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इंटरवल खत्म हो चुका है और फिल्म भी शुरू हो चुकी है।मैंने नावेद से पूछा- तुम्हारे दोस्त कहाँ बैठे हैं?वो मुस्कुरा कर बोला- भाभी मेरे तो कोई भी दोस्त नहीं हैं। मैं तो अकेला ही फिल्म देखने आया हूँ.तभी उसके बाद वो उसकी नादान जवानी के मज़े लूटेगा।पुनीत अब चूचों से नीचे उसके गोरे पेट पर अपनी जीभ घुमा रहा था और मुनिया किसी साँप की तरह अपनी कमर को इधर-उधर कर रही थी।उसको मज़ा तो बहुत आ रहा था। मगर थोड़ा सा डर भी लग रहा था कि कहीं पुनीत उसकी चुदाई ना कर दे। मगर बेचारी वो कहाँ जानती थी कि इस सबके बाद चुदाई ही होगी।पुनीत के होंठ अब मुनिया की चंचल चूत पर आ गए थे.

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और फिर उन्होंने बताया कि हम दोनों 12वीं क्लास से एक-दूसरे की अच्छी दोस्त हैं पर बारहवीं कक्षा के बाद नयना मेडिकल में चली गई और दीप्ति मैनेजमेंट की तरफ चली गई थी।अब नयना ने मुझे टीज़ करने की तैयारी शुरू की और वो धीरे-धीरे अपने टॉप को ऊपर करने लगी। जैसा कि मैंने कहा है शुरूआत में उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.यदि मुझसे इस कहानी में कोई गलती हो जाए तो पहली कहानी मान कर मुझे माफ़ कर दीजिएगा।मेरा नाम अनामिका जैन है.

तो तुम मुझे क्या दोगे?मैंने पूछा- क्या चाहिए?वो बोली- मुझे तुम चाहिए।मैं बोला- तुम्हारे सामने ही तो हूँ. बीएफ फिल्म सेक्स हिंदी में मैं अपने लंड को उसके चेहरे के पास ले गया और उससे अपना मुँह घुमाने के लिए कहा। जब उसने अपना मुँह मेरी तरफ़ घुमाया.

तो मैंने देखा उस दिन वो बहुत प्यारी लग रही थी, मैंने उसको अपनी बाँहों में भर लिया, उसके होंठ चूसने शुरू किए, वो भी बहुत मस्त तरीके से साथ देने लगी।उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसने कान की लौ को चूमने लगा और चूसने लगा।उसके बाद उसे पता नहीं क्या हुआ.

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लेकिन शादी के बाद मैंने जॉब छोड़ दी और घर पर ही रहने लगी हूँ।फैजान कोई बहुत ज्यादा अमीर आदमी नहीं हैं। उसकी फैमिली शहर के पास ही एक गाँव में रहती है. तो आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. तो मुझे ईमेल करके मेरा उत्साहवर्धन अवश्य कीजिएगा।कहानी जारी है।मेरी फेसबुक आईडी के लिए मुझे एड करेंhttps://www.

तो दोस्ती बढ़ जाती है।पिताजी उस नौजवान को अपना खास दोस्त मानने लगे और दिन-रात दोनों अपनी छोटी ज़िंदगी की तकलीफें एक-दूसरे के साथ बाँटते रहते। वो नौजवान भी पिताजी के दफ़्तर में काम कर रहा था। उनकी दोस्ती एक दिन ऐसे मोड़ पर आ गई कि पिताजी ने उसे अपना दामाद बनाने का निश्चय कर लिया।मेरी दो बड़ी बहनें थीं. बीच-बीच में वो रुक कर थोड़ा ब्लोजॉब भी देती थी।हम लोग अब पूरी तरह हाँफ़ चुके थे।मैंने कहा- मलाई खाओगी?तो उसने हँसते हुए कहा- हाँ भूख तो लगी है।मैंने उसे अपना मुँह मेरे लंड के पास लाने को कहा. जिससे उनकी बुर पूरी तरह खुल गई और उसकी पुत्तियाँ बाहर निकल कर लटक गईं।माँ धीरे-धीरे मेरे सुपारे को सहला रही थीं.

दिखाओ ना मुझे भी?मैंने बैग मैं से चारों बॉक्स निकाल कर बाहर टेबल पर हम दोनों की सामने रख दिए। बॉक्स पर ब्रा पहने हुई मॉडल्स की फोटो थीं. मुझे शर्म आती है, तुम बाहर जाओ।पर मैं नहीं माना तो उसको मजबूरन मेरे सामने कपड़े बदलने पड़े।तब मैंने उससे डिनर के लिए पूछा. वहाँ जाकर पता चला कि मेरे नाना जी स्वर्ग सिधार गए हैं, वहाँ शोक के कारण सब रो रहे थे।मैं तो वहाँ पर ठीक से किसी को जानता भी नहीं था.

जया की चूत देखने को मिलेगी?मैंने कहा- चिंता मत करो, इस बार तुम्हारी इच्छा पूरी कर दूंगी। मौका मिला तो तुम भी जया को चोद लेना।इतनी देर में एक फोल्डिंग को बीच में डाल दिया गया और सब लोग उसके आसपास बैठ गये।शुरूआत कुसुम ने ही की। बिस्तर पर पहुंचते ही कुसुम और उसका पति 69 की स्थिति में आ गये।कुसुम ने अपने पति का पूरा लंड मुंह में भर लिया था। उसका पति भी कम नहीं था। फच. बल्कि मुझे तो वो अपनी ही छोटी बहन लगती थी।आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।[emailprotected].

वैसे-वैसे उसको मजा आ रहा था।एक बार फिर मेरी और रेशमा की गाण्ड चुदाई की आवाज कमरे में सुनाई पड़ने लगी। क्या मस्ताने तरीके से रेशमा अपनी गाण्ड चुदवा रही थी। वो कभी दोनों पैर को जमीन पर रख कर.

आख़िर मैं भी तो देखूँ कि तुम्हारे लंड में कितना दम है।मैंने भी उनकी आज्ञा का पालन किया और फिर अपना लोवर व टी-शर्ट उतार दी।मैंने तो नीचे अंडरवियर भी नहीं पहना था तो मुझे नंगा देख कर वो हँसते हुए बोलीं- तुम तो जवान हो गए हो.

लेकिन वो करता रहा और मैं भी शांत हो गई और चुपचाप मरवाती रही। काफ़ी बाद वो मेरी गाण्ड में ही झड़ गया और मेरे ऊपर ही लेटा रहा।फिर मैंने उसका पकड़ा और बोली- साले. ’ करती जा रही थी।मैंने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसके मम्मे चूसने लगा। फिर उसके लबों को चूमने लग गया, उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी फुद्दी पर लगा दिया और कहने लगी- प्लीज़ आशीष मुझे यहाँ चाट लो. उस दिन के बाद सुहाना मेरे पास हमेशा आती और चुद कर जाती थी।एक बार सूर्या के साथ भी उसको चोदा मतलब सिर्फ़ मैं ही नहीं.

क्योंकि वो स्वाद दुनिया में किसी और चीज में होती ही नहीं है।मैं जानवरों की तरह उसकी बुर को चाट रहा था और अपने जीभ से उसकी गुलाबी बुर के भीतर का नमकीन रस पी रहा था।कविता की सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थीं और उन्हें सुन-सुन कर मेरा लंड लोहे की तरह कड़ा हो गया था।दस मिनट के बाद कविता बोली- विराट डार्लिंग. जो मॉम को और सेक्सी बना रही थीं।फिर मैं कभी भीगे बदन को मलता और कमर के पीछे से हाथ डाल कर उनके मम्मों पर साबुन मलने लगता।इस काम को करते हुए मेरा लंड बार-बार उनके चूतड़ और कभी-कभी दोनों चूतड़ों की दरार में घुस रहा था। मेरा लवड़ा उनकी गांड के छेद से टच होने पर. ’ आरती बोल उठी और अपनी चूत मुट्ठी में भर ली।ऐसे ही हंसी-ठिठोली करते हुए वे सब ये गन्दा खेल खेलती रहीं। मैं दम साधे वो सब देखता रहा.

तो मुझे उसे चूमने या चूसने का मन नहीं हुआ।फिर मैं उसकी बगल में लेट कर उसकी चूत को अपनी उंगलियों से मसलने लगा।वो भी मेरा लंड आगे-पीछे कर रही थी।यह मेरा पहली बार था.

वो बोली- क्या दिखाई दिया?मैंने कहा- ऊपर से काला दिखाई दे रहा था।वो बुर सहलाती हुई बोली- नजदीक से देखोगे?मैंने कहा- हाँ. मैं चूल्हे पर चाय रख कर आई हुई हूँ।इसी के साथ ही मुझे बाथरूम का दूसरा दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई।जाहिरा दूसरी तरफ से निकल गई थी और मैं भी वापिस अपनी बिस्तर पर लेट गई। कुछ ही देर में फैजान भी वॉशरूम से बाहर निकल कर कमरे में आ गया।इसके साथ ही जाहिरा भी चाय लेकर आ गई और मेरे सिर पर हाथ फेर कर मुझे उठाते हुए बोली- भाभी. जो मेरे मुँह से होता हुआ बॉडी पर आने लगा।अभी मैं उसके रस के आनन्द को ले ही रही थी कि लड़के ने मेरे बाल पकड़ते हुए मुझे खींचते हुए मैडम के पास ले आया।उनसे कहा- ले साली.

बहुत ही भीनी खूशबू है।’यह कहकर उसको और तेजी से सूंघने लगी और फिर चाटने लगी।रेशमा मुझसे निशानी के रूप में मेरी चड्डी ले जाने के लिए माँगने लगी। मैंने भी उसे ले जाने के लिए ‘हाँ’ बोल दिया। ज्यादा थके होने के कारण रेशमा राहुल के बगल में लेट गई और सो गई।मैं भी दूसरे कमरे में जाकर सो गया। सुबह राहुल की आवाज आ रही थी। वो घर चलने के लिए कह रहा था. कि हर औरत के आँसू निकले हैं। लंड इतना सख्त है कि जैसे लोहे की रॉड हो। मेरे लंड ने हर चुदाई की कहानी ऐसी लिखी है कि चुदने वाली की चूत काँप जाए।बात तीन महीने पहले की है। मेरे घर वाले सब लोग कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए थे। खाना-पीना चाची के जिम्मे बोल दिया गया था।मेरी चाची एक मस्त माल हैं। उनके मम्मे बहुत बड़े हैं। वो उस समय तीस साल की थीं। चाचा ट्रक चलाते थे. पर हुआ बिल्कुल उल्टा।वो वहाँ से खड़ी होकर मेरी वाली बैंच पर आकर मेरे साथ बैठ गई।मैं बस उसकी तरफ देख रहा था और उसमें बिल्कुल खो सा गया था।वो- हैलो.

क्योंकि उसकी गाण्ड पीछे से कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुए थी। उसकी गाण्ड कुछ अंडाकार किस्म की उठी हुई थी.

इसकी एंट्री भी जल्दी होगी और ये सन्नी को मुनिया के बारे में क्या याद आ गया। अब ये सब तो पता लग ही जाएगा. मैं- जी मैं भी साइन्स पढ़ा हूँ और मेरी इस नज़र की वजह से मुझे प्रैक्टिकल में पूरे के पूरे मार्क्स मिलते थे.

बीएफ फिल्म सेक्स हिंदी में ’ मेरे बार-बार कहने पर उसने अपनी उंगलियों के बीच से मेरे लण्ड की तरफ देखा और फिर से आँखे बंद कर लीं।‘क्या हुआ आरती. मैं आपको कोल्ड ड्रिंक पिलाता हूँ।मेरे इन्कार के बावजूद वो भाग कर पास ही की कैन्टीन पर गया और दो कोल्ड ड्रिंक ले आया।फिर बोला- आइए भाभी.

बीएफ फिल्म सेक्स हिंदी में दूसरा गाण्ड में पिलाई कर रहा था। दो हथियार मेरे मुँह में घुसे थे। एक साथ चार-चार लौड़े मुझे बजा रहे थे और अब मैं फिर झड़ने वाली थी. उसने मेरी नज़रें शायद पढ़ लीं और अपने हाथ मोड़ कर सीने पर रख लिए और घबरा कर दूसरी तरफ देखने लगी।लड़कियों में यह गुण जन्मजात होता है कि वो पुरुष की इस तरह की नज़रें तुरंत भांप लेती हैं.

’वो अकड़ने लगी और एकदम से मुझसे चिपट गई और शायद झड़ गई उसकी बुर की गर्मी से मुझे कुछ लगा और मैं आँख बंद करके.

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मुझे ईमेल करके मेरा उत्साहवर्धन अवश्य कीजिएगा।कहानी जारी है।मेरी फेसबुक आईडी के लिए मुझे एड करेंhttps://www. सफेद संगमरमरी जिस्म पर वो गुलाबी निप्पल कुदरत की अनोखी कारीगिरी की मिसाल दे रहे थे।मुनिया धीरे से आगे बढ़ रही थी और पुनीत भी बड़े आराम से ऊपर से नीचे अपनी नज़र दौड़ा रहा था। अब उसकी नज़र मुनिया के पेट से होती हुई उसकी जाँघों के बीच एक लकीर पर गई. और ये कह कर अपनी बुर को हाथों से फैला कर माँ को अपना लाल-लाल छेद दिखाने लगी और वो दोनों हँसने लगे।हम सब इतने उत्तेजित थे कि किसी को कुछ भी होश नहीं था।सिर्फ़ लंड और बुर दिखाई दे रहा था। तभी मैंने सही समय सोच कर उठने का नाटक करते हुए अपनी आँखें खोल दीं और उठने का नाटक करते हुए बैठ गया।मेरे उठते ही माँ ने पूछा- अरे उठ गया बेटा.

तो लुँगी की गाँठ रगड़ से अपने आप ही खुल गई और मैं नंगे ही अपने खड़े लंड को लेकर माँ की तरफ सरक गया और नाईटी खोल कर कमर तक हटा दिया।उस रात मैंने पहली बार माँ के चूतड़. कैसे तूने पहली बार सेक्स किया था और किसके साथ किया था?पूजा- अरे ये टॉपिक तो तेरे टॉपिक से भी ज़्यादा बकवास है. वो खुद कभी-कभी हम दोनों के सामने बिना शरमाए एक पैर पलंग पर रख कर साड़ी थोड़ा उठा देतीं और अन्दर हाथ डाल कर अपनी बुर खुजलाने लगतीं।नहाते समय या हमारे सामने कपड़े बदलते वक़्त.

दिखने में तेलगू की हीरोइन अनुष्का जैसी दिखती है।वो बीटेक पूरी करके एक सॉफ़्टवेयर कंपनी में जॉब कर रही है। दूसरी है सोनाली.

कुछ दिन पहले मैंने इन दोनों के साथ उस जालिम को देखा है। मैं उसकी सूरत कभी नहीं भूल सकता तुम मानो या ना मानो. तो आंटी की चूत में सुरसुरी होने लगी और वे भी चुदास की आग से भर उठीं।अब आंटी भी मेरा साथ देने लगीं और मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया।मैंने भी अपना लौड़ा आगे बढ़ा दिया. दोनों कबूतर हवा में लहरा रहे थे।मैंने एक मम्मे को मुँह में भर लिया और दूसरे को अपने हाथों से सहलाने लगा.

जब मेरी चूत में कुछ ज़्यादा आग लग गई थी और लंड माँग रही थी।हुआ यूँ कि सुबह से मैं एक स्ट्रेंजर चैट एप्लीकेशन पर चैट कर रही थी. मैं बस तेरे जिस्म को देखूँगा। उसके बाद तू मेरे लौड़े को चूस कर इसका दर्द मिटा देना।मुनिया- बाबूजी पहले आप आँखें बन्द करो ना. तो कार साइड में लगा कर मैं बीयर और सिगरेट पीने लगी।वहाँ से गुजरने वाले कुछ लोग कार की तरफ मुझे देखते जा रहे थे.

तो देखता तो हूँ कि मेरे चाचा उधर से गुजर रहे थे।मैं घबरा गया और जल्दी से छत पर जाकर लेट गया और सोने लगा. पंजाब के पटियाला जिले का रहने वाला हूँ। पेशे से एक कंप्यूटर इंजीनियर हूँ। हाल ही में मैंने नज़दीकी यूनिवर्सिटी में लेक्चरर की जॉब छोड़ी है और अभी मैंने लोगों को उनके घर में ही जाकर कंप्यूटर सिखाने का नया काम शुरू किया है। देखने में मैं एक पंजाबी गबरू हूँ.

और मैं भी अपनी ऊँगलियां माँ की बुर में तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगा।माँ भी धीरे-धीरे अपनी कमर ऊपर उछाल कर चुदवा रही थीं और खूब ज़ोर से हिलते हुए झड़ गईं।तभी मैं अपना लंड दीदी के मुँह में अन्दर तक घुसड़ेते हुए झड़ गया।दीदी भी मेरे लंड का पानी पूरा चाट गई. माँ ने आज साड़ी की जगह नाईटी पहन रखी थी और उन्होंने अपना एक पैर थोड़ा आगे की तरफ कर रखा था।फिर मैंने सोचा कि अगर यह किस्मत से हुआ तो अच्छा है और अगर माँ जानबूझ कर यह कर रही हैं तो माँ जल्दी ही चुद जाएगी।उस रात मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी हुई थी. मैंने अपनी बनियान को अपने कन्धों से नीचे को सरकाना शुरू कर दिया।यूँ मैंने अपनी दोनों चूचियों को नंगा कर दिया.

तूने कहा कि करके दिखाओ तो मानें!निकिता- अच्छा अच्छा ठीक है… तुमसे बातों में कौन जीत सकता है… सब मेरा ही क़सूर था… तुम तो दूध पीते छोटे से बच्चे हो.

तो माँ जी ने थोड़ा सा हाथ बढ़ा कर हल्के से मेरे मम्मों के ऊपर रखने लगीं। मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा था।मैं भी हल्के से माँ जी के चूतड़ों के ऊपर अपना हाथ फिराने लगी. मेरा नाम अभय राज है। मैं कलकत्ता का रहने वाला हूँ और अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ। मुझे यहाँ बहुत सारी कहानियां सच लगीं और बहुत सी झूठ भी लगीं. मैं भी उनके गोल और उठे हुए चूतड़ों पर गोलाई में घुमा-घुमा कर ‘रबिंग पैड’ से उनकी पिछाड़ी को दबाने लगा। फिर मैंने साबुन लेकर हाथों से चूतड़ों को खूब मला।अब मैं उनकी गर्दन पर साबुन लगाने लगा.

लेकिन वो छूट नहीं पाई और उसने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए।मैं अपने आप उससे अलग हो गया। अलग होते ही वो गुस्सा दिखाते हुए कार से उतरने लगी। मैंने उसकी बाँहों को पकड़ कर बोला- तुम गुस्सा क्यों कर रही हो?इस पर सुप्रिया बोली- यह गलत बात है. किंतु फ्लश और दरवाजा खुलने की आवाज़ सुन कर उन्होंने अपने बदन को तुरंत सामने से तौलिया से ढक लिया और हड़बड़ी में मुझे देखकर पीछे घूम गईं।जबकि पीछे पीठ पर तौलिया नहीं था और उनके पूरे नंगे बदन को देखकर मेरे पूरे बदन में सनसनी फ़ैल गई।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !क्या सेक्सी सीन था.

उसकी टाँगें भी बहुत चिकनी और गोरी थीं।मैंने उसे अपनी तरफ बुला लिया और अपने पास पर बिठा लिया। वो बहुत होशियार तथा सुंदर ढंग से बातें कर रही थी. और फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसे नीचे उसके कन्धों से बाज़ू पर ले आया।मेरी चूत तो जैसे गर्मी से जल ही उठी कि आज अपनी बहन के लिए फैजान और भी ज्यादा हवस की आग में भड़क रहा है।फैजान ने अपना हाथ दोबारा से अपनी बहन के सीने पर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसके नंगे सीने को सहलाने लगा।यह नेट ड्रेस ऊपर से तो वैसे भी काफ़ी ओपन था. मुझे लगता है कि दोबारा से वहाँ जाकर सो गए हैं।जाहिरा मुस्कराई और बेडरूम की तरफ बढ़ी और मैं उसको रसोई के दरवाजे के पीछे से देखने लगी।जाहिरा ने जैसे ही अन्दर झाँका तो एकदम पीछे हट गई। उसने रसोई की तरफ मुड़ कर देखा.

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सो मैंने अपनी उंगली उसकी चूत पर लगा दी। कुछ देर बाद चूत के नजदीक मुँह को ले गया और उसकी कटीली बुर को किस कर लिया.

अब वो सिर्फ़ गुलाबी पैन्टी में थी और फिर उसकी हिरनी जैसी टाँगों को मैं चूमने चूसने लगा। ऐसा करते-करते मैंने उसकी पैन्टी में हाथ डाल दिया. जैसे समय रुक गया है तथा दुनिया के सारे मज़े आज मुझे मेरे लंड के रास्ते ही मिलेंगे।पिन्की अब भी मेरे लंड वो मज़े लेकर चूस रही थी. लेकिन मैंने उसकी कोई भी बात सुनने से इन्कार कर दिया और आख़िर जाहिरा को मेरी बात माननी ही पड़ी।रात हुई तो मैं और फैजान अपने कमरे में आकर लेट गए.

उसको अच्छा लग रहा था, उसके लंड में अकड़न शुरू हो गई थी। तभी तो उसके मुँह से ऐसी बात निकल पड़ी।पायल तो वैसे भी अपने होश में नहीं थी, पुनीत की बात सीधे उसकी चूत पर लगी यानि उसकी चूत ये सोच कर गीली हो गई कि पुनीत के सामने जब वो नंगी होगी. तो कौन अपने पर काबू रख सकता है। मैंने उसके पांव की उंगलियों को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। फिर उसके तलवे चाटने लगा. ब्लू सेक्स हिंदी बीएफ?तो हमने जल्दी से कपड़े पहन लिए और नीचे चले गए। घर में काफी भीड़ होने की वजह से किसी को हम पर शक नहीं हुआ।उसके बाद मैंने उसे बहुत बार चोदा.

मगर वो नहीं मानी और सुबह की तैयारी का बोल कर वहाँ से निकल गई।चलो अब पुनीत के फार्म पर चलते हैं।मुनिया ने जब लौड़े को चाट कर साफ किया और पुनीत के बराबर में लेटी. चूंकि वो एक अनछुई लड़की थी और आज कली से फूल बनने जा रही थी।मेरे जोर से धक्का लगाने के बाद उसकी सील तोड़ते हुए मेरा लंड 5 इंच अन्दर घुस कर उसकी बच्चेदानी पर लगने लगा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। लगभग 30-40 धक्कों के बाद उसे अच्छा लगने लगा और मेरी गाण्ड पर हाथ लगा कर वो मेरे लवड़े को जोर-जोर से अपनी चूत में दबाने लगी।कुछ देर तक चुदाई करने के बाद वो झड़ गई.

उसने बार-बार अपनी बहन की नंगी कमर और नंगे कन्धों पर किस करना और उन्हें चूमना शुरू कर दिया।नीचे फैजान का हाथ जाहिरा की उभरी हुई गाण्ड पर पहुँचा और आहिस्ता-आहिस्ता उसने अपना हाथ जाहिरा की गाण्ड पर फेरना शुरू कर दिया।बिना किसी पैन्टी के पतले से कपड़े के बरमूडा में फंसी हुई जाहिरा की चिकनी गाण्ड. पर मैं रुका नहीं और लगातार उसकी चूत पर वार पर वार करता गया। मैं उसे तेजी से चोदता जा रहा था और वो दर्द से कराह रही थी।फिर थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो मेरा साथ देने लगी और अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदवाने लगी। उसने मुझे जोर से अपनी बाँहों में कस रखा था और मेरे लंड के जोरदार झटकों से उसके मुँह से चीखें निकल रही थीं।‘अह. उसको कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।कुछ देर बाद किसी ने पूजा के मुँह पर हाथ रख दिया और उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया, इस अचानक हुए हमले से पूजा की तो जान ही निकल गई।साया- मुझे पता है.

लेकिन भरे हुए शरीर वाली थीं और उनके चूतड़ चलने पर हिलते थे।उनकी शादी बहुत जल्दी हो गई थी। मेरी माँ बहुत ही सुंदर और हँसमुख है. मैं धीरे से उठ कर बैठ गया और अपनी पैन्ट उतार कर लंड को माँ के चूतड़ से सटाने की कोशिश करने लगा… पर कर नहीं पाया। तो मैं एक हाथ से माँ की बुर में ऊँगली डाल कर बाहर निकले चमड़े को सहलाता रहा और दूसरे हाथ से मुठ मारने लगा. वो स्लीबलैस थी और मेरे कन्धों से नीचे से पूरी बाज़ू नंगी थी।हॉल में स्क्रीन पर चल रही फिल्म की रोशनी में मेरे गोरे-गोरे मुलायम बाज़ू बहुत चमक रहे थे। दूसरी तरफ नावेद ने एक हाफ स्लीव टी-शर्ट पहन रखी थी और साथ में जीन्स पहनी हुई थी।कुछ ही देर में नावेद का नंगा बाज़ू मुझे अपनी नंगी मुलायम चिकनी बाज़ू से टच होता हुआ महसूस हुआ। मैंने फ़ौरन से कोई भी रिस्पॉन्स नहीं दिया.

आज इसी से काम चलाओ।मैं- उसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं है।सोनिया- अब तुम हटो इसको बिस्तर पर ले जाने दो।मैं- हाँ उसको पहुँचा कर मेरे पास आ जाओ.

रात को भी आपने मुझे इतना तंग किया और फिर बारिश में नहाते हुए भी आपने ऐसे ही किया था।फैजान ने उसे खींच कर अपने सीने से लगाते हुए कहा- तुम भी तो इतने दिनों से घर में इतनी नंगी होकर फिर रही हो. कुछ बात भी हो जाएगी।तब मैंने उससे कहा- तुम यहाँ? तुम तो शिमला में रहती थी न?तब उसने बताया- मैं यहाँ कॉलेज में पढ़ती हूँ। यहीं एक रूम किराये पर लिया हुआ है।मैंने पूछा- कहाँ?तो उसने बताया- द्वारका में।मैंने उसका नंबर लिया और उसे अपना नंबर दिया.

जैसे कोई गन्ने को चूस रही हो।पुनीत ने मुनिया के सर को पकड़ लिया और लौड़े को ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगा। उसकी नसें फूलने लगी थीं। लौड़ा कभी भी लावा उगल सकता था।मुनिया की साँसें रुकने लगीं. ’ से मेरे चूतड़ों में एक चपत सी महसूस हुई।मैंने बिलबिला कर उनके होंठ छोड़ दिए और उनकी तरफ सवालिया निगाहों से देखा. दोस्तो, मेरा नाम रोहित है (बदला हुआ नाम) अभी मैं 25 साल का हूँ। मैं देहरादून का रहने वाला हूँ। वैसे तो मैं अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ.

अब भाभी भी मुझे देख कर मुस्करा देती थीं और मेरे हाल-चाल पूछ लेती थीं कि सब ठीक है ना?मैं मन में सोचता कि तुम ठीक रहने दोगी. क्योंकि एक बार फिर से उसका हाथ अपनी बहन की चूचियों पर आ चुका हुआ था।थोड़ी ही देर में मुझे जाहिरा की आवाज़ सुनाई दी- भाईजान… उठो जरा. हुआ कुछ ऐसे कि लड़की की वरमाला के बाद मैं सोने के लिए एक कमरे में चला गया।मुझे पता नहीं था कि वो लड़कियों के तैयार होने का कमरा था।मेरी अभी नींद लगी ही थी कि लड़कियाँ वहाँ आ गईं। ग़लती से एक लड़की ने मेरे पाँव पर पाँव रख दिया। मेरी हल्की सी ‘आह्ह.

बीएफ फिल्म सेक्स हिंदी में तब तक सुनील ने मेरे बाकी के कपड़े खोल दिए और वो मेरी चूचियों से खेलने लगा था।मैं भी इस सेक्स के मज़े ले रही थी।तभी बिट्टू आया और उसने मुझे नीचे लिटा दिया और मेरे बदन को चूमने लगा वो मस्ती से मेरी चूचियां दबाता रहा. वहाँ जाएगा तो कम से कम आराम से देख तो सकेगा।मेरी बात सुन कर तो उसको तो मुँह माँगी मुराद मिल गई और जब तक वो वहाँ खड़ा रहा.

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तो वो सिसकने लगी। उसकी चूत टाईट होने के कारण मेरा लंड अन्दर नहीं जा रहा था। मैंने मुस्कान को तेल लाने को कहा. क्योंकि इन सब बातों के बाद भी मैंने उसकी या दीदी की नंगी बुर नहीं देखी थी। बस वो हमेशा हमें नॉर्मल रहने को कहतीं और खुद भी वैसे ही रहती थीं।धीरे-धीरे मैं माँ के और करीब आने की कोशिश करने लगा और हिम्मत करके माँ से उस वक़्त सटने की कोशिश करता. इसके बाद हमें जब भी मौका मिलता, हम चुदाई के मजे लेते, कभी नहाते समय तो कभी सोते समय…मैंने तरह तरह से उसकी चुदाई की और अब जब उसकी शादी हो चुकी है, फिर भी जब भी मौका मिलता है चुदाई के लिए तैयार रहता हूँ।आज उसकी फिगर 32-28-34 हो चुकी है और उसकी इस सेक्सी फिगर को देख कर बुड्डे भी जवानी के सागर में डूब जाते हैं जिसका श्रेय मुझे जाता है.

किसी भी तरह वैशाली की चूत मारना ही है।तो मैंने प्लान बनाया और उधर ही छुप गया।वैशाली दिखने में सांवली जरूर थी. अपने कपड़े तो खोल लो पैन्ट की चैन में से लौड़ा लगाने में क्या मजा आएगा?फिर सुनील ने अपनी पैन्ट खोली और नंगा होकर वापिस आकर. नई दुल्हन की सुहागरात बीएफमैंने थोड़ी सी हरकत की तो फैजान फ़ौरन ही पीछे हट कर लेट गया।मैं बड़े ही आराम से उठी जैसे नींद से जागी हूँ और आराम से बाथरूम की तरफ चल दी।बाथरूम में जाकर मैंने अपनी चूत को अच्छे से धोया.

तो अभी मेरा आधा सुपारा ही अन्दर गया होगा कि वो बहुत जोर से कराहने लगी।तब मैंने मेरा लंड निकाल कर चूत में ही डाल दिया और उसको पूरी ताकत से ज़ोर-ज़ोर से चोदता हुआ अपने अंतिम पड़ाव पर आ गया। मेरी भांजी झड़ चुकी थी और वो मुझे बस करने की कह रही थी.

यानि वो मेरी ननद हुई।मैं अपने शौहर फैजान के साथ शहर में ही रहती हूँ। हमने एक छोटा सा मकान किराए पर लिया हुआ है. नीचे सिर्फ़ एक चादर बिछाया हुआ था।वो इस वक्त एक बहुत ही सुंदर संगमरमर की मूरत लग रही थी। मैं भी निक्कर निकाल कर पूरा नंगा हो गया। पहली बार मैंने उसके दोनों पैर मेरे कंधे पर रखे और मेरा सुपारा उसकी गोरी चूत के छेद पर रख कर ज़ोर से धक्का मारा।‘आअहन्न.

वो यह थी कि जाहिरा को पता था कि उसकी चूचियाँ काफ़ी ज्यादा खुली नज़र आ रही हैं और उसका भाई इनका पूरी तरह से मज़ा ले रहा है. मेरे सामने कैसी शरम और अब तो दीदी के सामने भी शरमाने की कोई ज़रूरत नहीं है।इस कहानी के बारे में अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे जरूर लिखें।कहानी जारी है।[emailprotected]. तो हम सब नाश्ता करने लगे।मैंने नोट किया कि आज फैजान बड़ी ही अजीब नज़रों से जाहिरा को देख रहा था। आज भी उसकी नजरें बार-बार उसकी चूचियों पर जा रही थीं.

तभी मेरे हाथ से खिड़की खुल गई और चाची की नज़र मुझ पर पड़ गई। उन्होंने जल्दी से अपने आपको ढक लिया और कमरे में भाग गईं।मैं अब उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था, किसी तरह एक-दो दिन बीत गए।एक दिन मेरे चाचा को कहीं कुछ सामान लाने बाहर जाना था। उस दिन घर पर बस हम तीन लोग ही थे, हम दोनों न खाना खाया और अपने अपने कमरे में सोने चले गए।कुछ देर बाद चाची मेरे कमरे में आईं और उन्होंने मुझे जगाया.

उसका मुँह दीप्ति की तरफ था और दीप्ति भी उसी की तरफ देखते हुए मेरे लंड पर बैठने लगी।नयना ने मेरा तना हुआ लंड हाथ में ले लिया और बिल्कुल दीप्ति के चूत के छेद पर टिका दिया. सामान्य शिष्टाचार के बाद हम लोग बातें करने लगे।आरती भी चाय-नाश्ता लेकर आ गई।जब मैं उठ कर आने लगा तो भाभी जी बोलीं- कल मैं और आपके दोस्त मेरे मायके जा रहे हैं. उन्होंने हमें एक लेसन याद करने के लिए बोला और टेबल पर सर रख के सो गए।मैंने बुक को अपने हाथों में लेकर धीरे से कल्याणी की पीठ पर टच किया.

ई-मेल फिल्म बीएफथोड़ी देर बाद माँ आईं और मुझे सोता हुआ देख कर थोड़ी देर कमरे में कपड़े और सामान ठीक किया और फिर मेरे बगल में आकर सो गईं।करीब एक घंटे के बाद जब मुझे विश्वास हो गया कि माँ अब सो गई होगीं. दीपक ने कहा- साली रंडी चोद ही तो रहा हूँ।मैंने कहा- भाई बाहर निकालो नहीं तो अभी भैया को बता दूँगी।तो दीपक ने कहा- जल्दी बता.

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’ करता हुआ उड़ा और दूसरे पेड़ पर जा बैठा।मैंने लण्ड को थोड़ा सा पीछे लिया और फिर से बलपूर्वक चूत में धकेल दिया. मगर मुझे ऐसा-वैसा कुछ नहीं करना।आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. इस तरह मैंने अपने चोदू हुनर के चलते उसे करीब आधा घंटे तक हचक कर चोदा।मैंने उसकी चीखों के वजह से उसके मुँह पर एक पट्टी बाँध दी थी.

जो सीधी मुनिया के हलक में उतरती चली गई। इस बार मुनिया ने जल्दी से पूरा पानी गटक लिया और लौड़े पर से आख़िरी बूँद तक चाट कर साफ की।उफ़फ्फ़ दोस्तो. उसने मेरा लौड़ा अपने हाथ से पकड़ कर ठीक छेद के निशाने पर लगा दिया।मैंने हल्का सा धक्का दिया और लंड उसकी चूत में हल्का सा सरक गया और वो कसमसाने लगी।मैं उसके होंठों को चूसता रहा और अपने हल्के-हल्के धक्के चालू रखे।उसकी चूत काफ़ी कसी हुई थी. दोस्तो, मेरा नाम राज है, दिल्ली में रहता हूँ।मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और इसी वजह से आज मैं अपनी आपबीती आप लोगों को सुनाना चाहता हूँ।जैसा कि आप लोग जानते हैं, दिल्ली शहर दिल वालों का शहर है, अगर आपके दिल में किसी चीज़ की चाहत है तो आप थोड़ी सी मेहनत कर उसे आसानी से पा सकते हैं। ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ.

फिर गुरूजी ने मुझे शीलू के सामने ही गोद में उठा कर नीचे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।मैं शीलू के सामने ही गुरूजी की गोद में लटक कर चुदवाने लगी।गुरूजी ने शीलू से कहा- शीलू मेरा मोबाइल ले लो. तो हम सबने खाना खाया और फिर जाने लगे।मैं और मैडम एक ही कार से चल दिए। मैडम ने मेरे घर पर कह दिया कि यह रात भर मेरे घर रुक गई थी. पढ़ाई के कारण हम सब भी पापा के साथ आ गए।इसी शहर में पापा के रिश्ते में भाई या यूँ कहूँ कि हमारे दूर के चाचा-चाची और उनकी एक लड़की के साथ रहते थे। उसका नाम अनु (बदला हुआ) था, वो भी बारहवीं कक्षा में थी, उसकी उम्र भी अठारह वर्ष थी, वे लोग हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रहते थे।कुछ ही दिनों में हमारी अच्छी जान-पहचान हो गई.

उसने मुझे पकड़ लिया और मेरे होंठों को चूसने लगी, मेरे गले से लग कर पूरे बदन पर हाथ फ़ेर रही थी।मैंने उसको पकड़ा और उसके मम्मों को धीरे-धीरे दबाने लगा।मुझे उतना अनुभव तो नहीं था. उसकी चूत से दाना थोड़ा सा बाहर को निकल रहा था।मैंने लंड का निशाना बराबर बनाया और सुपारे को छेद पर लगा दिया। मेरे बड़े सुपारे ने उसकी चूत का मुँह पूरा बंद कर दिया था।अब मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरा लंड उसकी नाज़ुक चूत का चुम्मा कर रहा था।तब मैंने उसकी चूत की दोनों फाँकों को अलग किया और मेरा सुपारा छेद में सटा दिया।मेरा लंड लार टपका रहा था.

और इधर आप दोनों तो यहाँ जंगल में नंगा दंगल कर रहे हो।’सब लोग हमें चुदाई में मस्त और व्यस्त देख कर ताली बजाने में लग गए और मुझे शर्म आ गई, मैंने अपनी गर्दन नीचे कर ली।अब सबको पता लग गया था कि मेरे और गुरूजी के अवैध जिस्मानी रिश्ते भी हैं।तभी गुरूजी बोले- ये रत्ना मैडम डर गई थीं कि सांप आ गया तो फिर मुझे इनका डर निकालना पड़ा।‘वाह.

कब से तड़प रही थी!’मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज-तेज चुदाई करने लगा। दस मिनट के बाद उसका बदन ढीला पड़ गया और वो सुस्त हो गई. सनी लियोन बीएफ एचडी फुल30 बज गए थे।थोड़ी देर बाद ने हम दोनों एक दूसरे को कपड़े पहनाये, चूमा, एक फिर भाभी रात में आने का वादा करके चली गई।तो दोस्तो, कैसी लगी अर्चना भाभी के गांड मारने की कहानी? आगे की कहानी अगली बार।प्लीज मेल करके हौंसला- अफजाई करियेगा ताकि आगे भी लिखने के लिए प्रेरित हो सकूँ।[emailprotected]. बीएफ वीडियो सेक्सी आंटीकि सारी जिंदगी मेरे लौड़े को याद रखोगी।उसकी बातों से पूजा की चूत की आग भी अब तेज हो गई थी- अच्छा ये बात है. हम जैसे-तैसे एक-दूसरे का सहारा लेकर बेडरूम में चले गए और उसी नंगी हालत में एक-दूसरे की बांहों में बेड पर सो गए।एक डॉक्टर और एक एचआर इतनी बड़ी चुदक्कड़ और स्ट्रेट फॉर्वर्ड निकलेंगी.

लेकिन मैं सोफे पर लेटी रही और उठ कर देखने नहीं गई।थोड़ी देर के बाद फैजान बुखार की दवा लाया और मुझे पानी के साथ दी। मैंने वो दवा खा ली और बोली- तुम लोग एसी वाले कमरे में सो जाओ आज.

तो अचानक से जाहिरा मेरे कमरे में आ गई, वो अभी भी उसी सुबह वाले ड्रेस में थी।उसे देखते साथ ही एक बार फिर से मेरी आँखें चमक उठीं।मैंने जल्दी से उस फिल्म को बन्द कर दिया। जाहिरा मेरे पास बिस्तर पर आ गई और मेरे पास बैठती हुई बोली।जाहिरा- भाभी क्या देख रही थी लैपटॉप पर?मैं- कुछ नहीं यार. राजू का गधे जैसा लंड बिना किसी परेशानी के मेरी प्यारी पत्नी की कमसिन गांड में अन्दर-बाहर हो रहा था!!!‘आआआआ. क्या बनाना है?फैजान ने मुस्करा कर अपनी बहन की चूचियों की तरफ एक नज़र डाली और फिर बाहर निकलते हुए बोला- कुछ भी मस्त सा आइटम बना लो यार.

देख तेरे अचानक पलटने से बेचारा लौड़ा डर कर मुरझा गया।भाई की बात सुनकर मैं घबरा गई कि कहीं इनको पता तो नहीं लग गया कि मैं जाग रही हूँ।मैं बस सोच ही रही थी कि सामने सीन बदल गया। एक छोटी लड़की कमरे में बैठी अपनी पैन्टी के ऊपर से चूत को रगड़ रही थी. तो मुझे ऐसे ही खूब मज़ा आता।तभी सुनील रुक गया और बिट्टू को इशारा किया।बिट्टू नीचे लेट गया मुझे ऊपर आने का इशारा किया।उसका लण्ड छत की तरफ सीधा खड़ा था मैं दोनों तरफ पैर कर उसके लौड़े पर बैठने लगी।‘अह्ह्ह्ह्ह. जब मैं कॉलेज में पढ़ाया करता था, नया-नया शौक आया था, उसी साल मेरे जैसी ही एक लड़की ने भी पढ़ाना शुरू किया.

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उधर काफ़ी लड़कियाँ रिश्तेदारी में थीं, वहाँ मैंने भाई की रिश्तेदारी में एक साली को चोद दिया।यही मेरी कहानी है जिसका आनन्द लीजिए. शायद आप सभी लोगों को पसंद आए।मेरा नाम बिट्टू है और चाची का नाम शीला है।बात तब की है जब मेरे चाचा की नई नई शादी हुई थी, उसके दो सालों के बाद मैं अपने चाचा के पास रहने लगा, मेरी और चाची की बहुत बनती थी। मेरी उम्र अब 18 साल हो चुकी थी।एक बार रात को मेरी नींद खुली. अमित धीरे-धीरे अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख कर सहलाने लगा।रात की चुदाई देखकर मेरा भी शरीर गर्म हो गया था और चूत में खुजली होने लगी थी इसलिए मैंने उसे बिलकुल भी नहीं रोका।अमित- हाँ दीदी.

मेरे हाथ अब जाहिरा की छोटी-छोटी चूचियों पर पहुँच चुके थे और मैं उसकी चूचियों को उसकी नाईटी के ऊपर से ही सहला रही थी और हौले-हौले दबा रही थी।फैजान अभी भी अपनी बहन के होंठों को चूम रहा था.

शायद आप सभी लोगों को पसंद आए।मेरा नाम बिट्टू है और चाची का नाम शीला है।बात तब की है जब मेरे चाचा की नई नई शादी हुई थी, उसके दो सालों के बाद मैं अपने चाचा के पास रहने लगा, मेरी और चाची की बहुत बनती थी। मेरी उम्र अब 18 साल हो चुकी थी।एक बार रात को मेरी नींद खुली.

जिसकी वजह से चूत एकदम चिकनी और लिसलिसी सी लग रही थी।अब मैंने उसे बिस्तर पर लिटा कर उसके पैर नीचे लटका दिए और पैरों के बीच में बैठ गया. और इसे चक्कर में मेरी प्यास बढ़ा देते हो।मैंने हँसते हुए जाहिरा को छोड़ दिया और वो अपनी दूसरी ब्रा पहनने लगी. हिंदी बीएफ सेक्सी बंगालीथोड़ी देर में मैं झड़ गया।जैसे ही मैं बाथरूम के बाहर निकला घंटी बजी और मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने गुड़िया खड़ी थी।सफ़ेद रंग के सलवार सूट में वो एकदम कयामत लग रही थी।उसने बोला- ओ हैलो.

देखते हैं।मैं उसके साथ वाशरूम में गया और छिपकली को हटा दिया लेकिन अब ये मसला लगभग हर दूसरे या तीसरे दिन का हो गया।आखिर एक दिन जब वो मुझसे वो छिपकली हटाने के लिए बोली. वो आया और मुझे मैडम के पास घोड़ी बनाकर मेरी गाण्ड पर ढंग से तेल लगाया।अब मुझे दारू का बहुत तेज नशा हो रहा था और मुझे होश भी नहीं था कि कब मेरी गाण्ड फटी। मैं नशे में इतनी पागल हो चुकी थी कि गाण्ड में से खून निकल रहा था. इतना कह कर उसका पति बहुत ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा।उसकी वाईफ ने ज़ोर-ज़ोर से चुदवाते हुए कहा- ओर ज़ोर से.

उसने सफेद फ्रॉक पहना हुआ था। शरीर से गबरू होने के कारण बहुत ही जानदार लग रही थी। उसका फ्रॉक घुटनों तक आ रहा था. मुझे पता भी नहीं चला, वो धकापेल पेलने लगा और फिर दूसरे ने मुझे गोदी में उठाया और मेरी चूत में अपना हलब्बी डाल दिया।अब मैं चीखने लगी.

ताकि उसका भाई उसकी आवाज़ ना सुन सके।मैंने दोबारा से उसकी गर्दन पर अपनी गरम-गरम साँसें छोड़ते हुए कहा- आज तो तू क़यामत लग रही है।जाहिरा बोली- और भाभी आप तो हर रोज़ और हर वक़्त ही क़यामत लगती हो.

तुम्हारी बहन सोती हुए में कितनी मासूम और खूबसूरत लग रही है।फैजान ने भी अपनी नज़र जाहिरा के चेहरे पर जमा दी और अब बिना मेरी तरफ देखे हुए आहिस्ता आहिस्ता मुझे चोदने लगा।अब मैंने भी अपने मम्मों को फैजान के मुँह में देते हुए जरा तेज आवाज में सीत्कार करना शुरू कर दिया ताकि बगल में लेटी हुई मेरी ननद की बुर में चींटियाँ रेंगने लगें।‘हाय. मैं धीरे से उस कमरे के पास गई और खिड़की से झाँक कर अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गए।पूजा- ऐसा क्या देखा तूने आंटी के कमरे में. ’मैंने और ज़ोर लगाया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुसता चला गया और उसके आँखों में आँसू आ गए थे।मैंने पूछा- क्या बहुत दर्द हो रहा है?तो उसने कहा- नहीं.

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फिर देखना कितना मज़ा आएगा।मैंने सारा प्रोग्राम जाहिरा को समझाया और फिर हम दोनों रसोई में खाना बनाने के लिए आ गए।जैसे ही दोपहर में फैजान घर वापिस आया तो सबसे पहले मैंने उसे वेलकम किया। मैं गेट पर हस्बे मामूल. इसके बाद उसे पकड़ लूँगा तो मैं जीत जाऊँगा।फैजान ने आहिस्ता आहिस्ता उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया और शायद वो अपनी उंगलियों से जाहिरा के निप्पलों को भी मसल रहा था।मैं फैजान के पीछे से उसके थोड़ा क़रीब गई. तभी मैंने देखा कि फैजान ने अपना हाथ मेरे ऊपर से होता हुआ जाहिरा की नंगी बाज़ू के ऊपर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी बाज़ू को सहलाने लगा।मेरी पीठ फैजान की तरफ ही थी.

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मैं अभी डाल कर लाई।मैं उन दोनों बहन-भाई के दरम्यान से उठ गई और फिर रसोई में आ गई।वहाँ से मैंने देखा कि फैजान ने थोड़ा सा सरकते हुए जाहिरा के कन्धों पर गर्दन से पीछे बाज़ू डाल कर अपना हाथ रखा और फिर उसके कन्धों को सहलाते हुए बोला- और सुनाओ जाहिरा. मुझे तो मानो करेंट सा लग गया हो।जैसे फिर धीरे-धीरे मैं अपने हाथ को और दबाते हुए उसकी नरम-नरम चूचियों को महसूस करने लगा।हम दोनों रिश्ते में एक तरह से भाई-बहन थे. जिससे उसकी दोनों चूचियों बिल्कुल जैसे बाहर को निकलते हुए उसके भाई को नज़र आने लगीं।जाहिरा ने एक नज़र उठा कर उसी हालत में ही अपने भाई को देखा और कटीली अदा से मुस्करा कर सीधी होकर बैठ गई।मैं उन दोनों की हरकतों को नजरंदाज कर रही थी.

तो मैंने उसके पीछे बैठने की बजाए अपने प्रोग्राम के मुताबिक़ जाहिरा को कहा कि वो अपने भाई के पीछे बैठे।जाहिरा को अंदाज़ा नहीं था कि मैं क्या सोच रही हूँ. मैं क्यों बीच में रुकावट बनती।हम दोनों हँसने लगे और फिर चाय बना कर रसोई से बाहर आ गए और हम तीनों चाय उसी बेडरूम में बैठ कर पीने लगे।उस रात जब हम लोग सोने के लिए लेटे.

फर्स्ट इयर से ही मैं तुम्हें अपना बनाने के लिए तड़प रही थी और पूरी क्लास में सिर्फ तुम ही सबसे हेंडसम हो। आज मेरी मन्नत पूरी हो गई, तुमने मुझे जो सुख दिया.

जम कर चुदाई करने के बाद मैंने सारा रस उसकी चूत में भरा और शान्त होकर उसके बगल में लेट गया।मैं- बोलो मीरा कैसा लगा. कुछ देर वैसे करने के बाद हम दोनों ने पोज़ बदल-बदल कर उस रात चार राउंड चोदन किया। मतलब चार बार हम दोनों डिसचार्ज हुए और फिर थक कर लेट गए. उसने उसी हालत मे मेरी गोटियाँ अपने हाथ में पीछे से पकड़ लीं और गुस्साते हुए कहा- इस तरह से मेरी जाँघों पर अपना वीर्य गिरा कर तुमने बड़ी ग़लती कर दी है.

मुझसे छूटना चाह रही थी। मैंने उसे नहीं छोड़ा और 10 मिनट तक भयंकर चुदाई की।आख़िर मैं उसकी गाण्ड में ही छूट गया।वो दर्द से कराह तो रही थी. मैं और दिव्या मेंढक के पप्पू महाराज के दीदार कर रहे थे।तभी दिव्या ने कहा- इतने से लण्ड से क्या करता होगा मेंढक?मेरे मुँह से निकल पड़ा- उसकी मेंढकी से जा कर पूछ. तो उस वक़्त जाहिरा ने अपना हाथ फैजान के लंड पर रख दिया हुआ था।फैजान के तो जैसे होश ही उड़ गए, उसने जल्दी से उसे प्यार किया और उसे बाथरूम की तरफ धकेला।मैंने आवाज़ दी- फैजान क्या कर रहे हो.

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बीएफ फिल्म सेक्स हिंदी में: यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !कोमल ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। अब उसके नरम-नरम होंठों के बीच मेरा लंड फंसा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ ही देर में उसने मेरा रस निकाल दिया और खुद कोमल ने उसे चाट कर साफ कर दिया।अब हम एक-दूसरे को किस कर रहे थे और कोमल का हाथ मेरे लंड को सहला रहा था। इससे मेरा लंड जल्दी ही कड़क हो गया. क्योंकि उसे पता था कि मैं उसकी बात नहीं मानूँगी।मैंने उसके लण्ड को उसकी पैन्ट की ज़िप के रास्ते बाहर निकाला और अब सिनेमा हाल में अपनी बीवी और बहन के दरम्यान में बैठे हुए फैजान का लंड बिल्कुल नंगा हो चुका था।फैजान के नंगे लंड को मैंने अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी।धीरे-धीरे उसका लंड और भी अकड़ता जा रहा था.

जिसे लोग निभाने की भी कोशिश करते है।इस प्रकार आपने देखा कि चुदाई केवल शारीरिक आनन्द प्राप्त करने का ही साधन नहीं. मैं उसको अपनी जीभ से चाट कर आराम दिए देता हूँ।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मुनिया- अभी नहीं. मैंने मौका देख कर सुहाना की कमर में हाथ डाल दिया और अन्दर चला गया।अन्दर जाकर हम दोनों डान्स करने लगे.

हॉस्टल में रह कर ठीक से पढ़ाई कर सकूँगी।पूजा- तेरे पापा को पता है कि तू उनके राज़ जान गई है?पायल- ये मैं नहीं जानती.

ब्लाउज में एकदम सेक्सी लग रही थीं और उनके बड़े-बड़े मम्मे मुझे उनको छूने को मजबूर कर रहे थे।मैं थोड़ा डरते हुए उनके नज़दीक गया और उनसे कहा- मुझे एक बार अपने मम्मों को हाथ लगा लेने दो. आपको लगता है कि आपको भी इनकी तरह ही मज़ा करने का शौक चढ़ रहा है?मैं आहिस्ता आहिस्ता जाहिरा की नंगी जाँघों पर हाथ फेरते हुए उसके गालों को चूमते हुए बोली- हाँ. पर मेरे ऊपर तो उस वक्त सिर्फ अंजलि की चूत चोदने का भूत सवार था।इतने में मैंने एक शॉट और लगा दिया और पूरा लण्ड चूत के अन्दर कर दिया।मेरा लण्ड उसकी बच्चेदानी तक पहुँच गया और मैं दोनों हाथों से उसके बोबे दबा रहा था।इसी के साथ मेरे होंठ उसके होंठ से मानो चिपक से गए थे।फिर मैंने आधा लण्ड बाहर निकाला और फिर ठोक दिया।मैंने अंजलि से धीरे से पूछा- मजा आया रानी.