बार बार याद आ रहा था और मैं समझ गया था कि अंकल और मम्मी अभी और मिलेंगे, इस कारण मैं घर पर ही पढ़ाई करते बैठा हुआ था. मैंने पहले तो सोचा कि मेरे से 15 साल छोटी लड़की है, कुँवारी है, मुझे गंदा नहीं सोचना चाहिए…पर दिल और लंड मेरे दिमाग़ पर हावी हो गये, और उसको देख कर मैंने अपना लंड मसलना शुरू कर दिया…मैंने देखा कि जल्दी ही चाँदनी उसके छुपा-छुपी के खेल में नहीं मुझमें ज़्यादा ध्यान दे रही थी. आंटी फिर मेरे ऊपर आकर चुदने लगी, जोर जोर से कूद रही थी, ऐसे लग रहा था जैसे शताब्दी ट्रेन हो!मैं भी नीचे से अपना लण्ड उनकी चूत में दे दनादन मार रहा था.

‘म्म युम्मी मम आह्ह्ह’ जैसे शब्द लड़की बोल रही थी।मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा।इतने में क्या देखता हूँ कि पीछे से मुझे कोई बुला रहा है।मैंने जल्दी जल्दी लंड जींस के अन्दर डाला… और ‘ कौन है ‘ बोलते हुए बाहर गया.

हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे और चुम्बन प्रगाढ़ होता चला गया। वो मेरी गोद में ही बैठी रही और हम दोनों एक-दूसरे को करीब दस मिनट तक लगातार चूमते-चाटते रहे. फिर मैंने अपने हाथ से अपना अंडरवीयर उतार दिया और फिर थोड़ी ही देर में उनकी पेंटी भी उतार फेंकी.

सरदार का बीएफ मैं अपनी यौवनकलिका को हिला हिला कर अपनी उत्तेजना बढ़ाती चली गई और फिर स्खलित हो गई. तभी मेरी मम्मी ने मधु को अर्धनग्न देख लिया …सुनील क्यूँ परेशान कर रहे हो बेचारी को …चलो दोनों टेबल पर रखे रसगुल्ले खा लो …मधु अपने कपड़े पहन कर जैसे जाने लगी, मैंने उसे कहा- आज रात को आना ! घर पर पापा नहीं रहेंगे …रात हो चली थी.

सरदार का बीएफ रास्ते में रीटा की जवान चूचों और टाँगों को देख देख कर बहादुर का लण्ड फुंफकार उठता. उसके टॉप का ऊपर का एक बटन भी खुला था जहाँ से उसकी काले रंग की ब्रा का कुछ हिस्सा दिख रहा था.

?? हाँ, यह तुम्हारे शर्ट से झांकती तुम्हारी छाती… तुम्हारी घुटने से ऊपर हुई स्कर्ट में दिखती तुम्हारी जांघें … या फिर तुम्हारे मौज़े.

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अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार और ढेर सारा प्यार! कहानी के बारे में जानने के लिए कहानी के पिछले भाग जरूर पढ़िए, मैं उम्मीद करता हूँ कि आप मित्रों और लड़कियों को मेरी कहानी जरूर पसंद आएगी. मैंने कहा- यह काम मैंने पैसों के लिए नहीं किया है, मुझको तो सेक्स करने की बहुत इच्छा होती है!तो वो बोली- अगर मैं ये पैसे तुमको नहीं देती तो कोई और लेता. मैंने झट से उसका लौड़ा निकाला और अपने हाथों में ले लिया और फिर मुँह में डाल कर जोर जोर से चूसने लगी। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन कर उसका लौड़ा चूस रही थी और अनिल मेरे पीछे आकर मेरी चूत चाटने लगा.

भाभी बोली- मजा आ गया पहली बार गांड मरवाने में! बहन का लौड़ा, मेरा पति तो मेरी गांड चोदता ही नहीं है. उसने उस आदमी को कुछ पैसे दिए और बीयर लेकर आने को कहा और साथ में कुछ खाने के लिए भी!उसने मुझे बाँहों में भर लिया, मैं भी लिपट गई. जैसे ही मैंने उसे देखा मैं एक पथरा सा गया क्योंकि मैंने उसे तीन साल पहले देखा था और अब वो पहले से भी ज्यादा सुन्दर लग रही थी.

रात को करीब 11 बजे दरवाजे की घण्टी बजी और जब मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि ज्योति नशे में थी और उसके साथ एक लड़का खड़ा था.

फ़िर अपनी साली को पलंग पर लिटा कर उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और उसकी गुलाबी चूत पर अपनी जीभ चलाने लगा. मैं उसके ऊपर चढ़कर उसके चुचे दबाने लगा और अपना लण्ड फिर से उसके मुंह में डाल दिया, तान्या बिल्कुल एक रण्डी की तरह मेरा लण्ड चूसे जा रही थी. पर सोनिया को अपने काम के सिवा और कुछ नहीं सूझता। हालांकि वो भी सुनील को अपना अच्छा दोस्त मानती है लेकिन सिर्फ़ और सिर्फ़ दोस्त।यहाँ सोनिया अपनी सारी चिंता सुनील के साथ बांटना चाहती है.

थोड़ी देर में मुकेश मेरे सामने आया और बोला- आँखे खोल!मैंने डर के मारे आँखे खोली तो दंग रह गई, सामने मुकेश का 10 इंच का लौड़ा किसी फन फहराते सांप की तरह लहरा रहा था. मैंने आव देखा न ताव, अपना लंड दीदी के मुँह में रख दिया और फिर दीदी उसे लोलीपॉप की तरह चूसने लगी और हम 69 की अवस्था में आ गए. बाहर निकालूं…?भाभी ने कहा- नहीं अन्दर ही निकाल दो…तो फिर 2-4 जोरदार धक्कों के बाद मैं और भाभी फिर से साथ में झड़ने लगे… और मैं उनके अन्दर ही झड़ गया, उनकी योनि को पूरा भर दिया.

फिर मैंने उसकी गांड में पानी छोड़ दिया।तब तक दो बज चुके थे, भाभी बोली- रोहित, हम दोनों चूत और गांड धो कर आते हैं, तू तब तक कमरे में बैठ! हम एक साथ खाना खायेंगे।फिर भाभी खाना लगाया और मुझे बोली- रोहित, तू कल आना! मैं अपनी सहेलियों को बुला कर लाऊँगी।मैं बोला- ठीक है. !मैं यंत्रचालित सा उनके चूत की ओर झुकता चला गया। पहली बार चूत की मादक खुशबू मुझे मदहोश कर दे रही थी।मैं कस कर उनकी चूत को चूसते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और जाने कब मेरा हाथ उनकी गांड के बीच की घाटी में घुस गया।वो सिसकने लगी और मुझ पर झुकती हुई मेरे गांड को सहलाने लगी। उनके हाथ लगाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने एक उंगली उनकी गांड के छेद में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा।वो सी.

”उनकी बातें छोडो, वो तो हैं ही बेवकूफ!” अनीता दीदी ने नेहा की ब्रा खोल दी और नेहा ने भी हाथ बढ़ा कर दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया. अब राजू की धक्को की स्पीड बढ़ने लगी थी और ट्रेन के हिलने की वजह से मुझे भी दोगुना मज़ा आ रहा था. ’और उसने एक हाथ से अपनी चूची पकड़ी और मेरे मुँह में डालने लगी… उसके पैर उसी तरह हिल रहे थे.

कहानी का पिछला भाग:मेरे बस के सफ़र से आगे का सफ़र-2मैंने मामी को नीचे खींचा और फिर से उनके मम्मे दबाने लगा.

उसे देख मैं भी रुक गया, मगर थोड़ी देर बाद मैं आगे बढ़ा और उसके पास चला गया और उसे बात की. मैं समझ गई …घर में कोई नहीं था, मैंने अपने मम्में बाहर निकाल लिए टी शर्ट से ! क्यूंकि मैं हर वक़्त ब्रा नहीं पहनती. मैं तो ज़न्नत में आ गया था जैसे !थोड़ी देर उसके चूसने के बाद मैंने अपना सारा लावा उसके मुँह में छोड़ दिया जो वो गटागट सारा पी गई।मुझे एहसास था कि मैं कहाँ हूँ इसलिए अपने होंठ दबा गया वर्ना तो मेरी कामुक सिसकारी और किलकारी दूर तक जाती, इतना मज़ा आया मुझे !उसने सारा रस पी लिया और मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया.

क्योंकि अब मैं पूरे लण्ड का मजा ले रही थी जो मेरी चूत के बीचों-बीच अन्दर-बाहर हो रहा था…उसका लण्ड मेरी चूत में जहाँ तक घुस रहा था वहाँ तक आज तक किसी का लण्ड नहीं पहुँचा था. तो मैं झिझक गया…नहीं कुछ तो नहीं! आप इतनी सुन्दर हैं कि कोई भी आपको देखता ही रह जाएगा!उसने अपना हाथ गेयर की तरफ बढ़ाया और मेरी घुटने पर रख दिया.

मुकेश मेरे फ़ूले गालों पर थपकियाँ देता रहा और कहने लगा- तेरी चिकनी जांघों पर मेरी कब से नजर थी बहन की लौड़ी! मैं तो कब से सोच रहा था कि तेरी चूत देखने को मिलेगी, कब अपना लंड उसमें घुसाने का मौका मिलेगा, मेरी छप्पन-छूरी! आज तो तेरी चूत, तेरी गांड, तेरे बोबों के इतने मज़े लूँगा और दूंगा कि तू तो क्या, तेरी अम्मा भी मुकेश को याद करेगी. मेरे हाथ उसके चूचों को दबा रहे थे और मेरा लंड उसकी चूत में पिस्टन की तरह चल रहा था. तो योगी ने मुझसे पूछा- कैसे आना हुआ?तो मैंने उसे अपने और अपनी भाभी के सेक्स के बारे में सारी बात बता दी और कहा- मैं प्रिया भाभी को दोबारा चोदना चाहता हूँ इसलिए तुम्हारी मदद की जरूरत है.

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अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि इसे उतारूँ कैसे!मेरे दिमाग में एक विचार आया, मैंने कैंची ली और उसकी ब्रा को काट दिया.

अब हम दोनों एकदम नंगे थे, मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर लगाया और अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा. मर गई…आज मेरी भी जन्मों की प्यास बुझ रही थी, मैं भी अऽऽ आय… आआऽऽ आआअ ऊऊऊऊउ… कर रहा था और कह रहा था- साली अब तुझे नहीं जाने दूंगा, तू कितने दिनों से मेरे लंड को भड़का रही थी… साली आज में तेरी माँ-बहन एक कर दूंगा…वो अभी भी चीख रही थी- माय… उ. मैं देखता हूँ वो कैसे नहीं लुढ़कता !और अन्दर चले गये।फिर पांच मिनट में ही राणा और राठौड़ अंकल बाहर आये और बोले- चल छमकछल्लो, तुझे उठा कर अन्दर लेकर जाएँ जा खुद चलेगी?मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि पापा इतनी जल्दी लुढ़क गये.

बाकी चार लोग पीछे ही रुके थे जो भागने वालों पर नज़र रखने के लिए थे।दरवाजे के करीब पहुँचते ही एक सिपाही ने जोर से पैर से धक्का मारकर दरवाजा खोल दिया और अंदर जाते ही सोनिया बोली- कोई चालाकी नहीं… जो जहाँ है वो वहीं खड़ा रहेगा… तुम को पुलिस ने चारों ओर से घेर लिया है !गुंडों ने उनकी एक नहीं सुनी और अपने हथियार निकालकर फायर शुरू कर दिया…. हम दोनों पंद्रह मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और हम दोनों एक एक करके झड़ गए. ब्लू सेक्सी बीएफ दिखाएंअनु मेरे लंड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। अनु ने इतने शानदार तरीके से चूसा कि मैं आपको वो आनन्द बयान नहीं कर सकता.

मेरा निकलने वाला था, मैंने कहा- मेरा पानी कौन पिएगी?तो अमिता बोली- मेरे मुँह में डाल दो. सिनेमा हाल में घुसते हुए निशा ने मेरा हाथ पकड़ लिया क्योंकि वहाँ काफी अँधेरा था। हम मूवी देखने लगे।मूवी रोमांटिक थी.

सबसे पहले गुरुजी का धन्यवाद करना चाहूँगा जो मेरी कहानीबड़े घर की लड़की की बड़ी प्यासको अन्तर्वासना डॉट कॉम पर प्रकाशित किया और अपने सारे चाहने वालो को जिनमें महिलाएँ भी हैं, जिन्होंने मुझे मेल किया। मैं अपनी कहानी अन्तर्वासना पर देख कर बहुत खुश हुआ। सबने आगे की कहानी जानना चाही और मैं मजबूर हो गया कहानी बताने को…अब मैं आगे बताता हूँ कि दरवाजे के पीछे क्या था. तो सिंह अंकल जल्दी से पापा की ओर चले गये, अँधेरा होने की वजह से वो मुझे नहीं देख सके।मैं वहीं खड़ी रही कि शायद अंकल फिर आयेंगे मगर थोड़ी देर में ही राणा अंकल बाहर आ गये और सीधे अँधेरे की तरफ आ गये जैसे उनको पता हो कि मैं कहाँ खड़ी हूँ। शायद सिंह अंकल ने उनको बता दिया होगा. तो ये चाची ही थी जो धीरे धीरे मेरे लण्ड को मेरी दोनों टांगों के बीच में से खींच कर बाहर निकाल कर सहला रही थी.

‘जीजू, जोर से मारो ना… साली को फ़ाड़ डालो…! ‘ मेरे चूत में एक मीठी सी, प्यारी सी कसक उभर आई. मुझे वहाँ देख कर शरमा गई- भैया… अब देखो ना… मेरे सिर में दर्द होने लगा है… जरा दबा दो…’मेरा लण्ड जोर मारने लगा था. आख़िर एक दिन मुझ को एक इमेल मिली जिसमें एक कहानी थी। मैं कहानियाँ नहीं पढ़ा करती थी, सिर्फ़ तस्वीरें देखने की शौक़ीन थी.

अब मैं सिर्फ़ एक चड्डी में था जिसको मेरा लंड फाड़ के बाहर आने को बेकरार हो रहा था.

एक बात पूछूं ?”बोलो ?”फिर वो तुमने चीका को थप्पड़ क्यों मारा था ?”मैं एक भारतीय नारी हूँ कुछ तो भारतीयों जैसा करना पड़ेगा ना इस लिए ? वो सब चीका और डाइरेक्टर का प्रायोजित ड्रामा था यार !”कैसे ?”तुम भी अक्ल के दुश्मन ही हो… अरे बाबा उस शिल्पा को इऽच लो, साली हरामजादी रांड उस फिरंगी (गेर) के साथ एक चुम्मा देकर कितना फेमस हो गई थी ? और. प्रथम भाग :राधा और गौरी-1से आगे-‘कुछ नहीं अंकल, चोद डालो, मम्मी तो बस यूं ही शोर मचाती है.

उसकी पीठ पर हाथ फ़ेर कर उसे उत्तेजित करने का प्रयत्न करता था। उसके जिस्म की कंपकंपाहट मुझे भी महसूस होती थी। पर उसने कभी भी इसका विरोध नहीं किया। एक बार सर्वांग आसन कराते समय मैंने उसके चूतड़ों को भी सहलाया और दबाया भी। उसके चूत का गीलापन भी मुझे दिखाई दे जाता था…. ऐसा ना हो कल को मुझे तेरी गाण्ड फिर से बजानी पड़े…!!मैंने गुस्से से वेदांत को आवाज़ लगाई…: अब छोड़ेगा उसे…??वेदांत मेरे पास आया. जब वो जाने लगी तो उन्होंने मुझसे कहा- मुझको पता नहीं था कि तुम ऐसे हो! वरना मोना से पहले तुम्हारे लंड का स्वाद मैं ही चखती! और आज मैं सोच कर आई थी कि मैं आज तुम से अपनी प्यास बुझा ही लूंगी.

उसका लंड भी तो निचुड़ जाता है, उसे चूस कर ही छोड़ती है यह चूत…तो ऐसी ही खूबसूरत प्यासी चूत मेरी भी है. ”देखो रानी, तुम्हें हमारी कसम, आज हमें अपने चिकने गोरे-गोरे बदन का जायजा लेने दो न, आज हम लोग रौशनी में ही सब काम करेंगे और देखेंगे भी तुम्हारे नंगे, गोरे बदन को। अगर तुम्हें पसंद नहीं है तो हम जाते हैं. ‘हिच, मां की लौड़ी, तेरी चूत मारूँ… चिकनी है भाभी…!’ अब उसकी गालियाँ मुझे बहकाने लगी थी.

सरदार का बीएफ गले से क्या लगाया, सबने अपनी छाती से मेरे चूचों को दबाया…मैं समझ गई कि ये सभी ठरकी हैं, अगर किसी को भी लाइन दूँगी तो झट से मुझे चोद देगा।मैं खुश हो गई कि कहाँ एक लौड़ा मांग रही थी और कहाँ चार-चार लौड़े आ गये…पापा उनके साथ अन्दर बैठे थे और मैं चाय लेकर गई… जैसे ही मैं चाय रखने के लिए झुकी तो साथ ही बैठे राठौड़ अंकल ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा- कोमल बेटी. मेरी आँखें बंद थी, इस वकत सुनील पता नहीं क्या कर रहा था मगर उसने अभी तक मुझे नहीं छुआ था.

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उसके बाद कुछ बीयर और पी और उसने स्कूल टाइम तक मुझे खूब चोदा और मुझे कच्ची कलि से फूल बना दिया, वो भी तीन बार चोद कर!मुझे चलने में मुश्किल हो रही थी. वो मुझसे माफ़ी मांगने लगी और बोली कि वो मुझसे सचमुच प्यार करती है और मुझसे शादी भी करना चाहती है. बीच बीच में वो मुझे प्रेम भरे चुम्बन देता… धीरे धीरे उसके धक्के तेज़ होने लगे … चूत में मुझे खिंचाव महसूस होने लगा… खुद ब खुद मैं उसके धक्कों से ताल से ताल मिला कर… उसका ज्यादा से ज्यादा लण्ड अपने भीतर लेने की कोशिश करने लगी… मेरी कोमल काया, उसके पसीने से भरे बलिष्ठ शरीर के नीचे दबी हुई कसमसा रही थी.

तो मैं उसके साथ बैठ गई।वैसे भी लड़का इतना सेक्सी था कि उसको मना करना मुश्किल था। रास्ते में उसने अपना नाम अनिल बताया। मैंने भी अपने बारे में बताया। थोड़ी आगे जाकर उसने कहा- भाभी अगर आप गुस्सा ना करो तो यही पास में से मैंने अपने दोस्त से कुछ किताबें लेनी थी. हुम्म… आह!फिर मैंने उन्हें सोफे पर ही लिटा दिया और उनके पूरे शरीर को दबोचने लगा। चाची भी पूरे जोश में थी और मेरे बालों में तो कभी मेरे हाथों को सहलाती। अब चाची चुदने के लिये बिल्कुल तैयार हो चुकी थी, वो ऐसे तड़प रही थी जैसे सालों से भूखी हों।मैं उनकी नाईटी खोलने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी, घण्टी की आवाज़ सुनते ही हम दोनों घबरा गये और रुक गये। तभी हमरी नज़र सामने लगी घड़ी पर पड़ी, शाम के 5. जानवरो के बीएफकी आवाजें निकालने लगी। उसने मुझे अपने से लिपटा लिया और मेरा लण्ड हाथ में लेकर कहने लगी- अब मेरी शांति करा दो।मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और लण्ड उसकी चूत पर रखकर धक्का मारा।वो जोर से चिल्लाई- अह्ह्ह….

तो उस दिन के बाद किसी और को नहीं देख पायेगा तू…!!!मेरी आँखें भर आई थी… पर साथ साथ होंठों पर मुस्कान भी थी.

हरामी रीटा मासूमीयत से बोली- बहादुर, मुझे अकेले जाते तो बहुत डर लगता है, तुम साथ आ जाओ नाऽऽऽ!यह सुन कर ठरकी बहादुर के लण्ड की बांछें खिल गई और वह रीटा के पीछे कुते सा दुम हिलाता चल पड़ा. ‘क्या तुम रोज़ एंजोय करते हो…?’‘अरे कहाँ विनोद… सप्ताह में एक बार या फिर दो सप्ताह में…’‘इच्छा तो रोज होती होगी ना…’‘बहुत होती है… हाय राम… तुम भी ना…’ अचानक वो शर्म से लाल हो उठी.

रीटा की बन्द चूत अब नये नये फूल की तरह थोड़ा सा खिल कर छोटी भौंसड़ी बन गई, चूत की बाहरी फाकें खुल सी गई थीं और बीच में से गुलाबी पंखुड़ियाँ अब दिखाई देने लगी थी. की पढ़ाई कर रही थी, मेरी कामवासना चरम पर थी और मेरी जवानी लुटने को बेताब थी। मेरे सीने के उभार मसले जाने को तरस रहे थे, योनि में भी हलचल सी थी। मैं तब तक एकदम कोरी थी, कुंवारी थी, बिनचुदी थी. क्योंकि अंदर से दरवाजा बंद था इसलिए मुझे किसी का डर नहीं था, मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोलते हुए अपना लण्ड प्रिया भाभी की तरफ किया और एक बार चूसने को बोला.

मामी, अब पूरा अन्दर गया है! अब कैसा लग रहा है?”नयन, बहुत ही दर्द हो रहा है!”मामी, थोड़ा सहन करो! और आपको दर्द ना हो, इस तरह से अपनी गांड नीचे से हिलाओ!”हाँ मामी! बस इसी तरह से धीरे धीरे हिलाओ!”मामी ने अपना काम चालू कर दिया था.

राजा और पहलवान को लुभा रही थी कि तभी राजा अपने हाथ से मेरी चूत का दाना छेड़ने लगा. आईई करना शुरू कर दिया।मैंने पूछा- आपको क्या हुआ है?तो उन्होंने कहा,” बेटा, मैं भीग गई थी न इसलिए कमर में दर्द है। तू ऐसा कर मेरे बैग से मूव निकाल कर मेरी पीठ पर लगा दे…. कौन पिंकी?’‘वही जिसके नाम के ऊपर तुम अपना वो पकड़ कर गोल गोल घुमाते हुए सू सू करते रहते हो?’वो बिना बोले सिर नीचा किए खड़ा रहा।‘कहीं तुम्हारी प्रेमिका-व्रेमिका तो नहीं?’‘न… नहीं तो !’‘शरमाओ नहीं… चलो सच बताओ?’ मैंने हँसते हुए कहा।‘वो… वो.

मधु सिंह के बीएफवाह मेरी जान! क्या टाइट चूत है साली तेरी!हाँ अब अच्छा लग रहा है! थोड़ी स्पीड बढ़ाओ!उसने तेज़ तेज़ झटके मारने शुरु कर दिए. उसकी आँखें डबडबा आई…मैं : लेकिन बोलो तो सही ऐसी क्या बात है…वो : मेरी परेशानी का कारण आप हैं…अब मेरी समझ में कुछ आया लेकिन फिर भी मैं बोली- क्या…!! मैं तुम्हारी परेशानी का कारण…वो फिर अचकचा गया.

सेक्सी परिचय

मैंने कोशिश की लेकिन उसकी चूत इतनी तंग थी कि जा ही नहीं रहा था … 2-3 बार कोशिश करने के बाद भी नहीं गया तो वो बोली- जाओ, रसोई से तेल ले आओ…. कुछ देर बाद मम्मी ने मुझे बुलाया कि बाजार से कुछ सामान लाना है और मैं बाजार चला गया. उस दिन तो डर के मारे सिकुड़ गया था पर आज नरम नरम चूतड़ो का स्पर्श पा कर, चूत की खुशबू पा कर कैसा फ़ड़फ़ड़ाने लग गया था.

मैं जीजू से बोली- जीजू, मजा आ गया!जीजू बोले- मजा तो तब आएगा जब तू रंडी की तरह गालियाँ देने लगे!मैंने कहा- मुझे तो गालियाँ आती नहीं हैं. प्रेम एक दैविक शक्ति है… और इस शक्ति से ही इस जीवन ओर सरे विश्व का निर्माण हुआ है…उसकी जलेबी सी बातें सुनकर एक बार तो मेरा भी सर घूम गया था…एक बार तो मुझे भी लगा कि कोई साध्वी टकर गई. ‘हायऽऽऽ बहादुर! कितना सताओगे मुझे? कुछ करो नाऽऽऽ!’ नशीली अधखुली आँखों से देखती और अंगड़ाई लेती रीटा की छोटी छोटी मुट्ठियाँ अब भी हवा में ही थी.

वो थोड़ा सा चिल्लाई, मगर फिर अपने आपको सँभालते हुए उनके हाथों ने मेरे चूतडों को दबाना शुरू किया!उनकी इस हरक़त से मुझे काफी जोश मिला और मैंने झटके लगाने और तेज़ कर दिए. !”उम्म्म्मममम”बियर पिओगी प्रिया? मज़ा आ जाएगा ज़िंदगी का…”थोड़ी हिचकिचाहट के बाद बोली,”हाँ !”मेरी तो निकल पड़ी…प्रिया मैं तो रोज करता हूँ, आज तुम मेरे लिए करो…वो गुस्से में बोली,”क्या मतलब है तुम्हारा?”मैंने कहा- खातिरदारी यार ! वैसे तू क्या समझी? बता तो सही?”चुप कर तू !” बड़े सेक्सी अंदाज में बोली वो।सारी तैयारी हो गई, अब जश्न बाकी था. मैं भी उन्हें पूरा मौका देता था कि वो मेरे अंगों को छू लें और मेरे साथ मस्ती करें.

‘अब बनो मत राजू, अपनी आँखें खोल दो!’‘चाची, बहुत मजा आ रहा है, धीरे धीरे खींच कर और मलो लण्ड को!’‘आ रहा है ना मजा, अब जरा अपनी ये चड्डी तो नीचे सरका!’‘चाची खींच दो ना आप… ‘‘अच्छा यह ले…’ और चाची ने मेरी तंग चड्डी नीचे खींच कर उतार दी. आप लोग यह जानने के लिए बेताब होंगे कि वो कौन थी…वो थी प्रिया ‘कातिल हसीना’ हमारी पड़ोसन.

मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले … पूरा मेरा खा जा … ले … ले … पूरा ले …आह …राजा….

[emailprotected][emailprotected]सोने के पिंजरे में बंद एक मैना- निर्मला बेन पटेल[emailprotected]. बीएफ फिल्म दिखाएं हिंदीदीपू मेरे होठों को चूसते हुए मेरी छातियों से खेलने लगा और उधर राजू ने मेरी पेंटी निकाल कर चूत का रास्ता ढूँढ लिया. बीएफ हिंदी सेक्स व्हिडिओआपनी प्यास बुझा लो आज !”मैं लगातार धक्के पर धक्का लगाये जा रहा था और मेरा लण्ड उनकी बच्चेदानी से टकरा रहा था और आंटी के मुख से अजीब अजीब आवाजें आ रही थी। उनकी सीत्कारों से पूरा कमरा भर गया था,”आई लव यू मेरे राजा…… आज मैंने खुद को तुम्हारे हवाले कर दिया है…… फाड़ डाल मेरी चूत को……कीमा बना दे इसका…… बहुत सालों से इसकी प्यास नहीं बुझी……आज बुझा इसकी प्यास…. ’‘छीः मैं गाण्ड नहीं मारता… भोसड़ी की आई है बड़ी गाण्ड मराने वाली!’‘गाण्डू है मेरा देवर, भाभी की इतनी सी इच्छा पूरी नहीं कर सकता?’‘मां की लौड़ी, मुझे कह रही है, भेन दी फ़ुद्दी, गाण्ड फ़ट के हाथ में आ जायेगी!’‘ओह्हो, बड़ी डींगे मार रहे हो, और भड़वे, गाण्ड नहीं चोदी जा रही है?’वो गुर्रा कर और उछल कर मेरी पीठ पर सवार हो गया.

देखो तो मेरा पजामा फ़ाड कर चूत में घुस गया !” आभा ने शरमाते हुये कहा।नहीं आभाजी, मुझे तो आप को चोदना था इसलिये मैंने कल आपके पजामे के तीन-चार टांके ब्लेड से काट दिये थे !”क्याऽऽऽऽऽऽऽ? शरारती कहीं के….

पर हाँ उनका लण्ड दूसरों की अपेक्षा छोटा है, यानि राहुल, रोशन, गोवर्धन, गोविन्द के लण्ड से तो छोटा ही है. मुझे देख कर वो बोली- क्यों मनुजी? लड़कियों के बाथरूम में क्या चेक कर रहे थे?मैं बोला- यही कि कोई गड़बड़ तो नहीं हो रही, आजकल के बच्चे सूनेपन का फायदा उठा लेते हैं ना!पिंकी- हाय… सूनेपन का फायदा तो टीचर भी उठा सकते हैं. लगभग दस मिनट तक ऐसा करने के बाद हम अलग हुए तो मैंने पूछा- आपकी मम्मी आने वाली होंगी?तो वो बोली- अभी उनका ही फ़ोन था, उनको आने में देर होगी तो हम मज़े कर सकते हैं.

वह अब्बास को बालों से पकड़ कर टॉर्चर-रूम के दरवाजे तक खींचती हुई ले गई … अब्बास बुरी तरह हुई पिटाई के कारण अभी भी बेहोश था … मोना ने टॉर्चर-रूम का दरवाजा खुलवाया और अब्बास को एक अलग जेल में रखने का बोला हवलदार को …फिर दो हवलदार उसको घसीटते हुए वहाँ से ले गये. नमस्ते साथियो,मेरा नाम ईशा शर्मा है, वैसे तो मैं एक लड़का हूँ पर मुझे यही नाम ज्यादा अच्छा लगता है. कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…हे भगवान् मैंने आज से पहले उनके बारे में कभी भी नहीं सोचा था.

सेक्सी हिंदी 16 साल

‘नहीं रे… तेरी गाण्ड तो ठीक है बिल्कुल… बस छेद में थोड़ी लाली है या सूजन है… ‘‘अन्दर जलन सी लग रही है…’ मैं कुछ कुछ बेचैन सी हो गई थी. मगर मेरी मर्दानगी के आगे कहाँ टिक पाती, मैंने फिर से उसके पलंग पर पटक दिया और उसके लहंगे को ऊपर कर, उसकी चड्डी उतार फेंकी. बड़े ही बेमाने दिल से मैं स्कूल से आने के बाद सोने चली गई, मम्मी ने बाहर जाकर जन्मदिन मनाने के लिए भी कहा.

दोस्तों अगर आपकी दोस्त मुखमैथुन न करे तो प्लीज़ जबरदस्ती मत करना !अब उसका लंड तैयार था.

उसे ही अपनी मंजिल मान चुकी थी मैं…कुछ देर नग्न अवस्था में एक दूसरे की बाँहों में हमें वक़्त का पता ही नहीं चला.

मैंने उसे उठा कर उसकी चूचियों को मुँह में लेना चाहा तो उसने पहले चूत की तरफ इशारा किया. हम पंद्रह मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे फिर मैंने अपने होंठ फिर से चित्रा के होंठों पर रख दिये. बिहारी बीएफ सेक्सी व्हिडिओफिर स्ट्रेप बांधने के लिये रीटा ने अपना स्कर्ट ऊपर उठा पैर ड्रेसिंग टेबल पर रख दिया.

‘आज लण्ड कैसे खाओगी श्वेता?’ वो मम्मी को खड़ी करके उनके कसे हुए गाण्ड के गोले दबा रहा था. यह नेहा थी जो अपने बदन पर चादर डाल कर मेरे कमरे की तरफ ये देखने आई थी कि मैं क्या कर रहा हूँ और वो सिसकारी किसकी थी. तुम हो ना मेरे बॉय फ्रेंड… क्यों क्या नहीं हो?अँधेरा हो चुका था। मैंने अँधेरे में ही सोनिया का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा तो सोनिया एकदम से मेरी बाहों में आ गई। मैंने सोनिया का चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर अपनी तरफ किया और चूमने की कोशिश की तो सोनिया एकदम से मुझ से छुट कर भाग गई.

कुछ देर तो हम दोनों आराम से लेटे रहे, फिर वो बोली- मजा आया?मैंने कहा- बहुत मजा आया!तो वो बोली- कभी किसी को चोदा है?मैंने कहा- नहीं!तो वो बोली- कभी मेरे घर आना, तो बहुत मजे दूँगी और तुम्हें चोदना भी सिखा दूँगी. मैंने बिना कुछ सोचे समझे दीदी का तौलिया खोलने के लिए हाथ बढ़ाया। मैंने तौलिये की गांठ को धीरे से खोला और तौलिये को शरीर से अलग किया……इतनी गोरी चूचियाँ मैंने अपने सपने में भी नहीं देखी थी। उन गोरी चूचियों पर उसके हरी-हरी नसें साफ़ दिखाई पड़ रही थी।मैंने अपनी नज़रें नीचे झुकाई तो नीचे का नज़ारा और भी सुन्दर था……….

ले…पूरा ले मुँह में रांड……ले ले मेरे लौड़े को !” मैं बोला।उसके बाद हमने कपड़े पहने और फिर उसे उसके घर छोड़ दिया।इस घटना के बाद मैंने कई बार कोशिश की उससे मिलने की, मगर वो कहीं नहीं मिली………आप बताइए, आपको मेरी कहानी कैसी लगी?.

मैंने कहा- लेकिन तुम्हें दो दो किताबों की क्या जरूरत है? एक रखो और दूसरी लौटा दो, मुझे पढ़नी है. देख बेटी, तेरी माँ बीमार है … दवाई दारू का पैसा कहाँ से आयेगा?मैं- इसका मतलब मैं अपना शरीर बेच दूँ …आप मेरे दलाल हैं क्या?अंकल- नीच … यह एक्टिंग है खान अंकल के चलते हमारा घर चलता है! तेरा बाप तो तेरे पैदा होते ही किसी और के साथ भाग गया था …वो इस एक्टिंग के पूरी पन्द्रह हज़ार दे रहा है और देव साहब भी आ रहे है शो देखने. वो आई तो मैंने पूछा- तुम मुझे देखती क्यों रहती हो?उसने कहा- तुम मुझे अच्छे लगते हो!मैंने भी कहा- मैं भी तुझे पसंद करता हूँ.

इंडियन मॉम बीएफ मैं और वो सुबह सोकर उठे, मैंने सोचा कि चिंकी मम्मी से मेरी शिकायत करे, उससे अच्छा है कि मैं इससे माफ़ी मांग लूँ. खाना डायनिंग टेबल पर लगाने के बाद मैं बेटे को उठाने गई… उसका चेहरा लाल हो रहा था… उसकी आँखें भी सूजी हुई थी… घबरा कर मैंने उसको उठाया और देवर को बताया.

राजू ने कड़ियल लण्ड को बाहर खींच कर वापिस रीटा की चूत में पूरे वेग से वापिस धकेल दिया. मेरी चीख निकलने वाली थी कि उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया… मेरे मुँह से आह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह की आवाजें निकल रही थी…पूरा लण्ड अन्दर धकेलने के बाद वो कुछ देर शांत रहा और फिर लण्ड अंदर-बाहर करने लगा. इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया.

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एक दूसरे से बंधे…एक दूसरे में खो जाने के लिए… उस एक गर्म चुम्बन से बहार की ठंडक भी गर्मी में बदल गई थी…फिर धीमे से हम दोनों जब अलग हुए. जबकि माँ का अस्तित्व भ्रूण के बनने से लेकर आजीवन रहता है…मैं अपने मन के द्वंद्व में खो गई थी. तो उसने और जोर जोर से मेरा मुठ मारना शुरू कर दिया। करीब पाँच मिनट बाद मेरा माल निकल पड़ा.

कोई है जो इनके हुस्न को अपने सीने से लगा कर और इनका मद भरा रस अपने गर्म होंठों से लगा कर पीना चाहता हो. वाह क्या मस्त गांड है! बहुत दिनों के बाद पर्दा करने वाली लड़की की गांड मारूँगा!मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

मोना मेरा लण्ड जोर जोर से चूस रही थी, उनके मुँह की गर्मी से अचानक मेरे लण्ड में मेरा माल आंटी के मुँह में गिर गया, मैं शांत हो गया.

मैं तेज़ क़दमों से टेंट के पास गया तो मैंने देखा कि ज़ाहिरा ने बड़े तम्बू में एक पर्दा लगा कर अपने लिए अलग कमरा सा बना लिया था और एक मोमबत्ती उसके कमरे में जल रही थी. मैं उसके रस का एक एक कतरा चाट चाट कर पी गई और मुझे लगा कि जैसे किसी डिनर पार्टी के बाद मैंने कोई मिठाई खाई हो. बहादुर ने हाथ ओर ऊपर सरका दिया- अब?मस्ती में रीटा स्कर्ट उलटती बोली- नहीं, जरा सा और ऊपर करिये तो बताती हूँ!बहादुर एक हाथ से अपना लौड़ा रगड़ने लगा और दूसरे हाथ से हाथ रीटा की मक्खन सी गुदगुदी गाण्ड को मसलने लगा- अब कुछ आराम आया?बेहया रीटा टांगों को चौड़ाती बुदबुदाती सी बोली- नहीं, जरा बीच में करिये तो बताती हूँ.

मेरे लंड का टोपा पूरी तरह गुलाबी होकर फूलने लगा, मेरे मुँह से निकला- हाय मादरचोद! कहाँ से सीखा ये जादू?मेरे मुँह से गाली सुन कर मेरी गोलियों को मुट्ठी में भर कर बोली- अरे जानू! तुम्हारा हथियार देख कर रहा नहीं गया और खुद ही कर डाला मैंने! अब तो मेरी मारो न…!?!पिंकी के स्वर में एक नशीली बात थी कि मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होठों को अपने होठों से मसलने लगा. चाची की बेटी भी स्कूल में थी!ऐसे में मैं घर पर अकेला था, न जाने क्यूँ मेरा दिल हुआ कि आज बारिश में नहाया जाए!मैं नहाने के छत पर पहुंचा तो देखा चाची भी बारिश के मज़े ले रही थी. मैंने अपना हाथ उसके मुंह से हटा लिया तो वो बोली सर अपने तो मेरी जान ही निकाल दी थी एक बार लगा कि यहाँ से मैं जिन्दा घर नहीं जा पाउंगी.

आप ही सोचिये कोई बीस साल की कुंवारी लड़की जो 4-5 इंच का लंड अपनी बुर में लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो, उसे आठ इंच लम्बा अच्छा खासा मोटा लंड दिख जाए तो वो घबरायेगी या नहीं?मुझे ख्यालों में खोया देखकर अमित बोले- क्या हुआ जान?मैं कुछ नहीं कह सकी, मैंने कहा कुछ नहीं.

सरदार का बीएफ: प्लीज्ज्ज्जथोड़ी देर बाद बोली- जान कुछ निकल रहा है ! मेरी चूत से कुछ निकल रहा है…तब मुझे लगा कि प्रिया झड़ गई है, लेकिन मैं अपनी स्पीड से चोदता रहा … इसी बीच वो दो बार और झड़ी।लगभग 20 मिनट चोदने के बाद मैं बोला- जान, मेरा निकलने वाला है।तो बोली- जान, मैं अपने अन्दर महसूस करना चाहती हूँ… मेरे अन्दर ही निकाल दो. तो उस दिन के बाद किसी और को नहीं देख पायेगा तू…!!!मेरी आँखें भर आई थी… पर साथ साथ होंठों पर मुस्कान भी थी.

‘हाय रे मेरे राजा… मेरा तो निकाला रे… मैं तो गई… आह्ह्ह्ह्ह्ह’ और सोनू की चूत ने पानी छोड़ दिया. कि अनिरुद्ध का एक्सिडेंट हो गया है…अनिरुद्ध के हाथ पाँव टूट चुके थे उस दिन के बाद तीन महीने तक वो कॉलेज़ नहीं आया…!!!अब मेरा और वेदांत के रिश्ते में भी स्पष्टता आ गई… आखिर उसने अपने प्यार का इज़हार जो कर दिया था. मैंने उनकी ब्रा का हुक खोल कर उनको चूमना शुरू कर दिया और फिर उनके चुचूक को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

जीजू का लंड देखा तो मेरे होश उड़ गए, नौ इंच का फनफनाता लंड! मैं तो देखकर ही काँप गई कि यह मेरी इतनी सी चूत में जायेगा कैसे?मैंने जीजू से कहा- आप इस लंड का जो करने को कहोगे, वो मैं करूँगी लेकिन इसे मेरी चूत में मत घुसाना, नहीं तो वो फट जायेगी.

मैंने अपने बाएँ हाथ की तरफ उसे लिटा लिया और उसके गाउन की डोरी खोल कर उसके गुम्बदों को बाहर निकाल लिया. मैं आनंद-विभोर होकर कहते जा रहा था- वाह रसगुल्ले सरीखी बुर !फिर मैंने सम्भोग की इज़ाज़त मांगी !आंटी ने कहा- चोद ले. उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और सोचने लगा- क्या सच में मैंने उसे चोदा है? मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने प्रीति को चोदा है.