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मामी, मैं निकलता हूँ! आपने आज मेरा सपना पूरा कर दिया! अब मैं आप से दोबारा कुछ नहीं मांगूंगा!”नयन भले ही तुम मुझे दोबारा कुछ नहीं मांगो, लेकिन तुमने आज जो ख़ुशी मुझे दी है, अब मैं तुमसे रोज तुम्हारा लंड मांगूंगी! तो फिर नयन कल दोपहर को आओगे ना? मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी. बीएफ फिल्मी रिंगटोन डाउनलोड वीडियो वो पेड़ के पीछे जा कर बोली… ऐसे भी कोई ?!?तो फिर बैठी रहो रात भर यहाँ ! या ऐसे ही कपड़े पहन लो… मैं चला !मैं मुड़ा ही था कि वो बोल पड़ी- अरे सुनो तो….

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अब तक उन्होंने भी मुझे कपड़ों से अलग कर दिया था और मेरे बदन पर सिर्फ मेरा अंडरवियर ही बचा था!तभी उन्होंने अपने नाज़ुक हाथों से मेरे लण्ड को पकडा और उसे सहलाने लगी. सवेरे सात बजे जब नीना की नींद खुली तो उसका बदन में मस्ती समाई हुई थी और मेरे करीब आकर जोरदार चुम्मी लेते हुये मुझे ‘थैंकयू’ बोला. ”झंडे हल्के हाथों से मेरी दोनों जांघें सहलाने लगा। मेरी योनि के बाल उसके हाथ से टकरा रहे थे। इस बार मैंने महसूस किया कि लौड़ा बहकने लग गया था। बार-बार उसके हाथ मेरी जाँघों के बीच की घाटी की गहराई नापने लगते।हाँ, ऐसे ही बेटा, बड़ा ही आराम मिल रहा है….

क्या तो… तू भी… ऐसे ही…?”हाँ पापा… मेरे मन में भी तो इच्छा होती है ना!”देखो तुम भी दुखी, मैं भी दुखी…” मैंने उसके मन की बात समझ ली… उसे भी चुदाई चाहिये थी… पर किससे चुदाती… बदनाम हो जाती… कहीं???… कहीं इसे मुझसे चुदना तो नहीं है… नहीं… नहीं… मैं तो इसका बाप की तरह हूँ… छी:… पर मन के किसी कोने में एक हूक उठ रही थी कि इसे चुदना ही है. मैंने उसे सोफे के किनारे पर पैर लटका कर बिठाया और मैं नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया. ’ कहते हुए उसने मेरी गांड में अपना 18 साल का जवान लंड चीरता हुआ अन्दर तक घुसा दिया। मैं चीख उठी। उसने फिर गांड फाड़ देने वाला धक्का लगाया। मैं फिर चीख उठी। उसके धक्के बढ़ते गए। मैं चीखती रह गई.

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मैंने देखा कि उसकी आँखें बंद हैं तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा और अपने होंठों को उसके होंठ पर और जोर से धक्का दिया, लंड थोड़ा सा ही अन्दर गया, वो तड़प उठी और मुझे धक्का देने लगी मगर मैंने उसको पकड़ कर रखा था. मैंने राजू का लंड तैयार करते हुए उससे कहा,’चलो राजू तुम अपना अधूरा काम पूरा करो !’मेरी बात सुनते ही राजू हँसते हुए मेरे पीछे आ गया और बोला ‘क्यों नहीं मैडम अभी लो !!’अब सब लोगों ने अपनी अपनी पोज़िशन ले ली.

तो दिमाग इस ओर गया ही नहीं कि वह अपनी चूत का स्वाद बदलने के चक्कर में भी हो सकती है.

कुछ देर के बाद ज्योति योगी के कमरे में आई और बोली- आज मैं कॉलेज से कुछ देर से वापिस आऊँगी!पूछने पर उसने बताया कि करीब 11 बजे तक आएगी क्योंकि उसके एक दोस्त का जन्मदिन है और कॉलेज से सीधा ही डिस्को निकल जायेंगे.

मैंने उसको उठाया, न जाने मुझे क्या सूझी कि मैं जांघिए में वो जगह देखने लगी जहाँ लण्ड छुपा होता है. मौसी किसी को बुलाओ न ! किसी को भी अभी बुला दो चुदवा दो मुझे …मौसी : इबजा कोई नी आवैगा ए ऐसे छोरी … इब तनै बेरा लागया ना के यो छेद नी, शैतान की नलकी है … घणे गंदे काम करवावै सै यो … इन्ना गोल गोल बोब्बों नै चूस चूस कर इतने बड़े बना दयूंगी तेरे ब्याह सा पैल्लाँ ई … लौंडों को बड़े पसंद आवे हैं !मैं : मौसी कुछ कर ना !मौसी :. मैंने जल्दी से ब्रा को बिना खोले ऊपर की तरफ़ उठा दिया, वो सोफे पर पीछे झुक गई जिससे उसके फूले हुए गदराये स्तन और उभर आए थे। मैंने उसकी चूची पर चूमा और उसके मुँह सेसी.

वो मेरा इशारा समझ गई और कहा- तुम किसकी बात कर रहे हो?तो मैंने कहा- तुम मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड बन सकती हो?मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. !हम दोनों अपनी मस्ती में जोरदार चुदाई का आनन्द ले रहे थे लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मन्जूर था…अभी चुदाई चल ही रही थी कि मुझे किसी के होने का अहसास हुआ… !अभी आगे और भी है उसे भी किसी दिन ज़रूर सुनाऊँगा।दोस्तो कैसी लगी मेरी आपबीती? जरूर बताइएगा !. ‘ रोहित… मत मार मुझे… बहन चोद… कुत्ते… अपनी माँ को मारना घर जा कर उसकी गांड की छिताई करना मैं गलियाँदेती हुई घोड़ी बन गई। उसने मेरे चूतड की दोनों फांकों को चीरते हुए… अपने लंड की सुपारी गांड के छेद में टिका दी…‘ले कुतिया… अब तेरी गांड की माँ चोद दूंगा.

निकला। फिर मैंने उसकी नाक पर फीता रख कर नाप लिया। इस दौरान मैं उसके गाल छूने से बाज नहीं आया। काश्मीरी सेब हों जैसे। उसकी नाक का नाप भी 7 से.

ओफ़ सच्ची, बहुत गरम चूत है! उफ़ कितनी चिकनी है छोटी सी चूत! सच्ची बहुत तरसी हूँ इस प्यारी चूत के लिये मैं! दे दो न प्लीज अलीशा ये हसीन छोटी सी चूत मुझे!हाय कामिनी! मैं जल रही हूँ! प्लीज! आह! मैं क्या करूँ!मेरा पूरा जिस्म सुलग रहा था और मैंने कामिनी के नरम-गरम चूतड़ खूब दबाए और जब एकदम से उसकी चूत पर हाथ रखा तो वो तड़प उठी- ऊ. !मैं यंत्रचालित सा उनके चूत की ओर झुकता चला गया। पहली बार चूत की मादक खुशबू मुझे मदहोश कर दे रही थी।मैं कस कर उनकी चूत को चूसते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और जाने कब मेरा हाथ उनकी गांड के बीच की घाटी में घुस गया।वो सिसकने लगी और मुझ पर झुकती हुई मेरे गांड को सहलाने लगी। उनके हाथ लगाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने एक उंगली उनकी गांड के छेद में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा।वो सी. उन्होंने भी अपना कड़कता लण्ड बाहर निकाल लिया और एक दो बार मुठ मार कर अपना वीर्य पिचकारी के रूप में बाहर छोड़ दिया.

तो वो बोली- निकालो-निकालो! मैं मर जाऊँगी…तो मैंने कहा- चाँदनी, जब सब हो गया तो अब निकालने का क्या मतलब, अब तो तुम वो फिल्म वाली जैसे मज़े लो!और मैंने उठ कर उसको उसकी चूत में घुसा मेरा लौड़ा दिखाया तो उसको विश्वास नहीं हुआ कि मेरा पूरा का पूरा लौड़ा घुस चुका है. ईईईईईईईईईई !”उसने 4-5 धक्के ज़ोर ज़ोर से लगाए और फिर मेरी गाण्ड के अंदर ही उसकी पिचकारियाँ फूटने लगी. !!!एक और आवाज़ आई- और अगर छू भी रहे हैं जनाब, तो मसल डालियेगा! और हाँ! जिस्म का कोई अंग ना रहने पाए.

हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी.

बीस पच्चीस मिनट एक दूसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद मैं किचन में दोपहर का खाना बनाने चली आई और देवर गेस्ट-रूम ठीक ठाक कर नहाने के बाद जाने के लिये तैयार हो गया. ऑटो चलते समय भी वो किसी के ऑटो के एकदम सामने आ जाने पर माँ-बहन की गालियाँ दिया करता था.

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तभी उसके मित्र ने मेरी कमर कस कर थाम ली और मुझे एक और लण्ड मेरी गाण्ड के छेद को फ़ोड़ता हुआ अन्दर घुस गया.

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मम्मी ने कहा- बहन जी, मेहरबानी कैसी? यह भी तो आपके बेटे जैसा है!मम्मी ने मुझे आवाज़ लगाई, कहा- हैरी, तुम आंटी के घर जा कर सो जाया करो कुछ दिन! आंटी की तबीयत ठीक नहीं है. गले से क्या लगाया, सबने अपनी छाती से मेरे चूचों को दबाया…मैं समझ गई कि ये सभी ठरकी हैं, अगर किसी को भी लाइन दूँगी तो झट से मुझे चोद देगा।मैं खुश हो गई कि कहाँ एक लौड़ा मांग रही थी और कहाँ चार-चार लौड़े आ गये…पापा उनके साथ अन्दर बैठे थे और मैं चाय लेकर गई… जैसे ही मैं चाय रखने के लिए झुकी तो साथ ही बैठे राठौड़ अंकल ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा- कोमल बेटी. नयन, आऽऽऽऽ आआआऽऽऽ बहुत दर्द हो रहा है नयन…!”अब लंड आधा अन्दर जा चुका था और मामी अब गांड आगे खींचने लगी थी.

अब विपुल ने मुझे चूतड़ों के बल लेटा दिया और अपना फनफनाता लौड़ा लेकर मेरे ऊपर चढ़ गए और कहने लगे- अब नीविया लगाकर इसको चिकना कर दे. पर बहादुर अब थोड़ा संभल चुका था, वह रीटा को लाहपरवाह समझ हाथ निकालते निकालते रीटा के ठोस स्तन को भींच कर खींच सा दिया. उनकी चूत से पानी निकल रहा था, मैंने अपनी जीभ से चूत को साफ़ किया और जीभ से चोदने लगा.

लेकिन उस सख्ती में एक मुलामियत का अहसास था… मैंने उन्हें दबाते हुए मेरी जीभ उसकी नाभि पर गोलाई में घुमाना शुरू किया.

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देखो ऑफ़िस के बाद जरूर आना, मैं इन्तज़ार करूंगी!” राधा ने अपनी विशिष्ठ शैली से इतरा कर कहा. उसकी अण्डरवीयर शायद ठीक नहीं थी सो उसने उतार कर पेशाब किया और सिर्फ़ अपनी सफ़ेद निकर को ढीली करके बिस्तर पर लेट गया.

बीच बीच में वो बोबों को भी मसल देता, चुचूक तो इतनी घायल हो चुकी थी कि अगर मेरा बच्चा भी होता तो छः महीने में उसको दूध नहीं पिला पाती. एक लड़का जो थोड़ा शर्मीला था उसका चरित्र अपनी फ़ुफ़ेरी बहन और सगी बहन के साथ सेक्स करने के बाद बदल चुका था क्योंकि जिस बहन की वो इज्जत करता था वो बहन अब उसकी तथाकथित बन चुकी थी. मैंने मुकेश से कहा- अब तू चला जा!मुकेश ने मेरे आठ-दस कस कर चुम्बन लिए और उठ खड़ा हुआ.

गन्दा लगता है !रोहित : वाह चटवाने में गन्दा नहीं लगा ? अब चूसने में गन्दा लगता है ? … चूसोमुझे रोहित का यह बर्ताव ठीक नहीं लगा ! वो जबरदस्ती सी कर रहा था !उसने मेरे मुँह में अपना लण्ड डाला, मेरे बालों को पकड़ा और चुसवाने लगा !मेरी आँखों से आंसू निकल आए.

बहादुर रीटा के सामने बैठा तो शरारती रीटा ने अपना अपने नन्हे नन्हे सुडौल और सुन्दर पैर बहादुर की गोदी में रख दिये. जानने के लिए पढ़ते रहें राजा का फरमान” कई भागों में समाप्त…!मुझे अपनी प्रतिक्रियाएँ[emailprotected]पर भेंजें!इन्स्टाग्राम : Vrinda_venusकहानी का अगला भाग:राजा का फ़रमान-2. मैं वहीं तान्या का इन्तजार करने लगा, कुछ ही देर में तान्या एक नीले रंग की नाइटी पहन कर मेरे सामने आई, उस नाइटी में तान्या क़यामत लग रही थी और वो क़यामत मेरे ऊपर क़यामत गिरा रही थी.

भोसड़ी के अबे … दर्द हो रहा है इसे निकालो मेरी गांड फट जायेगी बहुत दर्द हो रहा है…. आंटी जोर से बोली- सागर, निकालो इसको! दर्द हो रहा है!मैंने कहा- अब मजा भी आएगा!और मैं जोर-जोर से लंड को उसकी गांड में ठोके जा रहा था.

पर यह बात उसके पति से कौन पूछे? बिल्ली के गले में घण्टी कौन बांधे?तो फिर वो ठीक कैसे होगा?फिर मैं रात का छबीली को चोदने की योजना बनाने लग गया था. मैंने चुपचाप उनको अन्दर आने को कहा तो वो अन्दर आ कर सोफे पर बैठ गई, मैं भी वहीं नज़रें नीची करके बैठ गया. रीटा को बहादुर का सूखा घस्सा बहुत ही प्यारा लगा और जवाब में रीटा ने भी अपनी शानदार गाण्ड को थोड़ा सा पीछे उचका कर बहादुर के खड़े लण्ड को गुदगुदा दिया.

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पापा मम्मी और विशाल दो दिन के लिए नानाजी स मिलने चले गए और घर में चिंकी और मैं अकेले रह गए. बोरीवली स्टेशन पर उतरने के बाद वो लोग ऑटो में चले गए, मैं उन्हें जाता देखता रहा पर अफ़सोस अनु से मैं उसका फोन नंबर नहीं ले पाया. वो पहली बार चुद रही थी इसलिए मैंने उसकी चूत में आराम से अपना लंड डाला। थोड़ा अन्दर जाने के बाद वो चिल्लाई- रोहित, निकालो इसे ! मुझे दर्द हो रहा है !मैं बोला- थोड़ी देर बाद अच्छा लगेगा…थोड़ा सहन कर लो इसे…वो बोली- ठीक है…फिर मैंने चुदाई चालू रखी… थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा और वो बोली- रोहित, और तेज़ चोदो ! फाड़ दो मेरी चूत को…मैंने और तेज़ चोदना शुरू किया। थोड़ी देर में वो झड़ गई.

उस दिन तो डर के मारे सिकुड़ गया था पर आज नरम नरम चूतड़ो का स्पर्श पा कर, चूत की खुशबू पा कर कैसा फ़ड़फ़ड़ाने लग गया था. तेज और तेज कहते कहते उसने मेरा सर अपने मोमों पर जोर से दबा दिया और अपनी टाँगें मेरी कमर पर कस ली और नीचे से उछल उछल कर धक्के लगाने लगी. सेक्सी भाभी की गांड की चुदाईअब अक्सर यह संयोग होने लगा कि मेरे कॉलेज से निकलने के समय अमित अंकल उधर से गुजरते और मुझे साथ ले लेते.

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अब वो मेरे पास आ गया और बोला- भाभी, कैसा लग रहा है? मुझे तो बहुत मजा आ रहा है भाभी!और वो जोर-जोर से दबाने लगा. ’मुझे लंड चूसने में मज़ा आ रहा था इसी बीच में दीपू ने भी अपने कपड़े खोल दिए और मेरे पास आ कर मुझे चूसते हुए देखने लगा. आपनी प्यास बुझा लो आज !”मैं लगातार धक्के पर धक्का लगाये जा रहा था और मेरा लण्ड उनकी बच्चेदानी से टकरा रहा था और आंटी के मुख से अजीब अजीब आवाजें आ रही थी। उनकी सीत्कारों से पूरा कमरा भर गया था,”आई लव यू मेरे राजा…… आज मैंने खुद को तुम्हारे हवाले कर दिया है…… फाड़ डाल मेरी चूत को……कीमा बना दे इसका…… बहुत सालों से इसकी प्यास नहीं बुझी……आज बुझा इसकी प्यास….

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मैंने अपने लौड़े पर क्रीम लगाई और कहा- सोना, घोड़ी बन जाओ… क्रीम लगा दूँ!’ सोनू मुस्करा कर झुक गई. वो बार-बार मेरे चुचूकों को काट रहा था उसकी यह हरकत मुझे बेचैन करने लगी मेरे स्तनाग्र सख्त होने लगे और उसका असर चूत पर भी होने लगा.

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बात उस समय की है जब मैं बारहवीं की परीक्षा पास करके अपने गाँव वापस आया।शहर में रहकर मैं बहुत बिगड़ गया था और चूत का आशिक बन गया था क्योंकि मैंने सुना था कि सांप और चूत जहाँ दिखे वहीं मार देनी चाहिए. मैंने कहा- आज मेरी प्यारी बहना औरत बन गई है! आज से तू मेरी रंडी है, मेरा जब दिल करेगा, मैं तुझे चोदूँगा मेरी रांड! आःह्ह! क्या मजा आ राहा है बहन को चोद कर!मुझे नहीं पता कि मैं क्या-क्या बोल रहा था, पर मैंने झटकों की रफ्तार थोड़ी कम कर दी. तुम हो ना मेरे बॉय फ्रेंड… क्यों क्या नहीं हो?अँधेरा हो चुका था। मैंने अँधेरे में ही सोनिया का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा तो सोनिया एकदम से मेरी बाहों में आ गई। मैंने सोनिया का चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर अपनी तरफ किया और चूमने की कोशिश की तो सोनिया एकदम से मुझ से छुट कर भाग गई.

मैंने सोचा कि मुकेश ऐसे नहीं मानेगा, मैंने उसको जोर से धक्का दिया और नीचे गिरा दिया, अब मैं उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत को उसके लौड़े पर टिका अन्दर घुसा लिया. ब्रा और पेंटी में मदमस्त नीना की इस अदा पर अमित का लंड कुछ ऐसे जोर मारने लगा, जैसे हरी घास देखकर सांड फुफकारने लगता है. सिंगापुर की सेक्सी वीडियोफिर मैंने दीदी की नाइटी उतार दी और ब्रा के ऊपर से ही उनके चूचे मसलने लगा जिससे दीदी मचल उठी.

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फिर धीरे से झुक कर अपनी जीभ को तिकोना बना कर मेरी गाण्ड के छिद्र को चाट लिया, फिर जीभ से मेरे छेद पर गुदगुदी करती रही. उसके बाद शादी की वजह से मैं और दीदी दो दिनों तक सही से एक-दूसरे से बात भी नहीं कर पाये. मेरी आँखें अब भी बंद थी…वो दोनों मुझसे प्यार का भरपूर का मजा ले रहे थे…यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।कभी अनिल मेरे होंठ चूसता तो कभी सुनील.

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मैंने अपने रहे सहे कपड़े भी उतार दिए और पूरा नंगा होकर उनके सामने खड़ा हो गया और अपने हाथ उनके टॉप में डाल कर स्तनों पर रख दिए. मैं बरामदे का दरवाजा बन्दकर गहरी सोच में डूब कर खड़ी हो गई कि अब तो कल की तरह चुदवाना भी मुश्किल हो गया है…तभी देवर मेरे बेडरूम की खिड़की से इशारा कर मेरा ध्यान हटाया और मैं उसके पास चली गई. वो १८ साल का एक सुंदर लड़का था, लंबा भी था, और हमेशा मुझे देख कर मुस्कुराता था, बल्कि खुश होता था.

मैं स्पीड में उसकी चूत में अपने लण्ड को अन्दर-बाहर कर रहा था…मेरा फिर होने वाला था, मैंने उसकी चूत में से अपना लौड़ निकाला और उसकी चूचियों पर झार दिया…फिर मैंने उसके बदन पर अपना वीर्य-रगड़ दिया, पूरी मालिश कर दी. आखिर आईसक्रीम ख़त्म हो गई और हम ठीक से बैठ गये।मैंने उसको कहा- विकास, मैं तुम को कैसी लगती हूँ?उसने कहा- बहुत अच्छी !तो मैंने पूछा- कितनी अच्छी?उसने फिर कहा- बहुत अच्छी ! भाभी…फिर मैंने कहा- मेरी एक बात मानोगे. वो मेरे ऊपर आ गया और मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पे रख दिया इससे मेरी बुर उसे साफ साफ दिखाई दे रही थी…फ़िर उसने मेरी बुर पे अपना लण्ड लगाया और एक ही झटके में जोर से पूरा अंदर डाल दिया… मैं लगातार सीत्कार कर रही थी आह.

मैंने पापा की ब्रा के हुक पीछे से लगाए। पापा के स्तन इतने सही थे कि उन्हें कुछ भरने की जरूरत नहीं थी। फिर एक ब्लाउज पहनी, इसके बाद इतनी सफाई से उन्होंने साड़ी पहनी कि कोई कहे नहीं कि ये मेरी मम्मी नहीं मेरे पापा हैं।इसके बाद पापा ने मुझे पैंटी पहनाई। एक बहुत ही छोटी साइज़ की ब्रा निकली और कस कर पहना दी। मैं बहुत पतला दुबला हूँ. मेरा लंडा मस्त तन कर खड़ा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैं उठ कर टॉयलेट में चला गया और वहाँ मुठ मारने लगा।इस बात का पता भाभी को चल गया तो उसने तुरंत दरवाजे पर दस्तक दी. मेरे बुर से रस की धार बह रही थी! न जाने क्या हो गया था मुझे … काश सर मान गए होते! मुझे भी चुदने का पागलपन हो गया था … बावली हो गई थी.

मैं जंगली बिल्ली की तरह अब उसे नोचने लगी थी… उसने मेरी चूत को छोड़ा और खड़े होकर मेरी चूत में लण्ड फ़ंसाने लगा… लंड घुस तो गया था पर. वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो ! बाहर करो ! मैं नहीं सह पाऊँगी !पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कविता की कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया……वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में कविता को भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो….

मुझे पता था कि यह तुम लोगो का ही काम है। मैंने पिछली बार गांड मराई थी तब तुम्हारे चाची और दादी को बताया था.

वो इस काम का मास्टर लग रहा था, पहले से ही मुझे अपने सिकंजे में जकड़ रखा था और मेरे होंठ अपने होंठों में दबा रखे थे. देसी देसी सेक्सी वीडियो देसी”तू नहीं और सही… पापा प्यार की मारी औरतें तो बहुत हैं…”चल छोड़!!! अब आराम कर ले… अभी तो उसे आने में एक घण्टा है…चल लाईट बंद कर दे!”एक बात कहूँ पापा, आपका बेटा तो मुझे घास ही नहीं डालता है… वो भी मेरे साथ ऐसे ही करता है!” कोमल ने दुखी मन से कहा. सेक्सी मौसी मौसी” कहते हुए ठन्डे ने एक ऊँगली दुल्हन के अन्दर कर दी।दुल्हन मारे दर्द के कराह उठी,”हाय राम, मर गई मैं तो…. और वाशरूम जाकर मुँह धोया और वापिस आ गए…जब हम वापिस आए तो मेरी गर्लफ्रेंड मिली और बोली- कहाँ रह गए थे तुम.

उस लड़की ने पूछा- बताईये क्या काम है?मैंने जवाब दिया- दीदी मैं सिंह अंकल के यहाँ रहता हूँ और आंटी ने अपना एक पैकिट लेने के लिए यहाँ भेजा है!उसने कहा- मैं जानती हूँ, मैंने कई बार तुमको अंकल और आंटी के साथ देखा है.

वैसे तो यह आम सी बात है और बहुतों की जिंदगी आपसी समझ की कमी से कुछ इसी तरह की हो जाती है और अलगाव बढ़ जाता है. आँखों में चमक… शरारत भरी कातिलाना मुस्कान से वो अपनी कक्षा की कई लड़कियों के दिलों पर राज करने लगा…यहाँ तक कि हमारे अलग होने की खबर के कुछ ही महीनों बाद उसे एक लड़की ने एक प्रेम पत्र लिखा. मुझे लगा कि अब मेरी लण्ड का पानी निकलने वाला है तो मैं और जोर जोर से आंटी को पेलने लगा.

मैंने भी अपने दिमाग में सोचा कि भाभी भी जयपुर में हैं, उनसे भी मिल आऊँगा और क्या पता इस बार उन्हें फिर से चोदने का मौका ही मिल जाए. वो मछली की तरह छटपटा रही थी- आ आह ऊ उई ईई ईई म्म म्म म्मह की आवाजों से कमरा गूंज रहा था. आते ही वो भी मुझ पर टूट पड़े और मेरी गाण्ड, चूचियाँ, जांघों को जोर जोर से मसलने लगे और मेरे होंठों का रसपान करने लगे, वो मेरी कमीज़ को ऊपर उठा कर मेरे दोनों निप्पल को मुँह में डाल कर चूसने लगे।मैं भी उनके सर के बालों को सहलाने लगी.

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रात के करीब 11 बजे मुझे मेरी बहन ने उठाया और कहा- खाना खा लो!मैं उठा और हाथ मुँह धोकर खाने के लिए मेज़ पर गया, वहाँ अनीता दीदी भी बैठी थी. जबकि माँ का अस्तित्व भ्रूण के बनने से लेकर आजीवन रहता है…मैं अपने मन के द्वंद्व में खो गई थी. मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?वो कहने लगी- तुम बहुत गंदे हो! मैंने मना किया फिर भी पीछे डाल दिया.

‘अरे बस करो ना…’‘बस क्यों भाभी जी, आपने रात को तो बुलाया ही था ना… फिर अब चुदो!’‘हाय मैं मर गई, मैं तो चुद गई, गुड्डू चल चढ़ जा मेरे ऊपर और तू बण्टी मेरी पीछे की मार दे…’रंगीले सोच के कारण हमारी चूतें तो वैसे ही लण्ड लेने के लिये फ़ड़फ़ड़ा रही थी.

मेरी ब्रा के ऊपर से ही वो मेरे मम्मों को मसलने लगा और फिर ब्रा को ऊपर कर दिया। अब मेरे मोटे मोटे स्तन उसके मुँह के सामने तने हुए हिल रहे थे.

!!!राजा : ठीक है छू लो!! आखिर ग्राहक को भी पता होना चाहिए कि जिस चीज की वो कीमत दे रहा है वो असल में क्या है और कैसा है. हरामी रीटा मासूमीयत से बोली- बहादुर, मुझे अकेले जाते तो बहुत डर लगता है, तुम साथ आ जाओ नाऽऽऽ!यह सुन कर ठरकी बहादुर के लण्ड की बांछें खिल गई और वह रीटा के पीछे कुते सा दुम हिलाता चल पड़ा. मराठी सेक्सी स्टोरीज्अमित करीब पचास साल के 5 फुट 10 इंच लम्बे हृष्ट-पुष्ट व्यक्ति थे, बालों से भरा उनका सीना उनसे लिपट जाने की दावत दे रहा था.

वो भीग कर और भी सेक्सी हो गई थी, उसके कपड़े शरीर से चिपक कर उसको और भी सेक्सी बना रहे थे. वो हाल में आगबबूला हो मेरा इन्तजार कर रहा था… उसकी अधीरता उसके एक दिशा से दूसरी दिशा तक चलने से पता लग रही थी…. सच भाभी…” कहते हुये वो लगातर दो-तीन मिनट तक मेरे गालों, होठों, माथे और आँखों को चूमता रहा जिससे मैं भी रोमांचित हो गई और उसी तरह उसको भी चूमने के बाद उसको समझा कर उसके कमरे में भेजा और बाथरूम से फ़ारिग होकर मैं बेड पर लेटी, अपनी आखें बन्द कर देवर के साथ लिये मज़े को कैद करती चली गई.

ही निकला।फिर मैंने कहा, तुम्हारी मध्यमा (बीच की) उँगली मापो। जब उसने नापी तो वह 9 से. फिर मैंने धीरे से अपना लंड-बाहर किया और फिर अंदर करने लग गया, और यही धीरे धीरे करता रहा.

उसने शरमाते हुए सर झुकाया और अपनी चूत को हाथों से ढक लिया। उसकी गुलाबी चूत मुझ से कुछ इंच दूर थी, मैंने धीरे से उसके हाथ हटाये और चूत पर मेरे होंठ रख दिए.

मैं खुश था कि मैंने ऐसी लड़की चोद दी जिसकी चूत में अभी तो अच्छी तरह बाल भी नहीं आए हैं और कल यह खुद से गाण्ड भी मरवाएगी. मेरा नाम सोनिया जैन है, 26 साल की हूँ, मेरा एक भाई है, वो मुझसे दो साल बड़ा है।बात उन दिनों की है जब मैं 18 साल की थी, तब मुझे सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं पता था, मुझे सेक्स की बातों से भी डर लगता था।एक दिन मैं भैया की अलमारी में कुछ ढूँढ रही थी, मुझे वहाँ से कुछ सी. मैं अपने दोनों स्तनों को साथ में जोड़ कर उनके सामने बैठी थी और वो अपनी गाण्ड को ऊपर नीचे करके मेरे स्तनों को ऐसे चोद रहे थे जैसे चूत में लण्ड अन्दर-बाहर करते हैं.

अमेरिका सेक्सी वीडियो दिखाइए मैं अन्दर चली गई और सोफे पर बैठ गई। सुनील कोल्ड ड्रिंक लेकर आया, हम कोल्ड ड्रिंक पीते हुए आपस में बातें कर रहे थे।अनिल मेरा साथ बैठा था और सुनील मेरे सामने। वो दोनों घुमा फिरा कर बात मेरी सुन्दरता की करते।अनिल ने कहा- भाभी, आप बहुत सुन्दर हो, जब आप बस में आई थी तो मैं आपको देखता ही रह गया था. यहाँ तो दो दो है… पर दो क्यूँ…? राजेश अंकल आ गये थे, उनका मोटा सा लटका हुआ लण्ड देख कर तो मैं भी हैरत में पड़ गया.

फिर उसने कहा- क्या तुम और पैसे कमाना चाहते हो?तो मैंने हाँ में सर हिला दिया तो उसने एक पेपर पर दो मोबाइल नंबर लिख कर दिए और कहा- ये मेरी ऑफिस की सहेलियाँ हैं. मेरी आँखें बंद थी, इस वकत सुनील पता नहीं क्या कर रहा था मगर उसने अभी तक मुझे नहीं छुआ था. गले से क्या लगाया, सबने अपनी छाती से मेरे चूचों को दबाया…मैं समझ गई कि ये सभी ठरकी हैं, अगर किसी को भी लाइन दूँगी तो झट से मुझे चोद देगा।मैं खुश हो गई कि कहाँ एक लौड़ा मांग रही थी और कहाँ चार-चार लौड़े आ गये…पापा उनके साथ अन्दर बैठे थे और मैं चाय लेकर गई… जैसे ही मैं चाय रखने के लिए झुकी तो साथ ही बैठे राठौड़ अंकल ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा- कोमल बेटी.

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क्या तो… तू भी… ऐसे ही…?”हाँ पापा… मेरे मन में भी तो इच्छा होती है ना!”देखो तुम भी दुखी, मैं भी दुखी…” मैंने उसके मन की बात समझ ली… उसे भी चुदाई चाहिये थी… पर किससे चुदाती… बदनाम हो जाती… कहीं???… कहीं इसे मुझसे चुदना तो नहीं है… नहीं… नहीं… मैं तो इसका बाप की तरह हूँ… छी:… पर मन के किसी कोने में एक हूक उठ रही थी कि इसे चुदना ही है. फिर धीरे से वो मेरे और करीब आया…उसने अपने दूसरे हाथ की उंगलियों से मेरे होंठों तक आती जुल्फों को मेरे कान के पीछे कर दिया. हुम्म… आह!फिर मैंने उन्हें सोफे पर ही लिटा दिया और उनके पूरे शरीर को दबोचने लगा। चाची भी पूरे जोश में थी और मेरे बालों में तो कभी मेरे हाथों को सहलाती। अब चाची चुदने के लिये बिल्कुल तैयार हो चुकी थी, वो ऐसे तड़प रही थी जैसे सालों से भूखी हों।मैं उनकी नाईटी खोलने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी, घण्टी की आवाज़ सुनते ही हम दोनों घबरा गये और रुक गये। तभी हमरी नज़र सामने लगी घड़ी पर पड़ी, शाम के 5.

मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया…हमारे स्कूल में हरे रंग की स्कर्ट्स हुआ करती थी…लंच में जब हाल में हम दोनों मिले. इस शानदार चुदाई की तैयारी में मैंने अपने दोनों बच्चों को गाँव भेज दिया, जिससे घर खाली मिले और हम तीनों एक साथ चुदाई करने का भरपूर मजा ले सकें.

तो सिंह अंकल जल्दी से पापा की ओर चले गये, अँधेरा होने की वजह से वो मुझे नहीं देख सके।मैं वहीं खड़ी रही कि शायद अंकल फिर आयेंगे मगर थोड़ी देर में ही राणा अंकल बाहर आ गये और सीधे अँधेरे की तरफ आ गये जैसे उनको पता हो कि मैं कहाँ खड़ी हूँ। शायद सिंह अंकल ने उनको बता दिया होगा.

‘नहीं जवान लड़की की गाण्ड ऐसे नहीं फ़टती है, बस दर्द ही होता है… अब इसे भी तो अपने लायक बनानी है ना… देख इसे भी चोद चोद कर मस्त कर दूंगा!’ जीजू हाँफ़ने लगे थे. उसने मेरा कच्छा खोल दिया और मेरा लंड निकाल कर जो उस समय पूरे उत्थान पर था, उसे पकड़ कर हिलाने लगी. तभी मैंने अमिता को खड़ा किया और घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा और शालू भी अब लण्ड मांगने लगी.

डॉक्टर ने पापा को चेक किया और कहा की उनके रीढ़ की हड्डी में कुछ परेशानी है और उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है. थोड़ा दर्द हुआ मीठा-मीठा… फिर थोड़ा सा और अन्दर गया… और दर्द भी बढ़ने लगा…वो मजदूर बहुत धीरे धीरे लण्ड को चूत में घुसा रहा था, इसलिए मैं दर्द सह पा रही थी. मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सारी कहानियाँ पढ़ी हैं और अब मैं अपनी कहानी भी भेज रहा हूँ.

यह तब की बात है जब बुआ की बड़ी लड़की की शादी थी और मैं शादी के इंतजाम के लिए एक महीना पहले चला गया था.

बीएफ फिल्मी रिंगटोन डाउनलोड वीडियो: इसी बीच मैं अपने मम्मे कभी उसकी बाजू पर लगाती और कभी उसकी पीठ पर… और कभी उसके सर से लगाती…जब वो नहीं माना तो मैंने उसे बिस्तर पर गिरा दिया और…बाकी की कहानी अगले भाग में !आपकी भाभी कोमल प्रीत[emailprotected]. पहले तो हम कोई भी घर जाने को तैयार नहीं थे पर बहुत कहने पर मैं, मेरी बहन और अनीता दीदी मान गए, अनीता मेरी मुँहबोली बहन का नाम था.

!मैं यंत्रचालित सा उनके चूत की ओर झुकता चला गया। पहली बार चूत की मादक खुशबू मुझे मदहोश कर दे रही थी।मैं कस कर उनकी चूत को चूसते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और जाने कब मेरा हाथ उनकी गांड के बीच की घाटी में घुस गया।वो सिसकने लगी और मुझ पर झुकती हुई मेरे गांड को सहलाने लगी। उनके हाथ लगाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने एक उंगली उनकी गांड के छेद में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा।वो सी. लेकिन अब तक तो मैं बेताब हो गया था और मेरा मन लड़कियों के कपडे पहनने को करने लगा तो मेरे अन्दर की लड़की पूरी तरह से ज़िंदा हो गई. मैं नहीं जानता था कि ऐसा मजा भी होता है! मैं तो बस उड़ रहा था और यह शायद उसे भी समझ आ रहा था इसलिये वो बस आराम से बैठी थी.

ओह्ह उसकी गांड भी एकदम गुलाबी थी और चूतडों के बहुत अन्दर की तरफ़ यानि गहराई में थी। एकदम नाज़ुक सी गुलाबी गांड! मैं गांड का शौकीन नहीं हूँ.

बात उस समय की है जब मैं बारहवीं की परीक्षा पास करके अपने गाँव वापस आया।शहर में रहकर मैं बहुत बिगड़ गया था और चूत का आशिक बन गया था क्योंकि मैंने सुना था कि सांप और चूत जहाँ दिखे वहीं मार देनी चाहिए. इतने में दीदी दो बार झड़ गई, मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने धक्के मारना तेज़ कर दिया. बीच-बीच में वो बुदबुदा भी रही थी- फाड़ दे अपनी बहन की चूत को! उड़ेल दे अपना सारा वीर्य! और बना दे मुझे अपने बच्चों की माँ!मैंने कहा- चिंता मत कर मेरी रानी!मैंने अपने लंड को जैसे ही चिंकी की चूत में डाला, वो चीखने लगी- बाहर निकालो भैया! मेरी जान निकली जा रही है.