लड़की चुदाई बीएफ

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जापानीज बीएफ: लड़की चुदाई बीएफ, मेरी मम्मी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं तो साधारण तरीके से ही बोलती हैं.

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मैं ये जानना चाहता था कि मेरी दीदी कैसे उन कुत्तों की मालकिन बन गईं और उन पर इतने जुल्म के बाद भी उन्हें कुछ नहीं हुआ. नवजात शिशु की लोईमैंने उसे अपनी बांहों में भरा और किस करने लगा, कभी उसके होंठों पे तो कभी उसके गालों पे, कभी कान की लौ पे, तो कभी गर्दन पे.

मैं प्रिया को बस शनिवार और रविवार को पढ़ाने लगा, इन दो दिनों में कुछ और बच्चे भी आते थे. सनी देओल एजहुक खोलते ही उनकी ब्रा छिटक कर नीचे गिर गई और उनके दोनों कबूतर आज़ाद हो गए.

पहले मैं रीना को लेकर अंदर गया और जाते ही उसके कपड़े निकाल कर फेंक दिए और पागलों की तरह उसे नोचने लगा और कभी उसकी गर्दन और कभी उसकी चूची पर लगातार किस कर रहा था और उसने मेरी पैन्ट खोल दी और लंड को आगे पीछे करने लगी.लड़की चुदाई बीएफ: लेकिन उसकी गांड का छेद इतना टाइट था कि उसमें उंगली भी आसानी से नहीं जा रही थी.

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तो बॉस ने पूछा- क्या हुआ नेहा? तुमको अच्छा नहीं लग रहा है?मैं- सर अपको एक बात बतानी है.फिर थोड़ी देर बाद मैंने सीमा की सलवार का नाड़ा एक झटके से खोल दिया, उसकी सलवार सरसरा के नीचे गीर गयी, उसकी कच्छी बुर वाली जगह पर भीगी हुई थी, मैंने उस जगह को सूंघ कर सीमा की कच्छी उतार दी और उसकी चूत चाटने लगा।अब वो अपने मुंह से तो ‘नहीं नहीं…’ कर रही थी लेकिन साथ ही मेरा सिर चूत में दबा भी रही थी क्योंकि उसको मेरे ऐसा करने से बहुत मजा आ रहा था.

मैंने लंड उनकी गांड पर लगाया और जोर से एक शॉट मारा, तो आधा लंड उनकी गांड में चला गया और वो चिल्लाने लगीं- प्लीज़ बाहर निकालो प्लीज़. लड़की चुदाई बीएफ अब बॉस ने मुझे मेज के सहारे झुका दिया और पीछे से मेरी गांड में पूरा लंड डाल दिया.

मैं रुका, तो वो मेरे पास आई और मुझे थैंक्स बोल कर कहा कि नवीन प्लीज़ ये बात घर पर किसी को मत बताना वरना तुम तो जानते हो ना.

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मैं भाभी की चुत के दाने पर जीभ फिराते हुए बुरी तरह से चॉकलेट चाट रहा था और पायल भाभी मेरे लंड को पागलों की तरह चूस रही थीं. अब उन लोगों का कम्प्यूटर से खुद का नाता तो ईंट और कुत्ते वाला ही था तो वो लोग मेरी शरण में आये थे. मैंने काफी सोच कर कहा- मुझे चाहिए कुछ नहीं है, लेकिन किस थोड़ा मुश्किल काम है और ये मैं कैसे करवा सकती हूँ, वो भी कमर पर?अमित- सोच लो यार.

दीदी ने अपने घुटनों को ऊपर करके मोड़ लिया और मुझे सलवार उतारने से रोकने लगी लेकिन दीदी की कोशिश नाकाम रही और कुछ ही देर में सलवार सोफे से होते हुए ज़मीन पर गिर गई थी. फिर क्यों पिंकी की गांड मारोगे?अच्छा तू अपनी चूत तक नहीं मारने देती, तू कैसे अपनी गांड देगी मुझे?”राहुल मुझे दर्द होता है, मुझे तुम और कुछ भी कहो, मैं करूँगी. यह बात कुछ टाइम पहले की है, मैं नाश्ता करके घर से अपनी जॉब की तरफ चला गया.

उसने अपने हाथ आगे बढ़ा के माया के बोबे अपने हाथों में भर लिए और निचोड़ने लगा. और मैं नीचे उसकी चूत के दाने को रगड़ रहा तो वो और वो सिसकारियाँ भर रही थी. इस तरह का ‘फुट जॉब’ मैंने कभी किसी पोर्न क्लिप में देखा था, तभी से मेरी तमन्ना थी कि कभी मौका मिला तो ये खेल मैं भी खेल के देखूंगा.

ये कहते कहते भी चाची की नज़र मेरे खड़े होते लिंग पर जा टिकी, जो कि तौलिया में अपना आकार बना चुका था. लेकिन मैं जब भी जाती तो सबसे पहले अपनी गांड ही चुदवाती थी क्योंकिगांड मराने का मजाअलग ही आता है.

आनन्द ने बिना कुछ बोले मोना को घोड़ी बनाया और अपना लिंग मोना की गांड पर रगड़ने लगा.

सुकुमारी भौजी के ऐसे कर्णभेदी शब्दों ने मेरे लंड को खड़ा करने में पुरजोर समर्थन दिखाया और मैं उठ कर खड़ा हुआ.

एक दिन रात में दस बजे मैं कमरे में बैठा था, मेरा छोटा भाई सो गया था. बॉस- ठीक है नेहा पर ऑफ़िस में चुदवाने आओगी ना?मैं- सर आज जो हुआ, उसके बाद बहुत डर लग रहा है. थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और फ्रेश होकर वापस अपने अपने घर जाने के लिए तैयार हो गए.

मैं घर में घुसा तो देखा एक खूबसूरत, गोरी-गोरी लड़की सोफा पे बैठी थी और दो बच्चे खेल रहे थे. क्योंकि उस वक्त मेरी एक गर्लफ्रेंड थी और मैं उसी के साथ काफी व्यस्त रहता था. लेकिन उनकी सास बोलीं- क्या कर रही है तू? रवि अभी अभी तो आया है और तू सामान लेकर जा रही है.

मैं पुणे में रहता हूँ और अभी सेकेंड ईयर में हूँ, उसी के साथ मसाज पार्लर में भी जॉब किया था, ताकि पढ़ाई के लिए थोड़े पैसे मिल जाएं.

मेरी जवानी की चुदाई की इस देसी कहानी के लिए आपके मस्त कमेंट्स का मुझे इन्तजार रहेगा. मैंने कपड़े पहने, मेकअप किया, लिप एंड आई लाइनर, लिपस्टिक आदि लगा ली ताकि यहाँ के लड़के भी मेरा जलवा देख सकें और बाहर आ गई. ”गोलू रोशनी के सर के पास जाकर उसके दोनों हाथों को ऊपर खींचकर एक वी शेप बना दिया.

अबकी बार चलने में मैंने चाची का सहारा नहीं लिया तो चाची बोलीं- अच्छा तो ये सब तेरा ड्रामा था. उसका शरीर इतना गर्म था कि उसका स्पर्श पाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और पेंट फाड़कर बाहर आने को उतावला हो उठा. फिर भाभी खुद ही मेरे पास बैठ कर मेरे पैर पे दवाई लगाने लगीं, उन्होंने जैसे ही पैर को छुआ, मैंने पैर पीछे खींच लिया.

फिर मैं उनकी चूत पे आ गया और मैं भी चूत को कस कस के काटने और चूसने लगा.

मैंने भी हां कर दी, मुझे खुशी थी कि मैं जिससे प्यार करती हूँ, उसे ही अपना सब दूँगी, पर मुझे क्या पता था कि वहां मेरे जिस्म पे हक जताने वाले 6 और भी हैंहम दोनों एक दूसरे से लिपट गए और किस करने लगे. अब मैंने रजाई के अंदर उसकी लेगी और टॉप पूरी तरह उतार दी और मैंने अपनी टीशर्ट और पजामा उतार दिया, अब मैं सिर्फ अंडरवियर था मेरा लंड तना हुआ था और हल्का दर्द हो रहा था.

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लड़की चुदाई बीएफ दीदी अब बहुत गर्म हो गई थीं और कामुक मादक सीत्कारें निकाल रही थीं-अहहा. पाँचवें पेग के बाद वो अकीरा को गोद में उठाये ही खड़ा हो गया और दे दनादन अकीरा को चोदना शुरू कर दिया.

फिर मैंने देखा कि उसकी चूत से खून निकल रहा है, मैंने उसको नहीं बताया.

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अंजलि की चूत की कामुक सुगन्ध मेरे नाक में भर कई और मेरे लंड को एक झटका सा लगा एक जवान लड़की की चूत की खुशबू लेकर!मैंने उसकी चूत पर पैंटी के ऊपर से ही किस किया और अपने नाक से उसकी चूत कुरेदने लगा. जैसे ही उनका लंड उनकी बेटी की गांड को चीरता हुआ अन्दर घुसा, मैं जोर से चिल्ला उठी. करीबन पन्द्रह मिनट तक भाभी को हचक कर चोदने के बाद मैंने कहा- भाभी मेरा होने वाला है.

मुझे हर बार इतना आश्चर्य होता है यह देख कर कि रोजमर्या के जीवन में इतनी कोमल, नाजुक लड़की, जिसके लिए पानी का भगोना उठाना, या सोफा चेयर खिसकाना भी बहुत मुश्किल का काम है, कितनी पारंगता के साथ विकराल लंडों को अपने शरीर में घुसवा लेती है!इस समय वो अपनी कलाई जितनी मोटाई वाले दो दो लंडों से अपने सारे छेद फोड़वाए जा रही थी! मैं उसे इस समय ओमार के मोटे-खूब लम्बे लंड पर कूदता देखते हुए गर्व से भर उठा!आआआआह. मैंने धीरे धीरे अपनी उंगली उसकी वर्जिन चूत में डाल दी और आगे पीछे करने लगा. ममता जी के मुँह से अब कराहों के साथ हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी थी और वो अब अपने हाथों को छुड़ाने का या फिर मुझे हटाने का भी प्रयास नहीं कर रही थी। मैंने भी अब उनके हाथों को छोड़ दिया और यह सही मौका जान कर ममता जी की चूची को चूसते हुए ही अपना हाथ नीचे उनके पेट पर से होते हुए चुत की तरफ बढ़ा दिया.

और उनके लंड को अपने दांतों से इतने जोर से काटा कि वो जोर से आह करते ही उठ बैठे और मुझे देखते ही बोले- मेरे रानी बेटी को आज मेरी याद कैसे आ गई?पूरी कहानी सुन कर मजा लीजिये.

वो अगले दिन ही यूपी चले गए। मैं परेशान सी हो गई। मैं सेक्स के बारे में नहीं सोचती थी. कुछ पल बाद मैं उठ कर किचन से एक पानी की बॉटल ले आया और उन पर पानी छिड़का. शाम को दीदी के फ्लैट में जा कर मैंने उनको चुपके से आईपिल की गोली दे दी.

तो मेरा रक्तचाप बढ़ गया। उसने अपने मिनी शॉर्ट्स को पकड़ा और अपनी चिकनी टांगों से नीचे खींच दिया।नजारा देख कर मानो मेरा कलेजा हलक में आ गया। उसने शॉर्ट्स के नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी। एकदम नंगी मधु मेरे सामने पीठ किए हुए खड़ी थी और मेरा लवड़ा फटा जा रहा था।तभी उसने अपनी गाण्ड को खुजाया और फिर सर झटकाते हुए बाथरूम में चली गई।मैं बेसुध सा खड़ा था. मेरे आनन्द का पारावार नहीं था क्योंकि मैं अपनी बहन की चूत चाट रहा था. इतना कह कर उसने पास रखी बियर की बोतल उठाई, दांतों से ही उसका ढक्कन खोला और अंगूठे से बोतल बंद करके जोर से हिला कर उसका फव्वारा सीधा मेरे बदन पे चला दिया। ये सब इतनी जल्दी हो गया कि मेरे समझने से पहले ही बियर की पहली धार मेरे बदन से टकराई और उसके ठन्डेपन से मेरी रीड की हड्डी तक को जमा दिया। मेरे मुँह से न चाहते हुए भी लम्बी चीख निकल गयी.

वो उठ कर घोड़ी बन गईं और मैंने भाभी की चूत पर अपना लंड रख कर जैसे ही धक्का दिया, मेरा लंड बड़े आराम से अन्दर चला गया. फिर उसने पास ही पड़ा एक दुपट्टा उठाया जो 90% तक पारदर्शी था, उस दुपट्टे को उसने अपनी चूचियों पर डाला, जैसे उसको छुपाना चाहती हो.

मैंने बॉस को चेयर पर बिठा दिया और झुक कर उनके लंड को चाटने लगी, जिससे उनका लंड गीला हो गया. वो मेरी बीवी के कोमल और तने हुए स्तनों को दबाकर उसको और गर्म कर रहा था. मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरा भाई एक अरविंद, दो बहनें रिया (रेहाना) और शीना(शाहाना) हैं.

मैं पुणे में रहता हूँ और अभी सेकेंड ईयर में हूँ, उसी के साथ मसाज पार्लर में भी जॉब किया था, ताकि पढ़ाई के लिए थोड़े पैसे मिल जाएं.

हम दोनों में से कोई किसी को हाथों से छू नहीं रहा था; बस अपने पैरों से ही एक दूजे को मजे दे रहे थे. मुझे इतना पता था कि मेरे पति मेरे बिना कितने बैचन हो रहे होंगे।फिर अगले दिन मैंने सोचा कि पति को फोन करती हूँ. मैं भी चाचा का लंड उनके अंडरवियर के ऊपर से सहलाने लगी और हम दोनों फिर एक दूसरे को किस करने लगे.

मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और करवट बदल के सोने की कोशिश करने लगा. थोड़ी देर में मैं भी उसके ऊपर ही गिर पड़ा, मेरे गर्म वीर्य से कविता की गर्म चूत भर गयी.

जब मुझे लगा कि मेरा लंड छूटने वाला है तो मैंने उसे हटाना चाहा, परंतु वो नहीं हटी. तभी मैंने तेज तेज धक्के मार कर मैंने अपना सारा वीर्य छाया भाभी की प्यासी चुत में छोड़ दिया. मेनका- तुम उनकी चिंता मत करो, ये बात हम दोनों के अलावा और किसी को नहीं पता चलेगी.

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मेरी माँ ने मुझसे कई बार पूछा भी कि आजकल तू इतना चुप चुप सा क्यों रहता है? किसी से झगड़ा हुआ है क्या? या फिर किसी ने तुझे कुछ कहा?मैंने माँ से कहा- नहीं माँ ऐसी कोई बात नहीं है, तुम परेशान मत हो, मैं बिल्कुल ठीक हूँ.

दो बजे छुट्टी के बाद मैं निकल रहा था कि निर्मला जी ने आवाज दी- अतुल रुको, मुझे कमला मार्केट जाना है कुछ सामान लेना है, मैं स्कूटी नहीं लाई हूँ, तुम अपनी गाड़ी से ले चलो. ब्रायन मेरे मम्मों को चूस लो, निकाल दो मेरा जूस, मेरा दूध!”ला साली भोसड़ी की रांड, ला तेरी बेटी को चोदूँ, साली कुतिया यह देख तेरी मासूम बेटी कैसे मेरा लंड चूस रही है. आनन्द फिर लंड को चुत के होंठों के पास लेकर गया और मोना की चूत फैला कर एक जोर का धक्का लगा दिया, जिससे आधा लंड मोना की चूत में घुस गया.

इसके बाद उसने मेरे कपड़ों को एक एक करके मेरे शरीर से निकल फेंका और खुद भी नंगा हो गया. दीदी ने साड़ी नाभि के नीचे बांधी ताकि उनकी नाभि की रिंग एकदम साफ दिखाई दे. हीरोइन हीरोइन की सेक्सीमैंने अन्तर्वासना की बहुत सी रियल कहानी पढ़ी हैं मुझे इधर की चुदाई की कहानी पढ़ कर बहुत मजा भी आया.

फिर मैंने उनको सोफे पर बिठा कर खुद नीचे बैठ गया और उनकी पेंटी को उतार कर उनकी टाँगें खोल कर उनको आगे को खींच लिया. मैंने प्रिया की आँखों में देखते देखते, अपनी दोनों हथेलियों को प्रिया के कूल्हों, प्रिया की दोनों जाँघों पर हल्के से रगड़ते हुये पैंटी को हौले हौले नीचे सरकाना शुरू किया.

मैं तो बस हवा में उड़ रही थी और अंजाने में मेरे मुँह से वो निकाला जो शायद महेश चाहता था. मैंने मानवी भाभी के मुँह पर एक चपत लगाई और उसके मुँह में अपना औज़ार जबरदस्ती डाल दिया. मेरे चूतड़ दुख रहे थे, मैं मेरे हाथों से उसके हाथ हटा रही थी, उसने मुझे घुमा दिया और वो पीछे से मेरी गर्दन पे मेरी गले की नसों को ऐसे चूसता कि मेरा खून चूस लेगा.

इसके कुछ ही दिनों बाद मेरी 12 वीं क्लास के पेपर खत्म हुए थे और मैं रोज़ दोपहर को घर पर अकेला होता था. तब पता चला कि यहाँ काफी अच्छे अच्छे नाईट क्लब हैं।ऑफिस से आकर फ्रेश होकर अपने दोस्तों से पूछा. मैंने सोचा कि इसके पापा से मिलना है, तो वही गांव में जो पहने जाते हैं जीन्स टॉप.

मेल आयी तो किसी महिला के नाम की आईडी से थी पर मैं शपथपूर्वक नहीं कह सकता कि लिखने वाली भी, सच में कोई महिला ही है.

तो मैं खड़ी होकर उनकी कमर से लिपट गई। यश ने मुझे अलग किया और कमीज उतार दी। परन्तु आज मैं पीछे हटने वाली नहीं थी। मैंने यश को अपनी तरफ घुमाया और उनका सिर पकड़ कर होंठों पर चुम्बन करने लगी और उनका एक हाथ अपनी चूची पर रखकर दबाने लगी। ये सब मैंने एक बीएफ में देखा था. मैं- आहह दीदी आह… बहुत अच्छा लग रहा है… आअह आह दीदी!मेनका- गुउ उउम्म आअहह… हाँ भाई…दीदी मेरे लंड को अपने दोनों हाथ में पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी.

सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली तो देखा कि मामी नंगी ही किचन में नाश्ता बना रही थीं. मैंने भी उनके दोनों हाथ पकड़कर दीवार से सटा दिए और फिर से अपनी जीभ उनकी नाभि में घुसेड़ कर ज़ोर जोर से घुमाने लगा. मैं उनकी वासना को भड़काने के लिए रोज उनकी ब्रा पैन्टी में मुठ मारकर वैसे ही रख देता था.

शायद जवान होने के कारण उसमें मुझे देख कर कामवासना ज़्यादा चढ़ गई थी। मुझे आज फिर से अपनी नौकरानी के बेटे श्याम की याद हो आई थी। मेरी चूत भी फड़क उठी तो मैंने कहा- ठीक है लेकिन किसी को बताना नहीं ओके।वो- ओके चाची जी।वो बहुत खुश हुआ. मैं- दीदी आपकी खुशी की और मेरे ये सब कुछ करने की एक ही वजह है, करण, उसी ने मुझे आपके और अमित के बारे में बताया था, वो तो अमित को जान से मारने वाला था लेकिन मैंने उसको समझाया और आपको एक बार अमित से शादी की बात करने को बोला और फिर आपसे कुछ दिन का टाइम माँगा ताकि हम अमित की पोल खोल सके आपके सामने. सब लोग पार्टी का मजा लेने में व्यस्त थे और मैं सपना को ढूंढ रहा था.

लड़की चुदाई बीएफ पहले पहल काफी समय ऐसे ही निकल गया और हम कहीं और किराये के घर में रहने आ गए. वो नहा कर आई थी, उसके बाल गीले थे और रेड कलर की ब्रा ओर पेंटी में मेरे सामने आकर खड़ी हो गई.

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आज चौबीस साल की हो गई हूं और आज तक अन मैरिड हूं।आप लोग अपनी राय मेरे मेल आई डी पर भेज सकते हैं।[emailprotected]. मैं रुका तो वो मेरे पास आई और बोली- मुझे कॉलेज साथ ले चलो, मौसम भी ख़राब है और बस का पता नहीं कब तक आएगी. मैंने ऊपर जाकर भाभी से कहा- मुझे बहुत भूख लग रही है और नीचे खाने के लिए कुछ भी नहीं है.

अब मैं सन्न सी रह गई कि उसके घर! अवी ने जानबूझ कर कार की गर्म वाली एसी चला दी. अब वो अपने हाथों मेरे सिर को अपनी चुत पर जोर जोर से रगड़ने लगीं और अपने चूतड़ उठाने लगीं. अंग्रेजी न्यू सेक्सी वीडियोमैंने भाभी को खड़ा किया और दीवार के साथ लगा कर उनकी चूत में ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा.

राहुल के सामने ये सब करने की क्या जरूरत थी? जब तुम्हारा दिल करता था, तो मेरी चूत तो तुम ले ही लेते हो न.

मैंने देखा कि मेरे लंड का टोपा ही अंदर गया था और मैंने अपने लंड को तुरन्त बाहर निकाल लिया क्योंकि मुझे भी हल्का सा दर्द हुआ था. मैं कभी अपने दाँतों से उनकी चुत के दाने को काटता, तो कभी अपने हाथों से उनकी चुचियों के निप्पल को जोर से मसल देता.

पर आज जब वह ख्याल आता है मैं उसकी चूत को याद करके मुठ जरूर मारता हूँ. एक दिन दीदी मेरा कम्प्यूटर चला रही थीं, वे मुझसे बोलीं- जा मेरे लिये शरबत बना कर ले आ. उसने मुँह बनाया तो मैंने उससे कह दिया कि मैंने सिर्फ़ 2 पैग लगाए हैं.

अब मुझे अपनी बेबकूफी और उसकी चालाकी पर हँसी आने लगी, यानि उसने इशारे में ही मुझसे चुदवाने की बात बोल दी थी.

मैंने खड़े खड़े अपनी टी-शर्ट और बनियान निकाल दी और ऊपर का जिस्मा नंगा कर दिया. मेरी कामुक सिसकारियां निकल रही थीं मगर उस सुकुमारी भौजी की गांड अभी भी घुसक घुसक करके मुझे चैलेंज दे रही थी, मानो मैं कुछ कर नहीं सकता. मैंने अन्तर्वासना की बहुत सी रियल कहानी पढ़ी हैं मुझे इधर की चुदाई की कहानी पढ़ कर बहुत मजा भी आया.

काली माता की आरती डाउनलोडचिंटू को भाबी के हाथ से लेते हुए मेरा हाथ उसके बड़े बड़े मम्मों को टच कर गया. बहूरानी के मायके वाले हमें रिसीव करने आये थे, सब लोगों से बड़ी आत्मीयता से हाय हेलो हुई और हम लोग अपने ठहरने की जगह की ओर निकल लिए.

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मैं चुपचाप करण के रूम में चला गया और दीदी अपना काम करने लगी, मैंने सोचा अब दीदी से बात कैसे शुरू की जाए!तभी एक आइडिया आया, मैं 10 मिनट बाद बाहर गया और अपने मोबाइल को देख कर ज़ोर से हँसने लगा, इतना ज़ोर से कि किचन में दीदी को मेरी आवाज़ सुन जाए!और ऐसा ही हुआ, दीदी को मेरी आवाज़ सुन गई और वो बाहर आ गई. बॉस की दो उंगलियों को पकड़ कर अपनी गांड में डलवा कर बॉस के मुँह में ही बोल दिया- ये मेरी गांड का छेद मिलेगा. मैंने पूछा कि चूत में मूली क्यों नहीं की?तो बोलीं- मैं चूत की सील लंड से ही खुलवाना चाहती थी.

प्यार से उसकी तरफ देखा तो पता चला कि वो नींद के आगोश में दुबकी हुई है. फिर ऐसे ही वीडियो देखते वक्त उनके शादी की वीडियो आई, तो मैं उनसे पूछने लगा- आपकी शादी कब हुई और आपके बच्चे किधर हैं?इस सवाल से मधुरा का थोड़ा मूड खराब हुआ और वो बोलने लगीं कि उनके पति मुझसे प्यार नहीं करते, वो बस अपने जॉब और पैसों से प्यार करते हैं. अब हम दोनों में इतना खुलापन हो गया था, बिल्कुल गर्लफ्रेंड ब्वॉयफ्रेंड जैसी फ्रेंडशिप हो गई थी.

मेरे इतना कहने पर पायल भाभी ने मुझे अपने ऊपर खींचा और मुझे किस करने लगीं. मैं- सर मैं सोच रही थी अगर आपकी परमीशन हो, तो मैं उस लड़के से चुदवा लूँ तो वो किसी को नहीं बोलेगा क्योंकि फिर वो भी मुझे चोदने के इन्तजार में रहेगा. मैंने उसे चूत दिखाने को कहा और लंड निकाल कर मुठ मारने लगा।अब हम दोनों एक दूसरे को अपने यौन अंग यानी चूत और लंड दिखा कर मुठ मार रहे थे.

मेरा लंड तो फटने की तरह हो गया था… मेरे लंड का लाल टोपा फूल कर पिंक हो गया था. वो मेरे पैरों के पास बैठा था, मेरे पैरों को उठा कर उसने बेड पर रख दिया और ऐसा करने से मेरी पैंटी थोड़ी दिखने लगी.

हम कार में बैठ कर रुबीना के घर की और चल दिए, पूरे रास्ते रुबीना मुझे प्यार से देखती रही.

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हालांकि मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगी, पर तेरी सज़ा ये है कि आज के बाद मुझसे कभी बात करने की कोशिश भी मत करना आई हेट यू.

शुरुआत में मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि उधर, मुझे छोड़ कर बाकी सब किरायेदार फैमिली वाले थे. हमने जूस पिया और ज़ायरा भाभी ने अपनी चुत को साफ किया, अपनी साड़ी सही की. उनको ऐसा करते हुए बहुत मजा आने लगा और वो गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगीं.

तो मित्रो, ये थी मेरे और मेरी बहूरानी के बीच बने अनैतिक सेक्स संबंधों की संक्षेप गाथा जिसे मैंने पहले की कहानियों में विस्तार से लिखा है. फिर उसने मेरी पेन्टी में हाथ डाल कर मेरी चुत पे अपनी कामुक होती उंगली फेर दी और धीरे धीरे संजय ने एक उंगली मेरी रस से तरबतर होती गीली चुत में डाल दी. यह बात नहीं मेरे घर में किसी को पता थी कि मैं अपने पड़ोस से चाचा से व्हाटसप्प पर रात भर बातें करती हूँ.

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करीब 5 मिनट का लम्बा स्मूच करने के बाद मैंने उसकी सलवार खोल दी और चुत में उंगली करने लगा. जैसे ही वो कुछ शांत हुई, मैंने धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर करना शुरू किया. मैंने कहा- चचीजान, इसमें शुक्रिया वाली क्या बात ये तो मेरा फर्ज़ था.

अंजू- हाँ दीदी, हो सकता पहली बार देखा हो इसलिए… वैसे यहाँ के लड़के बहुत ख़राब हैं.

मुझे उसकी ये अदा बहुत भा गई और मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लोवर के ऊपर से ही रख दिया.

कुछ देर बाद मेरे ठीक होने पर संजय ने अपना लंड धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया. मैंने भाभी से साड़ी निकालने का पूछा तो भाभी बोलीं- देवर जी ये साड़ी तुम्हारे लिए तो आज पहनी है. सेक्सी मूवी बढ़िया वालीतभी मैंने दीदी के सर को अपने हाथों से पकड़ा और अपने लंड की तरफ बढ़ा दिया, दीदी ने अपने फेस को दूसरी तरफ मोड़ दिया, मैंने फिर से दीदी के सर को पकड़ा और फेस को लंड की तरफ टर्न कर दिया.

बॉस गंदी गंदी गालियां देकर मेरी गांड मार रहे थे, जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मक्खन की चिकनाई की वजह से लंड तो अन्दर दाखिल हो गया पर उसे दर्द होने लगा. मैंने भाभी से उनके यहाँ आने वाला न्यूज़ पेपर माँगा और लेकर निकल गया.

मैं दर्द और आनन्द से फड़फड़ाने लगी- ‌निकालो इसे… फट गई मेरी चूत!वो जोश में आकर मुझे और जोर से पेलने लगे, मैं भी दर्द में भी मजा लेने लगी. कमरा पूरी मादक आवाज से लबालब था और उनकी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया था.

उधर नीचे भौजी ने अपनी साड़ी चोली और मेरे कपड़े बिछाते हुये कहा- जल्दी से मेरी चूत को चोदो, वरना झड़ जाऊँगी.

मामी के पैर में मोच आने की वजह से वो नहीं जा रही थीं, तो मामा ने मुझको उनके पास रुकने को बोल दिया और वो सुबह के 5 बजे ही बाइक लेकर चले गए. ये महीना नवम्बर का था, उस सर्द रात में मेरे पप्पू महाराज ने अंगड़ाई ली तो मैंने मन ही मन अपने पप्पू को कहा महाराज जी थोड़ा रुक जाओ, बस आपके लिए छेद का इंतज़ाम होने वाला है. कुछ देर तक वो देखती रही फिर पलट कर जाने को हुई तो मैंने लपक कर उसको पकड़ लिया और उसे खींच कर बेड पर बैठा लिया.

6 महीने की प्रेगनेंसी मुझे दीदी पर बहुत प्यार आ रहा था, मैंने कहा- दीदी, हम शादी नहीं कर सकते क्योंकि हम भाई बहन हैं, पर हम एक दूसरे से बचपन से प्यार करते हैं. चूत में घुस के आनन्द लूटता और लुटाता लंड का आनन्द देखने की चीज नहीं महसूस करने वाली बात है.

आज से नहीं, काफ़ी टाइम से मैं आपके करीब आना चाहता था लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई, जब भी आपके इस भरे हुए जिस्म को देखता पता नहीं मुझे क्या हो जाता. मैंने उसे अन्दर बुलाया और बधाई देते हुए बोला- कैसे आना हुआ?वो बोली कि आपको मिठाई खिलानी थी. ” दिनेश अपना खून से सना लन्ड उसकी कसी हुई चूत से बाहर खींच लिया।अरे तू तो कुंवारी निकली… छक्का साला मेरा बेटा जो ऐसीचूत की नथ खुलवाईन कर पाया.

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आहह हह …!” सच में बहुत अच्छा लगा मुझे, मैं जोश में लंड पूरा चूस रही थी. जब वो मेरे पास बात करने आई थी तो काम करने की वजह से पसीने से भीग चुकी थी, जिसके कारण उसकी साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी. रोशनी ने चीख कर बोला- तू ऐसा सोचना भी मत, मुझे सपनों मैं भी राहुल सर के अलावा कोई और नहीं छू सकता.

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कुछ देर बाद मैं अपनी जीभ निकाल कर उसके होंठों पर फेरना लगा, उसने मेरी जीभ पाने होंठों में पकड़ ली और चूसने लगी. एकदम नर्म, ऐसा लग रहा था जैसे मैं गुलाबजामुन खा रहा हूँ।किस करते करते अचानक ही मेरे हाथ उनके स्तनों पर पहुँच गये और मैं उनके स्तनों को दबाने लगा। मुझे तो खुला लाइसेन्स मिला हुआ था नीतू के साथ रोमान्स करने का. कुछ देर बाद मैं वासना से लिप्त मदान्ध की स्थिति में पहुँच गया और धीरे से उठकर, सहमे सहमे कदमों से उस ललचाती गांड की तरफ चल दिया.

उसने भी मेरे किस का स्वागत किया तो मैंने उसके लबों पर अपने लब रख दिए और उसे पागलों की तरह चूमने लगा. वो टाइम लकी था कि छत पर कोई नहीं था क्योंकि सब नीचे ऑर्केस्ट्रा पर डांस में लगे थे. रात उनके यहाँ सब छत पर लेटे थे गर्मी के चक्कर में… मैं भी वहीं लेट गयी।आधी रात को सब नीचे जाने लगे, समधन जी बोली- चलो नीचे!मैंने कहा- आप चलो, मुझे तो यहाँ अच्छा लगा रहा है, मैं अभी थोड़ी देर में आती हूँ।वो मुझे नींद में समझ कर नीचे चली गयी। सब चले गए.

एक दिन दिव्या के मोबाइल से मैंने अमित से मेसेज से बात की और उससे पूछा- क्या हुआ अब तो मिनी को गले से लगाने का मन नहीं करता है क्या?अमित- करता है यार… पर अब वो दूसरे की अमानत है और उसे अब वो भी गले लगा चुका होगा.

लड़की चुदाई बीएफ: जब मुझको लगा कि उसका दर्द कुछ कम हुआ है, तो मैंने बहुत धीरे धीरे अपना लंड हिलाना शुरू किया ताकि उसकी चूत मेरा लंड खाने लायक चौड़ी हो जाए. मैंने टाइम ना गंवाते हुए एक और कस के झटका मारा, मेरा पूरा लौड़ा उनकी गांड में समा गया.

” कहते हुए तुरन्त उठ कर बैठ गयी और दोनों हाथों से अपनी चुत को ढक लिया। ममता जी के दोनों हाथ अब अपनी चुत को ढकने में व्यस्त हो गये थे इसलिये मैंने उनके घुटनों में फँसी बाकी सलवार को भी निकाल कर अलग कर दिया. मेरी गांड फटी जा रही थी पर फिर कुछ हुआ नहीं!रात हो चुकी थी, रात्री भोज के पश्चात सब सोने की तैयारी करने लगे. वहां घर के बाहर पहुँचते ही मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी जो बुआ की छत पर खड़ी थी, उसका रंग एकदम दूध जैसा और उसकी गांड मानो जींस को फाड़ ही रही थी, और उसके छोटे छोटे चुचे एकदम तने हुए दिख रहे थे, मेरा मन कर रहा था कि साली को अभी पकड़ कर चोद दूँ.

फिर उसने अपने हाथ को मेरे सिर पर रखा और बुर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी, मैं समझ गया कि ये झड़ने वाली है.

सुरेश अंकल बोले- राजेंद्र, अब दोनों तरफ से रगड़ना शुरू करते हैं! जम कर चोद, दस मिनट में सारा दर्द गायब हो जायेगा आरती का!और दोनों ने बिना परवाह किए लंड को मेरी चूत और गांड में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. दोनों चुदाई के बाद फ्रेश हो कर बाहर आए तो कौमुदी और कुणाल बाहर एक दूसरे आगोश में दिखे. मुझे बहूरानी के कपड़े उतरने की सरसराहट सुनाई दी और फिर उसका नंगा जिस्म मुझसे लिपट गया और उसका एक हाथ मेरे बालों में कंघी करने लगा.