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मयूरी- वो कुछ दिनों से मुझे सेक्स करने का बहुत ज्यादा मन होता है…माँ बेटी लेस्बियन सेक्स की कहानी जारी रहेगी.तब तक उन्होंने मेरी पैन्ट खोली और अपनी साड़ी उतार कर मुझे बेड पर धक्का देकर पटक दिया.

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तभी भाभी को कुछ महसूस हुआ और वो हिलने लगीं तो मैंने झट से उनकी साड़ी ठीक कर दी.

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वे थोड़ी पतली भी हैं, लेकिन एक बार अगर देख लो, तो कसम से आप मुठ मारे बिना नहीं रह पाओगे. ”नाटा- बलवंत भैया, जिस औरत को एक बार चोद लेते हैं उसकी तरफ दुबारा देखते भी नहीं. लड़के की माँ ने कहा- जब लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं, तो फिर बात पक्की ही समझिए.

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फिर वो बोली- हाँ होता है कभी कभी … बिना खेले ही खिलाड़ी आउट हो जाता है. प्रिया की चीख कहीं उसकी मम्मी को ना सुनाई दे जाए इसलिये जल्दी से मैंने उसके होंठों को अपने मुँह में भरकर उसका मुँह बन्द कर दिया. फिर उसने सोचा कि अपने भाइयों को टारगेट करती हूँ, पर किस भाई को, छोटे को या बड़े को … यह फिर बहुत मुश्किल सवाल था, बहुत सोचने के बाद उसने फैसला किया कि दोनों पर लाइन मारी जाये, जो पट गया उसी का लंड अपनी चुत में डलवा लूंगी, पर चुदाई तो होकर रहेगी.

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सलवार खोलने से पहले मैंने सलवार के अन्दर हाथ डालकर पेंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाना शुरू किया. मैं भाभी का ये रूप देखते ही पागल हो गया और उनके एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा.

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वह इतना बेशर्म था कि उसने इतनी भीड़ भरी सड़क पर भी अपना लंड चेन से बाहर निकाल कर मुझसे सटा दिया.

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उसको ठीक कराकर घर छोड़ने में रात हो गयी, जिसका धन्यवाद उसने मेरे होंठों पर किस करके दिया.

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अंकल आगे बोले- लंड तो देख लिया, सूंघ भी लिया और अब इसे चाटना और चूसना रह गया है … इसे भी सीख लो. आहह आहह …” आंटी की मादक कराहें निकल रही थीं, वो अब एंजाय करने लगी थीं और नीचे से अपने कूल्हे उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थीं. सुबह उठकर देखा तो टीम और स्टीव जा चुके थे, साहिल मेरे बराबर में नंगा सोया हुआ था मगर आयेशा वहाँ नहीं थी.

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”नाटा- बलवंत भैया, जिस औरत को एक बार चोद लेते हैं उसकी तरफ दुबारा देखते भी नहीं.

वो मुझसे बोली- बस देखते ही रहोगे या स्वागत भी करोगे?मैं हड़बड़ाते हुए बोला- सॉरी मैम, प्लीज अन्दर आइये. रशीद ने पीछे से दांतों से उस ड्रेस की नॉट को निकाला और वो ड्रेस निकल गई. फिर वो बाथरूम में जाकर अपने आपको साफ़ किया और आकर मेरे लंड से खून साफ़ करके बोलीं- तुमने तो मेरी चुत भी सुजा दी.

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फच … फच … करते हुए उसकी चूत से मेरा लंड टकराता, तो ऐसे ही मधुर आवाज पलट कर आती. मैं- कहाँ झडूं … चूत के अन्दर ही या बाहर?चाची- अन्दर ही झाड़ दे … तेरा वीर्य अन्दर गिरेगा तब ही तो चूत की गर्मी शांत होगी. यह बात तो आप जानते ही होंगे कि नारी का ये हिस्सा कितना सम्वेदनशील होता है.

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कहानियां पढ़ते-पढ़ते आज मेरा भी दिल किया कि मैं भी आपको अपनी एक सच्ची घटना बताऊं.

मैंने करीब दस मिनट तक और तेज़ तेज़ धक्के मार कर अपना लंड पूरा का पूरा पूजा की चुत में डालकर अपने लंड के पानी से पूजा की चुत को भर दिया. मैं चोरी छुपे इधर उधर नजरें तो घुमाता रहता था, पर मेरी हिम्मत नहीं होती थी. संपत जी ने मम्मी से बोला- रचना जी, जो खेल उस रात को नहीं हो पाया था, यहाँ पूरा कर लें?मम्मी इठला कर बोलीं- आपका क्या मतलब है जी.

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वह मेरी कमर पर टिक गई और मैंने उसे कस कर अपने सीने से लगा दिया और दोनों एक दूसरे के होंठों का रस पीने लगे. ”आह… पापा आपका लंड मस्त अंदर घुस रहा है… उम्म… जैसे मानो अंदर गड्डा खोद रहा हो.

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मम्मी ने कहा- ठीक है तुम नीचे जाकर हाथ मुँह धो लो … मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं. जिन्होंने मेरी पहली सच्ची कहानी नहीं पढ़ी, वो उसे पढ़ लें ताकि आगे आने वाली मेरी कहानियाँ उन्हें आनन्द दे सके. कामदेव ने अपना पुष्पबाण चला ही दिया और कम्मो अपनी एड़ियाँ रगड़ने लगी.

इसके बाद मैंने मामी जी को छत पर उनके दोनों हाथों को सामने बाउंड्री के ऊपर रख कर घोड़ी बनाया और बोला कि अब थोड़ा झुक जाओ. उसे पड़ोस की शादी में जाना था, उसके जाने से पहले मैंने एक बार उसकी फिर से चुदाई कर दी. जब मुझसे उसकी नजर मिली तो उसने इशारे में कहा- मुझे भी चाहिए!तो मैंने उसे इशारे में ही बताया- ठीक है! और उसे जाने का इशारा किया.

फिर अंकल ने मुझसे कहा- अब सुपारे की चमड़ी को फिर आगे की ओर लाकर सुपारे पर चढ़ा दो. मैं दिखने में अच्छा लगता हूँ और मैंने जिम जा कर थोड़ी अच्छी बॉडी भी बना ली है।बात आज से तीन महीने पहले की है जब हमारे आफिस में एक नई लड़की ने जॉइन किया था, उसका नाम कोमल था, उसकी उम्र 21 साल थी दिखने में एकदम सीधी सादी, गोरा रंग, कसा हुआ शरीर, लंबे बाल।वो जयपुर के पास ही किसी गांव से यहाँ जॉब करने आयी थी, उसका पहला दिन था आफिस में तो वो किसी से कोई ख़ास बात नहीं कर रही थी. वो मुझे किस करते ही जा रही थी, तो मैंने भी उसे सहयोग करना शुरू कर दिया.

मेरे पिता बचपन में ही गुजर गए थे और माँ भाई के पास रहती थीं, जो ऑस्ट्रेलिया में ही बस चुका था. पर मैं बोली- मैं आपसे कितनी छोटी हूँ।वो बोले- कुछ नहीं होता है, तुम बताओ?मैंने भी हाँ में सिर हिला दिया और उठकर जाने लगी तो उन्होंने मुझे पकड़ लिया और चूमने लगे, मैंने भी उन्हें किस कर दिया।फिर मैं घर वापस आ गयी खुश होकर और अपनी उनके साथ चुदाई की सपने देखने लगी.

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तारा ने मुझे बताया कि कुछ मर्द ऐसे भी होते हैं, जिनको अपनी गुदा में लिंग लेना पसंद होता है. अब मेरी जान में जान आई, मैं अंदर जाकर पांच मिनट बाद निकली और वहाँ से चली गई. जब तक मैं वहां रहा मैंने एना को खूब चोदा, क्योंकि वहां किसी भी तरह की कोई रोक टोक नहीं थी कि घरवाले या मोहल्ले वाले ज्ञान दें.

उन्होंने मुझे वहां बेड पर लिटा दिया और बोले- मेरी एक फैंटेसी है और ये फैंटसी मैं तुम्हारे साथ पूरा करना चाहता हूँ. अब मैंने उनके पैरों से चूमना शुरू किया और उनकी जांघों व नाभि को किस करता हुआ दोनों स्तनों तक पहुंच कर उन्हें मुँह में भर कर चूसा, चूमा और जीभ से चाटने के साथ-साथ हाथों से भी दबाया, सहलाया व मरोड़ा. ये जगह मेरे दोस्त के खेत पर बना एक फार्म हाउस का कमरा था, इसलिए कोई आ भी जाए, तब भी किसी तरह का बवाल होने जैसी सम्भावना नहीं थी.

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मैं उनको छेड़ा- क्यों भइया का कैसा है?भाभी- अरे उस भड़ुए की बात मत करो. इसके बाद मैंने अपनी उंगलियों में लगा मौसी के चूतरस को चाटना शुरू कर दिया. माइक भी पूरा समर्थन देता रहा और तब तक लिंग की चोटें मारता रहा, जब तक कि मुनीर पूरी तरह झड़ कर शांत न हुई.

उसके धक्कों में इतनी ताकत थी कि तारा खुद को रोक न पाई और उसका पूरा बदन थरथराने लगा.

शाम को जब मुझे लगा कि सब सो गए, तब में अपने मोबाइल में एक पोर्न वीडियो लगाकर देखने लगा और मेरा हाथ लोअर के ऊपर से ही मेरे लंड पर पहुंच गया.

मैं बीच बीच में उनके बोबों को भी छू रहा था और साबुन के साथ पीठ पर पर गुदगुदी भी कर रहा था. मैंने उनको मेरी तरफ देखते हुए पकड़ा तो उन्होंने झट से टहनी की ओर देखा और उसे हटाने की कोशिश करने लगे।मौसा जी, ये तो हिल भी नहीं रही अब क्या करेंगे?” मैंने थक कर पूछा, मुझे बारिश की वजह से बहुत ठंड लगने लगी थी।एक काम करो तुम मेरे पीछे आ जाओ, दोनों एक जगह पे एक साथ धक्का लगाने से हिल जाएगी. हिंदी देसी सेक्सी वीडियोमैंने अपने भाई के लंड को अपने हाथ में ले लिया और उसे दोबारा खड़ा करने की कोशिश करने लगी.

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वे बेचैन होने लगी और विनती करने लगी- डालो ना!लेकिन मैं उन्हें और तड़पाना चाहता था. और कान खोलकर सुन लो, अगर मैं चाहूँ तो मेरे लिए लंड की लाइन लग जाएगी… ऐसा हुस्न है मेरे पास… पर क्या तुम्हें कभी ऐसा हुस्न मिलेगा, वो भी अपने घर में? ये तुम सोचो? तुम जब चाहो तब मुझे चोद सकते हो और अपना लंड मेर शरीर के हर छेद में डाल सकते हो… पर ये तुम्हें साथ में ही करना होगा. क्योंकि वो पिक्स तुम्हारे देखने के लिए ही मैंने अपना फोन वहां रखा था.

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फिर उन्होंने धीरज से कहा- बोलो क्या बात है?मगर धीरज अभी झिझक रहा था. शीतल- हाय मेरी प्यारी बेटी…और ऐसा कहकर शीतल के होंठों पर एक प्यारा सा चुम्बन देकर अपने बेटों के कमरे में चली गयी और मयूरी ने अशोक के कमरे का रुख किया.

तो मैं उत्सुकता के मारे शर्मा जी के घर उनका हालचाल पूछने के बहाने, बैट को कंधे पर रखके पहुंचा.

तब वो बोलीं- बस इतना ही? तभी तुम भाग रहे थे?तो उनकी इस बात पर मुझे हल्का सा गुस्सा भी आया और मैंने उन्हें बेड पर लिटाकर पहले उनके मम्मों से जी भर के खेला, फिर नाभि के रास्ते उनके गदराए हुए बदन को चूमते हुए उनकी मखमली योनि तक आ पहुंचा, जहाँ एक भी बाल नहीं था. उधर से उन्होंने बोला- ठीक है तो 3 बजे तुम दोनों बाहर आजो, मैं तुम्हें शॉपिंग के लिए ले जाऊंगा. अब मैं गौरी को हमेशा देखता रहता था और अकेले मिलने का मौका ढूंढता रहता था। मेरी हरकतों को चाची ने समझ लिया और अब वो मेरे ऊपर और गौरी पर नजर रखने लगी.

धर्मशाला में अंधेरा ही था क्योंकि सारी बत्तियां मैंने जानबूझ कर बुझा दी थीं. समझो किसी रबर की गेंद की तरह उछल कर उसके मम्मे खुली हवा में फुदकने लगे. प्रिया ने भी अब अपनी सांसें रोक लीं और वो अब धक्के खाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी.

तभी फूफा जी ने उनका हाथ पकड़ा और कहा- क्यों शर्म आ रही है क्या? यदि शर्म आ रही हो, तो आप मेरे साथ बेडरूम में चलो.

बीएफ ब्लू फिल्म सेक्सी मूवी: उसके मुंह से भी आवाज निकल जाती उम्म्ह… अहह… हय… याह… और मैं भी उसका मजा लेने लगा. मैंने भी उन्हें बोल दिया कि आपके जैसे सेक्सी कोई मिले, तब तो कुछ सोचूं.

मैंने भी थोड़ा सा गिरने का नाटक किया तो वे स्टूल के बजाय मेरी कमर को पकड़ के मुझे संभालने लगे. वो मेरे बालों को ऐसे नोंच रही थीं, जैसे कि मैं ठीक से चुत की चुसाई नहीं कर रहा हूँ. यह तू कल देख लेना सोनू कि तेरी मम्मी को कैसे विश्वास में लेना है, मुझे आता है.

क्या बताऊं यारो … वो इतनी प्यारी लग रही थी कि मन मचल रहा था कि बिना इन्तजार किये बस अभी ही लंड डाल दूँ इसकी चूत में … लेकिन मैंने अपने पर काबू किया.

उसका मुँह खुला तो मैं अपनी जुबान उसके मुँह में अन्दर तक डाल कर फिराने लगा. हालांकि मैं बहुत शर्मीला इंसान हूँ, जो लड़कियों से बातें करने मैं बहुत शरमाता है. अगर आप पहली कहानी नहीं भी पढ़ते हैं तो भी आप सीधे इस भाग का आनंद ले सकते हैं.